किछौछा नगर में एसीसी सीमेंट मामले में जांच टीम संदेह के घेरे में पीड़ित परेशान

ब्यूरो रिपोर्ट – विवेक पाण्डेय


अंबेडकरनगर। बसखारी थाना क्षेत्र के नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा में एसीसी सीमेंट के घटिया क्वालिटी का मामला तब प्रकाश में आया जब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण हो रहे मकान में पिलर की ढलाई हुई। एसीसी सीमेंट से तैयार पिलर ईट की हल्की सी चोट मारने पर भरभरा का टूटने लगा। तब से आजतक निर्माण कार्य रुका पड़ा है। प्रथम दृष्टा जो भी देख रहा बस यही कह रहा है साहब यह तो घटिया सीमेंट का कारनामा है।
इस पर मकान बनाना खतरे से खाली नहीं है। और जब इस घटना को पीड़ित ने स्थानीय दुकानदार महेश अग्रहरि पुत्र रामप्रताप अग्रहरी निवासी किछौछा को तत्काल बुलाकर दिखाया कि यह आपके द्वारा दिए गए एसीसी सीमेंट का हाल है जो पूरी तरह से बेहाल है।देखते ही देखते लोगों का भीड़ इकट्ठा हो गया और हर तरफ से एक ही आवाज आ रही थी यह तो सीमेंट घटिया है। इस पर मकान बनाना बेवकूफी होगा यदि इस पर मकान का निर्माण होगा तो परिवार के किसी भी सदस्य का जिंदा बच पाना मुमकिन नहीं होगा। क्योंकि जिस मकान का पिलर ही घटिया क्वालिटी के सीमेंट से बना होगा उस मकान का खडा रह पाना मील का पत्थर साबित होगा। ऐसे में किसी भी समय यह घटना को अंजाम दे सकता है। स्थानीय दुकानदार के आश्वासन पर कुछ दिन रुकने के लिए कहा गया समय बीत गया फिर भी वही हाल फिर दुकानदार ने जांच टीम बुलाने की बात कह कर समय बिताना शुरू कर दिया। जांच के लिए सीमेंट कंपनी के टेक्नीशियन राकेश श्रीवास्तव और दुकानदार के द्वारा बुलाए गए दो संदिग्ध व्यक्ति। दोनों संदिग्ध व्यक्तियों ने पीड़ित परिवार से ही बहस करते हुए मारपीट आमदा हो गये। पुलिस बुलाने की बात सुनते ही वहां से रफूचक्कर हो गये। फिलहाल टेक्नीशियन राकेश श्रीवास्तव ने ढाले गए पिलर को बखूबी निरीक्षण किया बोरियों का निरीक्षण किया और कहां की 10 दिन का समय देकर देख लीजिए अंततः कहा कि आप कंपनी को कंप्लेंट कर सकते हैं। आज या कल में जांच टीम आएगी तो स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल दो दिन के बाद जांच टीम आई लेकिन उसमें कौन-कौन लोग थे। टीम का इंचार्ज कौन था। जांच हुई जांच में किस तरह का जांच किया गया ।जांच के बाद क्या रिपोर्ट अभी तक किसी का भी कोई पता नहीं ।
जब इस संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया तो टेक्नीशियन इधर-उधर की, गोल मटोल बातें और कल जांच रिपोर्ट आज आने की बात कहकर फोन को गोल्ड कर देता है और फिर कुछ ही मिनट बाद काट दिया। फिर दोबारा संपर्क किया गया लेकिन प्रश्न का सही जवाब नहीं दे सक। तब से अभी तक किसी भी प्रकार का कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया गया। जिससे पीड़ित ग्राहक को राहत मिल सके और उसके नुकसान की भरपाई हो सके। इधर पीड़ित परेशान है घर खुला पडा है। कभी भी कोई घटना हो सकती है लेकिन दुकानदार का अड़ियल रवैया और बड़बोला आज भी बरकरार है। जोशीला दबंगई की आवाज कुछ और ही दिशा को प्रतीत करता हुआ नजर आ रहा है। अब राजनीतिक लोगों से मामले में दबाव बनवाने की कोशिश रहा है। दुकानदार द्वारा कुछ लोगों के साथ में षडयंत्र रचने का काम किया जा रहा है। जबकि पीड़ित के द्वारा इस कंपनी के टोल फ्री नंबर पर कंप्लेंट दर्ज कराते हुए पूरी घटना को बयां किया है। और आश्वासन दिया गया कि कंपनी की तरफ से जनपद में इंजीनियर तैनात किए गए हैं जो आपकी सहायता करेंगे। जनपद में कंपनी की तरफ से तैनात किसी अधिकारी का फोन आता है जो पूरी घटना के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं और कहते हैं कि टेक्नीशियन से बात करके आपको बताते हैं फिलहाल आप 28 दिन का समय दे दीजिए गजब की कहानी है इन लोगों का पहले दुकानदार समय मांगता है फिर टेक्नीशियन 10 दिन का समय मांगता है और अब ये साहब 28 दिन का समय मांग रहे हैं। क्या अजीबोगरीब कहानी है। बड़ी सीधी सी बात है साहब उसी कंपनी के सीमेंट और उतनी ही मात्रा में और भी पिलर की ढलाई की गई है उन सभी को देखकर बड़ी आसानी से सब कुछ अंदाजा लगाया जा सकता है तो आखिरकार यह नौटकी किस लिए।