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                <title>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS Feed</description>
                
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                <title>केरल’ से ‘केरलम’: पहचान की पुनर्स्थापना या राजनीतिक रणनीति?</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है। यह फैसला उस प्रस्ताव की अगली कड़ी है जिसे राज्य विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी थी। अब प्रश्न यह है कि इस नाम परिवर्तन से राज्य को वास्तविक लाभ क्या होंगे, संभावित हानियां क्या हो सकती हैं, इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे भारतीय जनता पार्टी को कोई राजनीतिक फायदा मिल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे पहले लाभ की</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171308/restoration-of-kerala-to-keralaam-identity-or-political-strategy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/centre-likely-to-approve-renaming-kerala-to-keralam-v0-zf_diebbeaieva0oapqdd83jbbtdvcjlkkoaljlmzou.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक और संवैधानिक बहस का विषय बन गया है। यह फैसला उस प्रस्ताव की अगली कड़ी है जिसे राज्य विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी थी। अब प्रश्न यह है कि इस नाम परिवर्तन से राज्य को वास्तविक लाभ क्या होंगे, संभावित हानियां क्या हो सकती हैं, इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ेगा और क्या इससे भारतीय जनता पार्टी को कोई राजनीतिक फायदा मिल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे पहले लाभ की बात करें तो समर्थकों का तर्क है कि ‘केरलम’ नाम राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के अधिक अनुरूप है। मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है, इसलिए यह परिवर्तन स्थानीय अस्मिता और आत्मसम्मान को मजबूती देता है। भारत में पहले भी कई राज्यों ने अपनी ऐतिहासिक या भाषाई पहचान के अनुरूप नाम बदले हैं—जैसे ओडिशा (पूर्व नाम उड़ीसा) और उत्तराखंड (पूर्व नाम उत्तरांचल)। इन उदाहरणों से यह तर्क दिया जाता है कि नाम परिवर्तन कोई असामान्य कदम नहीं, बल्कि समय के साथ पहचान के परिष्कार की प्रक्रिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरा संभावित लाभ सांस्कृतिक ब्रांडिंग का है। ‘केरलम’ नाम पर्यटन, आयुर्वेद, बैकवाटर्स और पारंपरिक कला रूपों की वैश्विक पहचान को स्थानीय भाषा से जोड़ सकता है। जब कोई राज्य अपनी मूल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को आधिकारिक रूप देता है तो वह अपने नागरिकों में गौरव की भावना उत्पन्न करता है। इससे प्रवासी समुदाय, विशेषकर खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों मलयाली लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है। यह मनोवैज्ञानिक लाभ सीधे आर्थिक लाभ में बदले या न बदले, लेकिन सामाजिक आत्मविश्वास को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इसके साथ कुछ व्यावहारिक चुनौतियां और संभावित हानियां भी जुड़ी हैं। नाम बदलने की प्रक्रिया में प्रशासनिक दस्तावेजों, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, सरकारी वेबसाइटों, कानूनी अभिलेखों और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समझौतों में संशोधन की आवश्यकता होगी। यह प्रक्रिया समय और संसाधन दोनों लेती है। आलोचकों का कहना है कि जब राज्य बेरोजगारी, बाढ़ प्रबंधन, कर्ज बोझ और बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियों से जूझ रहा हो, तब नाम परिवर्तन प्राथमिकता नहीं होना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ सीमित हैं, जबकि प्रशासनिक लागत वास्तविक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनावी असर के संदर्भ में यह निर्णय दिलचस्प है। केरल में लंबे समय से वामपंथी दलों और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का वर्चस्व रहा है। भाजपा यहां अब तक सीमित प्रभाव ही बना पाई है। ऐसे में यदि नाम परिवर्तन का निर्णय केंद्र सरकार की मंजूरी से आगे बढ़ता है, तो भाजपा इसे “संस्कृति के सम्मान” और “संविधान सम्मत प्रक्रिया” के रूप में प्रस्तुत कर सकती है। यह संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि केंद्र क्षेत्रीय पहचान के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके साथ है। इससे भाजपा को यह नैरेटिव गढ़ने का अवसर मिल सकता है कि वह केवल हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की आकांक्षाओं को भी समझती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि केरल की राजनीति अत्यंत जागरूक और वैचारिक रूप से परिपक्व मानी जाती है। यहां मतदाता केवल प्रतीकात्मक मुद्दों पर वोट नहीं देते, बल्कि सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए केवल नाम परिवर्तन से चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव आ जाए, यह मान लेना जल्दबाजी होगी। हां, यह भाजपा के लिए एक संवाद का द्वार खोल सकता है, जिससे वह राज्य की सांस्कृतिक भावनाओं के प्रति संवेदनशील दिखे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा के संभावित फायदे पर यदि विस्तार से विचार करें तो यह निर्णय उसे दक्षिण भारत में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का अवसर दे सकता है। पार्टी यह तर्क रख सकती है कि उसने राज्य विधानसभा की इच्छा का सम्मान किया और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कदम उठाया। इससे वह उन मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है जो क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन चाहते हैं। साथ ही, यह विपक्ष के उस आरोप को भी कमजोर कर सकता है कि केंद्र सरकार