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                <title>social commentary - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>social commentary RSS Feed</description>
                
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                <title>सुविधाएँ बढ़ीं, बजट बढ़ा, फिर भी व्यवस्था वहीं क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184435/facilities-increased-budget-increased-still-why-is-the-system-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1.-prof.-rkjain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नल में पानी नहीं। समस्या सिर्फ सुविधाओं की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौजूद साधनों और पदों का अपने उद्देश्य से गायब होना है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुर्सियाँ भरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम नहीं। सवाल है—इस दिखाई देती अनुपस्थिति को कब तक अनदेखा करेंगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने सुविधाओं को सेवा का माध्यम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजी लाभ का साधन बना लिया है। सरकारी अस्पताल का डॉक्टर सरकारी समय में निजी मरीजों में व्यस्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ओ.पी.डी. में गरीब अपनी बारी का इंतजार करता है। शिक्षक कक्षा के लिए नियुक्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर उसकी ऊर्जा निजी कोचिंग में खपती है। सरकारी वाहन जनता के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी आवागमन में चलता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कंप्यूटर काम के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी कारोबार में इस्तेमाल होता है। सरकारी फोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमरा और संसाधन—नाम सरकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल निजी। यहीं से सुविधा का चरित्र बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो साधन जनता की सेवा के लिए था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही किसी की निजी सुविधा और कमाई का जरिया बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि हर समस्या का हल हम नई सुविधा में खोजते हैं—अस्पताल में भीड़ हो तो नया भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम कमजोर हों तो नई इमारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन खराब हो तो नई मशीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी कम हों तो नई नियुक्ति। मगर पुरानी सुविधा का हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लाखों की मशीन खरीदी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीशियन न मिले तो धूल खाती है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">दवाइयाँ गोदाम भरती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वितरण की लापरवाही से जरूरतमंद तक नहीं पहुँचतीं और एक्सपायरी उन्हें निगल जाती है। स्कूल में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोजेक्टर और स्क्रीन आ जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पढ़ाने का ढर्रा वही रहता है। प्रशिक्षण होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाणपत्र बंटते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तस्वीरें खिंचती हैं—कक्षा में फिर भी रट्टा चलता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन बढ़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बजट बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खर्च बढ़ता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस उपयोगिता वहीं की वहीं रहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधाएँ शायद इसी लिए चुपचाप सवाल करती हैं। अस्पताल का बिस्तर पूछता है—“मैं मरीज के लिए था या सिर्फ औपचारिकता के लिए</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">किताब पूछती है—“बच्चे तक पहुँची क्यों नहीं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट लाइट पूछती है—“मेरी रोशनी किस काम की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब महीनों खराब पड़ी रहूँ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक शौचालय बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई के अभाव में बेकार हो जाता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस स्टैंड खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर यात्री सुविधा से वंचित हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देखरेख न हो तो कूड़े और टूटे सामान में बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीनें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजनाएँ कागज पर चल रही हैं—बस सेवा गायब है। सुविधा का शरीर बचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्देश्य मर चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी विडंबना तब सामने आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम दूसरों से ईमानदारी चाहते हैं और अपनी बारी पर “सिस्टम ऐसा ही है” कहकर बच निकलते हैं। डॉक्टर व्यवस्था को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक विभाग को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी अधिकारी को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी बजट को और नागरिक पूरे सिस्टम को दोष देता है। मगर सिस्टम है किससे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हमसे ही।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर न पहुँचने वाला कर्मचारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना पढ़े फाइल बढ़ाने वाला अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा को औपचारिकता मानने वाला शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज से ज्यादा निजी काम को तरजीह देने वाला डॉक्टर—ये सभी सिस्टम हैं। हम व्यवस्था बदलना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शुरुआत खुद से नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम को कोसना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भीतर के स्वार्थ को देखना कठिन। यही हमारी असली सामूहिक विडंबना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असली सवाल सुविधा के होने का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके सही इस्तेमाल का है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सही उपयोग हो तो मरीज को इलाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र को समझ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान को समय पर जानकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक को समय पर प्रमाणपत्र और सड़क को रात में रोशनी मिलती है। दुरुपयोग हो तो डॉक्टर की कुर्सी भरी रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा खाली</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक का वेतन आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहनत नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय खुला रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान बंद। कहीं नौकरी जिम्मेदारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी सुविधा बन जाती है—हाजिरी पूरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पूरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम अपनी मर्जी का। कहीं सरकारी संसाधन निजी काम में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं सार्वजनिक समय निजी लाभ में।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सामूहिक बेईमानी है—जिसे हम सुविधाजनक ढंग से “सिस्टम की समस्या” कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब विकास का सवाल भी बदलना होगा। हर बार “नई सुविधा कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले पूछा जाए—</span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका परिणाम क्या आया</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">नया अस्पताल बनाने से पहले पुराने की दवा व्यवस्था देखी जाए</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई मशीन लाने से पहले पूछा जाए कि पुरानी बंद क्यों है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नया स्कूल खोलने से पहले देखा जाए कि मौजूदा स्कूल बच्चों को क्या दे रहा है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सड़क से पहले पुरानी सड़क की मरम्मत का हिसाब हो। हर योजना के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखभाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और परिणाम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी तय हों। सुविधा खरीदना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे उपयोगी बनाए रखना कठिन। बजट से भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन और फर्नीचर खरीदे जा सकते हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदार उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और संवेदना किसी निविदा में नहीं मिलती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था केवल नई सुविधाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही नीयत से बदलती है। डॉक्टर के लिए मरीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक के लिए कक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी के लिए सरकारी समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी के लिए फाइल के पीछे खड़ा व्यक्ति और नागरिक के लिए सार्वजनिक संसाधन—जब सुविधा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी बन जाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आधी समस्याएँ बिना नए खर्च के खत्म हो सकती हैं। नई सुविधाएँ जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पुरानी नीयत के साथ नहीं। असली सुविधा बजट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका ईमानदार उपयोग है। जिस दिन “मुझे क्या मिला</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले “जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे किसका भला हुआ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">पूछा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन व्यवस्था का हर साधन अपना असली अर्थ पाएगा। तब सुविधाएँ सिर्फ उपलब्ध नहीं होंगी—सार्थक होंगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सींखचों में सिसक रहीं हैं अपने सुहाग की खूनी विवाहिताएं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश की बहुत सारी जेलों में अंधी वासना अवैध संबंध के चलते अपना सुहाग को उजाड़ने वाली कुलटाएं अपने कृत्यों के लिए दिनरात त्रासदी भुगत रहीं हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला जेल में ही पिछले कुछ महीनों में सामने आए  अवैध रिश्तों के ताने बाने में फंसकर अपने ही हाथों से अपने सुहाग को कत्ल कर जीवन को नरक में धकेलने की की कहानी दबी पड़ी हैं । हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की बैरक नंबर 12ए में छह महिलाएं भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183904/the-bloody-married-women-of-their-husbands-are-sobbing-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की बहुत सारी जेलों में अंधी वासना अवैध संबंध के चलते अपना सुहाग को उजाड़ने वाली कुलटाएं अपने कृत्यों के लिए दिनरात त्रासदी भुगत रहीं हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला जेल में ही पिछले कुछ महीनों में सामने आए  अवैध रिश्तों के ताने बाने में फंसकर अपने ही हाथों से अपने सुहाग को कत्ल कर जीवन को नरक में धकेलने की की कहानी दबी पड़ी हैं । हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की बैरक नंबर 12ए में छह महिलाएं भी बंद हैं, जिन्होंने पराए संबंधों के मोह में अपने ही परिवार के खिलाफ घातक षड्यंत्र रच डाला। पांच जहां पति की हत्या की गुनहगार हैं, छठी ने अपनी कोख से जन्मे बेटे को ही मरवा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूपी की सबसे पुरानी जेलों में शुमार मेरठ की जिला जेल में फिलहाल 67 महिला बंदी हैं, जिन्हें बैरक 12ए और 12बी में रखा गया है। पति को सांप से डसवाकर मरवाने वाली दामिनी को भी इसी बैरक में मुस्कान, अंजलि, रविता, कोमल और गुरप्रीत के साथ रखा गया है। जेल प्रशासन के अनुसार दामिनी फिलहाल किसी से बातचीत नहीं कर रही है। उसकी काउंसलिंग की तैयारी है।  जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा बताते हैं कि इन महिलाओं को एक ही बैरक में रखने का उद्देश्य यह है कि वे एक-दूसरे का सहारा बन सकें। अधिकांश को अपने किए पर पछतावा है।इन सबके भीतर जेल से बाहर आने की छटपटाहट है लेकिन भविष्य खत्म हो जाने का अहसास भी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन पति हंता महिलाओं से जब परिवार वाले बच्चों के साथ मिलने आते हैं तो उनका भावनात्मक संतुलन टूट जाता है। ऐसे समय में वे एक-दूसरे से कहती भी हैं कि उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी , जो खुद ही अपनी गृहस्थी उजाड़ ली। सुबह सुंदरकांड के पाठ के बाद मुस्कान अपनी बेटी के साथ समय बिताती है, जबकि अंजलि, गुरुप्रीत, रविता और कोमल सिलाई-कढ़ाई में खुद को व्यस्त रखती हैं। आपको बता दें मुस्कान रस्तोगी का नीला ड्रम कांड हो अथवा रविता और दामिनी..। सभी ने पति के रहते भी दूसरे युवकों से आशिकी का चक्कर चलाया प्यार के चक्कर में अपने पति का काम तमाम कर अपराध की अंधी राह पर जाकर खून से अपने हाथ रंग लिए। संगीता, अंजलि, कोमल और कविता की भी यही कहानी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पति से भावनात्मक और जिस्मानी पूर्ति के बावजूद ये दूसरे आशिकों के साथ रंगरलियां मनाने की वासना भरी चाहत में ऐसी भटकी कि कुछ महिलाओं ने अपने ही सुहाग को मौत के घाट उतार दिया तो एक ने बेटे को ही मार दिया। जिन सपनों के लिए उन्होंने यह खतरनाक रास्ता अख्तियार किया, वे टूट चुके हैं। जेल में कोई सिलाई-कढ़ाई सीख रही तो कोई बच्चों को पढ़ा रही है।हर सुबह जेल में बजने वाले सुंदरकांड को सुन कर मन की शांति पाने की कोशिश करती है। जाने-अनजाने उन्होंने यह कदम उठा तो लिया लेकिन सलाखों के पीछे अब सिर्फ दर्द है, पछतावा है और बेबस सिसकियां भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता होगा तीन मार्च 2025 की रात को ब्रह्मपुरी की रहने वाली मुस्कान रस्तागी ने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी। ड्रम के अंदर सीमेंट से शव को जमा दिया था। मुस्कान और साहिल अभी भी जेल की सलाखों के पीछे है। दोनों के मुकदमे में जल्द ही निर्णय भी आने वाला है। परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के गांव अगवानपुर निवासी 28 वर्षीय राहुल से अंजलि के तीन बेटे हैं। इसके बावजूद अंजलि का दिल पड़ोसी अजय पर आ गया। राहुल खेती बाड़ी व पशुपालन करता था, जबकि अजय आवारा किस्म का था और मौजमस्ती करता था। अजय ही अंजलि को रास्ते में से पिकअप कर लेकर होटल पहुंच जाता था। राहुल इसका विरोध करता था। एक नंवबर 2025 रात आठ बजे अंजलि ने काल कर राहुल को गांव के बाहर मंदिर पर बुलाया। वहां पर अजय भी आ गया। तब अजय ने राहुल की तीन गोली मारकर हत्या कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेरठ के बहसूमा के अकबरपुर सादात ने रविता ने 17 अप्रैल 2025 को प्रेमी प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर पति अमित की गला दबाकर हत्या कराई। उसके बाद सांप खरीद कर अमित के बिस्तर पर छोड़ दिया। उसके बाद सांप से काटने का नाटक रच दिया। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या आने के बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप को जेल भेज दिया। दोनों फिलहाल जेल में बंद है। वहीं चार अप्रैल को मेरठ जिला के परीक्षितगढ़ के अगवानपुर निवासी बीएसएफ जवान नैन सिंह की हत्या का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने पत्नी को और मौसी के बेटे गुलशन समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। कोमल ने बहन के मंगेतर गुलशन के साथ मिलकर हत्या की पूरी पटकथा रची थी। छह लाख की सुपारी के लिए अपने आभूषण गिरवी रखकर रकम जुटाई थी। मोबाइल कॉल डिटेल से ही पुलिस गुलशन तक पहुंची थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेरठ की ही युवती गुरप्रीत ने तो प्रेमी के चक्कर में फंसकर अपनी कोख को ही उजाड़ दिया है। 17 जून को मेरठ जिला के बहसूमा के सैफपुर फिरोजपुर निवासी गुरुप्रीत कौर ने प्रेमी मुजफ्फरनगर के मीरापुर निवासी अर्पित पराशर के साथ मिलकर सात साले के बेटे अंगदवीर की हस्तिनापुर ले जाकर हत्या करा दी। महिला पौने दो साल से पति से अलग रह रही थी, बेटे की हत्या से चार दिन पहले ही ससुराल लौटी थी। गुरुप्रीत और अर्पित पराशर भी जेल में है। 23 जून 2025 को मेरठ के जानी खुर्द के किसान सुभाष की हत्या उसकी पत्नी कविता और छोटी बेटी सोनम ने अपने प्रेमियों के साथ मिलकर कराई थी। बेटी के प्रेमी विपिन ने दोस्त अजगर उर्फ शिवम के साथ गोली मारकर हत्या की थी। मां बेटी समेत पांच आरोपितों को पुलिस ने जेल भेज दिया। कविता और सोनम जमानत पर जेल से छूट चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">28 फरवरी 2025 को जानी के गांव कुसैड़ी निवासी लोडर ऑपरेटर अजय कुमार की हत्या उसकी पत्नी संगीता ने ही प्रेमी अवनीश निवासी गाजियाबाद के संग मिलकर की है। अजय कुमार उर्फ बिटटू ताऊ के बेटे की शादी समारोह में शामिल होने के बाद लौट रहा था। तब रास्ते में अवनीश ने ईंट