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                <title>New York - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>New York RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आतंकी संगठन से गलबहियां करने वाले मेयर ममदानी को संघ प्रमुख मोहन भागवत का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं: हिन्दू विचार मंच पाकुड़िया इकाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे। परंतु न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एवं धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी एडवाइजरी संस्था यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से वीजा नहीं देने की अपील की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस यात्रा का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों पर धार्मिक भेदभाव करते हुए अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा का आरोप है। यद्यपि भारत सरकार ने ऐसे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186724/mayor-mamdani-who-has-misbehaved-with-the-terrorist-organization-has"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/news-5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे। परंतु न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एवं धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी एडवाइजरी संस्था यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से वीजा नहीं देने की अपील की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस यात्रा का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों पर धार्मिक भेदभाव करते हुए अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा का आरोप है। यद्यपि भारत सरकार ने ऐसे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता व आकलन पर भी सवाल उठाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर ममदानी के विरोध के बीच यूनिवर्सल अवेयरनेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम के आयोजक अमेरिकन हिन्दूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एहेड) का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौजूद खाता निलंबित किए जाने की सूचना है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम न्यूयॉर्क के मैडिसन गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में 29 अगस्त को आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में सभी धर्मों के पांच हजार लोगों व 250 संगठनों के शामिल होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जोहरान ममदानी भारत विरोधी होने के अलावा आतंकी गुटों के समर्थक रहे हैं। हिन्दू विचार मंच ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि आरएसएस सनातन सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षक रहा है और सनातन संस्कृति के मूल घोष वाक्य ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा पर मानवता का पक्षधर है। भारतीय राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि मानते हुए देश के समस्त नागरिकों को प्रेरित करता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या भारतवर्ष में अपनी कालजयी सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर राष्ट्रीय भाव का प्रचार-प्रसार करना अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा कहना उचित है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्दू विचार मंच ने पूरे जोर देकर दावे के साथ कहा है कि भारत विश्व का सर्वाधिक प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य आधारित राष्ट्र है और पंथनिरपेक्ष व प्रजातांत्रिक राष्ट्र है। इस राष्ट्र में बहुसंख्यक सनातनियों ने कभी भी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पीड़ित नहीं किया है बल्कि उन्हें धार्मिक अधिकारों के साथ प्रगति की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन राष्ट्रविरोधी तत्वों को दंड देना राष्ट्रीय धर्म है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंच का मानना है कि यदि जोहरान ममदानी में साहस है तो वे भारतवर्ष के जम्मू-कश्मीर सहित देश के अन्य नगरों में इस्लाम के नाम पर होती रही आतंकी गतिविधियों की निंदा करने का साहस दिखाएं।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 23:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यूजर्सी में 8 अक्तूबर को होगा दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मंदिर का उद्घाटन, भारत की खूबसूरत झलक </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंटरनेशनल  न्यूज़ </strong></p>
<p><strong>आधुनिक युग</strong> में भारत के बाहर निर्मित दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन 8 अक्तूबर को न्यूजर्सी में होगा। न्यूयॉर्क स्थित टाइम्स स्क्वायर से लगभग 60 मील दक्षिण में और वाशिंगटन डीसी से लगभग 180 मील उत्तर में स्थित न्यूजर्सी के रॉबिन्सविले टाउनशिप में बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और इसके निर्माण में 12,500 से अधिक स्वयंसेवकों ने मदद की। मंदिर के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही यहां दर्शन के लिए रोजाना हजारों लोग आते हैं। अधरधाम के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर 183</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135079/the-worlds-second-largest-temple-will-be-inaugurated-in-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/screenshot_2023-06-26-22-54-58-75-min.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंटरनेशनल  न्यूज़ </strong></p>
<p><strong>आधुनिक युग</strong> में भारत के बाहर निर्मित दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन 8 अक्तूबर को न्यूजर्सी में होगा। न्यूयॉर्क स्थित टाइम्स स्क्वायर से लगभग 60 मील दक्षिण में और वाशिंगटन डीसी से लगभग 180 मील उत्तर में स्थित न्यूजर्सी के रॉबिन्सविले टाउनशिप में बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था और इसके निर्माण में 12,500 से अधिक स्वयंसेवकों ने मदद की। मंदिर के औपचारिक उद्घाटन से पहले ही यहां दर्शन के लिए रोजाना हजारों लोग आते हैं। अधरधाम के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर 183 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है।</p>
<p>बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के अक्षरवत्सलदास स्वामी ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हमारे आध्यात्मिक नेता (प्रमुख स्वामी महाराज) की सोच थी कि पश्चिमी गोलार्ध में एक ऐसा स्थान होना चाहिए जो केवल हिंदुओं, केवल भारतीयों या केवल कुछ लोगों के समूहों का न होकर दुनिया के सभी लोगों के लिए हो। यह स्थान पूरी दुनिया के लिए होना चाहिए, जहां लोग आ सकें और हिंदू परंपरा के कुछ मूल्यों, सार्वभौमिक मूल्यों को सीख सकें।'' बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के वरिष्ठ धार्मिक नेता मीडिया को आमतौर पर साक्षात्कार नहीं देते। अक्षरवत्सलदास स्वामी ने कहा, ‘‘यह उनकी (प्रमुख स्वामी महाराज की) इच्छा थी और यह उनका संकल्प था। उनके संकल्प के अनुसार, यह अक्षरधाम पारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला के अनुरूप बनाया गया है।'' इस मंदिर का औपचारिक रूप से उद्घाटन 8 अक्तूबर को किया जाएगा और इसे 18 अक्तूबर से आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।</p>
<p>इस मंदिर को प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार बनाया गया है और इसमें 10,000 मूर्तियों एवं प्रतिमाओं, भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों और नृत्य रूपों की नक्काशी सहित प्राचीन भारतीय संस्कृति को दर्शाया गया है। यह मंदिर कंबोडिया स्थित अंकोरवाट के बाद संभवत: दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। 12वीं सदी में निर्मित अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है, जो 500 एकड़ में फैला है। यह यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन) का विश्व धरोहर स्थल है। नई दिल्ली स्थित अक्षरधाम मंदिर 100 एकड़ में बना है। इसे 2005 में आम लोगों के लिए खोला गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Sep 2023 16:03:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय मूल की सुष्मिता शुक्ला बानी फेडरल रिज़र्व की प्रथम उपाध्यक्ष </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>भारतीय</strong> मूल की सुष्मिता शुक्ला को न्यूयॉर्क में फेडरल रिजर्व बैंक की प्रथमउपाध्यक्ष (फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट) एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब वह इस प्रतिष्ठित केंद्रीय बैंक की दूसरी सबसे बड़ी अधिकारी बन गई हैं।</p>
<p>न्यूयॉर्क स्थित केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि शुक्ला की नियुक्ति को फेडरल रिजर्व सिस्टम के निदेशक मंडल ने मंजूरी दी है। शुक्ला (54) को न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने प्रथम उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया है और यह नियुक्ति मार्च 2023 से प्रभाव में आएगी।</p>
<p>शुक्ला ने एक बयान में कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126183/indian-origin-sushmita-shukla-became-the-first-vice-chairman-of-the-federal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/4.webp" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>भारतीय</strong> मूल की सुष्मिता शुक्ला को न्यूयॉर्क में फेडरल रिजर्व बैंक की प्रथमउपाध्यक्ष (फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट) एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। अब वह इस प्रतिष्ठित केंद्रीय बैंक की दूसरी सबसे बड़ी अधिकारी बन गई हैं।</p>
<p>न्यूयॉर्क स्थित केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि शुक्ला की नियुक्ति को फेडरल रिजर्व सिस्टम के निदेशक मंडल ने मंजूरी दी है। शुक्ला (54) को न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने प्रथम उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी नियुक्त किया है और यह नियुक्ति मार्च 2023 से प्रभाव में आएगी।</p>
<p>शुक्ला ने एक बयान में कहा कि वह सम्मानित महसूस कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस अहम संस्थान के समर्पित नेतृत्व को समर्थन देने और इसकी महत्वपूर्ण गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए मैं अपने पूरे अनुभव का उपयोग करूंगी।’’ केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी जॉन विलियम्स ने कहा कि शुक्ला ऊर्जा से भरी, प्रेरणादायी और बहुत ही प्रभावीशाली हैं जो बैंक में अपना लंबा अनुभव लेकर आ रही हैं।</p>
<p>विलियम्स ने कहा कि शुक्ला को प्रौद्योगिकी और नवाचार विधियों का गहन ज्ञान है और वह विविध तथा समावेशी संस्कृति बनाने को लेकर बहुत उत्साही हैं। केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर मौजूद शुक्ला के विवरण में बताया गया है कि उन्हें बीमा उद्योग का करीब 20 वर्ष का अनुभव है और वह नेतृत्व की विभिन्न भूमिकाओं में रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:40:12 +0530</pubDate>
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