घरेलू हिंसा में वृद्धि: संबंधों में विश्वास की कमी का प्रमाण है

घरेलू -हिंसा- में- वृद्धि-: संबंधों- में विश्वास- की -कमी- का- प्रमाण है डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाताए आर टी सेंटर, एस एस हॉस्पिटल -आई- एम- एस,-- बी एच यू-

डॉ मनोज कुमार तिवारी वरिष्ठ परामर्शदाता आर टी सेंटर, एस एस हॉस्पिटल आई एम एस, बी एच यू

स्वतंत्र प्रभात वाराणसी

घरेलू हिंसा सामाजिक ताना-बाना एवं पारिवारिक संबंधों पर एक धब्बा है। घरेलू हिंसा में प्रताड़ित करने वाला व्यक्ति पारिवारिक सदस्य या सगा- संबंधी होता है। घरेलू हिंसा की समस्या एक विश्वव्यापी समस्या है। दुनिया के सभी देशों में घरेलू हिंसा की घटनाएं होती हैं। घरेलू हिंसा को यद्यपि की कानूनन दण्डनीय अपराध घोषित किया गया है किंतु घर में होने वाली हिंसा की रिपोर्ट आज भी भारत वर्ष में बहुत कम है। यूनाइटेड नेशंस पापुलेशन फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार दो तिहाई विवाहित महिलाएं कभी न कभी घरेलू हिंसा के शिकार होती हैं।

दुनिया में साउथ अफ्रीका में  घरेलू हिंसा की दर सबसे अधिक पाई जाती है। घरेलू हिंसा महिलाओं, बच्चों पुरुषों एवं बुजुर्गों के प्रति किया जाता है। यद्यपि की इनके प्रति होने वाले घरेलू हिंसा का तरीका, प्रकार, गंभीरता तथा कारण भिन्न- भिन्न होता है।संयुक्त राष्ट्र के एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 10 में से 6 महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार होती है। भारत वर्ष में लगभग 37% महिलाएं अपने पति से घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं। कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया में घरेलू हिंसा के मामले बड़े हैं तथा भारतवर्ष में भी घरेलू हिंसा के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। महिलाओं के प्रति प्रमुख घरेलू हिंसा|

दुनिया भर में घरेलू हिंसा की सबसे अधिक घटनाएं महिलाओं के प्रति होते हैं, जिनमें प्रमुख निम्न है:  शारीरिक हिंसा (मारना-पीटना, धक्का देना, ठोकर मारना, बीमार होने पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न कराना व अन्य) गाली-गलौज करना सार्वजनिक रूप से अपमानित करना  क्षमता से अधिक काम करने के लिए बाध्य करना  अश्लील साहित्य व चित्र देखने को बाध्य करना महिला की अनिच्छा के बावजूद जबरन लैंगिक संबंध बनाना महिला के पारिवारिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को आहत करना महिला के चरित्र पर दोषारोपण करना  इच्छा के विरुद्ध शादी करना|


महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के प्रमुख कारण:-दहेज  रूढ़िवादी मानसिकता सुंदरता की कमी पति की इच्छा होने पर शारीरिक संबंध से इनकार करना  बच्चों के देखभाल न करना समय से व स्वादिष्ट भोजन  न बना पाना   घरेलू जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असफल होना बांझपन  लड़की पैदा होना पति द्वारा चरित्र पर संदेह करना  सामाजिक सुरक्षा की कमीमहिलाओं का अपने को कमजोर व  असहाय समझना  संबंधों में भावनात्मक जुड़ाव की कमी गरीबी आय की असमानता लिंग भेदभाव  अशिक्षा दिव्यांगता


बच्चों के प्रति घरेलू हिंसा:- महिलाओं के बाद पूरी दुनिया में सबसे अधिक घरेलू हिंसा के शिकार बच्चे होते हैं। बच्चों के प्रति होने वाले प्रमुख घरेलू हिंसा निम्नलिखित है:- मारना-पीटना  समय से एवं पर्याप्त भोजन ना देना शिक्षा के अवसर से वंचित करना  खेलने न देना कमरे में बंद करके रखना यौन शोषण बाल श्रम कराना


कारण:- सौतेले मां-बाप  परिवार के सदस्य या सगे-संबंधी का मानसिक विकृत होना भाई-बहन के बीच ईष्यापूर्ण सम्बंध टूटा परिवार  माता-पिता के बीच बिगड़े संबंध पढ़ाई में कमजोर होना  परीक्षा में अनुत्तीर्ण होना गरीबी अशिक्षा दिव्यांगता
पुरुषों के प्रति घरेलू हिंसा:- पत्नी एवं ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक रूप से परेशान करना पत्नी व ससुराल पक्ष द्वारा पारिवारिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना दोस्तों के सामने अपमानित करना पुरुषत्व की क्षमता को लेकर ताने मारना  आय कम होने पर दूसरों से तुलना करना  ससुराल के लोगों द्वारा अपमानित किया जाना


कारण:- बेरोजगारी  आय का कम होना  शारीरिक क्षमता की कमी  पत्नी का मायके वालों की अधिक सुनना पत्नी का दबंग एवं चरित्रहीन होना दिव्यांगता पत्नी के निर्देशों का पालन न करना घरेलू कार्यों में सहयोग न करना
बुजुर्गों के प्रति घरेलू हिंसा:- भरता वर्तमान परिवेश में भारत में भी बुजुर्गों के प्रति घरेलू हिंसा के दर निरंतर बढ़ती जा रही है बुजुर्गों के प्रति होने वाले प्रमुख घरेलू हिंसा निम्नलिखित हैं:-उपेक्षा करना मारना-पीटना  भोजन न देना परिवार से अलग रखनाबीमार होने पर चिकित्सा न कराना अपमानित करना भावनात्मक रूप से परेशान करना  अत्यधिक घरेलू कार्य कराना
कारण:-.मूर्खतापूर्ण मानसिकता. शारीरिक रूप से परिवार के सदस्यों पर निर्भर होना .आय का कोई स्रोत ना होना . बच्चों व परिवार के सदस्यों में संस्कार की कमी.संपत्ति हड़पने की मंशा


घरेलू हिंसा का दुष्प्रभाव:-. अवसाद . तनाव . दुश्चिंता .पीटीएसडी . मनोदैहिक विकार . मानसिक विकृति . व्यावहारिक समस्याएं . नशे का सेवन .नीरसता. उदासी. अकेलापन . अविश्वास की भावना  भयभीत रहना. नकारात्मक सोच . बच्चों में सीखने की क्षमता में कमी बच्चों में संज्ञानात्मक विकास का बाधितत होना . आक्रामक व्यवहार (विशेषकर घरेलू हिंसा से पीड़ित बच्चे अपने साथियों, खिलौनों या जानवरों के साथ हिंसक व्यवहार करते हैं).

आत्महत्या का विचार आना . आत्महत्या


घरेलू हिंसा के निवारण के उपाय:- भारत में घरेलू हिंसा अधिनियम बनाया गया है जिसमें घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्तियों के मदद एवं प्रताड़ित करने वाले व्यक्तियों के सजा का प्रावधान है, किंतु केवल कानून इस जघन्य अपराध से निपटने में पूरी तरह से सक्षम नहीं है। घरेलू हिंसा से निपटने के कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:-. घरेलू हिंसा के प्रति समाज में जागरूकता एवं संवेदनशीलता का प्रयास करना . घर का वातावरण तनाव रहित बनाए रखने का प्रयास सभी सदस्य द्वारा करना चाहिए . सामाजिकरण की प्रक्रिया इस प्रकार से अपनाई जानी चाहिए ताकि लिंग भेदभाव व दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जा सके . समतामूलक समाज का निर्माण.

घरेलू हिंसा अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना .महिलाओं को शिक्षित एवं स्वावलंबी बनाने का प्रयास करना. बालश्रम निरोधक कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना. वृद्ध जनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना. वृद्धजनों के आय एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना . बच्चों के शिक्षा एवं स्वस्थ मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध कराना।घरेलू हिंसा के अनेक आयाम है तथा इसके अनेक रूप एवं प्रकार हैं। घरेलू हिंसा को न्यूनतम करने के लिए इसकी शुरुआत घर से बच्चों के बचपन से ही होनी चाहिए तत्पश्चात विद्यालय में शिक्षा इस प्रकार से दी जानी चाहिए ताकि बच्चों के मन में शुरू से ही घरेलू हिंसा के प्रति जागरूकता लाई जा सके। घरेलू हिंसा को न्यूनतम करने में के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है, जिसमें सभी स्तरों पर कार्य करने की आवश्यकता है