मानवीय संवेदना की हदों को थाना प्रभारी ने किया तार तार, की युवक के गोपनीय अंग की जमकर कुटाई

स्वतंत्र प्रभात

प्रेम त्रिपाठी

देवरिया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही आम जन मानस ने राहत की सांस ली थी और कयास लगाया था कि पूर्व की सरकार की अपेक्षा वर्तमान की आदित्यनाथ  सरकार ने भयमुक्त और अपराध मुक्त सुशासन देने का वायदा किया था परंतु इस दावे को देवरिया पुलिस ने सरकार के जनता से किये सारे वायदों को ध्वस्त कर अपनी गुंडागर्दी दिखाने में जुटी पड़ी है। मामला है जनपद के रामपुर कारखाना थाने का, जहाँ थाना प्रभारी व थाने पर तैनात दो अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा एक लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर घायल कर दिया गया वहीँ दूसरे लड़के के गोपनीय अंग पर जमकर इतनी कुटाई कि की जिसे देखकर आम जनमानस के पेशानी पर बल आ जाये। बताया जाता है

कि बनकट बहादुरपुर में जमीनी विवाद में दो पक्षों में हुए विवाद में बीते रविवार को दोनों पक्ष को पुलिस थाने बुलाई और एक पक्ष को उससे रूपये ऐंठ कर छोड़ दिया और दूसरे पक्ष के दुर्गेश यादव को लाठियों से उसके गोपनीय अंग पर प्रहार कर घायल कर दिया। जिसे वह अपनी चोट की जगह किसी को दिखा भी नहीं सकता । पीड़ित दुर्गेश का कहना है कि पुलिस ने मेरे साथ घोर ज्यादती की है जिसे वह जीते जी उसको कभी नही भूल पायेगा। दुर्गेश ने बताया कि थाना प्रभारी को पूरा प्रकरण मालूम था लेकिन मुझे थाने बुलाया गया और थाना प्रभारी ने मुझे कमरे में बंद कर जमीन पर लेटाया और स्वयं व पुलिस कर्मियों के सहयोग से मेरे व मेरे भाई की बर्बरता से पिटाई की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना प्रभारी ऊँची रसूख व बड़ी पहुँच वाले आदमी हैं और जनपद के एक कद्दावर मंत्री का इनके ऊपर पूरा पूरा बरदहस्त भी है। ये मामला तब आया जब थाना प्रभारी कोरोना संक्रमित से प्रभाव में आकर कुछ पुलिस कर्मियों के साथ स्वयं क्वारन्टाइन हो रहे हैं और वहीं अपने कार्य व्यवहार से प्रायः चर्चाओं में भी बने रहते हैं।ज्ञात हो कि रामपुर कारखाना के थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह ने न ही अपनी ओहदे की गरिमा समझी और न ही मानवाधिकार के नियमो का पालन किया, स्वंय ही पीड़ित को पकड़ा और थाने पर सजा दे दिया, पीड़ित दुर्गेश अपने आप को बचाने की गुहार लगाता रहा, पर प्रभारी साहब पर ऐसी हैवानियत सवार थी कि अपने तो अपने थाने में तैनात कांस्टेबल राहुल यादव,

और हेड कांस्टेबल वीर बहादुर विश्कर्मा से भी डंडे व बेल्ट से उसके नाजूक अंग को जीवन भर के लिए अलग पहचान दे दिया, सूत्रों का कहना है कि थाने मे सिर्फ पैसे का खेल होता है, चाहे किसी भी प्रकार की घटना क्यों न हो, बस उसमें पैसा ठीक ठाक मिलना चाहिए। वहीँ फौज से सेवा निवृत्त उप निरीक्षक गुलाब यादव ने पुलिस अधीक्षक को तहरीर देकर न्याय की गुहार लगायी है और कहा कि गत 13 मई को जमीनी विवाद में हुए मामले में थाने में दोनों लड़कों को मारने पीटने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर कारखाना में नार्मल डॉक्टरी करा कर मेरे लड़के को पाबंद करते हुए जेल भेज दिया, वही प्रतिवादी पक्ष से दिखावे के लिए एक व्यक्ति को पाबंद किया गया और थाना प्रभारी द्वारा मेरे बेटे दुर्गेश व मेरे भतीजे को धमकी दी गई और कहा की बात नहीं माने तो गोली मार देंगे।

साथ ही यह भी कहा कि इस घटना का कहीं जिक्र किया तो फर्जी मुकदमे में जेल भेज दूंगा। जिंदगी भर जेल में रहोगे और बाहरी गुंडों से गोली मरवा देंगे जिसकी सूचना किसी को पता भी नहीं चलेगी। गुलाब ने थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह, सिपाही राहुल यादव, दीवान वीर बहादुर विश्वकर्मा व अपने पट्टीदार से अपने व अपने परिवार के जान माल की गुहार लगाई है व जांच करा कर उपरोक्त लोगों के विरुद्ध मुकदमा लिखने व विभागीय कार्रवाई की मांग की है।