राज्यों की स्वायत्तता की अनदेखी करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, विपक्ष इसे “प्रतीकात्मक राजनीति” बताकर जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा सकता है। यदि राज्य में आर्थिक या सामाजिक समस्याएं बनी रहती हैं, तो नाम परिवर्तन का मुद्दा जल्दी ही पृष्ठभूमि में चला जाएगा। इसलिए चुनावी लाभ तभी संभव है जब इसे व्यापक विकास और सुशासन के एजेंडे के साथ जोड़ा जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय स्तर का है। यदि संसद में यह विधेयक पारित होता है, तो यह संदेश जाएगा कि भारत की संघीय संरचना में राज्यों की सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देने की परंपरा जारी है। इससे अन्य राज्यों में भी समान मांगें तेज हो सकती हैं, जैसा कि पश्चिम बंगाल द्वारा ‘बांग्ला’ नाम के प्रस्ताव के मामले में देखा गया था। हालांकि हर प्रस्ताव का मूल्यांकन अलग राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ में होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि ‘केरल’ से ‘केरलम’ का नाम परिवर्तन भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव सीमित और मिश्रित रहेंगे। चुनावी राजनीति में इसका असर परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।यदि इसे क्षेत्रीय सम्मान और विकास के व्यापक विमर्श से जोड़ा गया तो भाजपा को सीमित लेकिन प्रतीकात्मक लाभ मिल सकता है; यदि यह केवल नाम तक सीमित रहा तो इसका प्रभाव भी प्रतीकात्मक ही रहेगा। लोकतंत्र में नाम केवल पहचान का माध्यम है, असली कसौटी नीतियों और उनके परिणामों से तय होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 18:27:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>38 देशों के साथ मजबूती की स्थिति में हुए FTA, PM मोदी बोले – बढ़ी आर्थिक ताकत से मजबूत हुआ भारत का पक्ष</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने कहा है कि भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTA) किसी दबाव में नहीं, बल्कि मजबूत और आत्मविश्वासपूर्ण स्थिति में किए हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक क्षमता, उत्पादन शक्ति और वैश्विक विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर व्यापार वार्ताओं में देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार एजेंसी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Press Trust of India</span></span> (PTI) को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी आर्थिक साझेदार के रूप</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169881/fta-pm-modi-in-a-position-of-strength-with-38"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images-(1)26.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने कहा है कि भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements – FTA) किसी दबाव में नहीं, बल्कि मजबूत और आत्मविश्वासपूर्ण स्थिति में किए हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक क्षमता, उत्पादन शक्ति और वैश्विक विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर व्यापार वार्ताओं में देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार एजेंसी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Press Trust of India</span></span> (PTI) को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>मजबूत आर्थिक आधार बना भारत की ताकत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के कारण भारत में विनिर्माण को नई गति मिली है। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि भारत का सेवा क्षेत्र—जिसमें आईटी, फाइनेंस, हेल्थकेयर और प्रोफेशनल सेवाएं शामिल हैं—दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। इसी तरह MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के अनुसार, इन तीनों क्षेत्रों की मजबूती ने भारत को व्यापार वार्ताओं में बेहतर शर्तें तय करने का आत्मविश्वास दिया।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>व्यापार समझौतों से क्या होगा लाभ?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का उद्देश्य केवल आयात-निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच दिलाना है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>इन समझौतों से:</strong></p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) में कमी आती है।</p>
</li>
<li>
<p>निर्यातकों को नए बाजार मिलते हैं।</p>
</li>
<li>
<p>विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलता है।</p>
</li>
<li>
<p>रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।</p>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत ऐसे समझौते कर रहा है जिनमें घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक स्थिरता और नीति स्पष्टता से बढ़ा भरोसा</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि देश में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की स्पष्ट दिशा (पॉलिटिकल प्रेडिक्टेबिलिटी) ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब सरकार स्थिर हो और नीतियां स्पष्ट हों, तो निवेशकों को दीर्घकालिक योजना बनाने में सुविधा होती है। यही कारण है कि भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में वृद्धि दर्ज की गई है और वैश्विक कंपनियां भारत को निवेश के लिए एक सुरक्षित और संभावनाओं से भरा गंतव्य मान रही हैं।</p>
<hr />
<h6 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक मंच पर मजबूत होती भारत की साख</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत की आवाज वैश्विक मंचों पर पहले से अधिक प्रभावशाली हो गई है। भारत न केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक विकास में भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनके अनुसार, 38 देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब व्यापार वार्ताओं में शर्तें तय करने की स्थिति में है, न कि केवल उन्हें स्वीकार करने की।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 20:09:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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            <item>
                <title>विकास की धड़कन बना असम ब्रह्मपुत्र पर सेतु और अंडरवाटर टनल से बदलती क्षेत्रीय तस्वीर</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;">असम की धरती पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी की जनसभा में भारत माता की जय का उद्घोष किया, तो वह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि उत्तर–पूर्व के विकास को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश भी था। उनके संबोधन में संगठन की शक्ति, कार्यकर्ताओं के समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की झलक दिखाई दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2014 के बाद उत्तर–पूर्व को प्राथमिकता दी गई है और यह क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। असम, जो लंबे समय तक भौगोलिक दूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169805/assam-becomes-the-heartbeat-of-development-regional-picture-changing-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/p5809hjc_underwater-tunnel_625x300_14_february_26.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">असम की धरती पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी की जनसभा में भारत माता की जय का उद्घोष किया, तो वह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि उत्तर–पूर्व के विकास को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश भी था। उनके संबोधन में संगठन की शक्ति, कार्यकर्ताओं के समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की झलक दिखाई दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2014 के बाद उत्तर–पूर्व को प्राथमिकता दी गई है और यह क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। असम, जो लंबे समय तक भौगोलिक दूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पिछड़ा माना जाता था, आज बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए नए युग में प्रवेश कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने 6-लेन के आधुनिक पुल कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन किया। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी को जोड़ता है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला एक्स्ट्राडोज्ड पुल है, जो इंजीनियरिंग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बन जाने से दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर मात्र सात मिनट रह जाएगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। ब्रह्मपुत्र, जो असम की जीवनरेखा है, अब विकास का सेतु बन चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्षों में उत्तर–पूर्व के 125 से अधिक महान व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र की प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि को राष्ट्रीय मंच पर उचित पहचान मिल रही है। लंबे समय तक उपेक्षित रहे इस भूभाग को अब देश के विकास मानचित्र में प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकास की इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर रेल एवं सड़क टनल को मंजूरी दी है। यह परियोजना गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच बनाई जाएगी। लगभग 15.8 किलोमीटर लंबी यह टनल तकनीकी दृष्टि से अत्यंत जटिल और महत्वाकांक्षी है। पूरे प्रोजेक्ट, जिसमें अप्रोच रोड और रेलवे ट्रैक भी शामिल हैं, की लंबाई 33.7 किलोमीटर होगी और इस पर लगभग 18,600 करोड़ रुपये की लागत आएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस टनल के बन जाने से वर्तमान में 240 किलोमीटर की दूरी घटकर लगभग 34 किलोमीटर रह जाएगी। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि क्षेत्रीय संपर्क भी सुदृढ़ होगा। यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपात स्थिति में सेना और आवश्यक संसाधनों की तेजी से आवाजाही संभव हो सकेगी। एक ट्यूब में सिंगल रेल ट्रैक की सुविधा होगी और ट्रेनें बिजली से संचालित होंगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे इस प्रकार डिजाइन किया जाएगा कि ट्रेन के गुजरने के दौरान सड़क यातायात नियंत्रित रहेगा। इसमें बैलिस्टिक ट्रैक जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो इसे अत्याधुनिक संरचना बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन परियोजनाओं का महत्व केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है। उत्तर–पूर्व भारत लंबे समय से भौगोलिक अलगाव और सीमित बुनियादी ढांचे के कारण आर्थिक रूप से पीछे रहा है। जब मजबूत पुल, आधुनिक सड़कें और सुरक्षित रेल नेटवर्क तैयार होते हैं, तो वे केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ते, बल्कि संभावनाओं को जोड़ते हैं। इससे उद्योग, कृषि, पर्यटन और छोटे व्यवसायों को नई ऊर्जा मिलती है। असम, जो प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध है, अब बेहतर संपर्क के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में संगठन की शक्ति और कार्यकर्ताओं के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी जहां भी पहुंची है, वह कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रजीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति होती है। यह संदेश केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर–पूर्व के विकास की यह नई कहानी केवल सरकारी योजनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि विश्वास, संकल्प और क्रियान्वयन का उदाहरण है। असम में बन रहे ये बड़े प्रोजेक्ट इस बात के संकेत हैं कि अब यह क्षेत्र देश के विकास की परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में है। पुल और टनल जैसी संरचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;">गुवाहाटी की सभा में गूंजा “भारत माता की जय” का उद्घोष केवल एक नारा नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक है जो विकास, एकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश को आगे बढ़ा रही है। असम और पूरा उत्तर-पूर्व अब उस परिवर्तन का साक्षी बन रहा है, जो बुनियादी ढांचे से लेकर राष्ट्रीय पहचान तक हर स्तर पर दिखाई दे रहा है। यह समय है जब ब्रह्मपुत्र की धारा के साथ विकास की धारा भी समानांतर बह रही है, और उत्तर-पूर्व भारत के उज्ज्वल भविष्य की नई इबारत लिखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:56:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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            <item>
                <title>कब्र के नारे, मोदी के मारे: विरोधियों की छुट्टी</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right">  <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in">  </span>5 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सदन में अचानक एक गहरा सन्नाटा छा गया। शोर-शराबे</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीच</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाषण</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तीखा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमला</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किया। यह भाषण केवल जवाब नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह इतिहास की आँख में आँख डालने जैसा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छुपी नफरत का बेनकाब सामना। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के मोहक शब्दों के पीछे छुपा जहर और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी तेरी कब्र खुदेगी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कड़वी चेतावनी सीधे लोकतंत्र पर वार कर रही थी। मोदी ने मुखौटे को</span></p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168393/grave-slogans-leave-modis-opponents-dead"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/pm-modi-speech-2-1770292368.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"> <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span>5 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को राज्यसभा में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सदन में अचानक एक गहरा सन्नाटा छा गया। शोर-शराबे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बीच</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाषण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तीखा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किया। यह भाषण केवल जवाब नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह इतिहास की आँख में आँख डालने जैसा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छुपी नफरत का बेनकाब सामना। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के मोहक शब्दों के पीछे छुपा जहर और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी तेरी कब्र खुदेगी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कड़वी चेतावनी सीधे लोकतंत्र पर वार कर रही थी। मोदी ने मुखौटे को चीरते हुए स्पष्ट संदेश दिया—शब्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्म और नीयत कभी छिप नहीं सकते। विपक्ष की ताकत और आक्रोश उस क्षण थम गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सदन ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीति में नारे अक्सर हथियार बन जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर कभी-कभी वे जहरीले बनकर लोकतंत्र की धमनियों में उतरते हैं। राहुल गांधी ने लगातार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का नारा दोहराया। मोदी ने सीधे सवाल उठाया—यह कैसी मोहब्बत है जो मौत और खतरों का संदेश देती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह व्यक्तिगत विरोध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह संवैधानिक और राष्ट्रीय अपमान है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले पच्चीस वर्षों में कितनी गालियाँ झेली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी विकास की गति रुकी नहीं। </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों का विश्वास ही सरकार की असली शक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी परिवार का रिमोट। यह तीखा संदेश सदन में गूंज गया और विपक्ष की आक्रोशित मुद्रा पर सन्नाटा छा गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस के लिए मानना कठिन था कि एक चायवाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री बन गया। मोदी ने कहा—वे मान बैठे थे कि प्रधानमंत्री पद उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। जब जनता ने वह अधिकार छीन लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नफरत की आग भड़क उठी। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी तेरी कब्र खुदेगी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल नारा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उनके गहरे मन का सपना था। लोकतंत्र की बात करने वाले भी कभी-कभी मौत के नारे लगाते हैं। पीएम ने चेतावनी दी—इतिहास की कब्र उन्हीं के इंतजार में है। जनता सब देख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ रही है। सदन में वॉकआउट हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सच गूंजता रहा और हवा में लटक गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ गिनाईं—आर्टिकल </span>370 <span lang="hi" xml:lang="hi">हटाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वोत्तर से आतंकवाद मिटाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवाद पर प्रहार किया। यही वजह थी कि नफरत और कब्र के नारे उठे। उन्होंने स्पष्ट कहा—कितने भी नारे लगाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेरी कब्र नहीं खोदी जा सकती। माँ-बहनों का आशीर्वाद मेरी सबसे मज़बूत ढाल है। गरीबों को घर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौचालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और जल जीवन मिशन मिला। </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ लोग गरीबी की जकड़न से मुक्त हुए। कांग्रेस ने परिवार के लिए देश को दांव पर लगाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं जनता के लिए जीवन समर्पित कर रहा हूँ। फर्क इतना साफ था कि बहस का कोई स्थान नहीं बचा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री ने भाषण में देश की आर्थिक उड़ान को भी बखूबी रेखांकित किया। स्वतंत्रता के समय छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से फिसलकर ग्यारहवें स्थान पर पहुंची भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज फिर से तीसरे नंबर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रेजाइल फाइव</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">विकसित भारत</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की राह पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च विकास दर और कम मुद्रास्फीति के साथ दुनिया भारत की ओर आकर्षित हो रही है। यूरोपीय संघ (</span>27 <span lang="hi" xml:lang="hi">देशों के साथ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मदर ऑफ ऑल डील्स</span>') <span lang="hi" xml:lang="hi">और अमेरिका जैसे बड़े समझौते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य-तैयार व्यापार सौदे—ये सब वैश्विक विश्वास की निशानी हैं। मोदी ने कहा—ये उपलब्धियां विपक्ष की नजर में नहीं आतीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वे नफरत के नारे लगाते हैं। लेकिन </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों का आशीर्वाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबों-युवाओं की ताकत ही असली ढाल है। कांग्रेस ने देश को लूटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने जनता को सशक्त बनाया। यह फर्क इतना स्पष्ट है कि कोई बहस बाकी नहीं बचती। सदन में उनकी बातें विकास की नई गूंज बन गईं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमला केवल कांग्रेस पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे विपक्ष पर था। मोदी ने कहा—</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में आग लगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए कब्र के नारे उठते हैं। वे हार से जलते हैं। चुनाव हारने पर नफरत दोगुनी हो जाती है। जनता समझदार है</span>, 140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ लोग मेरे साथ खड़े हैं। उनकी सरकार रिमोट से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन-विश्वास से चलती है। मोदी ने मुस्कान के साथ कहा—रोज़ गालियाँ सुनता हूँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है। यह केवल हास्य नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अटूट आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का परिचायक था। सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। विपक्ष चुप था</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बहस का कोई अवसर नहीं बचा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पीएम ने स्पष्ट संदेश दिया—नफरत से कुछ नहीं बनता। अगर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कब्र खोदने वाली बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह दुकान बंद होनी चाहिए। देश विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकता और प्रगति चाहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि नफरत। जो लोग </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी तेरी कब्र खुदेगी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे खुद समय की कब्र में समा जाएंगे। जनता ने अपना निर्णय सुना दिया है। यह भाषण विपक्ष पर तीखा हमला और सरकार की उपलब्धियों का बयान था। मोदी ने साबित कर दिया—शब्द भी क्रांति ला सकते हैं। सदन खाली हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनकी गूँज हवा में गूँजती रही और लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर शब्द में तीव्रता थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वाक्य में </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दृढ़</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबद्धता। यह केवल राजनीतिक हमला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय चेतना को जगाने का </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साहसिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयास था। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष के नारे और झूठ कभी छिप नहीं सकते। मोदी ने साबित किया कि जनता के विश्वास और कामकाज का सामना किसी नफरत से नहीं किया जा सकता।