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                <title>Rural India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rural India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ पिछले 09 वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ की उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन की आधारशिला है। जनपद लखनऊ में पिछले 09 वर्षों के दौरान पंचायती राज विभाग ने विकास के अनेक आयामों पर उल्लेखनीय कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, सुशासन और जनकल्याण को नई दिशा दी है। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और परियोजनाओं ने न केवल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार किया है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले नौ वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ में आधारभूत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184365/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-of-district-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas17.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊः </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ।</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन की आधारशिला है। जनपद लखनऊ में पिछले 09 वर्षों के दौरान पंचायती राज विभाग ने विकास के अनेक आयामों पर उल्लेखनीय कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छता, सुशासन और जनकल्याण को नई दिशा दी है। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और परियोजनाओं ने न केवल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार किया है, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले नौ वर्षों में पंचायती राज विभाग द्वारा जनपद लखनऊ में आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष बल दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के तहत 14.13 करोड़ रुपये की लागत से 58 अन्त्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया गया। यह कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरिमामय अंतिम संस्कार व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। इन स्थलों के निर्माण से ग्रामीण जनता को सुविधा मिलने के साथ सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार ग्रामीण प्रशासन को सुदृढ़ बनाने हेतु राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आर०जी०एस०ए०) के अंतर्गत 18.51 करोड़ रुपये की लागत से 106 पंचायत भवनों का निर्माण कराया गया। पंचायत भवन ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ होते हैं, जहां ग्राम सभाएं, विकास योजनाओं की बैठकें और प्रशासनिक गतिविधियां संचालित होती हैं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन पंचायत भवनों ने ग्राम स्तर पर सुशासन को मजबूती दी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />स्वच्छता के क्षेत्र में भी जनपद लखनऊ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 31.87 करोड़ रुपये की लागत से 491 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। इन शौचालयों के निर्माण से सार्वजनिक स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई और विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों तथा जरूरतमंदों को सुविधा मिली। यह कार्य ग्रामीण स्वच्छता अभियान की सफलता का प्रमुख उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी क्रम में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 267.05 करोड रुपये की लागत से 2.22.538 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया गया। यह उपलब्धि खुले में शौच मुक्त (ODF) अभियान को सफल बनाने में मील का पत्थर साबित हुई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी, महिलाओं की गरिमा सुरक्षित हुई तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सेवाओं को सुलभ बनाने हेतु आर०जी०एस०ए० योजनान्तर्गत 3.12 करोड़ रुपये की लागत से 78 जन सेवा केन्द्रों का निर्माण कराया गया। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाएं, प्रमाणपत्र, आवेदन और योजनाओं से संबंधित जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही है। इससे शासन की सेवाओं की पहुंच गांव तक सुनिश्चित हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इन उपलब्धियों के अतिरिक्त पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के माध्यम से गांवों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति दी। गांवों में सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, पंचायत भवन, पेयजल, सौर लाइट, खेल मैदान और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों का विकास किया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले 09 वर्षों में विभाग ने डिजिटल गवर्नेस को भी बढ़ावा दिया। