अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रा दिवस

Pooja Tiwari – Seattle, Washington (USA)
स्वतंत्र प्रभात (वाशिंगटन)

अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रा दिवस हर साल 3 मई को दुनिया भर में मनाया जाता जाता है। 1991 में यूनेस्को (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization) और संयुक्त राष्ट्र संघ के “जन सूचना विभाग ” ने मिल कर इसे मनाने का निर्णय लिया है। 3 मई का दिन लोकतंत्र के इतिहास में काफी अहम दिन है। भारत में प्रेस की स्वतन्त्रा भारतीय संबिधान के अनुच्छेद -19 में भारतीयों को दिय गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार से  सुनिश्चित की गयी है। हर बार इस पर अलग-अलग थीम तैयार की जाती है। और हर बार अलग-अलग देश को इसकी मेजबानी मिलती है। इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य यह है कि प्रेस की आजादी के महत्व को दुनिया भर के लोगों को आगाह कराया जाय। और इसी के साथ ही सरकार को भी आगाह कराया जाय की लोगों को अपने विचारों की अभिव्यक्ति का पूरा अधिकार है। प्रेस समाज को आइना दिखाने का 1 महत्वपूर्ण औजार है। इसलिए मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, और जो भी समाचार दुनिया के सामने रखे पूर्ण रूप से सही और निष्पक्ष होना चाहिए।  यूनेस्को द्वारा 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतन्त्रा दिवस पर “गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम” प्राइज भी दिया जाता है। पहला वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज चीन के पत्रकार Gao Yu को मिला है। अब तक भारत को 1 बार भी यह प्राइज नहीं मिला है। 

पहली बार कब मनाया गया था :-

1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए 1 पहल की थी। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस दिवस का आयोजन किया। तब से हर साल 3 मई को मनाया जाता है। 

विश्व प्रेस दिवस 2020:-

दुनिया भर में मई 2020 के पहले रविवार को यानी 3 मई को अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रा दिवस मनाया जायेगा। इस बार की थीम है “Journalism without Fear or Favour”.  

27वें अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रा दिवस के कार्यक्रम की मेजबानी नीदरलैंड और यूनेस्को मिलकर करेंगे। 

वार्षिक विश्लेषण के अनुसार वैश्विक प्रेस सूचकांक में 180 देशों के समूह में भारत 2 स्थान नीचे उतरकर 142वें नंबर पर आ गया है।  

द वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2020 के अनुसार भारत में 2019 में किसी भी पत्रकार की हत्या नहीं हुई और इस तरह देश के मीडिया के लिए सुरक्षा स्थिति में सुधार नजर आया। वर्ष 2018 में 6 पत्रकारों की हत्या कर दी गयी थी। 

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में, यूनेस्को नई दिल्ली COVID-19 के समय में रिपोर्टिंग पर एक घंटे का टॉक शो आयोजित कर रहा है। पत्रकारों के साथ-साथ सामुदायिक मीडिया पेशेवरों के सामने आने वाली चुनौतियों पर गहन ध्यान देने के साथ, इस महामारी के दौरान स्वतंत्र पत्रकारिता के विशेष महत्व पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसका शीर्षक है “पहले से कहीं अधिक हमें तथ्यों की आवश्यकता है। पहले से कहीं ज्यादा हमें प्रेस की आजादी चाहिए ”।

क्यों मनाया जाता है:-

कई देशों में पत्रकारों और प्रेस पर अत्याचार किये जाते हैं। उनको अपने हिसाब से चलने को बोला जाता है, अगर मिडिया उन देशों के मर्जी से नहीं चलती तो उनको प्रताड़ित किया जाता है। मीडिया संगठनों को बंद तक करने की कोशिश की जाती है। उनके पत्रकारों, सम्पादकों को डराया धमकाया जाता है, इतने से ही नहीं उनकी हत्या भी कर दी जाती है। इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए दुनिया भर में प्रेस की आजादी का दिन मनाया जाता है। 

प्रेस की स्वतन्त्रा का मतलब हर किसी को अपनी राय कायम करने और सार्वजानिक तौर पर उसे जाहिर करने का हक़ है। वैसे भी भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक जरूरत है। इसी के माध्यम से हम दुनिया भर की खबर पाते हैं कि हमारे समाज में क्या हो रहा है। 

कैसे मनाया जाता है :-

तरह-तरह के आयोजन किये जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उलेखनीय कार्य करने वालों को सम्मान से नवाजा जाता है। कॉलेज ,स्कूल सरकारी संस्थाओं में लेख लिखे जाते हैं, पत्रकारिता के ऊपर निबंध लिखे जाते है, और लोगों को इसकी स्वतंत्रा से अवगत कराया जाता है 

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