ग्राम पंचायतों में हो चुका मानक विहीन शौचालयों का निर्माण ,,अधिकारियों ने बांधी घूसखोरी की पट्टी

चरम पर भ्रष्टाचार : स्वच्छ भारत की बुनियाद महज दो चार इंच पर टिकी!

 

जिला संवाददाता नरेश गुप्ता की रिपोर्ट


स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए जा रहे शौचालय में घटिया सामग्री हो रही है इस्तेमाल

सिंधौली, मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत बनाये जा रहे सरकारी शौचालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे है। यूपी के सीतापुर जिले में सरकारी शौचालय बनाने के नाम पर ठेकेदारों द्वारा जमकर धांधली की जा रही है।

इन सरकारी शौचालय निर्माण में अधिकतर बाल मजदूर लगाए गए हैं। जबकि निर्माण सामग्री के नाम पर पीली ईंट के साथ जोड़ाई के लिए ज्यादा से ज्यादा बालू इस्तेमाल की जा रही है। इसमें मौरंग पूरी तरह से गायब हैं।

उत्तर प्रदेश और देश से यदि ऐसी ख़बरें आनी शुरू हो जाएं कि शौच करते हुए शौचालय की दीवार गिरने से महिला, पुरुष या किसी बच्चे की मौत हो गयी तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। क्योंकि स्वच्छ भारत की दीवार का जो निर्माण हो रहा है उसकी बुनियाद महज दो चार इंच पर टिकी हुई है।

शौचालयों की दीवार घटिया निर्माण सामग्री और घोटाले की परकाष्ठा पर टिकी हुई हैं। यही नहीं शौचालय के दरवाजे का वजन 3-4 किलोग्राम के आसपास है, जो हल्के जस्ते का बना हुआ है। शौचालय निर्माण के इस पूरे भ्रष्टाचार में ग्रामप्रधान से लेकर तहसील और जिले के संबंधित अधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं जिनकी जांच करने वाला कोई नहीं है।

केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश को खुले में शौच मुक्त करने का एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत सरकार एक परिवार की शौचालय के निर्माण के लिए 12 हजार रूपए दे रही है। इस बारह हजार रूपए में परिवार या तो खुद शौचालय का निर्माण करवाके ग्राम प्रधान के जरिए पैसे का दावा पेश करे।

या फिर ग्राम प्रधान द्वारा जो शौचालय बनवाया जा रहा है उसे स्वीकार कर ले। इसमें अधिकांश ग्रामीण ग्राम प्रधान द्वारा बनाए जा रहे शौचालय को ही स्वीकार कर रहे हैं। क्योंकि ज्यादातर ग्रामीण खुद शौचालय के निर्माण से पैसे की तंगी की बात कहके दूर हट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो पैसा नहीं है फिर जोड़तोड़ करके शौचालय बनवा भी लिए तो पता नहीं सरकार की तरफ से कब दावा किया गया पैसा मिले इसे कोई नहीं जानता।

शौचालयों के कमरे का निर्माण चार बाई चार फीट के चार इंच मोटी ईंट के दीवार से की जा रही है। शौचालय की उंचाई लगभग  छह फिट बनाया जा रहा है।   गांवों में बन रहे कई शौचालयों का निरीक्षण किया। उ.प्र. के सीतापुर जिले के विकास खंड सिंधौली  के गुलरिया ही नहीं समस्त ग्राम पंचायतों  में बन रहे शौचालयों की दीवार चिल्ला चिल्लाकर भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे है। यह इलाका भाजपा और सपा के दिग्गज नेताओं से भरा है। यहां के अधिकांश ग्राम प्रधान अंगूठा छाप  है। 


गुलरिया ग्राम पंचायत के लाभार्थियों की मानें तो । यहां के ज्यादातर शौचालयों में पाया गया कि ईंट बेहद घटिया किस्म की लगायी गयी है। ईंट की जुड़ाई के लिए जो मशाला तैयार किया जा रहा है उसमें घटिया किस्म की बालू और सीमेंट का इस्तेमाल हो रहा है। कई गांव वालों ने बताया कि इसमें मशाला एक और ग्यारह का लगाया जा रहा है। जो सीमेंट और बालू का बेहद घटिया अनुपात है। घटिया निर्माण सामग्री की वजह से कई शौचालयों की दीवार बनाते-बनाते गिर गयी। कई तैयार शौचालय निर्माण के दूसरे दिन ही जरा सी बारिश और तेज हवा की वजह से ढह जाने की कगार पर आ जाते हैं।

। यहां  बन रहे शौचालयों की नींव महज दो इंच गहरी है। जिसकी नींव दो-तीन इंच गहरी होगी वह शौचालय कितना टिकाऊ होगा।

शौचालयों के नींव और गुणवत्ता के मापदंड के बारे में जब ग्राम प्रधान से बात की गयी तो ग्राम प्रधान अवध नरेश ने रूढ़िवादिता शब्दों में बताया कि जो बन जा रहा है उसी में लोग खुश रहें। ज्यादा की उम्मीद न करें।

जब पूछा गया नींव की गहराई का मापदंड क्या है तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था। ये तो महज सिर्फ  तहसील के गांवों की कहानी है। सरकारी अभियान के तहत प्रदेश और देश में बन रहे यदि शौचालयों के निर्माण की जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जाएगा।

सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत बन रहे इन शौचालयों की बेहद घटिया निर्माण सामग्री, शौचालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार से साफ हो चुका है कि संबंधित अधिकारी और गांवों के ग्राम प्रधान न तो मोदी से डरते हैं न तो योगी से डर रहे हैं। हां आम आदमी बेहद घटिया निर्माण सामग्री से बन रहे इन शौचालयों में जाने से जरूर डरेगा।

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