प्रदेश की जनता के साथ सरकार के नुमाइंदे कर रहे ठगी

प्रदेश की जनता के साथ सरकार के नुमाइंदे कर रहे ठगी, केंद्र की योजना शौच मुक्त को लेकर गांवों में शौचालय बनाये जा रहे मानकों के खिलाफ

जिला संवाददाता नरेश गुप्ता की रिपोर्ट

गुलरिया,सिधौली,सीतापुर

 आम जनमानस के जीवन को बेहतर करने के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं पर जिम्मेदार ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि व अधिकारी बिना भ्रष्टाचार के अमली जामा नहीं पहनाते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त कराने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है जिससे आम जनमानस के जीवन में बदलाव आ सके l लेकिन गुलरिया ग्राम पंचायत के ग्रामप्रधान  अवध नरेश व ग्राम पंचायत अधिकारी व जनपद के उच्च अधिकारी एवं कर्मचारी मिलकर सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहे हैं l


       विकासखंड सिंधौली में जिला प्रशासन द्वारा खुले में शौच मुक्त करने के लिए सोचालय निर्माण कराया जा रहा है l जबकि बेसलाइन सूची के हजारों पात्रों परिवारों को धनराशि नहीं मिल पा रही है l जिसका साफ अर्थ यह है कि कागजों पर ही विकास खंड  को ओडीएफ घोषित जा रहा  है।

अधिकांश ग्राम सभाओं में ठेके पर या ग्राम प्रधान शौचालय मानकों को ताक पर रखकर बनवा रहे हैं जिनमें पीला ईट का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है l मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार द्वारा 700 पीला ईंट, 2 बोरी सीमेंट, 08बोरी बालू एवं नाम मात्र की  छत व ढक्कन देकर शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है अधिकांश शौचालयों में सीट भी नहीं रखी गई और लाभार्थियों के खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं ग्राम प्रधान बड़ी ही होशियारी से शौचालयों की फोटोग्राफी करा कर एवं लाभार्थियों से साइन करा कर खाते से पैसे उड़न छू कर देते हैं,


गुलरिया ग्राम पंचायत मैं निर्माण किए जा रहे शौचालयों की
ं कुल अनुमानित लागत ₹8000 में शौचालय तैयार हो रहे हैं l  गाँव वालोँ ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इसमें ग्राम प्रधान द्वारा गांवों में शौचालय ऐसे मानक को ताक पर रखकर बनाये जा रहे हैं जो 4 दिन बाद केवल कंडे रखने के कार्य आएंगे। केवल कोरम पूरा किया जा रहा है।


       आज विकास खंड सिंधौली की नब्बे पर्सेंट आबादी खुले में शौच जाने को विवश है l ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तैनात खंड प्रेरक व स्वच्छता ग्राही कागजों पर कार्य कर रहे हैं l जागरूकता टीम गांव में नहीं जा रही है।

एमआईएस फीडिंग फर्जी तरीके से की जा रही है। गड़बड़ी, शौचालय निर्माण में हो रही  ग्राम प्रधान अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके लाभार्थी के खाते से धनराशि निकलवाकर मानकों को ताक रखकर शौचालय बनवाए जा रहे हैं जो 4 दिन बाद गिर जाएंगे l ऐसे शौचालयों का क्या औचित्य है कि केवल खानापूर्ति की जा रही है l


       विकासखंड सिंधौली में  जमीनी स्तर पर ग्राम सभाओं में जागरूकता का कार्य केवल कागजों पर ही कर रही है l अधिकांश ग्राम सभाओं में बेसलाइन सूची के पात्रता सूची के आधार पर धनराशि नहीं निर्गत की गई है l

जब भी स्वतंत्र प्रभात  की टीम  ग्राम पंचायतों का जायजा लेने गांव में पहुचती हैंऔर गड़बड़ी मिलने पर खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर अधिकारियों को अवगत कराती है किंतु संबंधित अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती जिसके चलते जिले के ग्रामीण स्तर के लोगों को मानक विहीन निर्माण के शौचालयों का मालिक बना दिया जाता है और ग्राम प्रधान अपनी जेब भरते हैं

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