जर्जर सड़क के चलते ग्रामीणों में आक्रोश, कहा: रोड नहीं तो वोट नहीं

रविवार-को-सोनबरसा-में-एक-बैठक-कर-ग्रामीणों-ने-विगत-लोकसभा-चुनाव-की-भांति-इस-बार-विधान-सभा-के-भी-रोड-नहीं-तो-वोट-नहीं
रविवार-को-सोनबरसा-में-एक-बैठक-कर-ग्रामीणों-ने-विगत-लोकसभा-चुनाव-की-भांति-इस-बार-विधान-सभा-के-भी-रोड-नहीं-तो-वोट-नहीं"-के-नारे-के-साथ-चुनाव-का-बहिष्कार-करने-का-निर्णय-लिया-है।

स्वतंत्र प्रभात

सारण-ब्यूरो
मांझी/दाउदपुर (के०के०सिंह सेंगर)। प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाली मांझी-सोनबरसा-जैतपुर सड़क वर्षों से बदतर स्थिति में होने के कारण क्षेत्रीय ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश है।

रविवार को सोनबरसा में एक बैठक कर ग्रामीणों ने विगत लोक सभा चुनाव की भांति इस बार विधान सभा के भी “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

मांझी-सोनबरसा-जैतपुर सड़क वर्षों से बदतर स्थिति में होने के कारण क्षेत्रीय ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश है – स्वतंत्र प्रभात

बता दें कि राहगीरों की रूह कंपा देने वाली इस उपेक्षित सड़क की दयनीय स्थिति को लेकर विगत लोक सभा चुनाव का भी बहिष्कार किया था। उस वक्त जिला प्रशासन समेत कई नेताओं ने मनाने की कोशिश की थी और मतदान करने का आग्रह किया था।

लेकिन लोग रोड नहीं तो वोट नहीं की अपनी मांग पर अड़े रहे। लोक सभा चुनाव के एक साल बीत जाने के बाद भी इस समस्या का समाधान नही हो सका। बैठक के बाद आक्रोशित ग्रामीणों में धर्मेन्द्र सिंह, मनमोहन सिंह, मुकेश कुमार आर्य, विनोद सिंह, अजय तिवारी, श्याम बिहारी शर्मा, केदार राम आदि ने कहा कि कुछ माह पहले हीं निवर्तमान विधायक ने बताया था कि सड़क का चयन कर लिया गया है।

बहुत जल्द टेंडर होने वाला है। मगर यह आश्वासन भी गलत साबित हुआ है। स्थानीय सांसद ने अभी तक आश्वासन के सिवा कुछ नही किया है। ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग करीब दो दर्जन गांवों को सीधे प्रखंड मुख्यालय से जोड़ता है।

जिनमें अधिकतर गांव दाउदपुर थाना क्षेत्र के हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क वर्ष 1985 से लगातार इसी जर्जर स्थिति में है। इससे होकर अन्य वाहनों को कौन कहे ट्रैक्टर भी नही गुजर सकते। पैदल यात्री व दो पहिया चालक आदि रोज ब रोज इस सड़क पर दुर्घटना के शिकार होते हैं।

इधर से होकर शव यात्रा निकलना भी बेहद कठिन है। कई बार तो सड़क पर बने गड्ढों में असंतुलित होकर शव अर्थी से नीचे गिर जाता है। बीमार लोगों व प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल लाने ले जाने में बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उक्त मार्ग की बदहाली के कारण सड़क किनारे के गांवों में लोग नए रिश्ते के लिए भी आने से परहेज करते हैं। पुलिस की गश्ती टीम भी इस रास्ते से आने -जाने से परहेज करती है।

इस समस्या से निजात के लिए ग्रामीणों ने अनेक बार जन प्रतिनिधियों व सम्बन्धित नेताओं से सड़क निर्माण की गुहार लगाई। कई बार प्रखंड मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव पूर्व यदि सड़क का निर्माण शुरू नही किया गया तो आसन्न विधान सभा चुनाव में भी मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।