अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य हर बच्चे का अधिकार ‘विश्व बाल श्रम निषेध दिवस

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हर साल 12 जून को मनाया जाता है।बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं. केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया का भविष्य बच्चे ही हैं।लेकिन आज के इस वक्त में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जो स्कूल जानें या फिर खेलने की जगह, काम करने को मजबूर हैं ,ताकि दो वक्त की रोटी खा सकें। बच्चों का इस तरह से काम करना एक चिंता का विषय है

स्वतंत्र प्रभात वाराणसी 

मनीष पांडेय

हर साल 12 जून को मनाया जाता है। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं. केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया का भविष्य बच्चे ही हैं।लेकिन आज के इस वक्त में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जो स्कूल जानें या फिर खेलने की जगह, काम करने को मजबूर हैं ,ताकि दो वक्त की रोटी खा सकें।

बच्चों का इस तरह से काम करना एक चिंता का विषय है. विद्यालय  जानें और खेलने कूदने की उम्र में बहुत से बच्चे दो वक्त की रोटी के लिए काम करने को मजबूर हैं. इसी वजह से हर साल 12 जून को बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस  2020) मनाया जाता है. दुनियाभर में ऐसे बहुत से बच्चे हैं जिनसे बहुत तरह का काम कराया जाता है। 5 साल की उम्र से ही कई बच्चे ऐसे कामों में लग जाते हैं जो उनकी सेहत और विकास के लिए काफी हानिकारक होते हैं।

इस तरह से काम करने वाले बच्चों को बाल मजदूर कहा जाता है क्योंकि वो इन कामों के लिए काफी छोटे होते हैं और इससे उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर प्रभाव पड़ता है. इसी वजह से बाल मजदूरी के खिलाफ एक आंदोलन की शुरुआत की गई थी।ऋतुराज त्रिपाठी ने बताया कि,5 से 17 आयु वर्ग के कई बच्चे ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें सामान्य बचपन से वंचित करते हैं,जिससे वे पर्याप्त शिक्षा, उचित स्वास्थ्य देखभाल, खेलकूद,अवकाश आदि से पिछड़ जाते हैं ।

2002 में, संयुक्त राष्ट्र की संस्था, इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने इसी वजह से ‘वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर’लॉन्च किया। *भूतपूर्व सूबेदार मेजर बिनोद कुमार पांडेय ने बच्चों में पोषक खाद्य सामग्री  पावरविटा वितरित किया और कहा बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए