महजूदा में कानून को ठेंगा दिखाकर जीत के जश्न में डूबा पत्रकार से बना प्रधान , प्रशासन मौन।

महजूदा में कानून को ठेंगा दिखाकर जीत के जश्न में डूबा पत्रकार से बना प्रधान , प्रशासन मौन।

महजूदा में विजयी प्रत्याशी के जुलूस में फूटे बम, पहुंची पुलिस ।

उमेश दुबे (रिपोर्टर)

सुरियावां,भदोही ।

जिले में कोरोना के संक्रमण को जिस तरह प्रशासन सख्ती की बात कर रही है ठीक उसके उलटे कुछ लोग मनमानी करने से बाज नही आ रहे है। और जीत के जश्न को मनाये बिना उनको सुकून नही मिल रहा है।विदित हो कि जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने सख्त निर्देश दिया है कि जीत के बाद किसी भी तरह की जुलूस या विजय यात्रा इत्यादि नही निकाली जायेगी लेकिन इसके बावजूद भी लोग मनमानी करने से बाज नही आ रहे है। और अपने – अपने ढंग से खुशी मना रहे है।

ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है जो की जिले के सुरियांवा ब्लाक के ग्राम सभा महजूदा के प्रधान पद के प्रत्याशी व पत्रकार राजमणि पाण्डेय की जीत पर सोमवार को विजय जुलूस निकाला गया। जुलूस की अगुवाई पत्रकार से बने प्रधान के भाई व ग्रामसभा के उनके समर्थक कर रहे थे। बताते चलें कि भारी समर्थकों के साथ विजय जुलूस ढोल नगाड़े, गाजे-बाजे, अबीर गुलाल एवं गगनचुंबी नारों के साथ वह गांव में घंटो चक्रमण करता रहा,

और तो और यह प्रधान जीत के जश्न में इतना अंधा हो गया था कि गली कूचे में बमबाजी करने से भी बाज नहीं आया ।अब यहां सवाल यह पैदा होता है कि प्रशासन के रोक के बावजूद भी यह पत्रकार से बना प्रधान राजमणि पांडे के लोग डीजे पर गीत बजाकर गांव में भ्रमण करते हुए खुशी जाहिर करते हुए बम क्यों फोड़ रहे है । आखिर प्रशासन के आदेशों की खुलेआम धज्जियां क्यों उडाई जा रही है?

इस तरह के कृत्य को यह पत्रकार से बना प्रधान राजमणि पांडे क्यों कर रहा है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सत्ते के नशे में चूर हो करके यह तथाकथित पत्रकार से बना ग्राम प्रधान खुद को शासन – प्रशासन से ऊपर समझने लगा है । जिससे यह भयमुक्त होकर के दबंगई पूर्वक महजूदा गांव के गली- कूचों आदि में कुछ ग्रामीणों से अभद्रता करते हुए पत्रकार से बने प्रधान के समर्थकों ने गाली- गलौज करते हुए,

बेखौफ होकर बम – बाजी भी की जिसका ग्रामीणों ने जब विरोध किया तो उनके समर्थकों व ग्रामीणों के बीच नोकझोंक भी हुआ ,और तो और वही इस बात की सूचना जब ग्रामीणों द्वारा पुलिस को दी गई तो मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रधान को सिर्फ फटकार लगाते हुए कड़ी कार्यवाही की चेतावनी देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया।

जबकि जिला प्रशासन ने दी थी सख्त चेतावनी,चुनाव में जय पराजय के बाद न खोए संयम,यदि मनाया जश्न या फैलाई हिंसा तो होगी कार्यवाही ।

त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन की मतगणना सम्पन्न होने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा समस्त विजेताओं,अन्य प्रत्याशियों व उनके समर्थकों से यह अपील की गई थी, कि वह चुनाव परिणाम को सहर्ष स्वीकार करें तथा जीत या हार दोनों ही परिस्थितियों में उन्मादित न होकर निश्चित रूप से संयम का परिचय दें तथा विजय जुलूस न निकालें या हिंसा कदापि न फैलाये।

किसी भी प्रकार का विजय जुलूस निकालना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है तथा हिंसा फैलाना गंभीर श्रेणी का अपराध है। सभी इसका शत प्रतिशत पालन करना सुनिश्चित करें। अन्यथा आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए तत्काल गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर उन्हें जेल भेजा जाएगा।

लेकिन जूलूस के बावजूद बम फूटने के बावजूद भी सुरियावां पुलिस द्वारा किसी को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेजने की कार्यवाही नहीं की गई है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर अनायास ही नियम कानून का मखौल उडाने पर पत्रकार से बना प्रधान क्यों तुला है। क्या यह किसी के सह पर यह सब कार्य कर रहा है और पुलिस सिर्फ मूकदर्शक बन कर किसी ग्रामीण के हत्या होने का इंतजार कर रही है ।

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