गर्भवती महिला को चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने कारण देर 16 किलोमीटर पैदल चल कर पहुंचना पडा घर

निर्मल सिंह

कागड़ा ! कोरोना लांकडाऊन गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा भारी. ऐसा ही एक मामला कागड़ा के सीमावर्ती गांव सुकड़ मसेहड़  से संबंधित है। जिला कागड़ा में स्थित टांड़ा मेडिकल कालेज में बीती रात कागड़ा के सीमावर्ती गांव  सुकड़ मसेहड़  में रहने वाली  तीन माह की गर्भवती महिला आरती को अचानक रात को पेट में दर्द उठा।

उसके बाद रात को गर्भवती महिला आरती की बहन प्रिति और  उसकी मां किरण वाला ने 108 पर फोन करके गाड़ी के माध्यम से आरती को टांड़ा मेडिकल कालेज टांड़ा ले गए।टांड़ा मेडिकल कालेज पहुंचे के बाद वहां पर रात को डयूटी पर तैनात नर्सों ने गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की तरफ ध्यान नहीं दिया।और गर्भवती महिला को ईलाज के नाम पर एक कमरे से दूसरे कमरे में भेजते रहे और खुद नर्सें मोबाइल फोन पर विडियो गेम खेलने में व्यस्त रहीं।टाड़ा मेडिकल कालेज में तीन माह की गर्भवती महिला आरती को कोई ईलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण रात को ही टांड़ा मेडिकल कालेज से अपनी बहन और मां के साथ पैदल ही अपने घर सुकड़ मसेहड़ पहुंचना पड़ा।

कोरोना लांकडाऊन के दौरान घर वापस पहुंचने के लिए गाड़ी की सुविधा नहीं मिलने के कारण पैदल चलने पर  3 माह की गर्भवती महिला को घर पहुंचना पडा ।गर्भवती महिला आरती की बहन प्रिति और मां किरण वाला ने बताया कि बीती रात आरती को पेट में दर्द होने पर108के माध्यम टाड़ा मेडिकल कालेज ले गए।

टाड़ा मेडिकल कालेज में पहुंचने के बाद वहां पर तैनात नर्सों ने आरती का कोई टेस्ट बगैरा नहीं किया और रात भर एक कमरे से दूसरे कमरे में दौड़ाते रहे।जबकि गायनी विभाग में रात को कोई भी महिला डाक्टर विशेषज्ञ  नहीं थे।जो भी रात को थे वह सब जूनियर छात्र थे जो मोबाइलों पर गेम खेलने में व्यस्त थे।जिस वजह से रात को टांड़ा मेडिकल कालेज से पैदल ही अपने घर सुकड़ मसेहड़ पहुंचना पड़ा।

उन्होंने ने सरकार से मांग कि है कि कोरोना लांकडाऊन के दौरान गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित सुविधा के लिए घरद्वार से अस्पताल तक ले जाने की सुविधा तो है लेकिन वापस घर छोड़ने के लिए गाडी उपलब्ध करवाने का प्रबंध करना चाहिए।