योगिराज में प्राइवेट टीचर भुखमरी की कगार पर, देश के भविष्य को रौशनी देने वाले का खुद ही भविष्य अंधकार में


समाज के भविष्य के निर्माता का ही भविष्य डूबा गहन अंधकार में,प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधको के द्वारा लगातार शोषण का शिकार हो रहे प्राइवेट टीचर”
गौरव बाजपेयी
वैश्विक महामारी को दृष्टिगत रखते हुए सम्पूर्ण विश्व मे त्राहि-त्राहि मचा रखी है जिसके चलते सरकार के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए ही ऑनलाइन शिक्षा के निर्णय पर बेचारे शिक्षक उसमे भी जूझते रहे लेकिन जब प्रबंधकों के द्वारा मई,जून की सैलरी नही दी गयी बल्कि अभिभावकों से ऑनलाइन शिक्षा देने के नाम पर भी पूरी फीस वसूल की जा रही है लेकिन शिक्षक जब अपने हक की मांग करता है

तो उसे भिन्न भिन्न प्रकार से नोकरी से निकाल बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है तो वही कुछ स्कूल टीचरो को होल्ड पर रखकर प्राइवेट स्कूल निरन्तर बदस्तूर कार्य कर रहे है यह कार्य सिर्फ छोटे विद्यालय ही नही बल्कि राजधानी समेत प्रदेश के प्रतिष्ठित नांमचीन विधालय कर रहै है

कुछ विद्यालय तो वेतन देने के नाम पर सिर्फ 20 % से 30%ही वेतन देकर शिक्षकों से पूरे दिन कार्य ले रहे है और वेतन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे है जब दिल चाहा तब टीचरो को बाहर कर दिया जिसके लिए भी मानकों को तय करना होगा।
वर्तमान योगी व मोदी सरकार को समय रहते ध्यान देना होगा अन्यथा समाज को रोशनी देने वाले सूर्य पर गृहण लगा रहे इन प्राईवेट स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ न्यायिक जांच करवा कर कानूनी रूप से दण्डित भी किया जाए

अन्यथा समाज को अपने ज्ञान के प्रकाश से अभिसिंचित करने वाले शिक्षक की अंर्णिम हमेशा हमेशा के लिए अस्त हो जाएगी व मजबूरन शिक्षकों को न्यांय न मिलने व भुखमरी की मार झेल रहे इन टीचरो के सामने धरना,भूख हड़ताल या आत्महत्या के लिए मजबूर होगा क्यों कि कही भी किसी भी प्रकार से इन प्राइवेट स्कूलों प्रबंधको,प्रधानाचार्य के खिलाफ ऊंचे रसूख के चलते कोई कार्यवाही या सुनवाई नही हो पाती या तो उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत ही नही जुटा पाता लेकिन एक टीचर ही है जो एकमात्र समाज को रौशन कर आज खुद गहरे अंधेरे में रहने को मजबूर है

इस कार्य से मिलने वाले वेतन से अपने व अपने परिवार के लिए जीविकोपार्जन करता रहा है लेकिन नोकरी खोने के डर से प्रबंधक के सभी अत्याचारों पर मौन धारण कर अपनी सिसकियों के दर्द को चाहते हुए भी किसी से नही कह पा रहा है टीचर्स का प्रबंधकों द्वारा निष्कासन बड़ी समस्या है साथ ही उचित वेतन न देना उसमे भी कटौती करना ,

निर्धारित अवकाश में भी विद्यालय में बुलाकर काम कराना आदि गम्भीर समस्याओं के निदान के लिए कोई मानक तय करने की जरूरत है । अगर संगठन प्राइवेट टीचर्स के मुद्दों को गम्भीरता से हल करने का प्रयास करेगा तभी निश्चित रूप से इसका विस्तार होगा खास बात की सभी लोग खुद समस्याओं को महसूस किए हैं और कर भी रहे हैं ।आखिरकार विचारणीय यह है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए नोकरी से निकाल देने बेचारा टीचर कहां और कैसे अपना व अपनो की जीविका चला सकेगा जिसके परिणामस्वरूप वह भुखमरी की मार झेलने को मजबूर हो रहा है इस पर समय रहते सरकार को ध्यान देना नितांत आवश्यक है।

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