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भाषण इतिहास में दर्ज होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें केवल जवाब नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र के भविष्य का संदेश था। विकास और एकता की राह में नफरत की आग को बुझाने का प्रतीक बन गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सदन से बाहर लोग सोच में डूबे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर मन में सवाल उठ रहा था—क्या लोकतंत्र की सुरक्षा इतनी मजबूत है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने साबित किया कि लोकतंत्र केवल संविधान में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जनता के विश्वास और नेताओं की जिम्मेदारी में जीवित रहता है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोहब्बत की दुकान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी तेरी कब्र खुदेगी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे नारे इतिहास में चेतावनी बनकर हमेशा गूंजेंगे। यह भाषण वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश बन गया—नफरत से कुछ नहीं बनता। देश विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एकता और प्रगति चाहता है। जो लोग प्रधानमंत्री की कब्र की कामना करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे समय की कब्र में समा जाएँगे। जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। मोदी ने साबित किया कि शब्द भी परिवर्तन ला सकते हैं। सदन खाली हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उनकी गूँज लोकतंत्र की चेतना में अमिट छाप छोड़ गई।</span></p>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 17:19:06 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में जल जीवन मिशन योजना फेल</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास आसमान पर है. एक के बाद एक कई बड़ी परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं और कई पूरी होने वाली हैं. पीएम मोदी ने बनारस से परियोजनाओं की जो सौगात दी. 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी ने सुदूर गांव में रहने वाले लोगों को शुद्ध जल उनके घरों में नल के जरिए पहुंचने का जो संकल्प लेकर जल शक्ति मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना की शुरुआत की.</div>
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<div dir="ltr">
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">बनारस में इस योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में 2019 में शुरू</p></div></div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168347/jal-jeevan-mission-scheme-failed-in-pm-modis-parliamentary-constituency"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/modi-jal-mission-1200-2023-12-a75ffb86938cecc3da0cb43f821f400f.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास आसमान पर है. एक के बाद एक कई बड़ी परियोजनाएं पूर्ण हुई हैं और कई पूरी होने वाली हैं. पीएम मोदी ने बनारस से परियोजनाओं की जो सौगात दी. 15 अगस्त 2019 को पीएम मोदी ने सुदूर गांव में रहने वाले लोगों को शुद्ध जल उनके घरों में नल के जरिए पहुंचने का जो संकल्प लेकर जल शक्ति मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना की शुरुआत की.</div>
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<div dir="ltr">
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">बनारस में इस योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में 2019 में शुरू हुई इस परियोजना की हकीकत भले ही कागजों में दुरुस्त हो लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में असलियत सामने आ गयी.</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने कागजों में तो हर घर तक नल पहुंचने का दावा कर लिया. ओवरहेड टैंक बन गए, घर-घर पाइपलाइन बिछ गई, लेकिन इन सारे दावों की हकीकत ग्राउंड रिपोर्ट में जब सामने आई कि सब कुछ क्लियर हो चुका है.</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले हमने वाराणसी के टिकरी इलाके से कुछ दूरी पर बसे नैपुराकला ग्राम सभा में पहुंचकर यहां की हकीकत जानी चाहिए. यहां की आबादी लगभग 4500 के आसपास है और अलग-अलग बस्तियां में छोटे-छोटे हिस्सों में लोग रहते हैं. इन बस्तियों में एक बस्ती राजभर जाति की है, जहां बड़ी संख्या में लोग आज भी पानी के इंतजार में है सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से इस इलाके में विकास कार्यों के लिए काम शुरू हुआ.</p>
<p style="text-align:justify;">हर घर नल से शुद्ध जल पहुंचने के लिए लगभग 9 महीने पहले पाइपलाइन दौड़ाई गई और घरों के बाहर नीले रंग की पाइप लगाकर छोड़ दिया गया, लेकिन आज भी इस पाइप में पानी आने का इंतजार है. हालत यह है कि गांव में लगे लगभग 40 हैंड पंप में से चार या पांच ही काम कर रहे हैं, बाकी सब खराब पड़े उनकी रि बोरिंग के लिए भी फंडिंग हुई, लेकिन हुआ कुछ नहीं.</p>
