शहीदों की शहादत पर सरकार कब होगी गंभीर

शहीदों की शहादत पर सरकार कब होगी गंभीर

भारत :-  हिंदुस्तान में आये दिन जवानों के शहादत की खबर आम हो चली है,
इसे किसकी चूक कहे सरकार की या किसी और कि ?
देश के सबसे कीमती धरोहर को धारण करने वाले भारत माता के शेर जिस तरह से कभी धोखे से मार दिए जाते है या कभी प्राकृतिक आपदा के शिकार हो जाते है।
जो अपने कर्तव्य को निभाते हुए खुद को कुर्बान कर देते है क्या उनके लिए
सिर्फ एक दिन आँखें नम कर देने से अपनी अपनी जिम्मेदारी निभा लेते है ?
ऐसा बिल्कुल भी नही है एक तरफ जहां मीडिया में अपने चैनल को T.R.P के रेस में आगे रखने होड़ मची है उन मीडिया वाले को ये खबर दिखाई नही देती शहीद के घर मीडिया या पत्रकार सिर्फ तब जाना पसंद करते है जब उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास पर लाया जाता है,
आज ऐसे ही एक और घटना से मन बहुत आहत हुआ,
दरअसल नीलेश धाकड़ जिनकी शहादत की खबर सुनते ही उनकी  धर्मपत्नी ने भी इस संसार को अलविदा कह दिया।
कहीं न कहीं ये हम सबको सोचने पर विवश करता है।
यदि हम या हमारी सरकारे इस गंभीर विषय पर चिंतित रहती तो अवश्य ही इसका अब तक कोई न कोई हल निकलता।

आज स्वतंत्र प्रभात की पुरी टीम ऐसे वीर जावनों को नत मस्तक होकर नमन करता है।

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