आतंकवाद की जननीः पाकिस्तान

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 स्वतंत्र प्रभात :
15 जनवरी को भारत का नौसेना दिवस मनाया गया।   नौसेना दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना प्रमुख मनोज नरवाने  ने कहा कि – “पाकिस्तान की तरफ से जम्मू कश्मीर राज्य की एलओसी सीमा पर लगभग 200 आतंकवादियों ने बंकर बना रखे हैं इनका पता भारतीय नौसेना ने पता लगाया है।
 वहीं उन्होंने कहा कि-” लगातार पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जा रहा है जिसका भारतीय मूल नौसेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया है और हर बार पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया गया है”
 पाकिस्तान की छवि पूरी दुनिया में एक  आतंकवाद को पनहा देने वाले राष्ट्र के रूप में हुई है चाहे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी छवि को साफ करने में लगा रहा हो । चाहे गए फिर 2019 में पुलवामा हमला हो अन्य घटनाएं हो हर घटना में शामिल पाकिस्तान में बैठे आलाकमान आतंकवादी समूह ने ली है और पाकिस्तान सरकार ने हर तरफ से इन को बचाने की कोशिश की है।
 खैर अब नजर पाकिस्तान और भारत के इतिहास पर डालते हैं 1947 से पूर्व पाकिस्तान भारत कहीं भूभाग था लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के बाद यानी 1947 में भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग रास्तों में बांट दिया और भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना जबकि पाकिस्तान में मिलाजुला लोकतंत्र है।
 उसकी छवि एक आतंकवादी राष्ट्र के रूप में उभरी और हर बार अपनी छवि को धूमिल करने में आतंकवाद ने भरपूर काम किया है। चाहे फिर  अमेरिका में आतंकवादी हमला हो जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान में बैठे ओसामा बिन लादेन की हो जिसे कौन नहीं जानता अमेरिका ने पाकिस्तान के कराची शहर में ओसामा बिन लादेन को मारा था इससे ही पता चल जाता है की पाकिस्तान की नियत कितनी साफ है।
 और एफएटीएफ ने अपनी काली सूची में डाल रखा है जिससे बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान एक जालपा जी करता रहता है और वहां की आलाकमान पाकिस्तान की सरकार से समर्थन पाकर आतंकवाद को बढ़ावा देती रहती हैं
 भारत दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है जो पाकिस्तान कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता आज कौन नहीं जानता कि पाकिस्तान चीन प्रायोजित राष्ट्र है जो चीन की वर्ल्ड रोड एंड एनी सिटी परियोजना का हिस्सा है ? जिसका भारत ने विरोध किया है।
 निष्कर्ष के तौर पर भारत और पाकिस्तान को मिलकर बात करनी चाहिए ,जिस पर एक संयुक्त बैठक आयोजित की जानी चाहिए, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि- “पाकिस्तान के साथ बात तभी हो सकती है जब वह आतंकवाद को खत्म करेगा और साथ ही उन्होंने कहा था कि “बात और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते”
 और भारत , पाकिस्तान में शांति और स्थिरता चाहता है क्योंकि पड़ोस के देश में शांति होना परम आवश्यक हो जाता है।
सन्तोष गंगवार (पीलीभीत)