<p style="text-align:justify;">लंबी-लंबी पाइप लोगों के घरों तक जाती दिखाई दी. हम सोचे यह पाइप सरकारी है, लेकिन पता चला लगभग 8 साल पहले लोगों ने अपने खर्चे पर डेढ़ से 2000 का चंदा इकट्ठा करके बोरिंग करवाई और इस बोरिंग के जरिए घर-घर तक लोग सुबह-शाम पानी लेते हैं, लेकिन अब यह बोरिंग भी खराब हो रही है और पानी में बालू आ रही है. जिससे यह पीने योग्य भी नहीं है. यहां थोड़ा अजीब जरूर लगा, क्योंकि दूर-दूर तक सिर्फ पाइप ही पाइप थी और यही पाइप लोगों के सबसे बड़ी जरूरत पानी का सहारा है.।</p>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 22:44:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>विकास के शिलान्यास से  मोदी का चुनावी शंखनाद : सिंगूर से बदली बंगाल की सियासी हवा</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के लिए बीते 24 घंटे केवल सरकारी कार्यक्रमों या परियोजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य की राजनीति, विकास की दिशा और आगामी चुनावी समीकरणों को एक नई गति दे दी। हुगली जिले के बालागढ़ और सिंगूर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया, उसने स्पष्ट संकेत दे दिया कि बंगाल अब केवल राजनीतिक संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ विजन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। इन कार्यक्रमों ने न सिर्फ बुनियादी ढांचे से जुड़ी उम्मीदों को मजबूत किया, बल्कि चुनावी</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166658/with-the-foundation-stone-of-development-modis-election-campaign-changed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/विकास-के-शिलान्यास-से--मोदी-का-चुनावी-शंखनाद.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के लिए बीते 24 घंटे केवल सरकारी कार्यक्रमों या परियोजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य की राजनीति, विकास की दिशा और आगामी चुनावी समीकरणों को एक नई गति दे दी। हुगली जिले के बालागढ़ और सिंगूर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया, उसने स्पष्ट संकेत दे दिया कि बंगाल अब केवल राजनीतिक संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ विजन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। इन कार्यक्रमों ने न सिर्फ बुनियादी ढांचे से जुड़ी उम्मीदों को मजबूत किया, बल्कि चुनावी माहौल में भी नई हलचल पैदा कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी का सिंगूर और बालागढ़ आना अपने आप में प्रतीकात्मक रहा। सिंगूर वही स्थान है, जो कभी औद्योगीकरण बनाम कृषि भूमि विवाद के कारण राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा था। आज उसी सिंगूर से विकास कार्यों की शुरुआत का संदेश देना, केंद्र सरकार की यह मंशा दर्शाता है कि अतीत के टकरावों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ा जाए। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्वी भारत के विकास को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि जब तक पूर्वी राज्यों की प्रगति तेज नहीं होगी, तब तक देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा। बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों को केंद्र में रखकर बनाई जा रही नीतियां इसी सोच का हिस्सा हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बालागढ़ में एक्सटेंडेड पोर्ट गेट सिस्टम का शिलान्यास इस दिशा में एक ठोस कदम है। इस परियोजना में इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और ग्रेड ओवर ब्रिज जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की लॉजिस्टिक व्यवस्था को नई मजबूती देंगी। गंगा नदी पर विकसित जलमार्ग के साथ यह परियोजना मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगी। इससे कोलकाता जैसे महानगर पर ट्रैफिक और माल ढुलाई का दबाव कम होगा और उद्योगों को तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बीते 11 वर्षों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। सागरमाला योजना के तहत सड़क और पोर्ट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कोलकाता पोर्ट ने हाल के वर्षों में कार्गो हैंडलिंग के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि इससे जुड़े रोजगार, व्यापार और उद्योग के अवसरों का विस्तार भी है, जो बंगाल की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी बंगाल के लिए यह समय ऐतिहासिक बताया जा रहा है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत, कई नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का शुभारंभ और बंगाल को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने वाली नई रेल सेवाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य को राष्ट्रीय परिवहन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे बीते 100 वर्षों में शायद पहली बार 24 घंटे के भीतर इतना बड़ा काम बताया। रेल परियोजनाओं का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी तेज होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी विकास घोषणाओं के बीच राजनीतिक संदेश भी उतना ही स्पष्ट था। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी आक्रामक शब्दावली के यह संकेत दे दिया कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें राजनीति आड़े नहीं आने दी जाएगी। हालांकि, चुनावी दृष्टि से देखें तो इन कार्यक्रमों ने राज्य की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है। लंबे समय से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच, विकास के मंच से दिया गया यह संदेश मतदाताओं को सीधे संबोधित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिंगूर में विकास कार्यों की शुरुआत विशेष रूप से चुनावी नजरिए से महत्वपूर्ण है। कभी जिस क्षेत्र को औद्योगिक असफलता और राजनीतिक विवाद के प्रतीक के रूप में देखा जाता था, आज वहीं से विकास का नया अध्याय शुरू करने की कोशिश की जा रही है। यह संदेश किसानों, युवाओं और उद्योग जगत तीनों के लिए है। किसानों को यह भरोसा दिया जा रहा है कि विकास उनके हितों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर होगा। युवाओं के लिए यह रोजगार और अवसरों की बात है, जबकि उद्योगों के लिए यह स्थिर नीति और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के दौरे ने यह भी दिखाया कि केंद्र सरकार जलमार्ग, रेल, सड़क और हरित मोबिलिटी को एक साथ जोड़कर समग्र विकास मॉडल पर काम कर रही है। मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का यह दृष्टिकोण न केवल लागत कम करता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी ध्यान में रखता