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                <title>Saudi Arabia - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Saudi Arabia RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पाकिस्तान के लिए गले की हड्डी बनता - अब्राहम समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> मध्य पूर्व में तेल के एकाधिकार के वर्चस्व की लड़ाई को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और युद्ध को रुकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आतंक की छवि के विपरीत पाकिस्तानी हुक्मरान अपने देश की छवि एक शांति-दूत राष्ट्र के रूप में गढने के लिए पिछले कई महीनों से ईरान और अमेरिका के मध्य युद्ध पूर्णतः खत्म करवाने हेतु लगातार एक के बाद एक बैठकें कर दुनिया में शांति के सबसे बड़े मसीहा बनने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डोनाल्ड ट्रम्प </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180143/new-approach-to-understanding-womens-hormonal-health"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/abraham-accords.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> मध्य पूर्व में तेल के एकाधिकार के वर्चस्व की लड़ाई को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और युद्ध को रुकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आतंक की छवि के विपरीत पाकिस्तानी हुक्मरान अपने देश की छवि एक शांति-दूत राष्ट्र के रूप में गढने के लिए पिछले कई महीनों से ईरान और अमेरिका के मध्य युद्ध पूर्णतः खत्म करवाने हेतु लगातार एक के बाद एक बैठकें कर दुनिया में शांति के सबसे बड़े मसीहा बनने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डोनाल्ड ट्रम्प </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति हेतु एक बार फिर सभी मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ मित्रता कर अब्राहम समझौता करने की बात छेड़कर पाकिस्तान की हुकूमत और सेना प्रमुख की नींद उड़ा दी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी कूटनीति के हिसाब से ईरान समझौते से ज्यादा मध्य पूर्व के देशों के बीच अब्राहम समझौता जरूरी है। इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान समझौते पर जल्दबाज़ी न दिखाकर अब्राहम समझौते पर मुस्लिम देशों की राजनीति गरमा दी है। बकौल अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब्राहम समझौता पश्चिम एशिया के सभी देशों की आर्थिक उन्नति का समझौता है। इसलिए भविष्य में मुस्लिम देशों को अपने व्यापारिक हितों के लिए आंतरिक मतभेदों को भूलकर अब्राहम समझौते पर सहमत होना पड़ेगा और जो राष्ट्र इस समझौते से इतर जाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें स्वाभाविक रूप से अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चीन और रूस जैसे महाशक्तिशाली देशों की नाराज़गी भी सहनी पड़ सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका के अब्राहम समझौते पर कई मुस्लिम देशों ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इजरायल </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ संबंध बेहतर करने की दिशा में कदम बढ़ा भी दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणाम भी सार्थक निकल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी हुक्मरानों को अब्राहम समझौते पर सहमति देकर इजराइल के साथ संबंध बेहतर करने की बात से ही पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल मच गया है। पाकिस्तान ने इजराइल को कभी एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है। इसकी वजह पाकिस्तान का फिलिस्तीनी प्रेम रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दुनिया के करीब सौ से ज्यादा देश इजराइल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा है कि ईरान-अमेरिका के बीच शांति मध्यस्थता करवाने वाले देश पहले अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर कर इजराइल से संबंध बेहतर करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पाकिस्तान में सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना और कट्टरपंथी आतंकी ताकतों के बीच घमासान मचा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अब्राहम समझौते वाली बात ने पाकिस्तान को एक बार फिर  गृहयुद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। बेशक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पाकिस्तानी हुक्मरानों के लिए अब अब्राहम समझौता  गले की हड्डी