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, पंचायत लेखा प्रणाली और ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था के माध्यम से पंचायतों के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। पंचायत सहायकों और पंचायत सचिवालयों के माध्यम से ग्रामीण प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया गया।महिला सशक्तिकरण भी इस प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढी है और महिला ग्राम प्रधानों ने विकास कार्यों में सक्रिय योगदान दिया है। स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों के समन्वय से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मनरेगा के अंतर्गत भी पंचायती राज विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किए। तालाबों का पुनरुद्धार, चकरोड निर्माण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण कराया गया। अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन और जल संसाधनों की उपलब्धता बेहतर हुई।<br />सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका अत्यंत प्रभावी रही। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, राशन वितरण और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और सहायता में पंचायतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता के क्षेत्र में भी विभाग ने सराहनीय प्रगति की है। केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का उपयोग विकास कार्यों में प्रभावी ढंग से किया गया। ऑनलाइन भुगतान प्रणाली और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया गया। यदि पिछले 09 वर्षों की उपलब्धियों को समग्र रूप में देखा जाए तो पंचायती राज विभाग द्वारा केवल योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं किया गया, बल्कि ग्रामीण जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने का कार्य हुआ है। 58 अन्त्येष्टि स्थल, 106 पंचायत भवन, 491 सामुदायिक शौचालय, 2.22 लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालय और 78 जन सेवा केंद्र जैसी उपलब्धियां इस प्रगति को मूर्त रूप देती हैं। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर के प्रतीक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इन उपलब्धियों ने लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, सुशासन, सम्मानजनक जीवन, प्रशासनिक पहुंच और सामाजिक विकास को नई ऊंचाई दी है। पंचायती राज विभाग की यह प्रगति 'सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। निश्चित रूप से पिछले 09 वर्षों में जनपद लखनऊ में पंचायती राज विभाग की प्रगति उल्लेखनीय, बहुआयामी और प्रेरणादायी रही है। आने वाले समय में डिजिटल पंचायत, स्मार्ट ग्राम और आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा के साथ यह प्रगति और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहरों की बसाहट के पीछे विलुप्त होती मूल ग्रामीण संस्कृती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने कहा है कि अनियोजित शहरीकरण आर्थिक अवसर तो देता है,लेकिन यदि ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास नहीं किया जाए तो सामाजिक असंतुलन और सांस्कृतिक क्षरण अपरिहार्य हो जाता है। भारत में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लाखों लोग प्रतिवर्ष गाँवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं। यह पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का भी परिवर्तन है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी जीवनशैली में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज कमजोर पड़ रहे हैं और लोककलाएँ धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183432/the-original-rural-culture-is-disappearing-behind-the-settlement-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज़ ने कहा है कि अनियोजित शहरीकरण आर्थिक अवसर तो देता है,लेकिन यदि ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास नहीं किया जाए तो सामाजिक असंतुलन और सांस्कृतिक क्षरण अपरिहार्य हो जाता है। भारत में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में लाखों लोग प्रतिवर्ष गाँवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं। यह पलायन केवल जनसंख्या का स्थानांतरण नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का भी परिवर्तन है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्तावादी जीवनशैली में संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज कमजोर पड़ रहे हैं और लोककलाएँ धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर कहा है, "भारत का विकास तभी संभव है जब गाँवों का विकास होगा।" उनकी 'आत्मनिर्भर भारत', 'डिजिटल इंडिया', 'स्मार्ट विलेज' और 'वाइब्रेंट विलेज' जैसी अवधारणाएँ इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाएँ मिलें, लेकिन उनकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे।<br /></p><p style="text-align:justify;">पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपने "पूरा मॉडल" जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधा उपलब्ध करने की बात कही में स्पष्ट कहा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहर जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ ताकि लोगों को पलायन के लिए विवश न होना पड़े। उनका विश्वास था कि यदि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक गाँवों तक पहुँचेगी, तो भारत का संतुलित विकास संभव होगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत को सदियों से गाँवों का देश कहा जाता रहा है। गाँव केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता की जीवंत प्रयोगशाला रहे हैं। कभी गाँवों की चौपालें संवाद का केंद्र थीं, खेत-खलिहान जीवन का आधार थे, लोकगीत और लोकनृत्य संस्कृति की पहचान थे, और आपसी सहयोग जीवन की सबसे बड़ी पूँजी था। किंतु पिछले कुछ दशकों में तीव्र शहरीकरण, औद्योगीकरण और आर्थिक अवसरों की तलाश ने ग्रामीण संस्कृति की जड़ों को कमजोर कर दिया है। </p><p style="text-align:justify;">शहरों का लगातार विस्तार गाँवों की जमीन ही नहीं, उनकी आत्मा को भी अपने भीतर समेटता जा रहा है। महात्मा गांधी ने कहा था, "भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है।" यह कथन आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। यदि गाँव अपनी सांस्कृतिक पहचान खो देंगे, तो भारत की मौलिक पहचान भी धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाएगी। प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का मानना है कि किसी भी राष्ट्र का विकास तभी सार्थक है जब वह आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को भी समान महत्व दे। केवल शहरों में विकास केंद्रित होने से असमानता बढ़ती है और ग्रामीण समाज अपनी मौलिकता खोने लगता है।<br /></p><p style="text-align:justify;">पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि "मजबूत गाँव ही मजबूत भारत की नींव हैं।" यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है क्योंकि केवल महानगरों का विकास किसी राष्ट्र को समृद्ध नहीं बना सकता।ग्रामीण संस्कृति केवल खेती तक सीमित नहीं है। यह लोकभाषाओं, लोकसंगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक कृषि ज्ञान, सामुदायिक जीवन, प्रकृति के प्रति सम्मान और मानवीय संबंधों की संस्कृति है। जब गाँव शहरों में बदलते हैं, तब खेतों की जगह कंक्रीट के जंगल उग आते हैं। तालाब मिट जाते हैं, चौपालें समाप्त हो जाती हैं और बच्चों के खेल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो जाते हैं। अर्थशास्त्री ई. एफ. शूमाकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "स्माल इस ब्यूटीफुल" में लिखा था कि विकास का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज को अधिक मानवीय बनाना होना चाहिए। यदि विकास मनुष्य को उसकी संस्कृति और प्रकृति से दूर कर दे, तो वह अधूरा विकास है।<br /></p><p style="text-align:justify;">विकास और संस्कृति के बीच संतुलन स्थापित किया जाने की नितांत आवश्यकता है । गाँवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, इंटरनेट, उद्योग, कृषि प्रसंस्करण, कुटीर उद्योग, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ। साथ ही लोककलाओं, लोकभाषाओं, लोकपर्वों और पारंपरिक ज्ञान को विद्यालयों और सामाजिक जीवन में सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020-21 भी भारतीय भाषाओं, स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष बल देती है। यदि शिक्षा अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी, तो नई पीढ़ी आधुनिक भी बनेगी और अपनी सांस्कृतिक पहचान भी नहीं भूलेगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज अनेक गाँव शहरों के विस्तार में समाहित होकर अपनी पहचान खो चुके हैं। वहाँ अब खेतों की जगह कॉलोनियाँ हैं, बैलगाड़ियों की जगह वाहनों की भीड़ है, और लोकगीतों की जगह शोरगुल ने ले ली है। आधुनिकता का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन आधुनिकता का अर्थ अपनी जड़ों से कट जाना भी नहीं होना चाहिए। अंततः यह समझना होगा कि शहर किसी राष्ट्र की आर्थिक शक्ति हो सकते हैं, लेकिन गाँव उसकी सांस्कृतिक चेतना हैं। यदि आर्थिक विकास की दौड़ में ग्रामीण संस्कृति समाप्त हो गई, तो आने वाली पीढ़ियाँ आधुनिक तो होंगी, किंतु अपनी पहचान से अनभिज्ञ रह जाएँगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">इसलिए आवश्यक है कि विकास की प्रत्येक योजना में ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। शहरों का विस्तार हो, पर गाँवों की आत्मा सुरक्षित रहे। यही संतुलित विकास भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से सशक्त और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण राष्ट्र बनाएगा। आखिरकार, जिस देश के गाँव जीवित रहते हैं, वही देश अपनी सभ्यता को लंबे समय तक सुरक्षित रख पाता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 21:56:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करंट की चपेट में आने से महिला की दर्दनाक मौत, पंखे का प्लग लगाते समय हुआ हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के गौर थाना क्षेत्र के सुजिया गांव में सोमवार को करंट लगने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह हादसा एक बार फिर घरेलू विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है।</div>
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<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, सुजिया गांव निवासी तारा देवी अपने घर में पंखे का प्लग लगा रही थीं। इसी दौरान अचानक वह तेज करंट की चपेट में आ गईं और गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजनों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उनकी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182919/woman-dies-tragically-due-to-electric-shock-accident-occurs-while"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260707-wa0058.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्तीजिले के गौर थाना क्षेत्र के सुजिया गांव में सोमवार को करंट लगने से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह हादसा एक बार फिर घरेलू विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, सुजिया गांव निवासी तारा देवी अपने घर में पंखे का प्लग लगा रही थीं। इसी दौरान अचानक वह तेज करंट की चपेट में आ गईं और गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजनों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उनकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही गौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हादसा इस बात की भी याद दिलाता है कि घरेलू विद्युत उपकरणों के उपयोग में थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विद्युत उपकरण का प्लग लगाने या निकालने से पहले तार, प्लग, स्विच और अर्थिंग की स्थिति की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए। यदि कहीं कटे हुए तार, ढीले कनेक्शन या करंट उतरने की आशंका हो तो तुरंत बिजली विभाग अथवा प्रशिक्षित इलेक्ट्रिशियन की सहायता लेनी चाहिए</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने विद्युत उपकरण, जर्जर वायरिंग और अर्थिंग की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। ऐसे में घरेलू विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच, आवश्यक मरम्मत और लोगों में विद्युत सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 18:04:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मई-जून की भीषण गर्मी में समाजसेवी पी के तिवारी ने चलाया जनजागरूकता अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुलबाजार, अमेठी। </strong>भीषण गर्मी और तेज धूप से लोगों को राहत दिलाने तथा जागरूक करने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यों में अग्रणी संस्था कृष्णा जन कल्याण सेवा संस्थान रजि. के प्रबंधक एवं समाजसेवी पी.के. तिवारी द्वारा मई और जून माह में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, बाजारों तथा खेतों में कार्य कर रहे श्रमिकों और किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें गर्मी से बचाव के उपाय बताए गए।समाजसेवी पी.के. तिवारी ने लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने, दोपहर की तेज धूप से बचने, सिर को ढककर बाहर निकलने तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182542/social-worker-pk-tiwari-launched-public-awareness-campaign-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1-.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुलबाजार, अमेठी। </strong>भीषण गर्मी और तेज धूप से लोगों को राहत दिलाने तथा जागरूक करने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यों में अग्रणी संस्था कृष्णा जन कल्याण सेवा संस्थान रजि. के प्रबंधक एवं समाजसेवी पी.के. तिवारी द्वारा मई और जून माह में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, बाजारों तथा खेतों में कार्य कर रहे श्रमिकों और किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें गर्मी से बचाव के उपाय बताए गए।समाजसेवी पी.के. तिवारी ने लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने, दोपहर की तेज धूप से बचने, सिर को ढककर बाहर निकलने तथा स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में थोड़ी सी सावधानी लोगों को गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।अभियान के दौरान संस्था की ओर से जरूरतमंद श्रमिकों, किसानों एवं राहगीरों के लिए जलपान की व्यवस्था भी कराई गई। इसके साथ ही लोगों के सहयोग से लगभग 500 अंगवस्त्र भेंट कर गर्मी से बचाव का संदेश दिया गया। अंगवस्त्र प्राप्त करने वाले लोगों ने समाजसेवी पी.के. तिवारी के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें दुआएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्र के लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में जहां लोग अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, वहीं पी.