जयंती पर याद किए गए मुंशी प्रेमचंद

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 स्वतंत्र प्रभात


भाटपाररानी,देवरिया-भाटपाररानी तहसील क्षेत्र के बलिवन बाजार में शुक्रवार को महान उपन्यासकार व कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई।इस मौके पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए बिहार से पधारे प्रधानाचार्य मार्कण्डेय तिवारी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की साहित्य में जीवन की सच्ची तस्वीरें मिलती हैं।उनकी साहित्य जीवन की यथार्थ का प्रतिनिधित्व करती हैं।उन्होंने अपनी साहित्य में वास्तविक जीवन का चित्र खींचा है।अतः प्रेमचंद अपनी कृतियों के बदौलत साहित्य के पन्नों में सदा जिंदा रहेंगे।श्रीराम कुशवाहा ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में अदना से लेकर आला तक हर एक इंसान की समस्याओं को उजागर किया है।समाजसेवी जटाशंकर सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने जीवन मे जो कुछ देखा व महसूस किया,

उसे ही साहित्य का हिस्सा बनाया।प्रभुनाथ पासवान ने कहा कि व्यक्ति अपने कर्मो व संघर्षों के बदौलत अपना मुकाम बनाता है।बैरिस्टर चौहान ने कहा कि प्रेमचंद की साहित्य में जो भाव व रोचकता मिलती है, वह कहीं नहीं मिलती।धर्मनाथ सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने हकीकत में सिद्ध कर दिया कि साहित्य समाज का दर्पण है।कवि मकसूद अहमद भोपतपुरी ने अपनी रचना-समाजिक बुराइयों पर कलम चलाकर उन्हें कराया बंद,शत-शत तुझे नमन है आज मुंशी प्रेमचंद–प्रस्तुत कर मुंशी प्रेमचंद के जीवन आदर्शों पर प्रकाश डाला।वहीं उन्होंने  अपनी समसामयिक रचना-कई दिनों से लगातार तेज बारिश हो रही है,धीरे-धीरे जिंदगी लावारिश हो रही

पेश कर खराब मौसम को रेखांकित किया।डॉ रंगीला हिंदुस्तानी ने अपना गजल-है तुझको मुझसे मिलन की आहट,तो आस मुझको भी लग रही है प्रस्तुत किया।डॉ वेदप्रकाश तिवारी ने अपनी रचना-ऐसी विचारधाराएं हो जाती हैं मौन, सत्ता के गलियारों तक–पेश किया।पं० मधुसूदन द्विवेदी ने कजरी गीत- रुन -झुन बाजेला रे पायलिया, राधा बावरिया नाचेना—पेश किया।कार्यक्रम के संयोजक छोटेलाल कुशवाहा ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया।कार्यक्रम का संचालन कवि व पत्रकार मकसूद अहमद भोपतपुरी ने किया।यहां मुख्य रूप से श्रीकांत गुप्ता,शमशेर अली,लव गुप्ता,राम कुंवर प्रसाद आदि मौजूद रहे।