कैसे करें गुरु पूजन-कौशलेन्द्र शास्त्री

वैसे तो हर महीने की पूर्णिमा का अपना ही महत्व होता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है।

यह पर्व बड़ी श्रद्धा भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरु की ही नहीं, अपने घर में जो बड़ा है अर्थात पिता और माता, भाई-बहन आदि की भी गुरु समझ कर उनकी पूजा की जाती है।गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु को नमन करें। आपने किसी को गुरु नहीं बनाया है तो भगवान कृष्ण को गुरु मानें कृष्णम् वन्दे जगद् गुरुम् या आप अपने इष्टदेव को भी गुरु मान सकते हैं।

उनका यथावत पूजन करें और परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना कर प्रसाद चढाएं।जिन लोगों को अध्ययन संबंधी बाधाएं अक्सर परेशान करती हैं वे इस दिन गीता का पाठ करें व भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें। साथ ही गाय की सेवा करें।जिन लोगों का भाग्योदय नहीं हो पा रहा है, कारोबार मंद चल रहा है या फिर बहुत आर्थिक हानि हो रही है, ऐसे लोग इस दिन जरूरतमंद को पीले अनाज, वस्त्र और पीली मिठाई का दान करें।

 गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु यंत्र बनाएं या सिद्ध करा हुआ प्राप्त कर लें। ज्योतिषाचार्य कौशलेन्द्र पाण्डेय जी से सलाह लेकर उनसे उस दिन का शुभ मुहुर्त पता करें और शुभ मुहुुर्त में इस यंत्र को स्थापित करें या धारण करें। इससे गुरु का शुभ प्रभाव बढ़ जाता है। जिसकी कुंडली में गुरु की अशुभ स्थिति है वे किसी ब्राह्मण को पुखराज का दान करें। गुरु की अशुभ स्थिति जीवन में कई कष्ट देती है। ऊं बृं बृहस्पतये नमः का इस दिन जाप करें।

गायत्री मंत्र का जाप भी शुभ फलदायी है।जीवन में बार—बार कार्य बिगड़ रहे हैं तो गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु एवँ श्रीराम के चित्र के समक्ष या ठाकुरजी के मंदिर में जाकर गाय के घी का दीपक जलाएं और भगवान परेशानी दूर करने की प्रार्थना करें।