राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्‍यपाल सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र को किया संबोधित

The President, Shri Ram Nath Kovind addressing the inaugural session of Governors’ Conference on National Education Policy, through video conferencing, in New Delhi on September 07, 2020.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो काॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित किया. ‘उच्च शिक्षा के बदलाव में शिक्षा नीति की भूमिका’ विषय पर इस सम्मेलन का आयोजन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया गया. इस सम्मेलन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपालों के अलावा सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी शामिल हुए.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को शिक्षा के वैश्विक केंद्र के तौर पर स्थापित करेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि नई नीति से दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने का रास्ता साफ होगा, इससे छात्रों को देश में ही विश्वस्तरीय गुणवत्तापरक शिक्षा हासिल हो सकेगी. राष्ट्रपति ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बुनियादी बदलावों में शिक्षकों की अहम भूमिका होगी, ऐसे में नई शिक्षा नीति में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षण के पेशे में सबसे होनहार लोगों का चयन होना चाहिए.
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र किया कि देश में शोध कार्यों पर होने वाला खर्च अब भी काफी है, जबकि देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए ‘नॉलेज-क्रिएशन’ और रिसर्च को प्रोत्साहित करना जरूरी है. राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना से सभी क्षेत्रों में गुणवत्तापरक शोध को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
राज्यपालों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति को देशभर के लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है. उन्होंने कहा कि ये नीति सरकार की शिक्षा नीति नहीं बल्कि देश की शिक्षा नीति है. प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम से कम होना चाहिए, और  शिक्षक, छात्रों और अभिभावकों का जुड़ाव अधिक से अधिक होना चाहिए तभी इसकी प्रासंगिकता और व्यापकता दोनों बढ़ेगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में हर छात्र को सशक्त करने का रास्ता दिखाया गया है, साथ ही ये युवाओं को ज्ञान और कौशल दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत को हम एक Knowledge Economy बनाने के लिए प्रयासरत हैं और नई शिक्षा नीति ने ब्रेन ड्रेन की समस्या का हल ढूंढ़ने और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के कैंपस भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बेहतर तरीके से लागू करना सभी का सामूहिक दायित्व है. गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इक्कीसवीं सदी की पहली शिक्षा नीति है, जो 34 साल बाद आई है. इस नीति में स्कूली और उच्च शिक्षा स्तर दोनों में बड़े सुधारों की बात कही गई है जो आने वाले समय में भारत के विश्व गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त करेगी.