सामुहिक भगवान की भक्ती करने से ही अनुष्ठानों के अतिशय पृगट होते हैं :मुनिश्री

सामुहिक भगवान की भक्ती करने से ही अनुष्ठानों के अतिशय पृगट होते हैं :मुनिश्री

विदिशा से शोभित जैन की रिपोर्ट

सामुहिक भगवान की भक्ती करने से ही अनुष्ठानों के अतिशय पृगट होते हैं, मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज शादी विवाह के अनुष्ठानों में तो पाप का ही वंध होता हैं, लेकिन जिस पांडाल में जिनेन्द्र भगवान की सामुहिक भक्ती  होती हैं,

वंहा पर तो प्रत्येक समय पुण्य ही पुण्य का वंध होता हैं! और यही सामुहिक पुण्य आपकी अकाल मृत्यु का टालता हैं!उफरोक्त उद्गार मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज ने खरीफाटक रोड़ स्थित श्री सराफ जी के मंदिर में प्रातःकालीन प्रवचनसभा में प्रगट किये!

उन्होंने कहा कि जो लोग इस प्रकार के सामुहिक पुण्य में भाग ले रहे हैं, एवं उसमें अपनी सेवायें दे रहे हैं वह सातिशय  पुण्य का वंध कर रहे हें!उन्होंने कहा कि २४ घंटे पाप के कार्य ही तो करते रहते हो और संसार में पाप के संयोग तो आपको पल पल में मिलेंगे

लेकिन ऐसे सामुहिक पुण्यसंयोग के अवसर वहूत कम मिलते हैं।समवशरण की महिमा वताते हूये कहा कि इस प्रकार के आयोजन में चतुर्निकाय के जीव भगवान जिनेन्द्र की धर्मारधना में शामिल होते हैं, एवं उनका आना भी प्रारंभ हो गया हैं।

इसलिये पांडाल शुद्धि के उपरांत उपरोक्त क्षेत्र में कोई भी अशुचिमय कार्य मत करना अपने परिणामों को संयम के साथ भगवान जिनेन्द्र देव की भक्तीभाव के साथ धर्मारधना करना! उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्थाओं में सहयोगी तो वनना

लेकिन असहयोगी कभी मत वनना।जो भी व्यक्ति इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में विघ्न उत्पन्न करता हैं, वह वहूत वड़े पाप का वंध करता हैं! उन्होंने कहा कि अपने अंतरंग के परिणामों को सुधारना वाहरी आडंवरों में विल्कुल न पड़ें!

मुनि श्री ने कहा कि जैसे छोटा वच्चा मिट्टी को खाता हैं, उससे छुडा़ओ तो वह रोता हैं, ऐसे ही गुरू महाराज आपसे आपके अंदर के व्यसनों को आपके पाप को छूडा़नै की वात करते हैं, और आप लोगों को भगवान भक्ती में लगाते हैं।जिससे अगले भव में साक्षात समवशरण में वैठने का मौका मिले!           

श्री अर्हतचक्र समवशरण  महामंडलीय विधान का शुभारंभ 12 अक्टूम्वर से प्रातः 7 वजे से घटयात्रा अरिहंतविहार से निकलेगी!  स्थान शुद्धी एवं ध्वजारोहण के साथ मांगलिक क्रिआओं का शुभारंभ ।               

      विदिशा संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से अरिहंतविहार कालौनी में दस दिवसीय श्री अर्हतचक्र समवशरण विधान का शुभारंभ मुनित्रय मुनि श्री अभयसागर जी, मुनिश्री प्रभातसागर जी एवं मुनि श्री पूज्यसागर जी के सानिध्य में  होंने जा रहा हैं।  

            प्रवक्ता  अविनाशजैन ने वताया कि 12 अक्टूम्वर को प्रातः 7 वजे से घटयात्रा पांडाल स्थल से निकलेगी जो अरहंतविहार कालौनी में स्थित जिनमंदिर की परिक्रमा उपरांत कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेगी।

एवं वंहा पर स्थान शुद्धि की क्रिआओं को प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैयाजी एवं मुकेश भैयाजी अशोकनगर संपन्न करायेंगे।तत्पश्चात ध्वजारोहण होगा!एवं मुनि संघ के प्रवचन होंगे! अविनाशजैन ने वताया कि१००/२१० में भव्य डोम आकार का पान्डाल लगाया गया हैं जिसमें ३०समवशरण दौनों ओर वने हें। एवं एक समवशरण वडा़ वाला जंहा से समस्त क्रिआओं को संपन्न किया जाएगा!

प्रत्येक समवशरण में चारों और भगवान जिनेन्द्र देव विराजमान होंगे! एवं सभी मुख्यपात्रों के साथ124 जिन प्रतिमाओं की एक साथ भगवान की सामुहिक भक्ती करने का यह सौभाग्य विदिशा नगर वासिओं को प्रथमवार मिलने जा रहा हें!

उपरोक्त दस दिवसीय यह १२ अक्टूबर से प्रारंभ होकर २१अक्टूबर तक चलेगा! जिसमें प्रतिदिन प्रातःकाल ६:३० वजे से जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक के साथ नित्यनियम पूजन और८:३० से मुनिसंघ के प्रवचनों का लाभ मिलेगा!

जिसमें १००८ इन्द़ इन्द़ाणिओं के साथ एक साथ विधान प्रारंभ होगा जो कि दौपहर ११ वजे तक चलेगा! सांयकालीन ७ वजे से महाआरती के पश्चात इन्द्र दरवार एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे! जिसमें  चकृवर्ती राजाओं के साथ सौधर्म इन्द़,कुवेर इन्द्र महायज्ञनायक, नायक,

अपनी इन्द्राणीओं के साथ इन्द्र सभा का मंचन करेंगे! श्री समवशरण विधान समिति, श्री सकल दि. जैन समाज श्री शीतलविहार न्यास समिती सहित सभी युवा मंडलों महिला मंडलों ने उपरोक्त कार्यक्रम में भाग लेंने की अपील की हैं!

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