महागठबंधन व एनडीए के बीच सीधी टक्कर फैसला जनता के मुठ्ठी में बंद

इस-विधानसभा-क्षेत्र-से-कई-बार-विधायक-का-ताज-पहन-चुके-राजेश-सिंह-इस-बार-कांग्रेस-से-प्रत्याशी-हैं-जबकि-जदयू-ने-पिछले-बार-के-रिकॉर्ड-मत-से-निर्दलीय-विजेता-धीरेंद्र-प्रताप-सिंह-को-टिकट-दिया-है।
इस-विधानसभा-क्षेत्र-से-कई-बार-विधायक-का-ताज-पहन-चुके-राजेश-सिंह-इस-बार-कांग्रेस-से-प्रत्याशी-हैं-जबकि-जदयू-ने-पिछले-बार-के-रिकॉर्ड-मत-से-निर्दलीय-विजेता-धीरेंद्र-प्रताप-सिंह-को-टिकट-दिया-है।
  • स्वतंत्र प्रभात

बगहा-ब्यूरो की रिपोर्ट : –

बगहा, (नसीम खान “क्या”)। वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र, परिसीमन में बदलाव के बाद 2008 में अस्तित्व में आया था। धनहा और बगहा विधानसभा क्षेत्र के एक खास इलाके को जोड वाल्मीकिनगर विधानसभा को मूर्त रूप दिया गया है। पिछली बार यहां से निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई थी,जबकि इस बार जदयू और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। यह विधानसभा क्षेत्र प. चंपारण जिला के इंडो-नेपाल सीमा व यूपी सीमा पर स्थित है। बतादें की यह विधानसभा 2002 परिसीमन के पूर्व यह धनहा विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। पिछले बार निर्दलीय विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को लोगों ने ताज पहनाया था।

वोट मांगते हुए जदयू उम्मीदवार धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह

अब तक चुने गए विधायक का नाम जीती हुई पार्टी का नाम

1977 हरदेव प्रसाद कांग्रेस
1980 हरदेव प्रसाद कांग्रेस
1985 नर्बदेश्वर प्रसाद कुशवाहा लोक दल
1990 श्याम नारायण यादव कांग्रेस
1995 विष्णु प्रसाद कुशवाहा समता पार्टी
2000 राजेश सिंह बसपा
2005 राजेश सिंह आरजेडी
2010 राजेश सिंह जदयू
2015 धीरेंद्र प्रताप सिंह निर्दलीय

इस विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक का ताज पहन चुके राजेश सिंह, इस बार कांग्रेस से प्रत्याशी हैं। जबकि जदयू ने पिछले बार के रिकॉर्ड मत से निर्दलीय विजेता धीरेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दिया है।इस क्षेत्र से वैसे तो 13 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन मुख्य लड़ाई जदयू और कांग्रेस के बीच है।

गन, गंडक और गन्ना की तबाही से जूझता रहा है इलाका’

दरअसल यह इलाका गंडक नदी के किनारे बसा हुआ है। ऐसे में इस क्षेत्र के तहत 5 प्रखंडों में से चार प्रखण्ड (मधुबनी, पिपरासी, भितहा और ठकराहा) गंडक दियारा पार उत्तरप्रदेश की सीमा से सटा है और एक प्रखण्ड बगहा मुख्यालय से सटे इंडो-नेपाल सीमा अंतर्गत आता है।70,80,90 के दशक में यहां क्राइम मेन फैक्टर रहा है। साथ ही कटाव की समस्याओं से भी दियारावर्ती क्षेत्र के लोग जूझते रहे हैं। इलाके की एक और मुख्य समस्या गन्ना की खेती रही है।यह इलाका शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी पिछड़ा इलाका माना जाता है। आज के दौड़ में भी उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में पढ़ाई करने हेतु छात्र-छत्राओं को यूपी के कॉलेजों या 150 किमी दूर जिला मुख्यालय बेतिया का रुख करना पड़ता है।

‘मिनी चंबल के नाम से मशहूर था इलाका’

बतातें चलें कि इस विधानसभा क्षेत्र में तकरीबन 3 लाख 31 हजार मतदाता हैं। जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 78 हजार और महिला मतदाता 1 लाख 53 हजार है। मतदान केंद्रों की संख्या 462 है। बतादूँ कि यह इलाका मिनी चंबल के नाम से कुख्यात था। ऐसे में इस इलाके से कई बार विधायक रह चुके राजेश सिंह ने क्राइम फैक्टर को चुनावी मुद्दा बनाकर एक फाइटर ग्रुप बनाया था जो काफी चर्चित रहा था।इसी मुद्दे पर वह इलाके का प्रतिनिधत्व भी करते रहे। लेकिन मौजूदा हालात में लोग अन्य विकल्प की तलाश में हैं।जदयू प्रत्याशी रिंकू सिंह अपने किए कामों व सरकार की उप्लब्धधियों को गिनाकर बचे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए मतदाताओं से वोट करने की अपील कर रहें है।बहरहाल यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से अभी भी दूर हैं।फिलहाल प्रत्याशी चुनावी प्रचार के माध्यम से वोटरों को रिझाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।फैसला मतदाता की मुठ्ठी में अभी कैद है।मतदाता अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं।दस नवंबर को ही पता चल पाएगा कि की ताज किसके सर बैठेगी।