जनता की संपत्ति रेलवे को बेचकर मोदी सरकार राष्ट्र विरोधी कार्यवाही कर रही हैं- माले

मोदी-सरकार-द्वारा-जनता-की-संपत्ति-रेलवे-को-बेचने-के-खिलाफ-भाकपा-माले-ने-नरकटियागंज-रेलवे-स्टेशन-पर-विरोध-प्रदर्शन-किया-विरोध--प्रदर्शन-के-दौरान-भाकपा-माले-केन्द्रीय-कमिटी-सदस्य-विरेन्द्र-प्रसाद-गुप्ता-ने-कहा-कि-अभी-तक -भारतीय-ट्रेनों-का-संचालन-और-प्रबंधन-भारतीय-रेल-ही-करता-था-लेकिन-अब-मोदी-सरकार-रेलवे-को-निजी-हाथो-मे-यानी-अपने-मित्र-पूंजीपतियों-के-हाथो-बेच-रही-हैं,
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स्वतंत्र प्रभात
बेतिया, (मोहन सिंह )। मोदी सरकार द्वारा जनता की संपत्ति रेलवे को बेचने के खिलाफ भाकपा माले ने नरकटियागंज रेलवे स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया,विरोध प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य विरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि अभी तक भारतीय ट्रेनों का संचालन और प्रबंधन भारतीय रेल ही करता था।

लेकिन अब मोदी सरकार रेलवे को निजी हाथो मे यानी अपने मित्र पुजिंपतियो के हाथो बेच रही हैं, अभी तक 151 रेलगाड़ियों को 35 साल के लिए बेच दिया है। वहीं रेलवे स्टेशनो लगातार बेच रही हैं जैसे लखनऊ चार बाग,पटना, भोपाल जैसे सैकड़ों स्टेशनों को बेच दिया गया है।

कुछ दिनों में देश के सभी रेलवे स्टेशनों को बेच दिया जाऐगा, जिसका खमियाज़ा जनता को झेलना पड़ेगा, अभी पूना स्टेशन का दो घंटे के लिए प्लेटफार्म टिकट 50 रूपये कर दिया गया है, जो नीजिकरण का एक झलक हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री औंर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि रेलवे का निजीकरण नहीं होने जा रहा है।

लेकिन रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का कहना है कि अप्रैल 2023 तक सभी रेल निजी  हाथों को बेच दिया जाऐगा,नीजि रेल सेवाएं शुरू हो जाएंगी और ये भारत के रेलवे नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों के संचालन में निजी क्षेत्र के निवेश का पहला प्रयास है।

जाहिर है, इसके बाद रेलवे की जमीन और अन्य परिसंपत्तियां भी निजी क्षेत्र को सौंपने की कवायद की जाएगी। माले नेता मुखतार मियां ने कहा कि रेलवे के निजीकरण से सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां खत्म होंगी।

151 ट्रेनों के एलान के बाद रेलवे ने सभी मंडल रेल प्रबंधकों को पत्र जारी कर कहा है कि उन कर्मचारियों की सूची तैयार करें, जो 2020 की पहली तिमाही में 55 साल के हो गए या जिनकी सेवा अवधि के 30 साल पूरे हो गए।

उन सभी को समय-पूर्व सेवानिवृत्ति का ऑफर दिया जाएगा। इनकी संख्या पूरे रेलवे में कम से कम तीन लाख बताई जा रही है। जिनको नौकरी से जबर्दस्ती निकाल दिया जाएगा।