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                <title>IGRS Complaint - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>IGRS Complaint RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने कर-करेत्तर, राजस्व वसूली एवं राजस्व कार्यों की किया समीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जिलाधिकारी संजय चौहान ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कर-करेत्तर, राजस्व वसूली एवं राजस्व कार्यों (सीएम डैशबोर्ड) की मासिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने तथा शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व वसूली में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी ने विद्युत देय, खनन, आबकारी, परिवहन, नगर निकाय, स्टाम्प ड्यूटी, बाट-माप, जीएसटी सहित विभिन्न विभागों की राजस्व वसूली की समीक्षा की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कम प्रगति वाले विभागों को सुधार लाने तथा लक्ष्य के अनुरूप वसूली बढ़ाने के निर्देश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185874/district-magistrate-reviewed-non-tax-revenue-collection-and-revenue-works"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/3-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जिलाधिकारी संजय चौहान ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कर-करेत्तर, राजस्व वसूली एवं राजस्व कार्यों (सीएम डैशबोर्ड) की मासिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने तथा शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व वसूली में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी ने विद्युत देय, खनन, आबकारी, परिवहन, नगर निकाय, स्टाम्प ड्यूटी, बाट-माप, जीएसटी सहित विभिन्न विभागों की राजस्व वसूली की समीक्षा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कम प्रगति वाले विभागों को सुधार लाने तथा लक्ष्य के अनुरूप वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए। जीएसटी वसूली की समीक्षा के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वसूली में तेजी लाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। वहीं स्टाम्प विभाग की समीक्षा करते हुए स्टाम्प की कमी से संबंधित जारी आरसी की वसूली सुनिश्चित कराने तथा लक्ष्य पूर्ति के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण किया जाए तथा शिकायतकर्ताओं को उसकी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फीडबैक में प्राप्त बिंदुओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में रिट याचिकाओं, खतौनी अंश निर्धारण, स्वामित्व योजना, रोस्टर के अनुसार खतौनियों के दाखिले, एंटी भू-माफिया अभियान एवं अन्य राजस्व कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को निर्देशित किया कि तालाब, चारागाह, चकरोड एवं अन्य सार्वजनिक भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित कर अभियान चलाकर कब्जा मुक्त कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने विभिन्न न्यायालयों में लंबित वादों की समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन विभागों द्वारा आरसी जारी की गई है, वे राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी वसूली सुनिश्चित करें। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ज्योति सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक अमृता सिंह, जिला आबकारी अधिकारी, समस्त उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:20:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विकास कार्यों व निर्माण कार्यों (सीएम डैशबोर्ड) की मासिक समीक्षा बैठक हुई आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जिलाधिकारी संजय चौहान की अध्यक्षता में  शासन के विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों व निर्माण कार्यों (सीएम डैशबोर्ड) की मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग की योजनाओं/कार्यक्रमों के लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा में अवश्य पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी शासन के विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दें। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता कदापि न बरती जाये।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि संबंधित विभागाध्यक्ष अपने विभाग के कार्यों की स्वयं समीक्षा करें एवं प्रगति में सुधार लाएं। डीएम ने विभागवार योजनाओं की प्रगति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185872/monthly-review-meeting-of-development-works-and-construction-works-cm"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/2-1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> जिलाधिकारी संजय चौहान की अध्यक्षता में  शासन के विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों व निर्माण कार्यों (सीएम डैशबोर्ड) की मासिक समीक्षा बैठक का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग की योजनाओं/कार्यक्रमों के लक्ष्य को निर्धारित समय सीमा में अवश्य पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी शासन के विकास प्राथमिकता कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दें। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता कदापि न बरती जाये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि संबंधित विभागाध्यक्ष अपने विभाग के कार्यों की स्वयं समीक्षा करें एवं प्रगति में सुधार लाएं। डीएम ने विभागवार योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली, तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग की योजनाओं के लक्ष्यों को समय से पूर्ण करें। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जन कल्याणकारी योजनाओं/कार्यक्रमों से लाभांवित लाभार्थियों का सत्यापन भी कराया जाये। इसके साथ ही उन्होंने आईजीआरएस, मुख्यमंत्री पोर्टल, जनता दर्शन एवं अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का भी समय सीमा के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने एवं संबंधित शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने विभाग से संबंधित सभी योजनाओं में विशेष प्रयास कर रैंकिंग में सुधार लाएं उन्होंने कहा कि जिन विभागों की रैंकिंग खराब होगी उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। इसके उपरांत उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ जनपद में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए की सभी निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यदायी संस्थाएं सामग्री की गुणवत्ता जांच कर ही उसका प्रयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी परियोजना में शिथिलता, मानक विहीन कार्य या अनियमित पाए जाने पर संबंधित संस्था के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं पूर्ण हो गई हैं उनको हैंड ओवर कराया जाए। इस अवसर पर  मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ज्योति सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक अमृता सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अंशुमान सिंह, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, डीईएसटीओ पन्नालाल, प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्र सहित अन्य विभागों के अधिकारीगण व कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 21:18:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम साहब ! मुझे इंसाफ चाहिए... </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">हाकिम के शहर में इंसाफ की खातिर एक बेबस गरीब महिला दर-दर भटक रही है।  मामला राजधनी के  गुड़म्बा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रपुर का है। दो वक्त की रोटी के लिए घरों में काम करने वाली कामगार महिला के भरोसे का शातिर ठगों ने कत्ल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />बहला-फुसला कर उसका आधार और पैन कार्ड हासिल कर लिया। इसके बाद छह लाख रुपए का बैंक लोन लेकर डकार गए। जब बैंक ने अपना पैसा मांगा, तब उस कामगार महिला को पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असल लड़ाई इसके बाद शुरू हुई। धोखाधड़ी की शिकायत लेकर 'खादी' से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181688/cm-sir-i-want-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-20-at-15.30.04.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">हाकिम के शहर में इंसाफ की खातिर एक बेबस गरीब महिला दर-दर भटक रही है।  मामला राजधनी के  गुड़म्बा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रपुर का है। दो वक्त की रोटी के लिए घरों में काम करने वाली कामगार महिला के भरोसे का शातिर ठगों ने कत्ल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />बहला-फुसला कर उसका आधार और पैन कार्ड हासिल कर लिया। इसके बाद छह लाख रुपए का बैंक लोन लेकर डकार गए। जब बैंक ने अपना पैसा मांगा, तब उस कामगार महिला को पता चला कि उसके साथ ठगी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">असल लड़ाई इसके बाद शुरू हुई। धोखाधड़ी की शिकायत लेकर 'खादी' से लेकर 'खाकी' तक सबके पास गई। मगर, सिस्टम ऐसा कि गरीब की कोई सुनने वाला नहीं। एक तरफ विश्वासघात का दंश तो दूसरी तरफ लोन की भारी-भरकम रकम का बोझ। बेचारी महीनों से थाने के चक्कर काट रही है। नतीजा सिफर रहा। सब जगह भटकने के बाद अब इस लाचार महिला को सिर्फ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की आस है। </p>
<p style="text-align:justify;"><br /> आधार-पैन के जरिए फर्जी लोन </p>
<p style="text-align:justify;"><br />गुड़म्बा थाना के मिश्रपुर में रहने वाले अमित कुमार की पत्नी सन्ध्या पेशे से घरेलू कामगार महिला है। किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके वह पति के साथ मिलकर जीवन गुजार रही है। </p>
