पिरान कलियर और भगवानपुर पालिका में अंधेरगर्दी का राज

पिरान कलियर और भगवानपुर पालिका में अंधेरगर्दी का राज

रुड़की,(उत्तराखंड)| आखिरकार अपने गृह जनपद हरिद्वार कि पालिकाओं में तैनात एक अदने से अधिकारी शाहिद अली के सामने उत्तराखंड सरकार और शासन भी नतमस्तक बना हुआ है। पालिकाओं में लाखों-करोड़ों का सरकारी गोलमाल कर यह अदना सा अधिकारी मंगलौर कस्बे में बेहिसाब संपत्ति का मालिक बना बैठा है।

शाहिद अली की इस भ्रष्टाचारी कार्यशैली के चलते पिरान कलियर भगवानपुर और मंगलौर नगर पालिकाओं में विकास कार्य होने के बजाय वह रसातल में चली गई है। जिससे क्षेत्र के लोगों में सरकार के प्रति खासा रोष व्याप्त है और वह काफी दुखी हैं। उल्लेखनीय है कि दिवंगत मंत्री सुरेंद्र राकेश द्वारा क्षेत्र के लोगों की डिमांड पर पिरान कलियर और भगवानपुर को 2014 में नगर पंचायत का दर्जा दिलाया गया। लेकिन इन पालिकाओं में एक फूटी कौड़ी भी विकास कार्य नहीं हुआ। उल्टे उत्तराखंड सरकारों के सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के अलावा विकास कार्यों का कोई भी जलवा यहां देखने को नहीं मिला।
पालिका सूत्रों का कहना है कि मंगलौर कस्बे के शाहिद अली पूर्व में पिरान कलियर नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी रह चुके हैं। जो शुरू से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे और शहरी विभाग मंत्रालय के सरकारी बजट को उनके द्वारा खूब ठिकाने लगाया गया।

सरकार और शासन में सरकारी पैसे की जांच शाहिद अली के खिलाफ चल रही है। अपनी जांच की फाइल को बंद कराने के लिए शहरी विभाग के छोटे से लेकर बड़े अफसर को उनके द्वारा चुघा दिया जाता रहा है। मौजूदा स्थिति में शाहिद अली मंगलौर नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी पद पर तैनात है और इसी पालिका में वह चतुर्थ श्रेणी और बाबू गिरी कर चुके हैं। बरहाल पिरान कलियर नगर पंचायत की सभासद शबनम साबरी नाजिम त्यागी समेत कई सभासदों द्वारा इस अदने से अधिकारी शाहिद अली पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री शासन और जिलाधिकारी से की गई है। शबनम साबरी का कहना था कि अभी हाल ही में पिरान कलियर नगर पंचायत कार्यालय का ताला तोड़कर सरकारी फाइलों को खुर्द- बुर्द कर दिया गया।

जबकि मौजूदा तौर पर यहां विनोद श्रेय नाम का व्यक्ति ईओ है जो पूर्व में रूड़की पालिका में सफाई कर्मियों के नेता रह चुके हैं। जो इस पद के लायक भी नहीं है। क्योंकि शहरी विभाग मंत्री मदन कौशिक के राज में इन पालिकाओं में अंधेर गर्दी का राज कायम है। मंत्री महोदय की आंखें भी इस और पूरी तरह से बंद है। वहीं शासन के बड़े अफसर भी अपने लिफाफे के इंतजार में है। इसी के साथ अभी हाल ही में मंगलौर पालिका में सैनिटाइजर दवाई घोटाला भी प्रकाश में आया था और इसी प्रकरण में मंगलौर कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है। वहां भी आधा दर्जन से अधिक सभासद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का बिगुल बजा चुके हैं।

उधर भगवानपुर नगर पंचायत की अगर बात करें तो इस कार्यालय का राज ही संविदा कर्मचारी ही चला रहे हैं। जबकि भगवानपुर में अफसरों को धमकाने वाली विधायक ममता राकेश का राज है और वह भी नगर पंचायत की हालत को देखने की जरूरत नहीं समझती। मैडम साहिबा का जलवा भी यहां खोखला साबित होकर रह गया। जिससे क्षेत्र के लोग तो वास्तव में दुखी हैं। साथ ही मैडम द्वारा अपने पति सुरेश राकेश के सपने को भी कोरा छोड़ दिया।