से कुचलकर मार डाला। संगीता जमानत पर जेल से छूट चुकी है। यह समय की गति है या कलियुग का प्रभाव कि यूपी ही नहीं देश भर  में प्रेम त्रिकोण विवाहेत्तर संबंध अंधी वासना और अवैध सम्बन्धों के चलते कई सौ विवाहिता युवतियां जेल की चारदीवारी में शून्य हो चुके भविष्य को तलाश रहीं हैं। कुछ तो जेल से बाहर निकल कर कहां ठिकाना होगा यह भी नहीं जानती क्योंकि उनके अपराध के कारण सामाजिक जिल्लत झेल रहे उनके मा बाप परिवार ने भी उनसे किनारा कर लिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल फिर वही है ऐसा क्या है जो मुस्कान रविता गुलशन संगीता अंजली को उनके साथ सात फेरे लेने वाले पति नहीं दे पाए। संस्कार की कमी अवैध सम्बन्ध और विवाहेत्तर वासना की अंधी सुरंग हजारों विवाहित कपल्स के जीवन को कलंकित कर रही है। हमारे गौरवशाली समाज और संस्कृति में यौन शुचिता का विचार रहा है यही विचार है कि हिन्दुस्तान की नारी शक्ति का विश्व भर में विश्वास और सम्मान रहा है लेकिन पिछले एक दशक में भारतीय नारी समाज को कथित प्रगतिशीलता पुरुष समानता और स्वतंत्र जीवन शैली के नाम पर यौन स्वछंदता और अमर्यादित जीवन की ओर धकेलने की कोशिश की जा रही है नेटफलिक्स होट स्टार तमाम मीडिया पर भारतीय महिलाओं को कथित आधुनिकता के नाम पर अवैध सम्बन्धों वाले स्वछंद जीवन शैली की और प्रेरित किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि हजारों जीवन अपने राह से उतर कर अंधेरी सुरंग में जीवन का स्वर्णिम समय देने के लिए मजबूर हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:06:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>संपादकीय पेज के लिए समसामयिक आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181582/current-articles-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश में इन दिनों मजहबी आतंकवाद ने लवजेहाद का मुखौटा पहन लिया है। लव जिहाद सिर्फ श्रद्धा वालकर, साक्षी, सीमा गौतम, अनामिता, यशोदा, रबिता पहाड़िन, तनिष्का शर्मा, निकिता तोमर, चयनिका और टिक-टॉक स्टार शिवानी जैसी सैकड़ों हिंदू लड़कियों की कहानियां नहीं हैं। वास्तविकता में लव जिहाद आतंकवाद का ही दूसरा चेहरा है। यह हिंदू बेटियों पर अंतहीन अत्याचार, उनके धर्मांतरण और जिहाद की जुगुत्सा का बेहद वीभत्स और जीवंत चित्रण है। लव जिहाद या रोमियो जिहाद एक षड्यंत्र है, जिसके तहत मुस्लिम लड़के, गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ प्यार का ढोंग करके उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं। ये सिर्फ उनकी अस्मत ही नही लूटते है वरन उनके अश्लील वीडियो एमएमएस बना कर ब्लेक मेल कर उनको दूसरी हिन्दू लड़कियों को चंगुल मे फंसाने के लिए मजबूर करते हैं इतना ही नहीं जाल में फंसी इन लड़कियों को अब सुनियोजित तरीके से नशे की डोज देकर नशे की आदत डालने का धंधा भी चल रहा है इसके साथ ही इनको फुसलाकर और की बार ब्लेक मेल कर और जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया जाता है इसके साथ ही इनका आर्थिक शोषण भी किया जाता है यदि शिकार लड़की अच्छे सम्पन्न परिवार से सम्बद्ध है तो उसे परिवार की बदनामी का भय दिखा कर लाखों रुपए की रकम बार बार वसूली जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया है। यहां भारतीय वायुसेना  के एक अधिकारी की 24 साल की पत्नी को न सिर्फ 'रेप' और ब्लैकमेल का शिकार बनाया गया, बल्कि 'काला जादू' (काला जादू) कर उसका निजी धर्म भी बदल दिया गया। इस खतरनाक वायरस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, आरोप है कि नागपुर में भारतीय वायु सेना के अधिकारी की पत्नी के साथ ये दरिंदगी की गई। पीड़िता का आरोप है कि उसे नशीली दवा देकर रेप किया गया, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया गया और उससे लाखों रुपये ऐंठे गए. इन सबके बाद धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया। 