<p style="text-align:justify;"><br />ठगी का शिकार हुई पीड़िता सन्ध्या ने बताया कि वह एक घर में पिछले कई साल से सागर रस्तोगी के यहां घरेलू काम कर रही थी। समय के साथ-साथ घर वालों के साथ मजबूत रिश्ते बन गए। उसे रस्तोगी परिवार पर पूरा भरोसा था, लेकिन यहीं उसके साथ धोखा हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता ने बताया कि खेल की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई। सागर और उसकी पत्नी शुभी ने सन्ध्या से किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के बहाने  उसका आधार और पैन कार्ड  मंगवा लिया। उसने दस्तावेज दे दिए। करीब डेढ़ साल कोई हरकत नहीं हुई। तभी अचानक मई 2026 को उसके पति अमित कुमार के पास बैंक ऑफ बड़ौदा से एक फोन आता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैंक वालों ने कहा कि उसने छह लाख रुपए का लोन लिया था। उसकी किश्त नहीं जमा हो रही है। यह सुनते ही सन्ध्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। बैंक में सम्पर्क करके उसने बताया कि छह लाख रुपए का कोई लोन उसके द्वारा नहीं लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब बैंक वालों ने उसके दस्तावेज दिखाए तो पति-पत्नी के होश उड़ गए। दोनों समझ गए कि वे ठगी का शिकार हुए हैं। महिला का यह भी दावा है कि बाद में एक बुलेट शोरूम से भी फोन आया, जिससे उसे वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">वहां से पीड़िता सीधे रस्तोगी परिवार के पास पहुंची और पूरी बात बताई। इस पर रस्तोगी दम्पत्ति ने पीड़िता के दस्तावेजों के सहारे बैंक लोन लिए जाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। पीड़िता का कहना है कि उसने खूब हाथ-पैर जोड़े और लोन के मसले से बाहर निकालने की गुहार लगाई। मगर, रस्तोगी परिवार ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> एक महीने में एफआईआर नहीं </strong></h4>
<p><br />विडंबना देखिए कि एक गरीब कामगार महिला ठगी का शिकार होती है और पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही है। थानेदार की गणेश परिक्रमा लगाते-लगाते चप्पलें घिस गईं। खाकी वर्दी वालों का दिल नहीं पसीजा। शिकायत दर्ज करते हुए मामले की जांच करने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत के बाद भी पुलिस ने पीड़िता से कार्यवाही से संतुष्ट है पत्र लिखवाकर पुलिस आख्या लगा कर चलता कर दिया ।</p>
<p>यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री और डीजीपी इस तरह के धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए पुलिस महकमे को बार-बार गाइडलाइंस जारी कर रहे हैं।  सिस्टम के आगे पीड़िता लाचार भटक रही है। पीड़िता का आरोप है कि उसने 20 मई को संबंधित पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। बाद में उसने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की मांग की, लेकिन अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।</p>
</blockquote>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> धमकी देने का आरोप </strong></h4>
<p><br />महिला ने कुछ लोगों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।<br /><strong>जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।</strong></p>
<p><br />फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप एक पक्ष के दावों पर आधारित हैं। पुलिस की जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान का इंतजार है। <strong>स्वतंत्र प्रभात</strong>  ने पीड़िता के आरोपों के आधार पर खबर का प्रस्तुतीकरण किया है। समाचार पत्र दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। फिलहाल, मामला बेहद संवेदनशील है। निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसके बाद असल तस्वीर सामने आएगी। गुड़म्बा प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया तो संपर्क नहीं हो सका </p>
</blockquote>
<blockquote class="format2">
<h4><strong> बैंक की लापरवाही उजागर </strong></h4>
<p><br />पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कुछ निजी व्यक्तियों के साथ बैंक कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उसका कहना है कि बिना उसकी जानकारी और सहमति के इतना बड़ा ऋण स्वीकृत होना कई सवाल खड़े करता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। सिर्फ सन्ध्या ही नहीं, उसके जैसे न जाने कितने भोले-भाले लोग हर दिन इस तरह की ठगी का शिकार हो रहे हैं। कहीं न कहीं बैंक मैनेजमेंट की लापरवाही रहती है, जिससे आएदिन फर्जीवाड़ा हो रहा है। </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>बयान --</strong><br /> "मैंने कभी किसी प्रकार का लोन नहीं लिया। बैंक से फोन आने के बाद मुझे पूरे मामले की जानकारी हुई। मेरे दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।" — सन्ध्या, पीड़िता</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181688/cm-sir-i-want-justice</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 17:16:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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