चार दिन की चाँदनी है फिर अँधेरी रात है

शव दाह गृह बने होने के बावजूद स्नान घाट पर जल रही लाशें

शव दाह गृह बने होने के बावजूद स्नान घाट पर जल रही लाशें

संवाददाता -जय दीप सिंह सरस

परसपुर,गोण्डा-
हिन्दी की एक पुरानी कहावत है चार दिन की चाँदनी है फिर अँधेरी रात है। ये पूर्ण रूपेण चरितार्थ हो रही है परसपुर के सूकरखेत पसका स्थित त्रिमुहानी घाट पर। जहाँ अभी 10 दिन पहले लाखों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है और आज बसंत पंचमी के दिन भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी।

यह स्थान पवित्र सरयू और घाघरा नदियों का संगम होने के कारण स्थानीय लोगों के अतिरिक्त दूर सुदूर के श्रद्धालुओं की आस्था व विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसी लिए यहाँ साल के 12 महीने लोगों का आवागमन बना रहता है। किन्तु इस घाट पर लाशों के जलने के कारण गंदगी की भरमार रहती है। प्रतिवर्ष मेले के दौरान सरकारी फ़रमान जारी होता है और दस पन्द्रह दिन तक साफ सफाई रहती है उसके बाद स्थिति जस की तस फिर हो जाती है।

जब कि लाखों रुपये की लागत से बना हुआ शव दाह गृह यहाँ धूल फाँक रहा है। मुख्य स्नान घाट पर चिता का जलना कहीं न कहीं जिम्मेदारों की व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। प्रतिदिन एक दो चिताओं के जलने से घाट पर काफी गंदगी फैली रहती है ।उक्त के सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी कर्नलगंज ज्ञान चन्द्र गुप्ता ने बताया कि जल्द ही सम्बन्धित लेखपाल से रिपोर्ट मँगा कर उचित कार्यवाही व व्यवस्था की जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here