गायब हुए हजारों बच्चों के तलाश की फाइल धूल खा रहें हैं

 गायब हुए हजारों बच्चों के तलाश की फाइल धूल खा रहें हैं

स्वतंत्र प्रभात अम्बेडकर नगर


जिले के कई थानों में बच्चों के गुमशुदगी के रिपोर्ट दर्ज हो चुके हैं लेकिन अहम सवाल तो यह है कि इन बच्चों की अब तक सुरक्षा ढंग से घर वापसी कितना संभव हो सका है संभवता सटीक जवाब देने में अधिकारी असमर्थ पाते हैं

जिस तरह से प्रदेश के कई जिलों में बच्चों की गुमशुदगी के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं सरकार और प्रशासन को फिर से अपनी कार्यशैली में और योजनाओं पर चिंतन करने की जरूरत है कारण यह है कि बच्चे देश के भविष्य हैं उनको सुरक्षित जीवन देना सरकार की उत्तरदायित्व भी बनता है । गायब मासूम बच्चों की किन परिस्थितियों में जीवन यापन करते हैं इसका मात्र अनुमान लगा सकते हैं

और एकाध बार गुमशुदा बच्चों के मिलने पर उनकी दास्तान सुनकर आप  सभ्य समाज को हिलाकर रख देता है  अक्सर देखा गया है गुमशुदा बच्चों को अपराधी प्रवृत्ति के कुछ लोग बच्चों से भीख मंगवाने के कारोबार में धकेल देते हैं और खुदा खास्ता गुमशुदा हुये बच्चों में लड़की निकल आए तो तो उसे वेश्यावृत्ति के कारोबार में धकेल देते हैं ।

प्रदेश में करीब  50 हजार से ज्यादा बच्चे लापता हो चुके है बड़े भाग्यशाली मां बाप होते हैं जिनके बच्चे वापस मिल जाते हैं ।

और कहीं न कहीं पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में उदासीनता से अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते हैं पुलिस भी अक्सर बच्चों को ढूंढने के काम में बड़ा संजीदा नहीं दिखता कोई बड़ा प्रोफाइल मामला हुआ तो संजीव जुदा हो जाते नहीं तो खानापूर्ति का खेल खेल जाते हैं ।

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