अवैध कब्जा किए मकान पर जबरन की जा रही है, बोरिंग पुलिस प्रशासन मौन

अवैध कब्जा किए मकान पर जबरन की जा रही है, बोरिंग पुलिस प्रशासन मौन

 

संवाददाता हर्षित मिश्रा

कानपुर।

नगर थाना चकेरी अंतर्गत मोहल्ला-सफीपुर प्रथम/हरजिंदर नगर में अवैध रूप से सुशीला वर्मा व पंकज वर्मा ने मकान बेचने के बावजूद उसी मकान पर स्थानीय चौकी इंचार्ज की मिलीभगत से पहले तो कब्जा कर लिया है। अब मकान की खाली जमीन पर जबरन बोरिंग करवा रही हैं, जबकि इस मकान के असल मालिक श्याम बाबू अग्रवाल हैं।

जो कि जयपुर राजस्थान में रहते हैं,  मकान का विवाद न्यायालय में चल रहा है।
स्टे आर्डर भी लिया गया है, यह बोरिंग केवल चौकी इंचार्ज अमरेंद्र बहादुर की शय पर हो रही है। पीड़ित के मुताबिक पीड़ित पक्ष की चौकी इंचार्ज कोई भी मदद नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि आगे कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। 

यही कारण है कि चौकी इंचार्ज अमरेन्द्र बहादुर पीड़ित पक्ष को ही हमेशा परेशान करने की कोशिश में करते हैं। 
यही कारण है कि सुशीला वर्मा, पंकज वर्मा मकान बेचने के बाद भी चौकी इंचार्ज की सफर मकान पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं। ऐसे ही कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से पूरा विभाग बदनाम होता है

बोरिंग को तत्काल रुकने के लिए कोई कार्यवाही नहीं कर रहें हैं। जबकि पूरे मकान का मामला न्यायालय में है और स्टे है,  तो बोरिंग या किसी प्रकार के कार्य का कोई औचित्य नहीं बनता है? ऐसे में क्या बोरिंग कराने वाले के खिलाफ पुलिस विभाग कोई एक्शन नहीं लेंगा ??

इस पूरे मामले में थाना अध्यक्ष चकेरी एवं चौकी इंचार्ज अमरेंद्र बहादुर बिल्कुल भी निष्क्रिय नजर आ रहे हैं, जी हां बता दें कि, मामले को लेकर जब थानाध्यक्ष को कई बार फोन किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। हालांकि आज उन्होंने आश्वासन दिया है।

कल चौकी इंचार्ज अमरेंद्र बहादुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं राष्ट्रपति सुरक्षा ड्यूटी में व्यस्त हूँ, मैं कुछ नहीं कर सकता है। ऐसे में क्या कोई भी व्यक्ति किसी की जमीन पर या घर पर किसी भी तरह का कब्जा कर ले, या कोई अनुचित या अपराधिक कार्य करे और उस पर पुलिस कोई एक्शन नहीं लेगी???

यह क्या न्याय पूर्ण बात है?

चौकी इंचार्ज अमरेन्द्र बहादूर साहब ने ऐसे मौकौ पर अपना मोबाइल फोन बंद कर लेते हैं। अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, उक्त स्थान पर बोरिंग चालू भी धड़ल्ले से जारी है।

इस मकान के कब्जे से लेकर आज हो रही बोरिंग के प्रकरण में चौकी इंचार्ज अमरेन्द्र बहादूर व थाना प्रभारी चकेरी पूरी तरह से लिप्त हैं। जहां तक जानकारी प्राप्त हुई है कि इन लोगों ने अच्छी खासी रकम सुशीला वर्मा पंकज वर्मा से अच्छी खाशी रकम खा रखी है।

यही कारण है कि ये लोग इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। आलम यह है कि मीडिया द्वारा जानकारी देने।
पर थाना प्रभारी महोदय चकेरी बहुत ही अभद्र तरीके से बात करते हैं। जो कि सरासर गलत है, और सबसे बड़ी बात है, इस मामले में कानपुर जिले के पुलिस विभाग के सभी उच्च अधिकारियों को इस बात की सूचना दी गई। इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई। यह बड़ी ही शर्मनाक बात है।

ऐसे में कानपुर पुलिस का भ्रष्ट चेहरा उजागर होता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग इस तरह के भ्रष्ट अधिकारियों के ऊपर जब तक सख्ती नहीं बरतेगी तब तक ऐसे लोगों की वजह से विभाग पर सवालिया निशान उठते रहेंगें। और भ्रष्टाचार का ग्राफ बढ़ता रहेगा!!!, चाहे सरकार कुछ भी कर ले!! क्योंकि विभागीय आला अधिकारियों के द्वारा ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्यवाही न करके ज्यादातर मामले में हिलाहवाली करते ही करते हैं। यही कारण है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों का मनोबल बढ़ जाता है।

 यह उत्तर प्रदेश की कोई नई घटना नहीं है, पूरे उत्तर प्रदेश में ना जाने कितने जिले और कितने मोहल्लों में ऐसी घटनाएं आए दिन देखने को मिलती हैं।

जिनमें गलती स्थानीय दरोगा करता है, और बदनामी पूरे विभाग को झेलनी पड़ती है। यही कारण है कि जनता का पुलिस प्रशासन से विश्वास उठ चुका है। जिसके चलते आज पुलिस प्रशासन की भूमीका आज सवालों के लाल घेरे में है।

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