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                <title>Voter Awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Voter Awareness RSS Feed</description>
                
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                <title>कोरोना योद्धा से गरीबों की सेवा तक, समाजसेवा की मिसाल बने पीके तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।   </strong>समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय पीके तिवारी आज जरूरतमंदों की मदद और जनजागरूकता के लिए एक परिचित नाम बन चुके हैं। कोरोना महामारी के कठिन दौर से लेकर आज तक उन्होंने कृष्ण जन कल्याण सेवा संस्थान के माध्यम से विभिन्न सामाजिक एवं जनहितकारी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाया है। उनके सेवा कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता के साथ-साथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाना और समाज में जागरूकता पैदा करना है।</div>
<div style="text-align:justify;">कोरोना काल में पीके तिवारी ने लोगों की सहायता और जागरूकता के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उनके समर्पण को देखते हुए तत्कालीन सीएमओ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186216/pk-tiwari-became-an-example-of-social-service-from-corona"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/2-3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।   </strong>समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय पीके तिवारी आज जरूरतमंदों की मदद और जनजागरूकता के लिए एक परिचित नाम बन चुके हैं। कोरोना महामारी के कठिन दौर से लेकर आज तक उन्होंने कृष्ण जन कल्याण सेवा संस्थान के माध्यम से विभिन्न सामाजिक एवं जनहितकारी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाया है। उनके सेवा कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता के साथ-साथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाना और समाज में जागरूकता पैदा करना है।</div>
<div style="text-align:justify;">कोरोना काल में पीके तिवारी ने लोगों की सहायता और जागरूकता के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। उनके समर्पण को देखते हुए तत्कालीन सीएमओ अमेठी डॉ. आशुतोष दूबे सहित कई अधिकारियों ने उन्हें कोरोना योद्धा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया था।</div>
<div style="text-align:justify;">संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष लोगों के सहयोग से अत्यंत जरूरतमंद परिवारों को लगभग एक हजार गर्म वस्त्र वितरित किए जाते हैं। सर्दी से बचाव के लिए गौशालाओं में यथासंभव जूट कोट की व्यवस्था, गर्मी के मौसम में श्रमिकों के लिए जलपान तथा अंगवस्त्र वितरण और गौ आश्रय केंद्रों में लू से बचाव के लिए तिरपाल उपलब्ध कराने जैसे कार्य भी किए जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी संस्था सक्रिय है। प्रत्येक वर्ष करीब एक हजार पौधों का वृक्षारोपण एवं वितरण कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है। इसके साथ ही मतदाता जागरूकता अभियान, संचारी रोगों से बचाव के लिए जनजागरूकता, आयुष्मान कार्ड बनवाने में सहयोग तथा सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा के क्षेत्र में संस्था द्वारा स्कूल चलो अभियान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का प्रोत्साहन तथा प्रतिभावान और होनहार विद्यार्थियों को सम्मानित करने जैसे प्रयास किए जाते हैं। वहीं सामाजिक क्षेत्र में पत्रकारों, चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया जाता है।पीके तिवारी का कहना है कि समाजसेवा किसी एक दिन या अवसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना, लोगों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना तथा समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना ही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है।उनके नेतृत्व में कृष्ण जन कल्याण सेवा संस्थान द्वारा किए जा रहे ये कार्य समाज में सहयोग, संवेदना और जनभागीदारी की भावना को मजबूत कर रहे हैं। कोरोना योद्धा के रूप में सम्मानित होने के बाद भी पीके तिवारी का सेवा अभियान लगातार जारी है, जो उन्हें समाज के जरूरतमंद वर्ग के बीच एक संवेदनशील समाजसेवी के रूप में पहचान दिला रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:44:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण पर राजनीतिक दलों के साथ डीएम की बैठक, 6 जुलाई तक मांगे सुझाव व आपत्तियां।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तैयारियों के तहत बुधवार को जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में  मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण, सम्भाजन तथा नए मतदेय स्थलों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) उपमा पाण्डेय ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप जनपद के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निर्धारण तथा आवश्यकता अनुसार नए मतदेय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182492/dms-meeting-with-political-parties-on-rescheduling-of-polling-places"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260701-wa0102.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तैयारियों के तहत बुधवार को जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में  मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्यीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण, सम्भाजन तथा नए मतदेय स्थलों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) उपमा पाण्डेय ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप जनपद के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदेय स्थलों का भौतिक सत्यापन, पुनर्निर्धारण तथा आवश्यकता अनुसार नए मतदेय स्थलों की स्थापना का कार्य 28 जून 2026 तक संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा पूरा कर लिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आयोग द्वारा निर्धारित समय-सारिणी एवं दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए बताया कि मतदेय स्थलों का सम्भाजन प्रत्येक 1200 मतदाताओं के मानक के आधार पर किया जा रहा है, ताकि मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम, व्यवस्थित एवं पारदर्शी बन सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि मतदेय स्थलों की प्रारूप (आलेख्य) सूची का प्रकाशन 4 जुलाई 2026 को किया जाएगा। इसके बाद राजनीतिक दलों सहित अन्य संबंधित पक्ष यदि किसी मतदेय स्थल के परिवर्तन, संशोधन अथवा अन्य किसी विषय पर सुझाव या आपत्ति देना चाहते हैं तो वे 6 जुलाई 2026 तक संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा जिला निर्वाचन कार्यालय, प्रयागराज में अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे प्रकाशित होने वाली सूची का गंभीरता से परीक्षण करें और यदि किसी मतदेय स्थल के संबंध में कोई व्यावहारिक समस्या अथवा सुधार का सुझाव हो तो निर्धारित समय-सीमा के भीतर लिखित रूप में उपलब्ध कराएं, ताकि आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:46:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
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