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                <title>Party Ideology - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Party Ideology RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भाजपा जिला संगठन की बैठक संपन्न, प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने पदाधिकारियों से किया संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय पर शनिवार को  प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्रम एवं सेवायोजन ,समन्वय एवं जनपद के प्रभारी मंत्री  अनिल राजभर की उपस्थिति में जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ प्रभारी मंत्री एवं जिलाध्यक्ष सहित उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने जिला पदाधिकारियों एवं मंडल अध्यक्षों से सीधे संवाद करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों तथा बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186665/bjp-district-organization-meeting-concluded-in-charge-minister-anil-rajbhar-interacted"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1788011610677.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय पर शनिवार को  प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्रम एवं सेवायोजन ,समन्वय एवं जनपद के प्रभारी मंत्री  अनिल राजभर की उपस्थिति में जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ प्रभारी मंत्री एवं जिलाध्यक्ष सहित उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने जिला पदाधिकारियों एवं मंडल अध्यक्षों से सीधे संवाद करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों तथा बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पदाधिकारियों के सुझाव एवं विचार भी सुने और संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय एवं जनसरोकारों से जोड़ने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रभारी मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की वास्तविक ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। संगठन की मजबूती के लिए प्रत्येक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करते हुए पार्टी की विचारधारा एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संपन्न कराने तथा बूथ स्तर तक संगठन को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या ने बैठक में उपस्थित प्रभारी मंत्री  अनिल राजभर का स्वागत करते हुए संगठन की विभिन्न गतिविधियों एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि जिले में भाजपा का संगठन निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है और कार्यकर्ता पूरी ऊर्जा एवं समर्पण के साथ पार्टी के कार्यक्रमों को सफल बनाने में जुटे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में  जिला के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष एवं पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। </div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 19:34:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
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