सरकार, सिविल सोसायटी व देशवासी मिलकर भ्रष्टाचार समाप्त करने के प्रयास करें: उपराष्ट्रपति

सरकार,-सिविल-सोसायटी-व-देशवासी-मिलकर-भ्रष्टाचार-समाप्त-करने-के-प्रयास-करें:-उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार की कुवृत्ति को देश के विकास और प्रगति में सबसे बड़ा अवरोध बताते हुए सरकार, सिविल सोसायटी तथा देश के सभी नागरिकों से साथ मिलकर इस कुवृति को देश से समाप्त करने का आह्वान किया. वह बुधवार को सीएजी परिसर में बाबा साहब डॉ बीआर अम्बेडकर की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर उपस्थित अतिथियों को संबोधित कर रहे थे.

पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को उद्धृत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अभिभावकों के साथ शिक्षक भी विद्यार्थियों के चरित्र को गढ़ने तथा एक मूल्य आधारित नैतिक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

डॉ अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि डॉ अम्बेडकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, एक दूरदृष्टा राजनेता, एक प्रखर विद्वान, प्रबुद्ध विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, लेखक, समाज सुधारक तथा उदार मानवतावादी थे. उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारे संविधान की गणना विश्व के सबसे विशद विधानों में होती है. भारत के संविधान के निर्माण में डॉ अम्बेडकर के महत्वपूर्ण योगदान तथा विषम परिस्थितियों में देश का मार्गदर्शन करने के लिए, राष्ट्र उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा.

उन्होंने कहा आज भी हमारा संविधान हमारे लिए एक पवित्र ग्रंथ है, राष्ट्रीय जीवन के हर मुद्दे पर एक प्रकाश स्तंभ की तरह हमारा मार्गदर्शन करता है. उन्होंने देश के नागरिकों से संविधान की मर्यादाओं के निर्वहन के लिए निरंतर अभीष्ट प्रयास करते रहने का आग्रह किया.

एक स्वतंत्र और विश्वसनीय संस्था के रूप में सीएजी का अभिनन्दन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज सीएजी की प्रतिष्ठा एक स्वतंत्र और विश्वसनीय संस्था के रूप में स्थापित है और इसका श्रेय हमारे संविधान निर्माताओं को, विशेषकर डॉ अम्बेडकर को जाना चाहिए, जिन्होंने एक स्वतंत्र संस्था के रूप में सीएजी के व्यापक अधिकारों निर्धारित किया. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, तथ्यों पर आधारित निष्पक्ष वस्तुनिष्ठता, उपलब्ध तथ्यों के प्रति निष्ठा, विश्वसनीयता, पारदर्शिता, प्रोफेशनल कौशल उत्कृष्टता के गुण जो आज सीएजी की पहचान हैं, इन गुणों की प्रेरणा डॉ अम्बेडकर के जीवन और आदर्शों से ही प्राप्त हुई है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि जवाबदेही, पारदर्शिता तथा सुशासन लोकतंत्र की आवश्यक शर्त है.

डॉ अम्बेडकर को दबे हुए दुर्बल वर्गों का मसीहा बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे आजीवन लैंगिक समानता और शिक्षा के माध्यम से नारी सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक रहे, सभी नागरिकों में समानता और बराबरी सुनिश्चित करने के लिए जाति के बंधनों को तोड़ने के सार्थक प्रयास करते रहे.

उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा हमारे इस महान नायक के आदर्शों और विचारों का स्मरण दिलाती रहेगी, उनकी शिक्षा से भावी पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी, वे विचार जो आज भी हमाको दिशा दिखलाते हैं, यही इस प्रतिमा की स्थापना का उद्देश्य भी है.

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सीएजी की रिपोर्टों तथा उनके आधार पर विधाई निकायों और उनकी समितियों में हुए विमर्श के परिणामस्वरूप हुए नियमों में परिवर्तनों, शासकीय प्रणाली में आए बदलावों, सरकारी पद्धतियों में आई प्रभावी किफायत और दक्षता के लिए सीएजी को श्रेय दिया.

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विश्व के सर्वोच्च लेखा संस्थानों में विश्वसनीयता, उत्कृष्टता और ख्याति स्थापित करने के लिए सीएजी का अभिनन्दन किया. उन्होंने सीएजी द्वारा 2022 तक अपने कार्यालय को पेपर मुक्त बनाने के लक्ष्य की भी सराहना की.

इससे पूर्व भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) राजीव महर्षि ने स्वागत भाषण दिया और डेप्युटी सीएजी अनीता पटनायक ने धन्यवाद ज्ञापित किया.