महोबा मे वृक्षारोपण अभियान बना वन विभाग के लिए चारागाह

REPORT BY-ANOOP SINGH

महोबा मे वृक्षारोपण अभियान बना वन विभाग के लिए चारागाह

चार सालो मे महोबा मे लगे एक करोड़ चार लाख से अधिक पौधे

उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन हो तो बडा भ्रष्टाचार हो सकता है उजागर

महोबा । कहते है कि मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की’। जिले में वन संरक्षण को लेकर हालात ऐसे ही हैं। वननीति के तहत 33 फीसदी भूभाग पर वन होने चाहिए। लेकिन पूरे जनपद में यह मानक पूरा नहीं है। जबकि चार साल मे वृक्षारोपण अभियान के नाम पर लगभग एक करोड़ से अधिक पौधे लगवा डाले गये। लगाए गए पौधे नदारद हो गए। कहीं हरित क्रांति नहीं आई।         

जिले में इस मानसून  एक बार फिर वृहद पैमाने पर वृक्षारोपण  वन विभाग ने शुरू किया, लक्ष्य भी पिछले साल की तुलना मे काफी बड़ा रखा गया है लेकिन आंकडेबाजी के इस खेल में पिछले साल लगाए गये कितने पौधे बच पाये यह पता लगाने का समय न तो वन विभाग के पास है और न ही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने वाले अन्य विभागों के पास। इसी का नतीजा है कि वृहद स्तर पर वृक्षारोपण के बावजूद जिले में हरियाली नदारद है।       

गौरतलब है कि प्रतिवर्ष  जनपद महोबा को हरा भरा रखने के लिए वृक्षारोपण का भारी भरकम लक्ष्य  शासन  से आ जाता है कितु ऐसा प्रतीत होता है कि रोपे गये पौधों के संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि विगत कई वर्षों से यह देखा जाता है कि अभी तक अकेले जनपद में करोड़ों पौधे रोपे गये  कितु जिले में हरियाली न के बराबर है।        शासन की ओर से विभिन्न विभागों को पौधे रोपने का जो लक्ष्य दिया जाता है वह किसी तरह पूरा तो कर लिया जाता है लेकिन उन्हें यूं ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। इस प्रवृति ने वृक्षारोपण के अभियान को महज कागजों तक ही सीमित कर दिया है। प्रशासन की ओर से वृक्षारोपण के लक्ष्य और वास्तविक रूप से जिंदा पौधों के बीच रहने वाले इस बडे अंतर के बारे में जनप्रतिनिधि भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं।       

काबिले जिक्र है कि महोबा जनपद में वृक्षारोपण अभियान  के अन्तर्गत इन चार वर्षों मे वर्ष 2017 मे 14 लाख 32 हजार 267 पौधे, वर्ष 2018 मे 28 लाख पौधे , 2019 मे 14 लाख 66 हजार पौधे व वर्ष 2020 मे 47 लाख 48 हजार 119 पौधे लगाऐ गये।और लाखों की धनराशि का व्यय किया गया। परन्तु भ्रष्टाचार की दीमक ने न केवल वृक्षारोपण अभियान को चट किया अपितु शासन की मंशा को ही चट कर डाला।   

    क्या आपने कभी विचार किया है कि वृक्षों को हरा भरा करने व वृक्षारोपण में सरकार हर साल महोबा में करोड़ों रुपये खर्च करती है मगर जमीन में वृक्ष नही दिखायी पड़ते।वन क्षेत्र उतना ही है उसी जमीन में सैकड़ो सालों से वृक्ष लगाये जा रहे है मगर भूमि का वह टुकड़ा दूसरे साल फिर खाली हो जाता है। जानकारों का कहना है कि यूपी में वन क्षेत्र बराबर घटता जा रहा है। मगर ये वृक्ष कहां लगाये जा रहे है। इस मामले में जांच किसी उच्च एंजेसी करायी जाए ताकि धांधली का खुलासा हो सके।

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