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                <title>Temple Governance - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Temple Governance RSS Feed</description>
                
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                <title>राम मंदिर में सीईओ, क्या रुकेगा भ्रष्टाचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और चढ़ावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्थाओं तथा प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में मंदिर के सुचारु संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (</span>CEO) <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे आधुनिक और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183613/will-ceo-stop-corruption-in-ram-temple"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas25.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और चढ़ावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्थाओं तथा प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में मंदिर के सुचारु संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (</span>CEO) <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे आधुनिक और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं</span>, </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर प्रशासन की बदलती जरूरत- राम मंदिर आज एक विशाल संस्थान का स्वरूप ले चुका है। यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आगमन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान का प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारियों का संचालन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता और भविष्य की योजनाएं जैसे अनेक कार्य हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन सबका संचालन केवल पारंपरिक व्यवस्था से करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में एक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता महसूस की गई। सीईओ का दायित्व होगा कि मंदिर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाए और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या केवल सीईओ भ्रष्टाचार रोक सकता है</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का सीधा उत्तर है—नहीं। किसी भी संस्था में भ्रष्टाचार केवल व्यक्ति बदलने से समाप्त नहीं होता। इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता होती है। यदि वित्तीय लेन-देन पारदर्शी न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑडिट नियमित न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट न हो और जवाबदेही तय न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो किसी भी पद पर बैठा अधिकारी भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता। सीईओ व्यवस्था को बेहतर बना सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई अन्य कदम भी जरूरी होंगे। पारदर्शिता सबसे बड़ा हथियार-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी भी धार्मिक संस्था में श्रद्धालुओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि— दान और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो। नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। खरीद और ठेकों की प्रक्रिया पारदर्शी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था हो। यदि ये व्यवस्थाएं लागू होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भ्रष्टाचार की संभावनाएं स्वतः कम होंगी। देश के अन्य मंदिरों से सीख-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के कई बड़े मंदिरों में पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था पहले से लागू है। वहां आईएएस अधिकारियों या अनुभवी प्रशासकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इससे व्यवस्था में सुधार हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जहां निगरानी कमजोर रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां विवाद भी सामने आए। इससे स्पष्ट होता है कि केवल प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति पर्याप्त नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी प्रणाली को पारदर्शी बनाना आवश्यक है। आधुनिक प्रबंधन और धार्मिक परंपरा का संतुलन राम मंदिर केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि धार्मिक आस्था का केंद्र है। इसलिए यह भी जरूरी है कि आधुनिक प्रबंधन लागू करते समय धार्मिक परंपराओं और मंदिर की गरिमा का पूरा सम्मान बना रहे। सीईओ का कार्य धार्मिक निर्णय लेना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होना चाहिए। धार्मिक विषयों का निर्णय मंदिर ट्रस्ट और संत समाज के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि- मंदिर में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यह विश्वास लेकर आता है कि उसका दान धर्म और समाज के हित में उपयोग होगा। यदि वित्तीय पारदर्शिता मजबूत होगी तो श्रद्धालुओं का विश्वास और बढ़ेगा। इसके विपरीत यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसका असर केवल मंदिर प्रशासन पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की भावनाओं पर भी पड़ सकता है। जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी- सीईओ की नियुक्ति तभी प्रभावी होगी जब उसके कार्यों की नियमित समीक्षा हो। ट्रस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियां और निर्धारित नियम मिलकर जवाबदेही सुनिश्चित करें। किसी भी बड़े संस्थान में "चेक एंड बैलेंस" की व्यवस्था ही भ्रष्टाचार रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति को आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे कार्यों में पेशेवर दक्षता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर समन्वय और पारदर्शिता आने की संभावना है। लेकिन यह मान लेना कि केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावहारिक नहीं होगा। भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब पारदर्शी वित्तीय प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित ऑडिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट जवाबदेही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रबंधन और स्वतंत्र निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी समान रूप से मजबूत हों। अंततः किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी ताकत श्रद्धालुओं का विश्वास होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उस विश्वास की रक्षा केवल एक पद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मजबूत और ईमानदार संस्थागत व्यवस्था ही कर सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 20:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चढ़ावा चोरी पर सतीश महाना का बयान</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका पैसा चोरी हुआ उन्होंने श्रद्धा से दान नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा पैसा सुरक्षित है इस बात का प्रमाण अयोध्या का भव्य राम मंदिर है। अयोध्या स्थित राम मंदिर दान चोरी पर  बोलते हुए यूपी के विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का यह वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर सतीश महाना के इस बयान की होड़ लगी हुई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह बयान कितना उचित है। मंदिर में चढ़ावा चोरी पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का बयान कितना सही</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183509/satish-mahanas-statement-on-theft-of-offerings"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas8.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका पैसा चोरी हुआ उन्होंने श्रद्धा से दान नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा पैसा सुरक्षित है इस बात का प्रमाण अयोध्या का भव्य राम मंदिर है। अयोध्या स्थित राम मंदिर दान चोरी पर  बोलते हुए यूपी के विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का यह वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर सतीश महाना के इस बयान की होड़ लगी हुई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह बयान कितना उचित है। मंदिर में चढ़ावा चोरी पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का बयान कितना सही</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष मंदिरों में अपनी श्रद्धा के अनुसार दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। यह धन मंदिरों के रखरखाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक अनुष्ठानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक कार्यों और जनकल्याण की योजनाओं में उपयोग किया जाता है। ऐसे में यदि मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की घटनाएँ सामने आती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी आघात होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह भी कहा कि मंदिरों में चढ़ावे की चोरी जैसी घटनाओं पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका संकेत इस ओर था कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चढ़ावा केवल धन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आस्था का प्रतीक- मंदिर में चढ़ाया गया दान श्रद्धालु की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक होता है। कोई व्यक्ति अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर दान करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई सेवा भावना से। ऐसे में यदि इस धन की चोरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। इसलिए चढ़ावे की सुरक्षा केवल संपत्ति की सुरक्षा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आस्था की रक्षा भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि उनके बयान का आशय यह है कि धार्मिक स्थलों में ईमानदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह एक उचित और व्यावहारिक विचार माना जा सकता है। मंदिरों में चोरी की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई मामलों में दानपात्र तोड़े गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कहीं मंदिरों के आभूषण और नकदी चोरी हुई। ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालाँकि किसी भी घटना की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश के अनेक बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल दान प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा गार्ड और नियमित लेखा परीक्षण जैसी व्यवस्थाएँ लागू हैं। लेकिन छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में अभी भी सुरक्षा संसाधनों की कमी देखी जाती है। ऐसे में मंदिर समितियों को चाहिए कि वे आधुनिक सुरक्षा उपाय अपनाएँ और दान के उपयोग का सार्वजनिक विवरण भी समय-समय पर जारी करें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर केवल पुजारियों या ट्रस्ट की जिम्मेदारी नहीं हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। यदि समाज सजग रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो चोरी जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। दान के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिलती रहे कि उनके द्वारा दिया गया चढ़ावा किस कार्य में खर्च हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मंदिरों के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। डिजिटल भुगतान और सार्वजनिक ऑडिट जैसी व्यवस्थाएँ इस दिशा में उपयोगी हो सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक बयान और सार्वजनिक विमर्श</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के बयानों का व्यापक प्रभाव होता है। इसलिए ऐसे विषयों पर दिए गए वक्तव्यों का उद्देश्य समाधान और जागरूकता होना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि विवाद को बढ़ावा देना। यदि किसी बयान से सुरक्षा व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और जवाबदेही पर सकारात्मक चर्चा शुरू होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे रचनात्मक माना जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों में चढ़ावे की चोरी एक गंभीर विषय है क्योंकि यह श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान का मूल्यांकन उसके वास्तविक संदर्भ और आशय के आधार पर किया जाना चाहिए। यदि उनका उद्देश्य मंदिरों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और समाज की जिम्मेदारी पर ध्यान आकर्षित करना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह एक सार्थक संदेश माना जा सकता है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी आवश्यक है कि चोरी की प्रत्येक घटना की निष्पक्ष जांच हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाए जाएँ। तभी मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 21:06:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>&quot;CCTV बंद करके खोले जाते हैं गुल्लक...&quot;; फलाहारी महाराज ने CM योगी को खून से लिखा खत, मंदिर प्रबंधन कमेटी पर लगाये गंभीर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181542/gullaks-are-opened-after-closing-cctv-falahari-maharaj-wrote-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas9.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दाने के रुपये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चढ़ावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आभूषणों को सीसीटीवी कैमरे बंद करके प्रबंधन कमेटी वाले लोग बंदरबांट करके करोड़ों की गाड़ियों और कोठियों में प्रस्थान कर गये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जो प्रबंधन कमेटी वाले पहले स्कूटर पर आते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज करोड़ों की गाड़ियों में चलते हैं. करोड़ों के बंगला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोठी और फाॅर्म हाउस हैं. उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तराखंड में भी इन लोगों ने जमीनें खरीदी हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की जांच होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह प्रयागराज हाईकोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समय गुल्लक खुलता है वहां के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है. यह बहुत ही दुखद है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस प्रबंधन को अपने हाथ में ले लें.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जन्मभूमि सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने इस प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया और कहा मंदिर में जो चढ़ावा आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लिखित में लेखा-जोखा दर्ज किया जाता है. इन लोगों की बातें निराधार हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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