हाथरस कांड में उच्चतम न्यायालय ने यूपी सरकार का अनुरोध ठुकराया‌‌

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‌‌ सीबीआई जांच की मांग किंग इलाहाबाद हाई कोर्ट ही करेगा।

स्वतंत्र प्रभात।‌‌

प्रयागराज ब्यूरो।‌‌ उच्चतम न्यायालय ने यूपी सरकार का वह अनुरोध ठुकरा दिया है, जिसमें वह हाथरस कांड की जांच की निगरानी हर कीमत पर उच्चतम न्यायालय से कराना चाहती थी, क्योंकि इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेने के बाद लखनऊ पीठ ने जिस तरह कठोर रुख अख्तियार किया था,  उससे यूपी सरकार बचना चाहती थी। उच्चतम न्यायालय ने हाथरस मामले पर फैसला देते हुए कहा कि इस केस की जांच सीबीआई करती रहेगी और मॉनिटरिंग इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा। कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह जांच की स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में दाखिल करे।

‌चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि विक्टिम परिवार की सुरक्षा, गवाहों की सुरक्षा से लेकर अन्य तमाम पहलुओं को इलाहाबाद हाई कोर्ट देखेगा। मामले में सीबीआई अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेगी। हाई कोर्ट मामले को मॉनिटर करेगा। जहां तक केस ट्रांसफर करने का मसला है तो अभी उसका स्टेज नहीं है। पीड़ित परिवार ने अपील की थी कि इस मामले का ट्रायल दिल्ली में हो। पीठ ने कहा कि मामले की जांच के बाद कोर्ट तय करेगा कि केस का ट्रांसफर उत्तर प्रदेश से दिल्ली किया जाए या नहीं। जब मामले की छानबीन पूरी हो जाएगी तब इस मसले को देखा जा सकता है। इस मामले को अभी ओपन छोड़ा जाता है।

‌आज दिए आदेश में पीठ ने मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में भेज दिया। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट भी मामले पर सुनवाई कर रहा है। जो भी बातें उच्चतम न्यायालय  में रखी गई हैं, उन्हें हाई कोर्ट देख सकता है। सीबीआई अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा करवाए और हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक जांच को आगे बढ़ाए। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की याचिका पर भी ध्यान दिया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों के बारे में विवरण का खुलासा किया गया है। उसके आधार पर, पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह पीड़िता और उसके परिवार के विवरण को प्रकट करने वाले तथ्यों को हटाए।

‌उच्चतम न्यायालय ने मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए 15 अक्तूबर को ही संकेत दिया था कि मामले में सीबीआई जांच की निगरानी से लेकर अन्य तमाम तरह की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजी जा सकती है। मामले की उच्चतम न्यायालय  की निगरानी में सीबीआई जांच समेत विक्टिम परिवार की सुरक्षा के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। उच्चतम न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में होनी चाहिए और वहीं निपटान होना चाहिए हम तो आखिरी मॉनिटरिंग बॉडी हैं।

‌उच्चतम न्यायालय में यूपी सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि हाथरस मामले में पीड़ित परिवार और गवाहों को तीन स्तरीय प्रोटेक्शन दिया गया है। यूपी सरकार ने हलफनामा दायर कर पीड़ित परिवार के सदस्यों को दी गई सुरक्षा का विस्तृत विवरण पेश किया था। इससे पहले यूपी सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि हाथरस कांड की विक्टिम का अंतिम संस्कार रात में इसलिए करना पड़ा, क्योंकि खुफिया रिपोर्ट में लॉ एंड ऑर्डर का खतरा था और सुबह तक इंतजार में हिंसा होने का अंदेशा था। यूपी सरकार ने यह भी कहा था कि उसने सीबीआई जांच की सिफारिश की हुई है। उच्चतम न्यायालय खुद मामले की निगरानी करे और मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दे ताकि सच्चाई सामने आ सके।

‌इससे पहले पीठ ने एक जनहित याचिका और कार्यकर्ताओं तथा वकीलों की ओर से दायर कई अन्य हस्तक्षेप याचिकाओं पर 15 अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाओं में दलील दी गई थी कि उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है, क्योंकि कथित तौर पर जांच बाधित की गई। पीड़ित पक्ष के साथ पुलिस ने अपनी ड्यूटी का सही तरह से पालन नहीं किया। आरोपी का बचाव किया जा रहा है। साथ ही आधी रात को परिजनों को बताए बिना अंतिम संस्कार किया गया। विक्टिम फैमिली ने मामले का ट्रायल यूपी से बाहर किए जाने की मांग की थी। साथ ही कहा था कि गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए।