राफेल सौदे में दलाली का जिन्न पुनः बाहर आया, स्वीडन रेडियो ने पोल खोली।

राफेल सौदे में दलाली का जिन्न पुनः बाहर आया, स्वीडन रेडियो ने पोल खोली।

‌स्वतन्त्र प्रभात-प्रयाग राज।

‌जिस तरह से स्वीडेन रेडियो ने बोफोर्स सौदे में दलाली दिए जाने की पोल खोली थी उसी तरह फ्रांस की समाचार वेबसाइट मीडिया पार्ट ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार की आशंकाओं के साथ सवाल उठाए हैं। अब तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जो राफेल फैसले और बाबरी रामजन्म भूमि विवाद फैसले के पुरस्कार स्वरूप राज्यसभा सदस्यता का आनन्द ले रहे हैं, वे क्या कहेंगे ? उन्होंने तो राफेल सौदे में किसी तरह के भ्रष्टाचार और अनियमितता को नकारते हुए मोदी सरकार को क्लीनचिट दे दिया है। रिपोर्ट में देफ्सिस सल्युसंस (Defsys Solutions) का मालिकाना रखने वाले परिवार से जुड़े सुषेण गुप्ता का नाम भी आया है जो रक्षा सौदों में बिचौलिए रहे और दैसो के एजेंट भी। सुषेण गुप्ता को 2019 में अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार भी किया था।

भाजपा ने भारतीय वायुसेना के लिए फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे के मामले में उच्चतम न्यायालय से क्लीन चिट मिलने को सत्य की जीत करार दिया था और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस और गांधी से बेबुनियाद एवं शर्मनाक अभियान चलाने के लिए देश से माफी मांगने को कहा था पर फ़्रांस की वेबसाइट मीडिया पार्ट के इस खुलासे पर अब क्या कहेगी ?
‌फ्रांस की समाचार वेबसाइट मीडिया पार्ट ने एक बार फिर राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार की आशंकाओं के साथ सवाल उठाए हैं। फ्रेंच भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी एएफए की जांच रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक, दैसो एविएशन ने कुछ बोगस नजर आने वाले भुगतान किए हैं। कंपनी के 2017 के खातों के ऑडिट में 5 लाख 8 हजार 925 यूरो (4.39 करोड़ रुपए) क्लाइंट गिफ्ट के नाम पर खर्च दर्शाए गए। मगर इतनी बड़ी धनराशि का कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। मॉडल बनाने वाली कंपनी का मार्च 2017 का एक बिल ही उपलब्ध कराया गया।
‌मीडिया पार्ट की रिपोर्ट के अनुसार एएफए की छानबीन में दैसो एविएशन ने बताया कि उसने राफेल विमान के 50 मॉडल एक भारतीय कंपनी से बनवाए। इन मॉडल के लिए 20 हजार यूरो (17 लाख रुपए) प्रति नग के हिसाब से भुगतान किया गया। हालांकि, यह मॉडल कहां और कैसे इस्तेमाल किए गए इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि मॉडल बनाने का काम कथित तौर पर भारत की कंपनी देफ्सिस सेल्युसंस (Defsys Solutions) को दिया गया। यह कंपनी दैसो की भारत में सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी है।
फ्रांसीसी वेबसाइट के इस दावे के बाद एक बार फिर राफेल रक्षा सौदों का जिन्न बाहर आ गया है और आने वाले दिनों में मोदी सरकार और भाजपा का पीछा उसी तरह करेगा जैसा पीछा बोफोर्स दलाली के मामले में हुआ था। बोफोर्स में तो सिर्फ दलाली का ही आरोप था पर राफेल सौदे में तो अनियमितताओं की एक लम्बी फेहरिश्त है।
‌कांग्रेस ने और प्रशांत भूषण ने राफेल सौदे में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। आरोप था कि जिस लड़ाकू विमान को यूपीए सरकार ने 526 करोड़ रुपए में लिया था उसे एनडीए सरकार ने 1670 करोड़ प्रति विमान की दर से लिया। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया था कि सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस सौदे में शामिल क्यों नहीं किया गया। इस फैसले के खिलाफ लगाई गई याचिका को उच्चतम न्यायालय में तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 14 नवंबर, 2019 को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस मामले की जांच की जरूरत नहीं है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमें नहीं लगता है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में किसी एफआईआर या जांच की जरूरत है। अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को राफेल सौदे की प्रॉसेस और सरकार के पार्टनर चुनाव में किसी तरह के फेवर के आरोपों को बेबुनियाद बताया था। बाद में उच्चतम न्यायालय ने राफेल पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाएं भी ख़ारिज कर दी थीं।
‌पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राफेल सौदे में हुए भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाया था। राफेल डील को लेकर अनिल अंबानी को हजारों करोड़ का फायदा पहुंचाने का आरोप राहुल गांधी और उनकी पार्टी सीधे तौर पर पीएम मोदी पर लगाया था। कांग्रेस ने लगातार इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा था।

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