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                <title>Identity Theft - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Identity Theft RSS Feed</description>
                
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:27:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीएम साहब ! मुझे इंसाफ चाहिए... </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">हाकिम के शहर में इंसाफ की खातिर एक बेबस गरीब महिला दर-दर भटक रही है।  मामला राजधनी के  गुड़म्बा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रपुर का है। दो वक्त की रोटी के लिए घरों में काम करने वाली कामगार महिला के भरोसे का शातिर ठगों ने कत्ल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />बहला-फुसला कर उसका आधार और पैन कार्ड हासिल कर लिया। इसके बाद छह लाख रुपए का बैंक लोन लेकर डकार गए। जब बैंक ने अपना पैसा मांगा, तब उस कामगार महिला को पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असल लड़ाई इसके बाद शुरू हुई। धोखाधड़ी की शिकायत लेकर 'खादी' से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181688/cm-sir-i-want-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-20-at-15.30.04.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">हाकिम के शहर में इंसाफ की खातिर एक बेबस गरीब महिला दर-दर भटक रही है।  मामला राजधनी के  गुड़म्बा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रपुर का है। दो वक्त की रोटी के लिए घरों में काम करने वाली कामगार महिला के भरोसे का शातिर ठगों ने कत्ल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />बहला-फुसला कर उसका आधार और पैन कार्ड हासिल कर लिया। इसके बाद छह लाख रुपए का बैंक लोन लेकर डकार गए। जब बैंक ने अपना पैसा मांगा, तब उस कामगार महिला को पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असल लड़ाई इसके बाद शुरू हुई। धोखाधड़ी की शिकायत लेकर 'खादी' से लेकर 'खाकी' तक सबके पास गई। मगर, सिस्टम ऐसा कि गरीब की कोई सुनने वाला नहीं। एक तरफ विश्वासघात का दंश तो दूसरी तरफ लोन की भारी-भरकम रकम का बोझ। बेचारी महीनों से थाने के चक्कर काट रही है। नतीजा सिफर रहा। सब जगह भटकने के बाद अब इस लाचार महिला को सिर्फ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की आस है। </p>
<p style="text-align:justify;"><br /> आधार-पैन के जरिए फर्जी लोन </p>
<p style="text-align:justify;"><br />गुड़म्बा थाना के मिश्रपुर में रहने वाले अमित कुमार की पत्नी सन्ध्या पेशे से घरेलू कामगार महिला है। किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके वह पति के साथ मिलकर जीवन गुजार रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"><br />ठगी का शिकार हुई पीड़िता सन्ध्या ने बताया कि वह एक घर में पिछले कई साल से सागर रस्तोगी के यहां घरेलू काम कर रही थी। समय के साथ-साथ घर वालों के साथ मजबूत रिश्ते बन गए। उसे रस्तोगी परिवार पर पूरा भरोसा था, लेकिन यहीं उसके साथ धोखा हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता ने बताया कि खेल की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई। सागर और उसकी पत्नी शुभी ने सन्ध्या से किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के बहाने  उसका आधार और पैन कार्ड  मंगवा लिया। उसने दस्तावेज दे दिए। करीब डेढ़ साल कोई हरकत नहीं हुई। तभी अचानक मई 2026 को उसके पति अमित कुमार के पास बैंक ऑफ बड़ौदा से एक फोन आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंक वालों ने कहा कि उसने छह लाख रुपए का लोन लिया था। उसकी किश्त नहीं जमा हो रही है। यह सुनते ही सन्ध्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। बैंक में सम्पर्क करके उसने बताया कि छह लाख रुपए का कोई लोन उसके द्वारा नहीं लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब बैंक वालों ने उसके दस्तावेज दिखाए तो पति-पत्नी के होश उड़ गए। दोनों समझ गए कि वे ठगी का शिकार हुए हैं। महिला का यह भी दावा है कि बाद में एक बुलेट शोरूम से भी फोन आया, जिससे उसे वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">वहां से पीड़िता सीधे रस्तोगी परिवार के पास पहुंची और पूरी बात बताई। इस पर रस्तोगी दम्पत्ति ने पीड़िता के दस्तावेजों के सहारे बैंक लोन लिए जाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उसने खूब हाथ-पैर जोड़े और लोन के मसले से बाहर निकालने की गुहार लगाई। मगर, रस्तोगी परिवार ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> एक महीने में एफआईआर नहीं </strong></h4>
<p><br />विडंबना देखिए कि एक गरीब कामगार महिला ठगी का शिकार होती है और पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। थानेदार की गणेश परिक्रमा लगाते-लगाते चप्पलें घिस गईं। खाकी वर्दी वालों का दिल नहीं पसीजा। शिकायत दर्ज करते हुए मामले की जांच करने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत के बाद भी पुलिस ने पीड़िता से कार्यवाही से संतुष्ट है पत्र लिखवाकर पुलिस आख्या लगा कर चलता कर दिया ।</p>
<p>यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री और डीजीपी इस तरह के धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए पुलिस महकमे को बार-बार गाइडलाइंस जारी कर रहे हैं।  सिस्टम के आगे पीड़िता लाचार भटक रही है। पीड़िता का आरोप है कि उसने 20 मई को संबंधित पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। बाद में उसने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की, लेकिन अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।</p>
</blockquote>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> धमकी देने का आरोप </strong></h4>
<p><br />महिला ने कुछ लोगों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।<br /><strong>जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।</strong></p>
<p><br />फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप एक पक्ष के दावों पर आधारित हैं। पुलिस की जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान का इंतजार है। <strong>स्वतंत्र प्रभात</strong>  ने पीड़िता के आरोपों के आधार पर खबर का प्रस्तुतीकरण किया है। समाचार पत्र दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। फिलहाल, मामला बेहद संवेदनशील है। निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसके बाद असल तस्वीर सामने आएगी। गुड़म्बा प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया तो संपर्क नहीं हो सका </p>
</blockquote>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> बैंक की लापरवाही उजागर </strong></h4>
<p><br />पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कुछ निजी व्यक्तियों के साथ बैंक कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उसका कहना है कि बिना उसकी जानकारी और सहमति के इतना बड़ा ऋण स्वीकृत होना कई सवाल खड़े करता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। सिर्फ सन्ध्या ही नहीं, उसके जैसे न जाने कितने भोले-भाले लोग हर दिन इस तरह की ठगी का शिकार हो रहे हैं। कहीं न कहीं बैंक मैनेजमेंट की लापरवाही रहती है, जिससे आएदिन फर्जीवाड़ा हो रहा है। </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>बयान --</strong><br /> "मैंने कभी किसी प्रकार का लोन नहीं लिया। बैंक से फोन आने के बाद मुझे पूरे मामले की जानकारी हुई। मेरे दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।" — सन्ध्या, पीड़िता</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:16:53 +0530</pubDate>
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