नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की चुनौतिया

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     नई शिक्षा नीति पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन जी की अध्यक्षता में शिक्षाविदों द्वारा तैयार की गई है | मैं वर्तमान शिक्षा नीति को 185 साल के बाद बदली हुई नई शिक्षा नीति के रूप मे देखता हू, जो छात्रों को दिशा, दशा व परिभाषा बदलने वाली है | वर्तमान शिक्षा नीति को मै बदलाव की दिशा के रूप में भी देखता हूं क्योंकि 185 वर्ष पहले 1835 में लार्ड मैकाले द्वारा जो शिक्षा नीति उसने हमारे भारत देश में लागू की थी उसका उद्देशय भारतवर्ष को मानसिक रूप से कमजोर करने के लिए संस्कार, संस्कृति और शिक्षा के रहित शिक्षा नीति बनाई, जबकि पूरा विश्व जानता है कि प्राचीन समय मे भारत को विश्व गुरु का दर्जा मिला हुआ था | मैकाले का मानना था कि यदि भारत को गुलाम बना कर रखना है तो भारत के लोगों को मानसिक रूप से कमजोर करना होगा अर्थात शिक्षा के माध्यम से भारत की संस्कृति को भ्रष्ट बनाना होगा ऐसा उसने किया भी और अंग्रेजीयत को बढ़ाते हुए उसने शिक्षा नीति बनाई परंतु आज 185 वर्षों के बाद हमें पुरानी संस्कार, संस्कृति, और शिक्षा तीनों का वरदान प्राप्त इस नीति के माध्यम से हुआ है |       

         जिस तरह एक जगह रुका हुआ पानी बदबू मारने लगता है ठीक इसी प्रकार पुरानी शिक्षा पद्धति रटनतोते वाली शिक्षा व्यवस्था थी , यही कारण है कि भारत में समय-समय पर शिक्षा नीति में बदलाव होते रहे चाहे 1968 हो, 1986 हो, 1992 हो या वर्तमान शिक्षा नीति परंतु पुरानी सभी शिक्षा नीति कहीं ना कहीं छात्रों को बांधकर रखने वाली थी जैसे छात्रों को पाठ्यक्रम रूपी जंजीरों से जकड़ कर रखा हुआ है |    

         हम सब जानते हैं कि कमजोर पेड़ में कैसे अच्छा फल लग सकता है जब तक उस पेड़ की जड़, तना और डाली मजबूत नहीं होगी तब तक उसमें फल लगना संभव नहीं है | वैसी ही हमारी पुरानी शिक्षा पद्धति का कार्य रहा है परंतु आज की शिक्षा पद्धति में हम देखते हैं तो कक्षा 1 में बच्चे को प्रवेश के लिए करीब 7 वर्ष इसी प्रकार दूसरी कक्षा में 8 वर्ष होना चाहिए, इस प्रकार बच्चे की जब उम्र ठीक होगी तो वह बचपन का पूरा पोस्टिक आनंद  प्राप्त करते हुये | मानसिक, शारीरिक और वैचारिक रूप से मजबूत होता है और जब तक कोई भी छात्र मानसिक, शारीरिक और विचारों से मजबूत नहीं होगा आप उसे किसी प्रकार की अच्छी शिक्षा देने की और लेने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं | परंतु वर्तमान शिक्षा नीति में यह प्रावधान करते हुए मानसिक, शारीरिक व वैचारिक को बढ़ावा देते हुए जोड़ा गया है जो कि बहुत ही प्रशंसनीय है | 

              वर्तमान शिक्षा पद्धति जो नई लागू हुई है इसमें हर एक छात्र को स्वतंत्रता मिली है यदि हम पहले की शिक्षा नीति की बात करते हैं तो कहीं ना कहीं हमारे छात्र छात्राओं को पाठ्यक्रम से बांधकर रखा गया था | यदि उसे इंजीनियरिंग करनी है तो ओर कुछ नहीं कर सकता जब तक उसकी डिग्री पूरी नहीं हो जाती | यदि कोई छात्र बी॰ए॰ का है तो उसे भी  डिग्री पूरी करनी तभी वह कुछ ओर करने की सोच सकता है , जरूरी नहीं है कि छात्र जो, आज कला से पढ़ रहा है उसका मन इतिहास में आगे भी लगे  क्योकि व्यक्ति का मन चंचल, नवाचारी व परिवर्तनशील होता है , जो हर पल बदलता रहता है | कला के छात्र मे हो सकता है कोई रचनात्मक, सृजनात्मक या कोई वैज्ञानिक पद्धति उसके दिमाग में आ जाए या कोई आविष्कार करना चाहता हो , इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि बीए का छात्र है नई शिक्षा नीति में उसको स्वतंत्र किया है, कि नहीं, ऐसा नहीं है यदि कोई छात्र बीए पढ़ रहा है तो नई शिक्षा नीति उसे अपनी कार्य कुशलता के अनुरूप शोध करनी कि अनुमति देती है |  

            नई शिक्षा नीति के अनुसार छात्रों को गूगल कि तरह स्वतंत्र कर दिया है कि छात्र भ्रमण कर सकता पूरे ब्रह्मांड में और जो आपको ठीक लगे वैसे अपने जीवन को दिशायुक्त बना सकता हैं | यह शिक्षा नीति बहुत ज्यादा छात्रों के हित में है उनकी स्वतंत्रता के लिए है और इस प्रकार बच्चों ना केवल नौकरी के लिए पढ़गे बल्कि वह अपने स्वयं के कौशल विकास के माध्यम से रोजगार का सृजन करेंगे | इसके साथ ही नई  नीति की और प्रमुख बातों पर हम बात करते हैं तो सबसे पहले शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6% खर्च होगा जो की बहुत बड़ी उपलब्धि है जो वर्तमान में अभी तक 4.43% है    पांचवी तक के बच्चों का शिक्षण कार्य मातृभाषा में होगा यह बहुत ही अच्छी और प्रेरणादाई कदम है | इससे बच्चों पर मानसिक तनाव नहीं होगा क्योंकि बच्चा जब हमारे विद्यालय में आता है तो वह अपनी मातृभाषा से ही जुड़ कर आता है अगर मातृभाषा के स्थान पर किसी अन्य भाषा को सिखाने का प्रयास करते है तो मातृभाषा पर उसकी पकड़ कमजोर रह जाती है जिससे उसे तनाव और दबाव दोनों महसूस करने होते हैं |     
           ला और मेडिकल को छोड़कर सभी उच्च शिक्षा में एकल के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग का गठन कर एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा व उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीट जुड़ेंगे ये बहुत बड़ी बात है छात्रो के हित मे और यह हमारे आने वाले सभी छात्रों के लिए बहुत कारगर सिद्ध होगी | कक्षा छठवीं से ही वोकेशनल कोर्स शुरू होंगे इसके लिए छठवीं कक्षा के बाद से ही इंटर्नशिप कराया जाएगा जिससे बच्चों को कौशल विकास में फायदा होगा और उनके सोचने की दिशा में, रूचि में परिवर्तन होगा और नौकरी को प्राथमिकता ना देते हुए मालिक बनने की दिशा में भी बढ़ेंगे  तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा |  

                इसके साथ ही म्यूजिक और कला को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है उसका भी बढ़ावा दिया जाएगा जो हर एक व्यक्ति के अंदर होती है जिसे शुरू में पहचान लिया जाए और उसे उसकी शिक्षा दे दी जाए तो बहुत अच्छा प्रस्तुतीकरण देते हुए अपना नाम रोशन कर सकता है | यह बहुत अच्छी पहल है                 इसके साथ ही ई-पाठ्यक्रम को बढ़ावा देने राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नालजी फोरम बनाया जा रहा है जिसके लिए वर्चुअल लेब सरकारी विद्यालय में उपलब्ध कराते हुए तैयार की जा रही है ताकि बच्चों को बचपन से ही उसकी शिक्षा, रुचि अनुसार जोड़ा जा सके |       

         नई शिक्षा नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू होगा , अर्थात यदि कोई छात्र 2 साल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाता है तो उसको कुछ भी हासिल नहीं होता है लेकिन अब मल्टीपल एंट्री एग्जिट सिस्टम में 1 साल के बाद पढ़ाई छोड़ने पर सर्टिफिकेट 2 साल के बाद डिप्लोमा तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोड़ने के पर डिग्री मिल जाएगी | इससे देश में ड्रॉपआउट रेशों कम होगा तथा जितना उस छात्र ने सीखा, या पड़ा है उतने की डिग्री उसके हाथ में आ जाएगी जो उसे लाभकारी होगी अगर कोई छात्र किसी कोर्स को बीच में छोड़कर दूसरे कोर्स में एडमिशन लेना चाहे तो वह पहले कोर्स से एक खास निश्चित समय तक ब्रेक ले सकता है और दूसरा कोर्स ज्वाइन कर सकता है | यह बहुत ही प्रभावशाली कदम होगा छात्रो के हित मे, क्योंकि हम सभी जानते हैं कि छात्र का मस्तिष्क कभी स्थिर नहीं रहता है इसमें परिवर्तन व नए विचार आना जाना लगे रहते हैं जरूरी नहीं है कि आज वह जो कार्य कर रहे हैं वह आने वाले समय में वही काम करें, हो सकता उस में परिवर्तन करते कुछ नया कर सके | 
       
       इससे छात्र के जीवन में बदलाव आएगा यदि कुछ नया कोर्स करना चाहता है, तो वह ब्रेक कर किसी अन्य कोर्स मे प्रवेश कर सकता है इससे छात्र के सीखने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और हमें कई नवाचारी छात्र भविष्य में अपने देश को मिल सकेंगे, कुल मिलाकर वर्तमान शिक्षा नीति छात्र हित और शिक्षा हितो को ध्यान में रखते हुये एक शिक्षित भारत की परिकल्पना की गई है | जिसके बहुत ही प्रभावशाली परिणाम हमारे लिए प्राप्त होंगे और छात्र शिक्षा मानसिक गुलामी से मुक्त होते हुये एक नया वातावरण, नई शिक्षा नीति के माध्यम से मिलेगा इसके लिए मैं वर्तमान शिक्षा नीति से जुड़े हुए सभी शिक्षक व सरकार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि यह शिक्षा नीति पूर्ण रूप से भारतीयता पर आधारित शिक्षा नीति है जो हमारे देश को संस्कार, संस्कृति और शिक्षा तीनों के सहयोग से ऊंचाइयों तक ले जाने वाली रहेगी और  आने वाले समय में हमारा देश विश्व गुरु बनकर रहेगा |            

   आज भी सरकारी स्कूलों में 65% बच्चे पढ़ते हैं इसी को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति बनाई गई है ताकि जो बच्चे सरकारी स्कूलों में अध्ययन करते हैं उन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर के कौशल विकास से जोड़कर भी तैयार किया जा सके ताकि उनके जीवन में शिक्षा का महत्व कार्य और रोजी-रोटी कमाने का उन्मुखीकरण किया जा सके   1986 में शिक्षा नीति में बदलाव किया गया जो कि सिर्फ मात्रात्मक सुधार के अतिरिक्त और कुछ  कोई नहीं हुआ, 1992 में कुछ और बदलाव हुए परंतु यह भी शिक्षा नीति बहुत ज्यादा कुछ बदलाव नहीं कर सकी और ना ही इतनी ज्यादा कारगर सिद्ध हुई |            

    आज स्तरीय शिक्षा के बिना कोई भी देश विश्व मे शक्तिशाली नहीं बन सकता है | जिस नवाचार की बात की जाती है उसका आधार ही स्तरीय शिक्षा है आज केवल अक्षर ज्ञान से ही काम नहीं चलने वाला है | इसमें कोई शक नहीं कि नई शिक्षा नीति काफी दूरदर्शी और बेहतर दूरगामी परिणाम वाली है आने वाले समय में आज की शिक्षा नीति का परिणाम हमें बहुत ही सुखद मिलने वाला है और इसी से हमारा राष्ट्र शक्तिशाली भी बनेगा  प्री-प्राइमरी शिक्षा यानी कि 3 से 6 साल के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा का वैश्वीकरण किया जाएगा साथ ही सभी बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी यह बहुत ही अच्छी और प्रशंसनीय पहल है | नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य ही यह है कि शिक्षा सस्ती, सरल और सबको उपलब्ध हो सभी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिले |   

              इस सकारात्मक परिवर्तन और सुधार के लिए हमे और हमारे परिवार को भी अहम भूमिका निभानी होगी और इसके लिए सबसे पहले शिक्षा के प्रमुख सैनिक शिक्षकों में कौशल चिंतन विकसित किया जाए |  जिससे वे बच्चों की अभिरुचि और शिक्षा को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारण को समझ सके   तथा उसी अनुसार बच्चो को जीवन की दिशा प्रदान कर सकें, क्योंकि नई नीति को कल्पना से साकार रूप देने के लिए जरूरी है | सबसे अहम भूमिका एक योग्य शिक्षक की ही होगी क्योंकि शिक्षक विद्यार्थियों को नई नीति के अनुसार तैयार करेंगे और शिक्षक ही इस नीति को जमीनी स्तर पर उतारने का काम करेंगे ऐसे में कोई भी नीति सफल तभी होगी जब उस देश के राष्ट्र निर्माता नीति को आत्मसात करने को तैयार होंगे तथा छात्रो के मन की बात समझ सकेंगे और  तभी हमारे छात्र लाभान्वित हो सकेंगे |  

            इसके साथ ही कुछ सुझाव के माध्यम से बदलाव की भी इस शिक्षा नीति में आवश्यकता है कि पूरी तरीके से मशीनीकरण से शिक्षण कार्य कराया नहीं जा सकता है | शिक्षक आखिर शिक्षक ही होता है जो वह अपने अनुभव से प्रत्यक्ष रूप से बच्चों को दे सकता है वह हमें मशीन से प्राप्त नहीं होगी | इस और हमें ध्यान देने की आवश्यकता है इसके साथ ही इसमें प्रावधान यह भी होना चाहिए कि जिस प्रकार शिक्षक छात्रों का मूल्यांकन करते हैं, वैसे ही ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए कि छात्र भी शिक्षकों का मूल्यांकन कर सकें ताकि समय-समय पर शिक्षकों को मिलने वाले पुरस्कारो का एक आधार छात्रों का मूल्यांकन बन सके ।

इसके साथ संसाधन, सुविधाएं और ग्रामीण स्तरों पर भौगोलिक स्थिति के आधार पर बदलाव की आवश्यकता है , तथा विद्यालयों में शिक्षकों की विषय वार पूर्ति करने की भी आवश्यकता होगी ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को बनाया जा सके और पाठ्यक्रम ग्रामीण स्तर में पढ़ने वाले विद्यालयों के बच्चों के मनोभावों के आधार पर भी तैयार होना चाहिए क्यों ग्रामीण स्तर पर रहने वाले बच्चों का स्तर, भाषा शैली परिवार व उनके आसपास का कैसा माहोल कैसा है, इसका भी विशेष ध्यान रखना चाहिए ।पाठ्यक्रम रटने वाला नहीं समझने वाला होना चाहिए तथा वैकल्पिक प्रश्न उत्तरों के आधार पर बच्चों का मूल्यांकन हो इसकी व्यवस्था होना चाहिए | इन सभी बदलावों से यह नई शिक्षा नीति को क्रियान्वयन कराना और अच्छा और सुगम हो सकता है | इसके साथ ही नई शिक्षा नीति के लिए सभी शिक्षकविदो और सरकार को शुभकामनाएं कि आने वाली समय मे नई शिक्षा नीति पूरी तरीके से संस्कार, संस्कृति और शिक्षा पर आधारित रहेगी और इसी के आधार पर हमारा भारत पुनः विश्व गुरु बन कर रहेगा | 

साथी हाथ बढाते है शिक्षा की अलख जगाते है| नई  शिक्षा नीति  को मिल  हम सब  अपनाते है|| फिर  से  शिक्षा  संस्कृति  संस्कार को बढाना है, भारत को शिक्षा से  हम सब विश्व गुरू बनाते है||