नकारा नेतृत्व की कमी से डूब रही है भदोही में कांग्रेस की नैया ।

नकारा नेतृत्व की कमी से डूब रही है भदोही में कांग्रेस की नैया ।

ए •के• फारूखी (रिपोर्टर )

ज्ञानपुर, भदोही ।

लगातार दो लोकसभा चुनावों में भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलने वाली कांग्रेस पार्टी ने शायद आगामी चुनाव के पहले ही यह मान लिया है कि अब उसे आगे आने वाले चुनाव में ऐसी ही पराजय स्वीकार करने के लिए तैयार रहना होगा।
बताते चलें कि कुछ बुजुर्ग व अनुभवी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के चलते ही भदोही जिले में आज कांग्रेस को दुर्दिन के दौर देखने पड़ रहे हैं।

जिसके चलते विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों में पार्टी की जीत का कोई संभावना नहीं है। बीते दिनों पूर्व जिलाध्यक्ष नीलम मिश्रा के इस्तीफे से उपजी परिस्थितियों को पार्टी को संकट में इजाफा करने वाला बताते हुए कहा जाता रहा है कि भदोही जनपद में कांग्रेस के पास कोई तगड़ा जिलाध्यक्ष नहीं है। कांग्रेस आज भी इस दौर में डूबती नैया के सहारे चल रही है ।

इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस में कोई नेता नीति और नियति नहीं बची है गौरतलब है कि वर्तमान समय में कांग्रेस को आत्ममंथन की सख्त जरूरत है। उसे एक ऐसा युवा ऊर्जावान जिलाध्यक्ष की जरूरत है । जो सबको साथ लेकर चल सके। इसलिए पार्टी को आत्ममंथन की जरूरत है। परन्तु जबसे जिलाध्यक्ष देवनारायण यादव को बनाया गया है ।पार्टी को किसी विधियों से संकेत नहीं मिलते हैं, कि उनकी पार्टी आत्मचिंतन के लिए तैयार है।

पार्टी ने पूर्व जिलाध्यक्ष नीलम मिश्रा को हटाकर जनपद में देवनारायण यादव को प्रोजेक्ट करने का जो फैसला लिया और वरिष्ठ कांग्रेसियों की उपेक्षा की। उससे पार्टी में असंतोष फैल गया। इतना ही नहीं बीते लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पराजय के कारणों की खोज करने की जहमत नहीं उठाई और न ही ऐसी कोई रुचि दिखाई।

जिससे यह संकेत मिल सके कि आगामी चुनाव में पार्टी अपना खोया हुआ गौरव अंकित कर सकेगी या नहीं। नवागत जिलाध्यक्ष के मनोनयन का लाभ भले ही कांग्रेस को मिले या न मिले, यह तो भविष्य पर निर्भर है ,जो चुनाव के नतीजे घोषित होने पर ही पता चल सकेगा। यह भी बताते चलें कि जनपद में कांग्रेस के संगठन में के कोई भी अनुभवी पदाधिकारी शामिल नहीं किए गए हैं। जिसके चलते पार्टी के अंदर गहरा असंतोष फैला हुआ है।