भारत-नेपाल सीमा पर, लागू है पाबन्दियॉं, गंडक बराज मार्ग पर, टकटकी लगाये लोग –

भारत-नेपाल सीमा पर, लागू है पाबन्दियॉं, गंडक-बराज-मार्ग-पर,-टकटकी-लगाये-लोग


विश्वव्यापी आपदा से दुनिया अभी भी दो-चार हो रही है। कोरोना कहर से जीव-जतन की जुगत किये देश की मोदी सरकार ने देशव्यापी लॉक-डाउन को अमलीजामा तो पहनाया। परन्तु अब जब देश के अमूमन हर कोने तक संक्रमण के वायरस पांव पसार दिये हैं केन्द्र सरकार अपने पांचवे चरण के लॉक-डाउन में जन-जीवन को पटरी पर लाने के लिए छूट क्या दी, इसे

आधार बना बिहार में नीतीश सरकार ने कोरेन्टाइन क्षेत्रों को छोड समूल बिहार को अनलॉक कर दिया।
     बीते सोमवार से एहतियात बरतते हुए प्रदेश में आवागमन, दूकानें, होटल, रेस्मटुरेन्ट जहां खोल दिए गये वहीं मन्दिर,  मस्जिद, गिरिजा और गुरूद्वारों के पट पूजन पाठन के लिए खोल दिया गया। ऐसे में राज्य सरकार के इस फैसले से उत्सुक

भारत-नेपाल सीमा पर लोगों के बीच कौतूहल भरा माहौल महसूस किया जा रहा है। लेकिन, सीमापार की आवाजाही को मंजूरी ना मिलने से सीमा पर स्थित भारत सहित नेपाल में भी उदासी के खामोश बादल छाये दिख रहे हैं। भारत के वाल्मीकिनगर के बाजार पर जीवन की निर्भरता बनानेवाले नेपाली मुल्क के सीमावर्ती क्षेत्र में हजारों की आबादी से जुडी अवाम रात में करवट

बदलते प्रत्येक सुबह इस उम्मीद से जागने लगी है मानों भारत-सरकार सीमावर्ती नेपाली अवाम के आवाजाही पर से लगी पाबंदियों में ढील दे दी हो और दोनों मित्र देशों को जोडनेवाला ऐतिहासिक गंडक बराज मार्ग पहले के अनुरूप जनोपयोगी हो

लोगों के आवागमन से पुन: गुलजार होता दिखे, परन्तु लोगों की यह हशरत अभी पूरा होता नजर नहीं आता। जिससे सीमावर्ती नेपाली लोगों को अनायास घर खर्चा से जुडी महंगाई की मार झेलने की विवशता है।सीमापार नेपाल के त्रिवेणी

गा. वि. स. के प्रमुख समाजसेवी गोपालचन्द्र ढकाल ने सेल-फोन पर जताया कि महामारी के लॉक-डाउन ने सीमावर्ती जनता में त्रासदी का सबब दे दिया है। बकौल श्री ढकाल भारत से लगी किन्हीं चुनिन्दा प्रवेश मार्ग के जरिए हीं सामानों की आवक

होने के चलते इनके आस-पास के दर्जनों गांव की जनता को खान-पान और रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए अतिरिक्त रूपये खर्चने की मजबूरी है।
      बताते चले कि, नेपाल से आवाजाही बन्द होने से दस रूपयों किलो बिकनेवाले नमक पर तीनगुणा खर्च वहन करने के लिए नेपाल के सीमावर्ती लोग विवश हैं। जबकि, गोपाल ढकाल के मुताबिक नेपाल के इस क्षेत्र में इस महामारी का असर बहुत

हीं कम यह मानें की ना के बराबर है, जिन दो-तीन लोगों के संक्रमित होने की शंका दिखी उन्हें सुरक्षित आइसोलेशन वार्ड में इलाज के हवाले कर दिया गया है। बहरहाल लॉक-डाउन से गंडक बराज मार्ग सन्नाटे का चादर ओढ समूल सीमाक्षेत्र में निस्तब्धता का माहौल कायम कर दिया है, जहां दूर-दूर तक किसी इंसान की हलचल नहीं दिखाई देता।   

गंडक बराज पर लगा बैरियर आवाजाही पर लगाया पाबंदी।