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                <title>Police Misconduct - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Police Misconduct RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पिकअप चोरी की एफआईआर के लिए मांगे पांच हजार रुपये, थाना प्रभारी और हेड कांस्टेबल निलंबित।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पिकअप वाहन चोरी होने के बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर काट रहे पीड़ित से कथित तौर पर पांच हजार रुपये लेने के मामले में प्रयागराज पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मांडा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा और हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, मांडा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति की पिकअप गाड़ी चोरी हो गई थी। पीड़ित चोरी की घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लगातार थाने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185168/police-station-in-charge-and-head-constable-suspended-demanding-rs-5000"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/khdlffg.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिकअप वाहन चोरी होने के बाद मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर काट रहे पीड़ित से कथित तौर पर पांच हजार रुपये लेने के मामले में प्रयागराज पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मांडा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा और हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार को निलंबित कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, मांडा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति की पिकअप गाड़ी चोरी हो गई थी। पीड़ित चोरी की घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लगातार थाने के चक्कर काट रहा था। आरोप है कि मुकदमा दर्ज करने के नाम पर उससे पांच हजार रुपये लिए गए। इसके बावजूद पीड़ित को कार्रवाई के लिए परेशान होना पड़ा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले से परेशान पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने का निर्णय लिया। उसने पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया से मुलाकात कर पूरे मामले की लिखित शिकायत की और आरोप लगाया कि पिकअप चोरी होने के बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए उससे रुपये लिए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने लिया संज्ञान</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित की शिकायत को पुलिस आयुक्त ने गंभीरता से लिया। मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मांडा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार वर्मा तथा हेड कांस्टेबल उज्जवल कुमार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया गया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/185168/police-station-in-charge-and-head-constable-suspended-demanding-rs-5000</link>
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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 20:28:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन विवाद में पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम कुसौरा में जमीन कब्जे के विवाद के बीच पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़िता सबा, पुत्री स्वर्गीय मोहम्मद कासिम, निवासी कुसौरा ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, 5 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे गांव निवासी नागेंद्र पुत्र रामजतन कथित रूप से उस जमीन पर दीवार बनाकर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जहां पीड़िता के अनुसार उसके पूर्वजों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182881/police-accused-of-assault-and-indecency-in-land-dispute"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260707-wa0070.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के कलवारी थाना क्षेत्र के ग्राम कुसौरा में जमीन कब्जे के विवाद के बीच पुलिस पर मारपीट और अभद्रता का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़िता सबा, पुत्री स्वर्गीय मोहम्मद कासिम, निवासी कुसौरा ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, 5 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे गांव निवासी नागेंद्र पुत्र रामजतन कथित रूप से उस जमीन पर दीवार बनाकर कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे, जहां पीड़िता के अनुसार उसके पूर्वजों की आरा मशीन संचालित होती थी। सूचना मिलने पर सबा, उसकी मां कुलसुम बानो और भाई सुफियान मौके पर पहुंचे तथा निर्माण कार्य रोकने का अनुरोध किया। आरोप है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़िता का कहना है कि इसके बाद परिवार ने महिला हेल्पलाइन पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। आरोप है कि नागेंद्र के बुलाने पर पहुंचे दरोगा एस.एन. सिंह ने बिना मामले की जांच किए ही सबा और उसके परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया।सबा का आरोप है कि दरोगा ने उसका कॉलर और गला पकड़कर धक्का दिया तथा जबरन थाने ले गए। परिवार का कहना है कि उन्हें शाम तक हवालात में रखा गया और बाद में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की निवारक धाराओं 107/151 के तहत चालान कर एसडीएम न्यायालय भेज दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन कब्जे के आरोपों की भी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित दरोगा के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।हालांकि, इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182881/police-accused-of-assault-and-indecency-in-land-dispute</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:59:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: ।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने से पहले सरकार की मंजूरी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले 24 वर्षीय पंकज वैष्णव को 19 दिसंबर 2015 को स्कूटर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए इंदौर के एमआईजी थाने लाया गया। उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद </span>CrPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 176 के तहत स्वतंत्र जांच कराई गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह मामला आपराधिक मानव वध का प्रतीत होता है।इसके बाद दो आरक्षकों और एक थाना प्रभारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध निरुद्ध करने और झूठे साक्ष्य देने सहित विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दायर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 197 के संरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आरोपित कृत्य और सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के बीच स्पष्ट और उचित संबंध हो। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पुलिसकर्मी किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और बल प्रयोग करते हुए अपनी सीमा से आगे बढ़ गए हों। यहां आरोपित बल प्रयोग उस समय किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मृतक पुलिस हिरासत में था और थाने के नियंत्रण में था। ऐसी स्थिति में बल प्रयोग या शारीरिक हमला करने का कोई औचित्य नहीं था।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हिंसक भीड़ को तितर-बितर करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कहा गया कि हिरासत में हिंसा और मौत सभ्य समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से हैं तथा यह व्यक्ति के मूल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आरक्षकों की पुनरीक्षण याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा जैसे मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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