धारा 497 एक चिंताजनक विषय पर विशेष लेख

धारा 497 एक चिंताजनक विषय पर विशेष लेख

497 पर एक विशेष लेख फूटी किश्मत टूटे सपने मैंने पढ़ा था सती के बारे में सती सावित्री सती उर्मिला सती सीता रामचरितमानस में तुलसीदास ने पत्नियों की चार प्रकार बताए थे जो सीता से संवाद करते समय सती अनुसूया ने कहा था, जग पतिब्रता चारि विधि अहहीं।बेद पुरान संत सब कहहीं।।

उत्तम के अस बस मन माहीं।सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।। मध्यम पर पति देखइ कैसें।भ्राता पिता पुत्र निज जैसे।। धर्म बिचारि समुझि कुल रहई।सो निकिष्ट त्रिय श्रुति अस कहई।। बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई।।

किसी भी स्त्री के आदर्श के लिए सनातन धर्म यह वाक्य सनातन सत्य है।लेकिन अब इस अवस्था का पुनरावलोकन करने की नितांत आवश्यकता है कि क्या कोई पिता अपना पुत्र अपना है या नहीं को पता करने के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेगा ।

स्त्री पुरुष की संपत्ति नहीं है पुरुष स्त्री का संपत्ति नहीं है। अर्थात स्त्री और पुरुष दो ऐसे लोग हैं जो अपनी मर्जी से एक दूसरे के साथ अपने यौन इच्छाओं की पूर्ति कर रहे हैं और इसके द्वारा होने वाले आय व्यय के समान रूप से साझीदार हैं। उपरोक्त वाक्य मैं नहीं कह रहा हूं घुमा फिरा कर यह वाक्य माननीय उच्चतम न्यायालय के ही है। हम उसको इस प्रकार सिद्ध कर रहे हैं। कोई पुरुष किसी प्रकार से किसी पराई स्त्री को बहला फुसलाकर उसके घर अपनी संतान पैदा करता है ।

उस संतान का पिता उस स्त्री की संपत्ति से नहीं अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी उस संतान को बनाएगा जो उसकी संतान है ही नहीं या समाजिक कर्तव्य का पालन करते हुए उसका और उसकी मां का संपूर्ण खर्च भी वहन करेगा ।हमारा सवाल यहां से तो शुरू होता है। भारत के समाज में प्रत्येक पुरूष अगर आप सहमत नहीं हैं तो यह कह लीजिए कि ज्यादातर पुरुष दिन रात मेहनत करके इसीलिए धन अर्जित करते हैं कि हमारे और हमारे परिवार का भविष्य उज्जवल हो सके।

इंद्राणी मुखर्जी दिग्विजय सिंह और अनूप जलोटा जैसे लोगों के बारे में बातचीत नहीं कर सकते हैं अत्यंत भाग्यशाली और विशिष्ट लोग हैं। हम सामान्य भारतीय पुरुषों की वास्तविक परिस्थिति बताने का कार्य कर रहे हैं।

फिक्स डिपॉजिट पत्नी के नाम पर रहेगी शहर में जमीन पत्नी के नाम खरीदी जाएगी मरने के बाद उत्तराधिकारी पत्नी रहेगी तलाक होने की स्थिति में गुजारा भत्ता मांगने का हक पत्नी का होगा और पत्नी के पास एक बड़ा सा चाबुक बिहार जो पत्नी 7 साल से कम समय कि आई है उसके पास दहेज उत्पीड़न नाम का एक कानून भी है । और पत्नी को यह सारे हथियार उन्ही अदालतों और संविधान प्रदान किया जो वंशानुगत बेकार को आधारहीन मानते हैं।

बंधुओं पत्नी कोई अकेले काम तृप्ति की साधन नहीं वंश परंपरा का आधार भी होती है और इसीलिए हमारे धर्म ग्रंथों ने पत्नी को पति की धरोहर बताया है। अदालत का कथन है पत्नी किसी से भी प्यार कर सकती है वह बालिक है उसकी अपनी इच्छा है मान लिया वह बालिक है उसकी अपनी इच्छा है छोड़िए धर्म ग्रंथ के बात को जाने ही दीजिए

एक बार मानव न्याय के रूप में ले लीजिए आपको समस्त सुख साधन तो चाहिए पति से और प्यार के लिए स्वतंत्रता चाहिए क्या पहले इतनी ही बात न्याय संगत है। आपका उत्तर शायद नहीं में होगा हम कुछ परिस्थितिगत्त साधन बता रहे हैं जो पूरी तरह से उदाहरण के लिए कपोल कल्पना है।रामू आतंकियों से भरे सीरिया में 2 साल के लिए मजदूरी करने गया है रामू शादीशुदा है और पत्नी से दूर है।

श्यामू उसका पड़ोसी है माना कुंवारा श्यामू रामू के साथी था । रामू के विदेश जाने के बाद रामू अपनी पत्नी के खर्चे के लिए बड़ी मेहनत से पैसा भेजता रहा और श्यामू और रामू की पत्नी गुलछरे उड़ाते रहे । विदेश से आने से पहले राम की कोई संतान भी हो गई जो श्यामू की है या संतान नहीं हुई रामू आया और रामू के अब तक की कमाई राम की पत्नी के पास है और उसका दिल श्यामू पास है। अब नए कानून के मुताबिक रामू पत्नी को तलाक देगा ।

इसमें पहली बात बताइएगा अगर कोई महिला गर्भवती नहीं है तो यह कैसे सिद्ध हो जाएगा कि वह किसके साथ रह रही है आप कहेंगे डीएनए टेस्ट हो जाएगा लेकिन उसकी भी तो समय सीमा है। और वह जान ही गया और कुछ अच्छा साबूत उसके पास हो तो रामू जैसा मजदूर क्या कर सकता है कानून तो श्यामू की तरफ है। दूसरी अवस्था उसकी पत्नी गर्भावती ही हो गई किसी तरह से ब्याज का पैसा लेकर या जेवर को गिरवी रखकर रामू विदेश कमाने गया था

लेकिन श्यामू उसका पैसा और घरवाली दोनों हड़प लिया अगर उसने तलाक दे दिया तबथोड़ा और आगे की बात करते हैं। दो 4 साल के भीतर ऐसी घटनाएं तो तमाम देखने को मिलने ही लगेंगीं और ज्यादातर आदमी बहुत सुग्राही हैं । इस स्थिति में जिसका परिवार घर पर रह रहा है और वह बाहर रह रहा है शायद ही पत्नियों को खर्च देने के बारे में सोचे इसका अर्थ क्या होगा आप अनुमान लगा सकते हैं। इसका एक ही अर्थ होगा परिवारों का बिखराव आप जरा सोच समझ कर देखिए । क्या धारा 497 को हटाना अनेक इंद्राणी मुखर्जी बनाने की साजिश नहीं है

Loading...

Comments