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                <title>corruption - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>corruption RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भाजपा सरकार प्रदेश के लिए संकट, सत्ता परिवर्तन से ही होगा समाधान : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184537/crisis-for-bjp-government-in-the-state-will-be-solved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-02-at-19.00.11.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों के साथ समझौता कर यह आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और न ही उनका उत्पीड़न होगा। लेकिन अब छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि सरकार अपने वादों पर कायम नहीं रहती तो जनता का विश्वास कमजोर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फतेहपुर की घटना का उल्लेख करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि वहां विद्यालय के बच्चों ने केवल पीने के पानी और कक्षाओं में पंखे लगाने जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की थी। जब उनकी मांग स्वीकार कर ली गई, तब बच्चों और उनके परिवारों को परेशान करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से मिलकर हर संभव सहायता प्रदान करेंगे तथा किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने का दावा करने वाली सरकार को पहले सरकारी विद्यालयों में बिजली, पानी, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना था कि विकास के बड़े दावों के बीच शिक्षा व्यवस्था की आधारभूत जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले के कई महत्वपूर्ण सरकारी तालाबों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रदेश में बने विभिन्न एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इनके निर्माण में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना था कि कई परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं और कुछ स्थानों पर सड़कें उद्घाटन के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं। उन्होंने इसे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की कमी का उदाहरण बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने अयोध्या से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों में भी पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने दिल्ली में छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी नसीहत देते हुए कहा कि वे निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उनके अनुसार सरकारें बदलती रहती हैं, इसलिए अधिकारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आकर कार्य नहीं करना चाहिए और कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लेने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पेपर लीक के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि युवाओं का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक प्रश्न के उत्तर में अखिलेश यादव ने कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को 'यश भारती सम्मान' प्रदान किया जाता था और भविष्य में भी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की परंपरा जारी रखी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं का समाधान, पारदर्शी शासन, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, युवाओं को रोजगार और कानून का निष्पक्ष पालन सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी प्रदेश के लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और जनहित के प्रश्नों पर संघर्ष जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 19:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसडीएम के आदेश के बाद भी दबंगकोटेदार संजय कुमार केखिलाफ नही किया कोई कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>उप जिलाधिकारी हरैया उमाकांत तिवारी ने पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर ग्राम पंचायत नरहरपुर कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया था लेकिन 07 कार्य दिवस बीत जाने के बाद भी राशन वितरण में गड़बड़ी करने वाले कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  आपको बता दें कि ग्राम पंचायत नरहरपुर के ग्रामीणों ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ राशन वितरण में घटतौली करने का आरोप लगाया था । ग्रामीणों की शिकायत पर एडीओ पंचायत कप्तानगंज सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सेक्टर प्रभारी अरुण कुमार पटेल</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184089/despite-sdms-order-no-action-was-taken-against-dabangkotedar-sanjay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260724-wa0065-(2).