के. तिवारी लगातार समाजहित में कार्य कर मानव सेवा की मिसाल पेश कर रहे हैं। संस्था द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों से जरूरतमंद लोगों को काफी राहत मिलती है।इस अवसर पर समाजसेवी पी.के. तिवारी ने कहा कि संस्था द्वारा किए जा रहे प्रत्येक सामाजिक कार्य में समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिलता रहता है, जिससे संस्था को और अधिक कार्य करने की प्रेरणा और बल मिलता है। उन्होंने भविष्य में भी जनहित के कार्य निरंतर जारी रखने की बात कही।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:43:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान के बेटे ने बढ़ाया गोंडा का गौरव, अग्निवीर जीडी में चयनित होकर देश सेवा के लिए नागपुर रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो गोण्डा।</strong> विकासखंड रुपईडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत भवानीपुर उपाध्याय के मजरा छिछुली निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र शशांक शुक्ला का भारतीय सेना की अग्निवीर (जीडी) भर्ती में चयन होने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक 1 जुलाई 2026 से नागपुर प्रशिक्षण केंद्र में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। देश सेवा के लिए रवाना होने से पूर्व गांव में उनका भव्य सम्मान किया गया। माता-पिता ने तिलक लगाकर, आरती उतारकर और आशीर्वाद देकर उन्हें विदा किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। शशांक शुक्ला ने कहा कि बचपन</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182540/farmers-son-made-gonda-proud-agniveer-got-selected-in-gd"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1007811081.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो गोण्डा।</strong> विकासखंड रुपईडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत भवानीपुर उपाध्याय के मजरा छिछुली निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र शशांक शुक्ला का भारतीय सेना की अग्निवीर (जीडी) भर्ती में चयन होने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक 1 जुलाई 2026 से नागपुर प्रशिक्षण केंद्र में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। देश सेवा के लिए रवाना होने से पूर्व गांव में उनका भव्य सम्मान किया गया। माता-पिता ने तिलक लगाकर, आरती उतारकर और आशीर्वाद देकर उन्हें विदा किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। शशांक शुक्ला ने कहा कि बचपन से ही उनका एकमात्र सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की सेवा करना था। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करना उनके लिए गर्व, सम्मान और सौभाग्य की बात है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों तथा ग्रामीणों के स्नेह और आशीर्वाद को दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक के पिता जग प्रसाद शुक्ला एक मेहनती किसान हैं, जिन्होंने खेती-किसानी करते हुए अपने पुत्र को बेहतर शिक्षा दिलाई और हर कदम पर उसका मनोबल बढ़ाया। उनकी माता मेनका शुक्ला गृहिणी हैं और परिवार का कुशलतापूर्वक संचालन करती हैं। माता-पिता के संस्कार, अनुशासन और त्याग ने ही शशांक के व्यक्तित्व को मजबूत बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक ने अपनी हाईस्कूल की शिक्षा बाबू बच्चा सिंह स्मारक इंटर कॉलेज, देवरिया कला भटपुरवा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने श्री गाँधी आदर्श विद्यालय इंटर कॉलेज, खरगूपुर से इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1.80 लाख की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। आगे उन्होंने नवीन चंद स्मारक महाविद्यालय, इटियाथोक से स्नातक की शिक्षा पूरी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शशांक का परिवार लंबे समय से राष्ट्र सेवा की भावना से जुड़ा रहा है। उनके बड़े पिताजी बजरंगी शुक्ला उत्तर प्रदेश होमगार्ड में सेवारत हैं। वहीं उनके चाचा बाबूराम शुक्ला भी उत्तर प्रदेश होमगार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके छोटे भाई हिमांशु शुक्ला भी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश सेवा के लिए रवाना होने से पहले गांव में भावनात्मक माहौल देखने को मिला। सैकड़ों ग्रामीणों ने शशांक को फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया तथा "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "जय हिंद" के नारों के बीच उनका उत्साहवर्धन किया। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि शशांक अपने अनुशासन, समर्पण और परिश्रम से गांव, जनपद और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अमरनाथ तिवारी, प्रबल प्रताप, शशिभूषण, बृजभूषण तिवारी, हिमांशु, शुभांशु, संचित राम तिवारी, दीपक, दीपांशु, प्रयाग दत्त शुक्ला, मुक्तिनाथ शुक्ला, शिवम शुक्ला सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने शशांक को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल सैन्य जीवन की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि किसान परिवार से निकलकर सेना में चयनित होना यह संदेश देता है कि कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और माता-पिता के संस्कार किसी भी युवा को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। शशांक शुक्ला की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उनमें भी देश सेवा का जज्बा मजबूत करेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:41:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीमा सुरक्षा बल (अग्निवीर) में चयनित महावीर यादव का गांव में भव्य स्वागत, पहली बार घर पहुंचने पर उमड़ा जनसैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के सोनखर डीह गांव निवासी मिन्कू यादव के पुत्र महावीर यादव के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अग्निवीर के रूप में चयनित होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद महावीर यादव पहली बार अपने गृह जनपद सिद्धार्थनगर पहुंचे, जहां उनका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डुमरियागंज सीमा पर पहुंचते ही क्षेत्र के युवाओं, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत जुलूस डुमरियागंज से शुरू होकर शाहपुर, नेबुआ, पेडारी मुस्तहकम और मछिया होते हुए सोनखर डीह गांव पहुंचा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग में</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182527/grand-welcome-to-mahavir-yadav-selected-in-border-security-force"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1782920516116.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के सोनखर डीह गांव निवासी मिन्कू यादव के पुत्र महावीर यादव के सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अग्निवीर के रूप में चयनित होने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद महावीर यादव पहली बार अपने गृह जनपद सिद्धार्थनगर पहुंचे, जहां उनका जगह-जगह जोरदार स्वागत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डुमरियागंज सीमा पर पहुंचते ही क्षेत्र के युवाओं, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। स्वागत जुलूस डुमरियागंज से शुरू होकर शाहपुर, नेबुआ, पेडारी मुस्तहकम और मछिया होते हुए सोनखर डीह गांव पहुंचा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग में लोगों ने महावीर का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। गांव पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महावीर यादव की इस उपलब्धि से गांव के युवाओं में भी देश सेवा के प्रति नया उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने कहा कि महावीर ने अपने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर महावीर यादव के पिता मिंकू यादव ने अपने पुत्र के पहली बार नौकरी लगने के बाद घर आने की खुशी में जलपान का आयोजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, मित्र एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने महावीर को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल सेवा जीवन की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव में देर तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। ग्रामीणों का कहना था कि महावीर की मेहनत, लगन और अनुशासन का परिणाम है कि उन्होंने सीमा सुरक्षा बल में स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे सोनखर डीह गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182527/grand-welcome-to-mahavir-yadav-selected-in-border-security-force</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:15:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मॉनसून का करिश्माई रूप और कुदरत की विराट शक्ति के सामने इंसान की सीमाएं तथा असम की बाढ़ से मिला प्रकृति का बड़ा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">असम में मॉनसून की पहली बड़ी बाढ़ ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि प्रकृति जब अपना स्वरूप बदलती है तब इंसान की सारी योजनाएं और सारी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं। जून का अधिकांश समय देश के अनेक हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। कहीं खेत सूखे रहे तो कहीं जलाशय खाली दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि इस बार मॉनसून सामान्य समय से पीछे चल रहा है। लेकिन जून के अंतिम दिनों में जैसे ही पूर्वोत्तर भारत में बादलों ने डेरा डाला वैसे ही असम</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182342/the-charismatic-form-of-monsoon-and-the-limitations-of-humans"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas26.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">असम में मॉनसून की पहली बड़ी बाढ़ ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि प्रकृति जब अपना स्वरूप बदलती है तब इंसान की सारी योजनाएं और सारी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं। जून का अधिकांश समय देश के अनेक हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। कहीं खेत सूखे रहे तो कहीं जलाशय खाली दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि इस बार मॉनसून सामान्य समय से पीछे चल रहा है। लेकिन जून के अंतिम दिनों में जैसे ही पूर्वोत्तर भारत में बादलों ने डेरा डाला वैसे ही असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते नदियां उफान पर आ गईं और हजारों परिवार बाढ़ की चपेट में आ गए। यह दृश्य केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं बल्कि यह संदेश भी है कि प्रकृति के अपने नियम हैं और उसके सामने मनुष्य की शक्ति सीमित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम के अनेक जिलों में हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांव पानी में घिर गए हैं। खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं। पशुधन भी संकट में है। रेल संपर्क बाधित हो गया है और लोगों का सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। यह केवल असम की समस्या नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है क्योंकि प्राकृतिक आपदाएं किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहतीं। कभी पहाड़ों में बादल फटते हैं तो कभी मैदानों में नदियां उफान पर आ जाती हैं। कहीं समुद्र तूफान लेकर आता है तो कहीं सूखा लोगों की जिंदगी कठिन बना देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा ने भी स्थिति को गंभीर बना दिया है। पहाड़ों से उतरने वाला पानी असम की नदियों में पहुंचा और बाढ़ का स्वरूप और भी भयावह हो गया। यह प्रकृति का वही चक्र है जिसे मनुष्य पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता। विज्ञान ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन आज भी बादलों को आदेश नहीं दिया जा सकता कि वे कहां बरसें और कितनी देर तक बरसें। यही कारण है कि कुदरत के सामने हर व्यक्ति समान रूप से असहाय दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मॉनसून भारत की जीवनरेखा माना जाता है। देश की कृषि का बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है। अच्छी बारिश होती है तो खेतों में हरियाली छा जाती है और किसानों के चेहरे खिल उठते हैं। लेकिन यही बारिश जब सीमा से अधिक हो जाती है तब वही जीवनदायिनी जलधारा विनाश का कारण बन जाती है। इस बार भी यही देखने को मिला। जहां देश के कई हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे वहीं असम में इतनी अधिक वर्षा हुई कि लोगों के घर और खेत पानी में डूब गए। प्रकृति का यही विरोधाभास उसे रहस्यमयी और करिश्माई बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">देश के अनेक किसान इस समय कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। कहीं बारिश नहीं होने से बुवाई प्रभावित हुई है तो कहीं अत्यधिक वर्षा ने तैयारियां बिगाड़ दी हैं। खेती पूरी तरह मौसम पर आधारित है और मौसम का मिजाज हर वर्ष बदलता रहता है। किसान मेहनत करता है लेकिन अंतिम निर्णय प्रकृति के हाथ में होता है। यही कारण है कि भारतीय किसान सदियों से धरती और आकाश दोनों को समान श्रद्धा से देखता आया है। उसे पता है कि मेहनत उसकी है लेकिन सफलता का आशीर्वाद प्रकृति देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष अधिक मास के कारण लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि मॉनसून देर से आया। चाहे इसके धार्मिक या सांस्कृतिक संदर्भ अलग हों लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से मॉनसून का आगमन समुद्री हवाओं तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिर भी भारतीय समाज में प्रकृति और आस्था का गहरा संबंध रहा है। लोग वर्षा को केवल मौसम नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा भी मानते हैं। जब समय पर बारिश होती है तो खुशियां आती हैं और जब अत्यधिक या कम वर्षा होती है तो चिंता बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम की बाढ़ ने यह भी सिखाया है कि प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से भी संभव है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलना चाहिए। प्रभावित परिवारों तक भोजन दवाइयां और सुरक्षित आश्रय पहुंचाना सबसे पहली जिम्मेदारी है। बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। जिन किसानों की फसलें और पशुधन प्रभावित हुए हैं उन्हें आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए ताकि वे दोबारा अपने जीवन को संभाल सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा राज्य सरकार से लगातार संपर्क बनाए रखना और राहत कार्यों की समीक्षा करना सकारात्मक पहल है। ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर केवल मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्राकृतिक आपदा किसी दल या क्षेत्र को देखकर नहीं आती। उसका सामना पूरे समाज को मिलकर करना पड़ता है। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत भी है कि संकट की घड़ी में लोग एक दूसरे का हाथ थाम लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल राहत पहुंचाने की नहीं बल्कि भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने की भी है। नदियों के किनारे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जल निकासी की प्रभावी योजना समय पर चेतावनी प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण जैसे उपाय भविष्य में नुकसान कम कर सकते हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलित दोहन ने भी कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को बढ़ाया है। यदि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलेगा तो आपदाओं की तीव्रता को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुदरत का अपना अद्भुत स्वभाव है। वही धरती को हरियाली देती है वही नदियों को जीवन देती है वही अन्न उपजाती है और वही कभी कभी अपनी अपार शक्ति का परिचय भी देती है। मनुष्य ने ऊंची इमारतें बना लीं आधुनिक तकनीक विकसित कर ली और अंतरिक्ष तक पहुंच गया लेकिन बादलों की चाल और नदियों के वेग के सामने आज भी उसकी सीमाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। यही प्रकृति का सबसे बड़ा करिश्मा है कि वह जीवन भी देती है और समय आने पर विनम्रता का पाठ भी पढ़ाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम की बाढ़ केवल एक समाचार नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी और सीख है। हमें प्रकृति का सम्मान करना होगा उसके संतुलन को बनाए रखना होगा और आपदाओं से निपटने की तैयारी को मजबूत करना होगा। बारिश जीवन का उत्सव भी है और जिम्मेदारी की परीक्षा भी। जब तक संतुलन बना रहता है तब तक वर्षा अमृत बनकर बरसती है लेकिन जब संतुलन बिगड़ता है तब वही जल प्रलय का रूप ले लेता है। इसलिए आवश्यक है कि हम प्रकृति को जीतने का नहीं बल्कि उसके साथ सामंजस्य बनाकर चलने का प्रयास करें क्योंकि कुदरत के विराट स्वरूप के सामने अंततः हर मनुष्य विनम्र और लाचार ही दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>          *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182342/the-charismatic-form-of-monsoon-and-the-limitations-of-humans</link>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तालाब में 30 कुंतल मछलियां मरीं,मत्स्य पालक को लाखों का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[न्याय के लिए चौकी से कोतवाली तक भटक रहा पीड़ित,कार्रवाई का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182231/30-quintals-of-fish-in-the-pond-loss-of-lakhs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260628-wa0358.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>लालगंज (रायबरेली)</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरेनी थाना क्षेत्र के तिवारीपुर कला गांव में तालाब में पाली गई मछलियों के संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलने का मामला सामने आया है।घटना से मत्स्य पालक को लाखों रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। पीड़ित ने गांव के ही एक युवक पर तालाब में जहरीला पदार्थ डालने का संदेह जताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।तिवारीपुर कला निवासी हरिश्चंद्र पुत्र गोवर्धन के अनुसार,उन्होंने तालाब में मत्स्य पालन कर रखा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका कहना है कि 27 जून की सुबह जब वह तालाब पर पहुंचे तो वहां लगभग सभी मछलियां मृत अवस्था में तैरती मिलीं।पीड़ित की मानें तो करीब 30 कुंतल मछलियां मर गईं,जिससे उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।हरिश्चंद्र ने बताया कि तालाब में जहरीला पदार्थ डाल दिया,जिसके कारण मछलियों की मौत हुई।उन्होंने गांव के पिंटू निर्मल पर संदेह जताते हुए सरेनी थाने में तहरीर देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।पीड़ित का आरोप है कि भोजपुर पुलिस चौकी में शिकायत करने के बावजूद उसे अब तक न्याय नहीं मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं रविवार को पीड़ित ने कोतवाली पहुंचकर भी मामले की शिकायत की है।पीडित का कहना है कि वह पुलिस चौकी भोजपुर और सरेनी कोतवाली के बीच लगातार चक्कर लगाने को मजबूर हैं,लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।वहीं,सूत्रों की मानें तो चौकी इंचार्ज भोजपुर द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।अब क्या सच क्या झूठ यह पुलिस की जांच का विषय है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182231/30-quintals-of-fish-in-the-pond-loss-of-lakhs</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:33:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
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<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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