बनता जा रहा है। यदि वे इसे स्वीकार करते हैं तो निश्चित ही पाकिस्तान में सत्ता और सेना के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को कट्टरपंथी ताकतों का तीखा विरोध झेलना पड़ेगा और यदि पाकिस्तान अब्राहम समझौते से इंकार कर देता है तो फिर अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से उसका हुक्का-पानी बंद होना तय माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा अब्राहम समझौते को स्वीकार करने से इंकार करने के बाद पाकिस्तान के शांति का मसीहा बनने का दावे का झूठ भी उजागर हो चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलोचना हो रही है। बेशक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य पूर्व के देशों को अमेरिकी दबदबे को कम करने और अपनी आर्थिक उन्नति के लिए आपसी दुश्मनी को भुलाकर साझा व्यापार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने हेतु अब्राहम समझौते को अपनाना ही होगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश मनभेद रखकर इस समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे या तो गृहयुद्ध में स्वयं खत्म हो जाएंगे या फिर अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों के दबाव में कमजोर पड़ जाएंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका के नए शांति प्रस्ताव पर कई मुस्लिम देश मंथन कर रहे हैं और इसे मानवीय शांति का सबसे बड़ा समझौता कह रहे हैं। उम्मीद है कि अमेरिकी संबंधों और कूटनीति के चलते</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाले दिनों में </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सऊदी अरब , कतर, तुर्की और ईरान </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी अब्राहम समझौते को स्वीकारते नजर आएं तो हैरानी नहीं होगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अतः वर्षों से युद्ध की त्रासदी भुगत रहे मध्य पूर्व के देशों के लोगों के लिए अब्राहम समझौता मानवीय शांति का सबसे बड़ा उपहार साबित हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:43:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हज यात्रा के 17 हजार से ज्यादा लोग  हिरासत में !</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>  International news:</strong><br /><br /></p>
<p>  <strong>सऊदी</strong> अरब की पुलिस ने यहां के अधिकारियों की अनुमति के बिना हज यात्रा करने का प्रयास करने वाले 17 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। एसपीए ने बताया कि सऊदी सुरक्षा बलों ने हज के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी के बिना यात्रा कर रहे करीब 17,615 लोगों को हिरासत में लिया, इनमें से 9,509 लोगों ने निवास, कार्य और सीमा सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन किया।</p>
<p><br />एजेंसी ने बताया कि तीर्थयात्रियों को बिना अनुमति के हज स्थलों तक ले जाने के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131751/more-than-17-thousand-people-of-haj-pilgrimage-in-custody"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/हज-यात्रा-के-17-हजार-से-ज्यादा-लोग- हिरासत-में-!.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> International news:</strong><br /><br /></p>
<p> <strong>सऊदी</strong> अरब की पुलिस ने यहां के अधिकारियों की अनुमति के बिना हज यात्रा करने का प्रयास करने वाले 17 हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। एसपीए ने बताया कि सऊदी सुरक्षा बलों ने हज के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी के बिना यात्रा कर रहे करीब 17,615 लोगों को हिरासत में लिया, इनमें से 9,509 लोगों ने निवास, कार्य और सीमा सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन किया।</p>
<p><br />एजेंसी ने बताया कि तीर्थयात्रियों को बिना अनुमति के हज स्थलों तक ले जाने के आरोप में अन्य 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया। बता दें कि पिछले सप्ताह, 20 लाख से अधिक लोगों ने हज किया, जो मुसलमानों के सबसे पवित्र शहर मक्का की वार्षिक इस्लामी तीर्थयात्रा है। एजेंसी के अनुसार, कोरोना वायरस के बाद से यह पहली बार है, जब सऊदी अधिकारियों ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को हज करने की अनुमति दी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2023 14:27:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन का नया दांव: अमेरिका के विरोध में सऊदी से करेंगे डील शी जिनपिंग </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>अमेरिका-</strong>    के साथ तनाव के बीच  चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग बहुप्रतिक्षित यात्रा गुरुवार को  सऊदी अरब  पहुंचे। चीनी राष्ट्रपति ने हवाई अड्डे पर अपने सरकारी विमान से उतरकर सऊदी अधिकारियों से हाथ मिलाया। जानकारों की मानें तो चीन का यह दौरा अमेरिका के खिलाफ नया दाव है। इस दौरे दौरान शी जिनपिंग  अमेरिका के 'दोस्‍त' सऊदी अरब से महाडील करेंगे और उसके लिए अपना खजाना खोल देंगे। जानकारी के अनुसार सऊदी अरब और चीन के बीच 29.3 अरब डॉलर की डील होगी। सऊदी अरब लंबे समय से खाड़ी देशों में अमेरिका का घनिष्‍ठ सहयोगी देश रहा</p>
<p>वहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126182/chinas-new-bet-xi-jinping-will-deal-with-saudi-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/36.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>अमेरिका-</strong>  के साथ तनाव के बीच  चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग बहुप्रतिक्षित यात्रा गुरुवार को  सऊदी अरब  पहुंचे। चीनी राष्ट्रपति ने हवाई अड्डे पर अपने सरकारी विमान से उतरकर सऊदी अधिकारियों से हाथ मिलाया। जानकारों की मानें तो चीन का यह दौरा अमेरिका के खिलाफ नया दाव है। इस दौरे दौरान शी जिनपिंग  अमेरिका के 'दोस्‍त' सऊदी अरब से महाडील करेंगे और उसके लिए अपना खजाना खोल देंगे। जानकारी के अनुसार सऊदी अरब और चीन के बीच 29.3 अरब डॉलर की डील होगी। सऊदी अरब लंबे समय से खाड़ी देशों में अमेरिका का घनिष्‍ठ सहयोगी देश रहा है लेकिन बाइडेन के राष्‍ट्रपति बनने और खशोगी मर्डर के बाद दोनों ही देशों के बीच संबंध बिगड़ते चले गए । शी जिनपिंग अब सऊदी-अमेरिकी संबंधों में आई इसी कड़वाहट का फायदा उठाने में जुट गए हैं।</p>
<p>वहीं यूक्रेन पर रूसी हमले और मास्को के खिलाफ पश्चिमी देशों के कड़े रुख के कारण अरब देश भी चीन से संबंध मजबूत करना चाहते हैं।  चीनी राष्‍ट्रपति की यह यात्रा इस लिहाज से अहम है कि वह कोरोना महामारी के यह तीसरी विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। जिनपिंग की यह सऊदी अरब यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका के साथ ओपेक की तेल की कीमतों को लेकर उसका तनाव काफी बढ़ा हुआ है। सऊदी अरब जहां सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है, वहीं चीन सबसे आयातक देश है। वहीं अल जुबैर ने चीनी राष्‍ट्रपति की यात्रा को कमतर करके दिखाने की कोशिश की और कहा कि दोनों नेताओं के बीच यह बैठक स्‍वाभाविक है क्‍योंकि चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्‍यापारिक सहयोगी देश है।</p>
<p>सऊदी अरब की सरकारी न्‍यूज एजेंसी एसपीए ने बताया कि 6 साल में पहली बार सऊदी अरब की यात्रा पर पहुंचे  शी जिनपिंग किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे। शी जिनपिंग रियाद में चीन-अरब शिखर सम्‍मेलन और चीन-गल्‍फ कॉन्‍फ्रेंस में हिस्‍सा लेंगे जहां इन देशों के नेता पहुंच रहे हैं। जिनपिंग की इस यात्रा को बाइडन की पिछले दिनों हुई यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। बाइडन ने अपनी यात्रा के दौरान खाड़ी के सहयोगी देशों को सुरक्षा, निवेश और अर्थव्‍यवस्‍था में अमेरिकी सहयोग की प्रतिबद्धता को दोहराया था।</p>
<p>सऊदी एजेंसी ने गुरुवार को कहा कि किंग सलमान ने शी जिनपिंग को चीन और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक रिश्‍ते तथा रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए आमंत्रित किया है। बयान में कहा गया है कि चीन-अरब शिखर बैठक में सभी क्षेत्रों में संयुक्‍त रिश्‍ते को बढ़ाया जाएगा और आर्थिक तथा विकास से जुड़े सहयोग पर चर्चा की जाएगी। वहीं सऊदी अरब के विदेश राज्‍य मंत्री अदेल अल जुबैर ने कहा कि व्‍यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे को शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा अमेरिका को सीधा संदेश है। उन्‍होंने कहा कि सऊदी अरब और चीन दोनों ही देश भूराजनीति को महत्‍व दे रहे हैं। दोनों ही देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके पास पश्चिमी देशों का विकल्‍प मौजूद है। चीन यह कह सकता है कि अमेरिका हमें दबाने की कोशिश कर रहा है लेकिन हमारे साथ अन्‍य शक्तिशाली शक्तियां हैं। वहीं सऊदी अरब भी कह सकता है कि हमारे पास विकल्‍प हैं और हम आप पर निर्भर नहीं हैं।</p>
<p>  </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:32:44 +0530</pubDate>
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