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>उप जिलाधिकारी हरैया उमाकांत तिवारी ने पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर ग्राम पंचायत नरहरपुर कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने का निर्देश दिया था लेकिन 07 कार्य दिवस बीत जाने के बाद भी राशन वितरण में गड़बड़ी करने वाले कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> आपको बता दें कि ग्राम पंचायत नरहरपुर के ग्रामीणों ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ राशन वितरण में घटतौली करने का आरोप लगाया था । ग्रामीणों की शिकायत पर एडीओ पंचायत कप्तानगंज सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सेक्टर प्रभारी अरुण कुमार पटेल व सचिव पंकज सिंह को जांच करके जांच रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीओ पंचायत के निर्देश पर एडीओ पंचायत को जांच टीम ने जांच कर के जांच रिपोर्ट दिनांक - 12-07-2026 को दिया था एडीओ पंचायत ने जांच रिपोर्ट प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी कप्तानगंज कृष्ण कुमार सिंह को दिनांक - 15-07-2026 को दिया था प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी ने जांच रिपोर्ट उप जिलाधिकारी हर्रैया उमाकांत तिवारी को दिनांक - 17-07-2026 को अग्रिम कार्यवाही हेतु भेजा था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप जिलाधिकारी ने दिनांक - 17-07-2026 को पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज को 07 कार्य दिवस के अन्दर उक्त प्रकरण में की गई कार्यवाही को अवगत कराने का निर्देश था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एसडीएम के आदेश के 07 दिन बीतने के बाद भी पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज ने कोटेदार संजय कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नही किया है जिसको लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही है । मीडिया टीम ने फोन के माध्यम से पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज से कई बार फोन किया लेकिन पूर्ति निरीक्षक कप्तानगंज ने न तो मीडिया टीम के फोन को रिसीव किया और न ही मीडिया टीम को पुनः फोन नही किया ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीडियो की सह परभानपुर में ग्राम प्रधान, सचिव व टीए की मिलीभगत से सरकारी धन का हो रहा लूट</title>
                                    <description><![CDATA[आनलाइन मस्टर रोलपंचायत चुनाव को नजदीक देख ग्राम प्रधान शकुन्तला देवी ने सरकारी धन को लूटने में झोंकी पूरी ताकत सचिव प्रिया शुक्ला, तकनीकी सहायक एस ० के ० सिंह ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने में लगाया है पूरी ताकत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182770/video-government-money-is-being-looted-in-parbhanpur-with-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0094.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>बस्ती।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले के विकास खंड हरैया केग्राम पंचायत भानपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी / सचिव प्रिया शुक्ला का चयन मंडी समिति में हो गया है लेकिन अभी तक सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया में कार्यरत हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सचिव प्रिया शुक्ला विकासखंड हरैया से जाते-जाते अपनी साफ सुथरी छवि धूमिल करने पर तुली हुई है यदि सचिव ग्राम प्रधान शकुंतला देवी को सह न देती तो ग्राम प्रधान शकुंतला देवी पानी से भरे तालाब में विकसित भारत की जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी न लगती । पानी से भरे तालाब में विकसित भारत जी राम जी के नाम पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगने पर सचिव प्रिया शुक्ला के कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है और तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह भी ग्राम पंचायत भानपुर में कमीशन के लालच पानी से भरे तालाब की फर्जी एमबी की तैयारी में जुटे हुए हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   सूत्रों की माने तो तकनीकी सहायक हरि किशन सिंह ने ग्राम पंचायत भानपुर में पूर्व भी कई विकास कार्यों के नाम पर फर्जी एमबी कर चुके हैं और फर्जी एमबी के सहारे ग्राम प्रधान शकुंतला देवी फर्जी भुगतान प्राप्त कर चुकी हैं । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      विकसित भारत जी राम जी के कार्य को पलीता लगाने वाली रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व ग्राम प्रधान शकुंतला देवी के भ्रष्टाचार के आगे खंड विकास अधिकारी हरैया विनय कुमार द्विवेदी नतमस्तक हो चुके हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     मीडिया टीम धरातलीय पड़ताल में ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भानपुर के राजस्व गांव नागपुर के सभी तालाब एवं गढही में पानी भरा है । सरकारी धन लूटने के उद्देश्य मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बातचीत में ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व ब्लॉक हरैया के जिम्मेदार अधिकारियों का कर्मचारियों की मनमानी से 05 वर्षों से ग्राम पंचायत भानपुर तरस रहा है । जब तक ग्राम प्रधान शकुंतला देवी व रोजगार सेवक वर्षा जायसवाल व अन्य भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तब तक ऐसे ही सरकारी धन के लूटने का खेल जारी रहेगा । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      अब देखना यह है कि डीसी मनरेगा संजय शर्मा के द्वारा उक्त प्रकरण में क्या कार्यवाही की जाती है ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:14:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनपद प्रयागराज के समस्त कृषकों से फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील।</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व कर्मी आधार के अनुसार खतौनी में नहीं कर रहे संशोधन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182658/appeal-to-all-the-farmers-of-prayagraj-district-to-get"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-kisan-yojana-(19).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक जनपद प्रयागराज के समस्त कृषक भाइयों एवं बहनों को सूचित किया है कि भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों के लिए फार्मर रजिस्ट्री तैयार किए जाने का अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है जिसमें जनपद के 569000 कृषकों की फार्मर आई०डी० बनी है एवं लगभग एक लाख किसान भाइयों जिनकी फार्मर आई०डी० नहीं बनी है उन सभी पात्र कृषकों से अपील है कि वे शीघ्र अपनी फार्मर रजिस्ट्री बनवाकर यूनिक फार्मर आईडी प्राप्त करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फार्मर रजिस्ट्री किसानों की एक प्रमाणित डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से कृषक की आधार, भूमि अभिलेख एवं अन्य आवश्यक विवरण एकीकृत रूप से उपलब्ध रहते हैं। इससे वास्तविक पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ् प्राप्त करने में सुविधा होगी, जिसमें वर्तमान में महत्वपूर्ण खाद की उपलब्धता हेतु। कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं में प्राथमिकता। बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र एवं अन्य कृषि आदानों पर उपलब्ध अनुदान का सुगम लाभ। किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा तथा अन्य कृषि सेवाओं में सुविधा। शासन द्वारा भविष्य में संचालित की जाने वाली योजनाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ। कृषक की एकल एवं प्रमाणित डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) उपलब्ध होना। पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित होने से योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुँचना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। विभिन्न कृषि योजनाओं एवं सेवाओं को क्रमिक रूप से फार्मर आईडी से जोड़ा जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ केवल सत्यापित एवं पात्र किसानों को ही प्राप्त हो सके। अतः प्रत्येक कृषक भाई के लिए समय रहते फार्मर रजिस्ट्री कराना अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">*फार्मर रजिस्ट्री कराने हेतु आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, भूमि अभिलेख (खतौनी/गाटा विवरण) एवं आवश्यकतानुसार अन्य संबंधित अभिलेख आवश्यक है।*</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषक अपनी फार्मर रजिस्ट्री   </strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने निकटतम जन सेवा केन्द्र, ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित विशेष शिविर, कृषि विभाग द्वारा आयोजित पंजीकरण शिविर, अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल माध्यमों से करा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिन कृषकों की फार्मर आईडी में समस्त गाटों को दर्ज नहीं कराया गया है उनको शीघ्र अतिशीघ्र पोर्टल पर <a href="http://upfr.agristack.gov.in/">upfr.agristack.gov.in</a> पर जाकर स्वयं या जनसुविधा केन्द्र के माध्यम से जुडवा लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान द्वारा फॉर्मर रजिस्ट्री कराने के बाद भी पेंडिंग रिपोर्ट दिखाई देता है जब की महीनों पहले किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।इसमें सबसे बड़ा रोड़ा तहसील का राजस्व विभाग बन गया हैजिसमे लेखपाल की भूमिका सर्वाधिक संदिग्ध और काम चोरी की मिली है।इसमें सबसे अधिक फूलपुर तहसील में रिपोर्ट पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसानों का आरोप है कि 99% खतौनी मैं सरनेम नहीं अकित है  नाम ही दर्जहै। जबकि आधार कार्ड  में नाम के आगे उसकी जाति जैसे त्रिपाठी मिश्राद दुबे  यादव भारतीय विश्व कर्मा आदि दर्ज हैं ।इसे शुद्ध करने की जिम्मेदारी लेखपाल की निर्धारित की गई है लेकिन वह इसकी आड़ में किसानों से भयादोहन और सुविधा शुल्क  की मांग कर रहा है। कहता है कि इसमें पैसा लगेगा और मुकदमा  करना पड़ेगा।जिसके  कारण से रजिस्ट्रेशन  होने के बावजूद रजिस्ट्रेशन पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्योंकि प्रमाणित करने के लिए लेखपालों के पास लटका है लेकिन इस पर कोई राजस्व अधिकारी ध्यान नहीं देते जबकि कृषि विभाग बार-बार रजिस्ट्रेशन के लिए अपील करता है लेकिन  सरकारी सिस्टम को ठीक करने के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं दियाजाताहै।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार रोकने में मुख्य विकास अधिकारी नाकाम धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181316/chief-development-officer-failed-to-stop-corruption-attendance-of-61"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0018.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मेंमनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10 मजदूर ही कार्य करते पाए गए।</div>
