क्षेत्र पंचायत के कार्यो मेंं बीडीओ व लेखाकार ने की बड़े पैमाने पर धांधली


एक ही ठेकेदार को दिये गये अधिकांश कार्यो को ठेके, फर्म का जीएसटी नम्बर भी सवालों के घेरे मेंं
वर्ष 2018-19 मेंं राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत कराये गये 96 लाख रूपये के कार्य
राहुल शुक्ला

ललितपुर। पंचायती राज अधिनियम के अन्तर्गत ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों को सशक्त बनाने के लिये हर वर्ष राज्य वित्त आयोग सहित तमाम योजनाओं से बजट का आवंटन होता है परन्तु इन पंचायती संस्थाओं के पदों पर बैठे राजनैतिक व्यक्तियों द्वारा जो कार्य योजनाओं के अन्तर्गत कराये जाते हैं उनमें बड़े पैमाने पर धांधली की जाती है। विकासखण्ड बार की क्षेत्र पंचायत में वित्तीय वर्ष 2018-19 व 2019-20 में राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत कराये गये कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली व वित्तीय अनियमिततायें की गई हैं। जिस दर पर निविदाएं प्राप्त हुईं थी उससे अधिक दर पर कार्यों का आवंटन कर दिया गया है। इसके अलाबा सारे कार्य एक ही फर्म को आवंटित किये गये हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिये सरकार द्वारा हर वर्ष पंचायती राज संस्थाओं को करोड़ों रूपये का बजट आवंटित किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में विकासखण्ड बार की क्षेत्र पंचायत को 96 लाख 35 हजार रूपये का बजट आवंटित हुआ था। इस बजट से क्षेत्र पंचायत बार द्वारा जो कार्य कराये गये हैं उसमें बड़े पैमाने पर धांधली ब्लॉक प्रमुख, खण्ड विकास अधिकारी व लेखाकार द्वारा की गयी है। 14 से अधिक निर्माण कार्यों के लिये निविदा का प्रकाशन खण्ड विकास अधिकारी द्वारा किया गया था। जो कार्य कराये गये हैं उसमें भैलोनी लोध में भगत जी के घर से शमशान घाट तक सीसी रोड का निर्माण (लागत 4.17 लाख), ग्राम बुरागांव में सहरिया मुहल्ला में डॉ. गोविन्द के मकान से अमरकान्त के मकान तक नाली निर्माण (लागत 9.68 लाख), धीरज पाल के मकान से मुलायम जोगी के मकान तक पेवर ब्रिक्स (लागत 4.86 लाख), ग्राम बिल्ला में टॉवर से अजुद्दी के मकान तक सोलिंग मिट्टी कार्य (लागत 9.21 लाख), ग्राम बिल्ला में अजुद्दी के मकान से तुलसी के खेत तक सोलिंग कार्य (लागत 9.22 लाख), ग्राम बिल्ला में तुलसी के खेत से गम्भीर के खेत तक सोलिंग कार्य (लागत 10.33 लाख), ग्राम बिल्ला में गम्भीर के खेत से गुलमोहड़ तक सोलिंग कार्य (लागत 10.48 लाख), ग्राम दशरारा में सोलिंग कार्य (लागत 4.88 लाख), ग्राम बुरागांव में नरसिंह मन्दिर से डाकघर तक पेवर ब्रिक्स कार्य (लागत5.56 लाख), ग्राम मथुराडांग में कसर मुहल्ला में पुलिया निर्माण कार्य (लागत 1.72 लाख), ग्राम सूरीखुर्द में मैन रोड से बल्देव के खेत तक सम्पर्क मार्ग (लागत 5.57 लाख), ग्राम सूरीखुर्द में बल्देव राजपूत के खेत से गुण्डे चढ़ार के खेत तक सम्पर्क मार्ग (लागत 5.57 लाख), ग्राम सूरीखुर्द में गुण्डे चढ़ार के खेत से पम्पा रजक के खेत तक सम्पर्क मार्ग (लागत 6.51 लाख) सहित आदि निर्माण कार्य शामिल हैं। इन कार्यों की गुणवत्ता घटिया किस्म की है।
उक्त कार्यों की जब निविदा प्रक्रिया सम्पन्न हो रही थी तो तुलनात्मक चार्ट में जिस ठेकेदार की दरें सबसे निम्र थीं उक्त ठेकेदार को ठेका आवंटित किया गया है। परन्तु निर्माण कार्यों का अनुबंध तुलनात्मक चार्ट में अंकित धनराशि से न कर अनुमानित लागत की दर से किया गया जिससे स्पष्ट है कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह किया गया है जिसमें लेखाकार व खण्ड विकास अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। इस वर्ष जितने भी निर्माण कार्यों के टेण्डर क्षेत्र पंचायत बार द्वारा किये गये उसमें से अधिकांश का आवंटन विभाग के एक अवर अभियंता की फर्म को किया गया। जिस समय निर्माण कार्यों का आवंटन हुआ था उस समय इस फर्म का जीएसटी नंबर भी नहीं था। प्रश्र उठता है कि किस प्रकार इस फर्म ने निविदा प्रक्रिया मेंं भाग ले लिया और उसे ठेकों का आवंटन भी कर दिया गया । इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2019-20 मेंं क्षेत्र पंचायत बार मेंं कराये गये कार्यो में भी धांधली की गयी है।

भ्रष्टाचार के बल पर लेखाकार ने अर्जित की अकूत अवैध संपत्ति

क्षेत्र पंचायत / विकासखण्ड बार विकास कार्यो मेंं बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है। यहां तैनात लेखाकार द्वारा हर कार्य में अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 मेंं मनरेगा योजना मेंं परिसंपत्तियों पर स्थापित होने वाले साइन बोर्ड में भी बड़ा घोटाला किया गया। नियमों को ताक पर रखकर एक विशेष ठेकेदार से कई ग्राम पंचायतों में 15 लाख रूपये कीमत के साईन बोर्ड क्रय कर लिये गये। जबकि आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग ने निर्देश दिये थे कि महिला स्वयं सहायता समूह से ही साईन बोर्ड क्रय किये जाये, परन्तु नियमोंं को ताक पर रख कर कमीशन की लालच मेंं पेंंटर से साईन बोर्ड क्रय कर लिये गये। इसी प्रकार अपने एक रिश्तेदार से लाखों रूपये के वृक्ष मनरेगा योजना के अन्तर्गत क्रय किये गये है। जो वृक्ष क्रय किये गये है उनका मूल्य उद्यान विभाग व वन विभाग की सरकारी नर्सरियों मेंं मिलने वाले वृक्षों से कई गुना अधिक है। इस लेखाकार का रिटायरमेंट भी इसी वर्ष है। इस कारण यह लेखाकार वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत प्राप्त धनराशि के टेंडर शीघ्र कराना चाहता है कि कमीशन का बंटवारा अपने रहते कर सके। अपनी सेवा काल मेंं लेखाकार द्वारा करोड़ेा रूपये की अवैध संपत्ति भ्रष्टाचार के बल पर अर्जित की गयी है।
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