<div style="text-align:justify;">पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मदारे और अमीन शेख को गिरफ़्तार कर लिया है, जबकि मध्य प्रदेश के तामिया निवासी तीसरे आरोपी हजरत मौलाना की तलाश जारी है.पुलिस के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति एयरफोर्स अधिकारी और अन्य शहर में अधिकारी है। महिला नागपुर में नौकरानी डीलिंग का काम करती है। इसी बात की फ़ायदेमंदी उसके स्कूल के पुराने क्लासमेट अय्याज़ ताज मदारे (26) ने रची है। पुलिस के मुताबिक शिकायत करने वाली 24 साल की महिला के पति इंडियन एयर फ़ोर्स में हैं और अभी दूसरे शहर में तैनात हैं. पीड़िता प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है. फरवरी 2025 में अयाज़ ने कथित तौर पर एक प्लॉट खरीदने के बहाने उससे संपर्क किया और उसे वर्धा रोड पर एक होटल में बुलाया. महिला का आरोप है कि उसने उसे नशीला पदार्थ मिला हुआ जूस पिलाया और बेहोशी की हालत में उसके साथ रेप किया, साथ ही इस हरकत का वीडियो और फ़ोटो भी बनाए और कथित तौर पर उससे 3.09 लाख रुपये ऐंठे. पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला गया और धार्मिक रीति-रिवाजों के नाम पर उससे कई तरह की चीजें कराई गईं.</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने बलात्कार, बार-बार यौन उत्पीड़न, जबरन वसूली, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों के साथ-साथ काला जादू विरोधी कानून की धाराओं को भी लागू किया है। नागपुर पुलिस की एक टीम उस मौलाना की तलाश कर रही है जिसने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया था।</div>
<div style="text-align:justify;">डीसीपी सुरेश रेड्डी ने कहा, "महिला ने अपनी शिकायत में बलात्कार, जबरन वसूली, धर्मांतरण और काला जादू का आरोप लगाया है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। यह सबूत बेहद अहम साबित होगा। धर्मांतरण कराने वाले मौलाना की तलाश में पुलिस की एक टीम दूसरे राज्य गई है। गहन जांच जारी है।"  नागपुर पुलिस ने अय्याज मदारे और अमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले अभी अप्रैल माह में महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर-परतवाड़ा इलाके से एक बेहद गंभीर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग मामले ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी . पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद अयान ऊर्फ मोहम्मद तनवीर को गिरफ्तार किया गया . प्राथमिक जांच में पता चला  कि आरोपीएआइएमआइएम का कार्यकर्ता है और लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था.</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती में 180 युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर 350 अश्लील वीडियो बनाए गए. आरोपियों ने ब्लैकमेल कर कई बार शोषण किया. पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की.स्थानीय सांसद डॉ. अनिल बोंडे के अनुसार, यह मामला किसी बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा हो सकता है. उन्होंने बताया कि मोहम्मद अयान और मोहम्मद जोयान सहित अन्य आरोपियों ने 180 से अधिक लड़कियों के करीब 350 आपत्तिजनक वीडियो बनाए. इन वीडियो के जरिए उन्हें देह व्यापार में धकेलने के लिए ब्लैकमेल किया गया इससे पहले यूपी के मिर्जापुर में जिम की आड़ में चल रहे एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. इस गिरोह का संचालन पुलिस का एक सिपाही और उसके साथी मिलकर कर रहे थे. इंस्टाग्राम से दोस्ती, ब्लैकमेलिंग और फिर धर्म परिवर्तन के इस काले खेल में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई .मिर्जापुर पुलिस ने जिम के जरिए संचालित हो रहे एक सुनियोजित धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा किया है. जीआरपी में तैनात सिपाही इरशाद खां और उसके शागिर्द फरीद अहमद ने 'आयरन फायर' और 'KGN 2.0' जिम की आड़ में 50 से अधिक लड़कियों को जाल में फंसाया.</div>
<div style="text-align:justify;"> ये आरोपी इंस्टाग्राम के जरिए युवतियों से संपर्क बढ़ाते थे और बाद में प्रेम जाल या आपत्तिजनक वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते थे. पुलिस ने मुख्य सरगना लकी अली के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया , जबकि सिपाही इरशाद और मुठभेड़ के बाद ट्रेनर फरीद को गिरफ्तार किया गया.</div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी वारदातों के मद्देनज़र यह साफ  है हिन्दू लड़कियों को फुसलाकर लवजेहाद में फंसा कर अय्याशी नशाखोरी और ब्लैकमेलिंग कर उनके धर्मांतरण का सिलसिला चल रहा है इस के पीछे सुनियोजित साजिश है और मजहबी वित्त व लीगल मदद भी भूमिका निभा रही हैं इस सम्बंध में अधिकाधिक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431 </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 17:01:15 +0530</pubDate>
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