<div> </div>
<div>इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर दो किशोर भी काम करते मिले, जो मनरेगा प्रावधानों एवं बाल संरक्षण कानूनों की सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। शेष 51 मजदूरों को अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिर दर्शाया गया है। सरकारी अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टि कर सरकारी धन के दुरुपयोग उजागर हो रहा है। रोजगार सेवक रामतौल मौर्य एवं पंचायत सचिव अमरनाथ गौतम की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा की धनराशि का गबन करने का प्रयास किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी धन के इस दुरुपयोग से न केवल मनरेगा की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि योजना के मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने को भी नुकसान पहुंच रहा है।सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि जब मौके पर केवल 10 मजदूर मौजूद थे तो 61 की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गयी है और 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराने की अनुमति किसने दी? ब्लाक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आखिर नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?यदि ऐसे ही फर्जी हाजिरी रजिस्टर में दर्ज होता रहेगा तो सरकारी धन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181316/chief-development-officer-failed-to-stop-corruption-attendance-of-61</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:40:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>📍 <em>लखनऊ | संवाददाता</em></strong></blockquote>
<hr />
<h4 style="text-align:justify;"><strong>  स्थापना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (UPMSCL) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं और आधुनिक उपकरण पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराए जा सकें।<br />कारपोरेशन को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना गया था, लेकिन हाल के घटनाक्रम इस संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों और कथित बिचौलियों के गठजोड़ ने खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर इसे कथित रूप से भ्रष्टाचार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178039/uttar-pradesh-medical-supply-corporation-ventilator-scam-2"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/photo-1.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>📍 <em>लखनऊ | संवाददाता</em></strong></blockquote>
<hr />
<h4 style="text-align:justify;"><strong> स्थापना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन (UPMSCL) की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं और आधुनिक उपकरण पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराए जा सकें।<br />कारपोरेशन को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना गया था, लेकिन हाल के घटनाक्रम इस संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों और कथित बिचौलियों के गठजोड़ ने खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर इसे कथित रूप से भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-1.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="614" height="840"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ICU वेंटीलेटर टेंडर में ‘खेल’</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ताजा मामला जेम (GeM) पोर्टल पर जारी टेंडर संख्या <strong>GEM/2025/B/5823357</strong> से जुड़ा है, जिसके तहत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों के लिए <strong>221 ICU वेंटीलेटर</strong> खरीदे जाने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस टेंडर में कुल 11 कंपनियों ने भाग लिया है। इनमें शामिल <strong>Heidelco Medicore Pvt. Ltd.</strong> पर आरोप है कि यह कंपनी अलग-अलग टेंडरों में अपनी पहचान बदलकर हिस्सा लेती रही है—कभी खुद को निर्माता, तो कभी अधिकृत वितरक बताकर।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार कंपनी ने खुद को <strong>Sysmed Medical Technologies Pvt. Ltd., चंडीगढ़</strong> का अधिकृत वितरक बताया है और जिस वेंटीलेटर मॉडल की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया गया है, वह <strong>Topnotch TV-15</strong> है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-2.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="634" height="897"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>KGMU की रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान <strong>किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU)</strong> ने पूर्व में एक अन्य टेंडर (<strong>GEM/2026/R/647614</strong>) में इसी मॉडल के वेंटीलेटर को गुणवत्ता और सर्विस से जुड़े कारणों से खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">KGMU की तकनीकी समिति द्वारा की गई जांच में निम्न बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई थी:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>उपकरण की <strong>परफॉर्मेंस मानकों पर खरा न उतरना</strong></li>
<li><strong>क्लिनिकल उपयोग में विश्वसनीयता की कमी</strong></li>
<li><strong>सर्विस और मेंटेनेंस सपोर्ट कमजोर होना</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इसके बावजूद वही मॉडल दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>‘मेड इन इंडिया’ के नाम पर चीनी उत्पाद?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आरोप यह भी है कि जिस वेंटीलेटर को भारतीय कंपनी के नाम से पेश किया जा रहा है, वह वास्तव में चीन की कंपनी <strong>Shenzhen Mindray Bio-Medical Electronics Co. Ltd.</strong> का उत्पाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह न केवल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>GFR 144(XI) की अनदेखी?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के <strong>GFR 144(XI)</strong> नियम के अनुसार, सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों और उनसे जुड़े उत्पादों की सरकारी खरीद पर सख्त प्रतिबंध है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से अनुमति न ली जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बिना स्पष्ट खुलासे के चीनी उत्पाद को भारतीय कंपनी के माध्यम से पेश करना नियमों की अवहेलना माना जा सकता है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong> <img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/photo-3.jpg" alt="जीजा-साले का ‘चीन कनेक्शन’ उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वेंटीलेटर घोटाला–2" width="662" height="468"></img></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>विभागीय जिम्मेदारी और निगरानी पर सवाल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री <strong>ब्रजेश पाठक</strong> के पास है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सूत्रों का दावा है कि:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>एक आउटसोर्स कर्मचारी <strong>उज्ज्वल कुमार</strong> कथित रूप से खरीद प्रक्रिया में प्रभावशाली भूमिका निभा रहा था</li>
<li>टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी जांच को प्रभावित करने के प्रयास हुए</li>
<li>कथित दलालों के साथ मिलकर निर्णयों को प्रभावित किया गया</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कारपोरेशन का पक्ष</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के कर्मचारी <strong>देवव्रत कुमार आर्य</strong> ने संवाददाता से बातचीत में कहा:</p>
<blockquote>
<p>“यदि किसी कंपनी द्वारा चीनी उत्पाद को छिपाकर सप्लाई करने का प्रयास किया जाता है, तो उसकी विस्तृत जांच की जाएगी। नियमों के विरुद्ध पाए जाने पर टेंडर तत्काल निरस्त किया जाएगा।”</p>
</blockquote>
<hr />
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बड़े सवाल</strong></h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<blockquote class="format1">
<ul>
<li>क्या पहले से रिजेक्टेड उपकरण को दोबारा टेंडर में शामिल किया जा सकता है?</li>
<li>क्या टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है?</li>
<li>क्या ‘मेड इन इंडिया’ के नाम पर विदेशी उत्पादों की आपूर्ति हो रही है?</li>
<li>क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?</li>
</ul>
</blockquote>
</li>
</ul>
<hr />
<p style="text-align:justify;"><strong>📢 निष्कर्ष</strong><br />यह मामला केवल एक टेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ आर्थिक घोटाला होगा बल्कि मरीजों की जान से भी खिलवाड़ माना जाएगा।</p>
<hr />
<blockquote class="format2">✍️ <strong>(स्वतंत्र प्रभात की खोजी टीम अगले अंक में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे करेगी…)</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178039/uttar-pradesh-medical-supply-corporation-ventilator-scam-2</link>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 07:00:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11.17 करोड़ के खर्च पर सवाल: अभिलेख न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका, जमीनी हकीकत पर भी उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/bhrastachar.