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                <title>Illegal Occupation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Illegal Occupation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अतिक्रमण का जाल और रेंगती आम आदमी की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186145/the-web-of-encroachment-and-the-creeping-life-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते अवैध निर्माण ने शहरों की व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उस नागरिक को भुगतना पड़ता है, जिसके पास न ताकत है, न प्रभाव और न ही व्यवस्था से लगातार संघर्ष करने का समय।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें छोटी, समस्याएं बड़ी</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का सबसे सीधा असर यातायात पर पड़ता है। जिस सड़क का निर्माण वाहनों और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए हुआ था, उसका एक बड़ा हिस्सा दुकानों, ठेलों, पार्किंग या निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ जाता है। परिणामस्वरूप सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम होती जाती है और यातायात का दबाव बढ़ता जाता है। कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लगना अब कई शहरों में असामान्य नहीं है। वाहन ईंधन जलाते रहते हैं, लोग समय गंवाते हैं और प्रदूषण बढ़ता रहता है। इस पूरी व्यवस्था की कीमत अंततः आम आदमी ही चुकाता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ गायब, पैदल यात्री परेशान</span></div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता देना है। लेकिन जब फुटपाथ पर दुकानें, वाहन, विज्ञापन बोर्ड और अस्थायी निर्माण कब्जा कर लेते हैं, तो पैदल यात्री सड़क पर चलने के लिए मजबूर हो जाता है। बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और दिव्यांग नागरिक ऐसी स्थिति में सबसे अधिक परेशान होते हैं। सड़क पर चलते पैदल यात्री और तेज रफ्तार वाहनों का टकराव दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाता है। सवाल यह है कि जिस नागरिक के लिए फुटपाथ बनाया गया, उसे आखिर उसी फुटपाथ से हटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़े?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जलभराव की समस्या को बढ़ाता अतिक्रमण</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला परिणाम जलभराव है। नालियों और जलनिकासी के रास्तों पर निर्माण होने से बारिश का पानी अपना प्राकृतिक रास्ता नहीं पा पाता। कई जगह नालियां ढक दी जाती हैं या उनका आकार इतना छोटा कर दिया जाता है कि पानी का प्रवाह बाधित होने लगता है। बारिश होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। घरों और दुकानों में पानी घुसता है, यातायात ठप होता है और नागरिकों को घंटों परेशानी उठानी पड़ती है। हर वर्ष जलभराव के बाद सफाई और नाला खुदाई की कवायद होती है, लेकिन यदि जलनिकासी के रास्तों पर कब्जे कायम रहें तो समस्या स्थायी रूप से कैसे समाप्त होगी?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण और भ्रष्टाचार का सवाल</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण केवल प्रशासनिक कमजोरी का परिणाम है या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत भी है—यह सवाल बार-बार उठता है। किसी सड़क या सार्वजनिक जमीन पर एक दिन में स्थायी कब्जा नहीं हो जाता। पहले अस्थायी कब्जा होता है, फिर वह धीरे-धीरे स्थायी रूप लेता है और अंततः नागरिक उसे सामान्य स्थिति मानने लगते हैं।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">यदि नियम स्पष्ट हैं और सरकारी जमीन की निगरानी होती है तो वर्षों तक अवैध निर्माण कैसे खड़े रहते हैं? यदि कार्रवाई होती है तो कुछ समय बाद वही स्थान फिर अतिक्रमण से कैसे भर जाते हैं?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">इन सवालों का जवाब केवल छोटे दुकानदार या ठेले वाले को दोषी ठहराकर नहीं दिया जा सकता। व्यवस्था को यह भी देखना होगा कि अतिक्रमण को पनपने का अवसर कौन देता है और कार्रवाई के बाद उसे दोबारा खड़ा होने से कौन रोकता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">रोजगार बनाम व्यवस्था—समस्या का कठिन पक्ष</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का दूसरा पहलू भी है। बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले लोग अपनी आजीविका के लिए सार्वजनिक स्थानों पर निर्भर हैं। अचानक सामान हटाने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। इसलिए समाधान केवल बुलडोजर या जबरन हटाने में नहीं है। प्रशासन को व्यवस्थित वेंडिंग जोन, वैकल्पिक बाजार और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था विकसित करनी होगी। गरीब की रोजी भी बचे और सार्वजनिक रास्ता भी—यह संतुलन ही वास्तविक प्रशासनिक सफलता होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">कानून सबके लिए समान होना चाहिए</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी आवश्यकता समानता की है। यदि गरीब की छोटी दुकान हटाई जाए लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति का बड़ा अवैध निर्माण वर्षों तक खड़ा रहे, तो नागरिकों का कानून और प्रशासन पर विश्वास कमजोर होता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">कानून का अर्थ तभी है जब वह बिना भेदभाव लागू हो। सड़क पर कब्जा करने वाला चाहे छोटा दुकानदार हो या बड़ा कारोबारी, सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण करने वाला चाहे कोई भी हो—नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">शहर केवल वाहनों के लिए नहीं हैं</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">शहरी नियोजन में अक्सर सड़क चौड़ी करने, फ्लाईओवर बनाने और यातायात बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, लेकिन पैदल चलने वाले नागरिक की जरूरतों को उतना महत्व नहीं मिलता। वास्तव में स्वस्थ शहर वह है जहां व्यक्ति सुरक्षित पैदल चल सके, सार्वजनिक परिवहन तक आसानी से पहुंच सके और बारिश के दिनों में जलभराव से न जूझे।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाना केवल सड़क खाली कराने का अभियान नहीं होना चाहिए। यह शहर को नागरिकों के लिए वापस हासिल करने की प्रक्रिया होनी चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">आम आदमी की जिंदगी कब तेज चलेगी?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">आज आम नागरिक का बड़ा हिस्सा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अनावश्यक समय यातायात, जाम, पार्किंग और जलभराव में गंवा देता है। जिस दूरी को कुछ मिनटों में पूरा होना चाहिए, वह घंटों में पूरी होती है। यही वह स्थिति है जिसे कहा जा सकता है—शहर बढ़ रहे हैं, लेकिन आम आदमी की जिंदगी रेंग रही है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक ईमानदारी और बेहतर शहरी नियोजन से ही संभव है। केवल अभियान चलाकर तस्वीर नहीं बदलेगी। अतिक्रमण हटाने के बाद उस स्थान का नियमित निरीक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड, स्पष्ट पार्किंग नीति, व्यवस्थित वेंडिंग जोन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें जनता की हैं, फुटपाथ जनता के हैं, नालियां जनता के लिए हैं और सार्वजनिक जमीन भी जनता की संपत्ति है। जब इन पर कब्जा होता है तो नुकसान केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जरूरत इस बात की है कि शहरों को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम को केवल दिखावटी कार्रवाई न बनाया जाए। प्रशासन को गरीब की आजीविका और नागरिकों के अधिकार—दोनों के बीच संतुलन कायम करना होगा। तभी शहरों की सड़कें खुलेंगी, जलभराव घटेगा, यातायात सुधरेगा और सबसे महत्वपूर्ण—आम आदमी की जिंदगी रेंगने के बजाय आगे बढ़ सकेगी।</span></div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाइवे पर चला बुलडोजर, मिनटों में जमींदोज हुए खोखे-टीनशेड</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध कब्जों के खिलाफ एनएचएआई ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बुलडोजर कार्रवाई कर अतिक्रमणकारियों की नींद उड़ा दी। बाइपास चौराहा ओवरब्रिज के नीचे और दोनों सर्विस रोड पर वर्षों से जमे खोखे, ठेले और टीनशेड पर जेसीबी गरजी तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। कार्रवाई से बचने के लिए कई लोगों ने आनन-फानन में अपना सामान समेटना शुरू कर दिया, जबकि शेष अवैध कब्जे जेसीबी से ध्वस्त कर दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एनएचएआई के प्रबंधक अंजनी कुमार के निर्देश पर नियंत्रण अधिकारी इंद्रेश यादव के नेतृत्व में अभियान चलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183030/bulldozer-ran-on-the-highway-and-kiosks-and-tin-sheds"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img_20260709_152422-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तिलहर, शाहजहांपुर।</strong> लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवैध कब्जों के खिलाफ एनएचएआई ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बुलडोजर कार्रवाई कर अतिक्रमणकारियों की नींद उड़ा दी। बाइपास चौराहा ओवरब्रिज के नीचे और दोनों सर्विस रोड पर वर्षों से जमे खोखे, ठेले और टीनशेड पर जेसीबी गरजी तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। कार्रवाई से बचने के लिए कई लोगों ने आनन-फानन में अपना सामान समेटना शुरू कर दिया, जबकि शेष अवैध कब्जे जेसीबी से ध्वस्त कर दिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एनएचएआई के प्रबंधक अंजनी कुमार के निर्देश पर नियंत्रण अधिकारी इंद्रेश यादव के नेतृत्व में अभियान चलाया गया। पुलिस बल की मौजूदगी में टीम ने एक-एक कर सड़क किनारे किए गए स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण हटाए। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह का विरोध सफल नहीं हो सका।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि राष्ट्रीय राजमार्ग और सर्विस रोड पर दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी कीमत पर सड़क की भूमि पर अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।लगातार दूसरे दिन चली बुलडोजर कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में दहशत का माहौल बना रहा। एनएचएआई अधिकारियों ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने तक अभियान बिना रुके जारी रहेगा और अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलता रहेगा।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183030/bulldozer-ran-on-the-highway-and-kiosks-and-tin-sheds</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 21:47:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नैनी सब्जी मंडी के सामने सड़क पर आम विक्रेताओं का कब्जा </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज:।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी सब्जी मंडी के ठीक सामने सड़क पर आम विक्रेताओं द्वारा अतिक्रमण कर बिक्री किए जाने से प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। सड़क के दोनों ओर अस्थायी रूप से दुकानें लगाने के कारण यातायात बाधित हो जाता है, जिससे राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार जाम की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि वाहन चालकों और विक्रेताओं के बीच कहासुनी होने लगती है और मामला मारपीट तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181717/mango-vendors-occupy-the-road-in-front-of-naini-vegetable"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260620-wa0147.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज:।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नैनी सब्जी मंडी के ठीक सामने सड़क पर आम विक्रेताओं द्वारा अतिक्रमण कर बिक्री किए जाने से प्रतिदिन भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। सड़क के दोनों ओर अस्थायी रूप से दुकानें लगाने के कारण यातायात बाधित हो जाता है, जिससे राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय दुकानदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार जाम की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि वाहन चालकों और विक्रेताओं के बीच कहासुनी होने लगती है और मामला मारपीट तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।हैरानी की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र नैनी कस्बा चौकी और नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने स्थित है, लेकिन अब तक अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था को सुचारु करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि सड़क पर अवैध रूप से दुकानें लगाए जाने से उनके व्यवसाय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सड़क से अतिक्रमण हटाकर नियमित निगरानी की जाए, ताकि जाम की समस्या से लोगों को राहत मिल सके और क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181717/mango-vendors-occupy-the-road-in-front-of-naini-vegetable</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:32:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी ब्लॉक-8 पार्क पर कार्रवाई नहीं, शासन पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181568/government-did-not-take-action-on-block-8-park-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002015129.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन स्पेस के रूप में दर्ज भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण कार्य होते रहे, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय प्रकरणों का निस्तारण कागजों तक सीमित रखते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में ब्लॉक-8 स्थित पार्क में हुए निर्माण कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि जिस भूमि को पार्क एवं खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा गया हो, वहां निर्माण और अतिक्रमण किस प्रकार होने दिया गया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्कों और खुले स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तथा किए गए अतिक्रमणों को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकाश वीर आर्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 29 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त कराए जाने के बावजूद अब तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने अथवा उसके मूल स्वरूप की बहाली के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत पार्क क्षेत्र में नई गतिविधियों और कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकरण का एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब केस्को को लिखित शिकायत और न्यायालयीय आदेशों की जानकारी दिए जाने के बावजूद पार्क में स्थित विवादित धार्मिक संरचना पर नया विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क की विवादित भूमि पर स्थित संरचनाओं को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने से अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है तथा भविष्य में ऐसे कब्जों को स्थायित्व प्रदान करने का आधार तैयार होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में पार्क में अवैध रूप से निर्मित कंक्रीट ढांचों एवं इंटरलॉकिंग को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः पार्क के रूप में विकसित करने, नए कब्जों एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने, विद्युत संयोजन प्रकरण की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। नगर विकास मंत्री कार्यालय द्वारा मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजे जाने के बाद अब क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों और शासन स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी पार्क को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल पाता, तो यह सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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