चीन जनित कोरोना एवं विश्व पर दुष्प्रभाव

विचारक – इंद्र दमन तिवारी

समस्त विश्व बिरादरी आज कोरोनाग्रस्त हो चुकी है यदि पीड़ितों की संख्या का गौर करें तो ईरान, यूरोप के बाद आज अमेरिका इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी बनता दिख रहा है यही कारण है कि ट्रंप के हालिया बयानों में आक्रामकता की तपिश स्पष्ट रूप से महसूस होती है..

स्वाभाविक है कि अधिकांश उंगलियाँ चीन की ओर उठ रही हैं, इस तथ्य को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए कि चीन के जिस वुहान शहर से यह प्राणघातक वायरस फैला वहाँ चीन ने वायरस अनुसंधान के लिए विश्व की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बना रखी है, चीन के स्वनियंत्रण वाला सरकारी मीडिया इस लैब को लेकर निरंतर शेख़ी बघारता रहा है..यह भी अब स्पष्ट है कि अक्टूबर 2019 से ही चीन में कोरोना के मामले आने शुरू हो गए थे परंतु इसे दिसंबर तक छुपाए रखा गया,

जनवरी तक महामारी की दशा हो चुकी थी लेक़िन चीन ने पीड़ितों एवं मृतकों की संख्या को गुप्त रखने का कुत्सित प्रयास ज़ारी रखा..द टाइम्स के अनुसार दिसंबर में चीनी पैथालाजिस्ट को सरकार ने मजबूर किया कि वे कोरोनाग्रस्त लोगों की रिपोर्ट औऱ सैंपल नष्ट कर दें इसका प्रभाव रहा कि दूसरे देश चीन से आने वाले यात्रियों की समय रहते पड़ताल नहीं कर सके औऱ अब सकल विश्व कोरोनाग्रस्त है..

इसकी सबसे बड़ी क़ीमत चुकाई उस इटली ने जो चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना में शामिल होने वाला जी-7 समूह का एकलौता देश है
इसी बीच दुनिया भर में दवाओं एवं चिकित्सकीय उपकरणों की भारी मांग है यहाँ विडंबना है कि इस बाज़ार पर भी चीन का ही दबदबा है नतीजतन जिस चीन के छल से यह बीमारी फ़ैली, उपचार के लिये सामान खरीदने को उसके अलावा कोई चारा नहीं..

भारत दवाओं में काम आने वाले सक्रिय फार्मा घटकों यानि एपीआई के मामले में चीन पर निर्भर है, हम लगभग 2.4 अरब डॉलर क़ीमत का 70 प्रतिशत तक एपीआई चीन से आयात करते हैं, हम उस चीन के ऊपर निर्भर हैं जहां तंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं है..अग़र चीन का वर्चस्व तोड़ा नहीं गया एवं उसकी जवाबदेही तय नहीं की गई तो वह वैश्विक बिरादरी के लिए नित नए ख़तरे खड़े करता रहेगा, अतः हमें चीन के व्यापारिक वर्चस्व को तोड़ना नितांत आवश्यक है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here