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोण्डा-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए खर्च की गई 11.17 करोड़ रुपये की धनराशि को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। एक ओर जहां अभिलेख प्रस्तुत न करने पर 18 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जानकारी के अनुसार, पंचायत राज विभाग के तहत वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच जिले की 82 ग्राम पंचायतों में कुल 11 करोड़ 17 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इन कार्यों का ऑडिट जिला लेखा परीक्षा समिति द्वारा किया गया, जिसमें कई स्थानों पर संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। समिति ने इसे गंभीर मानते हुए धनराशि के दुरुपयोग की आशंका जताई और रिपोर्ट विभाग को भेजी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कई बार नोटिस व पत्राचार के बावजूद अभिलेख प्रस्तुत न करने पर डीपीआरओ लालजी दूबे ने 18 सचिवों के मार्च माह के वेतन पर रोक लगा दी है और स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इधर, क्षेत्रीय ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्य केवल कागजों में ही दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता में मौके पर कार्य अधूरे या न के बराबर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी बिल-वाउचर के जरिए भुगतान दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभागीय आंकड़ों के अनुसार खर्च की गई कुल धनराशि 11.17 करोड़ रुपये है, लेकिन अभिलेख प्रस्तुत न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इसमें से कितनी राशि का वास्तविक और सत्यापित हिसाब उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्थानीय स्तर पर अब मामले की निष्पक्ष जांच और जमीनी सत्यापन की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173462/questions-raised-on-expenditure-of-rs-1117-crore-salary-of</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:44:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़हरा में 74 मजदूरों के जगह कार्य करते मिले 35 मजदूर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर फर्जी मजदूरों की आनलाईन हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। बड़हरा गांव में मनरेगा योजना के तहत हो रहे कुला खुदाई कार्य में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर दर्ज आनलाईन हाजिरी व मौके पर कार्य कर रहे मजदूरों में दो गुना का अंतर है। ऐसे में पोर्टल पर 74 मजदूरों की हाजिरी लगाया गया है जबकि मौके पर सिर्फ 35 मनरेगा मजदूर ही कार्य करते नजर आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कार्य कर रहे एक मजदूर ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 मजदूर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164829/35-laborers-found-working-instead-of-74-laborers-in-badhara"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/00.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर फर्जी मजदूरों की आनलाईन हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। बड़हरा गांव में मनरेगा योजना के तहत हो रहे कुला खुदाई कार्य में मनरेगा के एनएमएमएस पोर्टल पर दर्ज आनलाईन हाजिरी व मौके पर कार्य कर रहे मजदूरों में दो गुना का अंतर है। ऐसे में पोर्टल पर 74 मजदूरों की हाजिरी लगाया गया है जबकि मौके पर सिर्फ 35 मनरेगा मजदूर ही कार्य करते नजर आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कार्य कर रहे एक मजदूर ने बताया कि प्रतिदिन 30 से 40 मजदूर ही कार्य करने आते हैं लेकिन आनलाईन कितनी हाजिरी लगाई जाती है यह हमें नहीं मालूम है। ऐसे में ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में हो रहे मनरेगा के कार्यों में भारी लूट-खसोट मचा हुआ है लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी स्थानीय विभागीय अधिकारी अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सम्बंधित जिम्मेदार मनरेगा में लूट-खसोट को लेकर अपनी चुप्पी साधे हुए मूकदर्शक बने हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवां ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़हरा में मनरेगा योजना के तहत रामचंद्र के खेत से अहिरौली सीवान तक कुला खुदाई कार्य करवाया जा रहा है। इस कार्य में पारदर्शिता को दरकिनार कर जमकर लूट-खसोट किया जा रहा है। मंगलवार को रामचंद्र के खेत से अहिरौली सीवान तक हो रहे कुला खुदाई कार्य में मस्टरोल संख्या 6150 से 6157 तक कुल 8 मस्टरोल जारी कर 74 मनरेगा मजदूरों का आनलाईन हाजिरी लगाया गया। वहीं पत्रकारों के पड़ताल में 74 मजदूरों के बजाय सिर्फ 35 मजदूर ही कार्य करते हुए मौके पर मिले।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में 39 अन्य मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा योजना में लूट-खसोट किया जा रहा है। इस पूरे सम्बंधित प्रकरण में स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने के बजाय उन पर मेहरबान हैं। जिम्मेदारों के मेहरबानी के कारण क्षेत्र में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। सरकार मनरेगा योजना में पारदर्शिता को लेकर एनएमएमएस पोर्टल चलाया लेकिन इसके जिम्मेदारों ने पारदर्शिता वाले एनएमएमएस पोर्टल में भी सेंध लगा दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 18:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुलायम सिंह का कड़ा अल्टीमेटम: स्टांप विक्रेताओं की मनमानी वसूली पर लगाम वरना आंदोलन और सख्त कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर देहात।</strong> भ्रष्टाचार एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो शक्ति के दुरुपयोग से लोकतंत्र की जड़ें हिला देती है और समाज में अविश्वास की गहरी खाई पैदा कर देती है। इसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सबको एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। इन शब्दों में जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष एडवोकेट मुलायम सिंह यादव ने जिला अधिकारी को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन  अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देश दीपक को सौंपा।</div>
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<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में उन्होंने स्टांप विक्रेताओं द्वारा जनता से मनमाने ढंग से धन वसूलने की कड़ी निंदा की। एडवोकेट मुलायम सिंह ने चेतावनी दी कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्टांप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163902/mulayam-singhs-strict-ultimatum-to-stop-arbitrary-recovery-of-stamp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1001468685-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर देहात।</strong> भ्रष्टाचार एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो शक्ति के दुरुपयोग से लोकतंत्र की जड़ें हिला देती है और समाज में अविश्वास की गहरी खाई पैदा कर देती है। इसे जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सबको एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। इन शब्दों में जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष एडवोकेट मुलायम सिंह यादव ने जिला अधिकारी को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन  अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देश दीपक को सौंपा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में उन्होंने स्टांप विक्रेताओं द्वारा जनता से मनमाने ढंग से धन वसूलने की कड़ी निंदा की। एडवोकेट मुलायम सिंह ने चेतावनी दी कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्टांप विक्रेताओं को लोक सेवक का दर्जा दिया है। यदि कोई 10 रुपये का स्टांप 12 रुपये में बेचता है तो यह स्पष्ट भ्रष्टाचार है। इसके तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के अनुसार तत्काल मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जनपद में स्टांप विक्रेताओं पर कड़ी निगरानी बढ़ाई जाए उनकी मनमानी रोकी जाए और प्रभावी जांच के बाद दोषियों पर सख्ती बरती जाए। इस अवसर पर जिला बार एसोसिएशन के महामंत्री घनश्याम सिंह राठौर रमेश चंद सिंह गौर बलराम सिंह सर्वेंद्र सिंह डीके सिंह धर्मेंद्र यादव रोहित शुक्ला जितेन बाबू महेंद्र सिंह उपदेश योगेंद्र कुमार आदि सदस्य उपस्थित रहे। जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 18:26:55 +0530</pubDate>
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                <title>नौतनवा क्षेत्र में मनरेगा योजना चढ़ रहा भ्रष्टाचार का भेंट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र में स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों के उदासीनता के कारण लगातार मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के तमाम ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों में कार्यदाई स्थल पर कार्य पूर्ण होने के बाद भी मजदूरों की हाजिरी लग रही है। ऐसे में परसेंटेज के खेल में स्थानीय जिम्मेदार कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेखुआनी में एक सप्ताह से फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकासी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163611/mnrega-scheme-is-falling-prey-to-corruption-in-nautanwa-area"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/one.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र में स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों के उदासीनता के कारण लगातार मनरेगा योजना भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा है। नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के तमाम ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों में कार्यदाई स्थल पर कार्य पूर्ण होने के बाद भी मजदूरों की हाजिरी लग रही है। ऐसे में परसेंटेज के खेल में स्थानीय जिम्मेदार कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सेखुआनी में एक सप्ताह से फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकासी करने का प्रयास किया जा रहा है। सेखुआनी में भोला के खेत से गब्बूलाल के खेत तक बघेला नाले के किनारे बंधे पर फसल सुरक्षा हेतु चकबंध पर मिट्टी कार्य करवाया जा रहा है जिसमें मस्टरोल संख्या 5778 से 5781 तक कुल 32 मनरेगा मजदूरों को कार्यदाई स्थल पर फर्जी तरीके से कार्य करते दिखाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ मनरेगा मजदूरों के मुताबिक यह कार्य पूर्ण हुए एक सप्ताह हो गए बावजूद इसके लगातार गुरूवार तक फर्जी तरीके से मनरेगा मजदूरों की हाजिरी लगाकर धन निकासी किया जा रहा है। नाम की गोपनीयता रखते हुए दो मनरेगा महिलाओं ने बताई कि दस दिनों से हर रोज सुबह कुछ मजदूरों को कार्यदाई स्थल पर बुलाकर उनका फोटो खींचकर हाजिरी लगाया जा रहा है जब कि करीब दस दिनों से कार्य बंद है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 16:58:24 +0530</pubDate>
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