है। ग्रीन मोबिलिटी और इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट जैसे विकल्प भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हैं, और बंगाल जैसे नदी-समृद्ध राज्य के लिए यह विशेष अवसर प्रदान करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परियोजनाओं और घोषणाओं का असर केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले चुनावों में विकास बनाम शासन, केंद्र बनाम राज्य और भविष्य बनाम अतीत जैसे मुद्दे और अधिक मुखर होंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा और सिंगूर से दिया गया विकास का संदेश भाजपा के लिए एक मजबूत चुनावी आधार तैयार करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह इन घोषणाओं के बीच अपनी उपलब्धियों और नीतियों को कैसे सामने रखती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, सिंगूर और बालागढ़ से उठी यह विकास की आवाज केवल ईंट-पत्थर की परियोजनाओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति, अर्थव्यवस्था और भविष्य की दिशा को प्रभावित करने वाला क्षण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के शिलान्यास के साथ चुनावी शंखनाद भी कर दिया है। अब यह बंगाल की जनता पर निर्भर करेगा कि वह इस विकास के वादे को किस नजर से देखती है और आगामी चुनावों में किसे अपना समर्थन देती है। इतना तय है कि बंगाल की सियासी हवा बदल चुकी है और विकास का मुद्दा केंद्र में आ गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 18:11:01 +0530</pubDate>
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                <title>स्वच्छता अभियान के दौरान पीएम मोदी ने दिया श्रम दान </title>
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                        <![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 1 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो पोस्ट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत श्रमदान किया है। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमदान करते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के सोनीपत में रेसलर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर अंकित बैयनपुरिया के साथ मिलकर सफाई अभियान में अपना सहयोग दिया है। अंकित बैयनपुरिया 75 डे हार्ड चैलेंज को पूरा करने वाले इनफ्लुएंसर हैं।</p>
<p>बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने उसी वर्ष</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135371/pm-modi-donated-labor-during-cleanliness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/modi-safai_large_1358_144.webp" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 1 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो पोस्ट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत श्रमदान किया है। इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमदान करते हुए दिखाई दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के सोनीपत में रेसलर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर अंकित बैयनपुरिया के साथ मिलकर सफाई अभियान में अपना सहयोग दिया है। अंकित बैयनपुरिया 75 डे हार्ड चैलेंज को पूरा करने वाले इनफ्लुएंसर हैं।</p>
<p>बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने उसी वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि अपने आसपास की जगह को साफ रखने में मदद करें। इसके साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सजग रहने की अपील भी की गई थी। हर वर्ष गांधी जयंती के मौके पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती से एक दिन पूर्व एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा आज जब देश स्वच्छता पर ध्यान दे रहा है तो इस मौके पर मैं और अंकित बैयनपुरिया ने भी ऐसा ही किया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के अलावा इसमें फिटनेस और खुशहाली को भी शामिल किया गया है। यह पूरी तरीके से स्वच्छ और स्वस्थ भारत के संबंध में है। बता दें कि इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाडू लेकर सफाई अभियान में अपना योगदान देते हुए दिख रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री के गले में एक गमछा भी लिपटा हुआ है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अब तक एक लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।</p>
<p>इस वीडियो की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी को कहते हुए सुना गया, राम राम सारेया ने। इसके बाद वह अंकित से बातचीत करते हैं और उनका हाल-चाल लेते हैं। वह अंकित से कहते हैं कि आज हम आपसे कुछ सीखेंगे। उसके बाद दोनों सफाई करने में जुट जाते हैं। इसके बाद दोनों ने मिलकर सफाई अभियान में अपनी सहभागिता निभाई। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले अनिल के साथ झाड़ू लगाई और उसके बाद कूड़ा भी उठाया। बता दें कि दोनों ने सफाई करने के दौरान कई मुद्दों पर बातचीत की जिसमें फिटनेस, स्वच्छता, जी20 सम्मलेन, सोशल मीडिया, स्पोर्ट्स भी शामिल है।</p>
<p>जानें स्वच्छता ही सेवा के बारे में<br />बता दें कि केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2023 से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा अभियान को शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य है कि स्वच्छ भारत मिशन को बढ़ावा दिया जाए। इसका उद्देश्य है कि हर भारतीय नागरिक को भारतीय स्वच्छता लीग 2.0, सफाई मित्र सुरक्षा शिविर और स्वच्छता अभियान जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाए।  </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Oct 2023 15:26:17 +0530</pubDate>
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