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                <title>Featured - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>गंगा एक्सप्रेस-वे का शुभारंभ: प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन लाइव देख उत्साहित हुए जनप्रतिनिधि </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong>  देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव संबोधन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से देखा। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक फूलपुर दीपक पटेल, विधायक फाफामऊ गुरु प्रसाद मौर्या, जिलाध्यक्ष गंगापार निर्मला पासवान, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय समेत कई जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे। वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और सीडीओ हर्शिका सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177626/inauguration-of-ganga-expressway-public-representatives-were-excited-to-see"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260429-wa0074-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव संबोधन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से देखा। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक फूलपुर दीपक पटेल, विधायक फाफामऊ गुरु प्रसाद मौर्या, जिलाध्यक्ष गंगापार निर्मला पासवान, एमएलसी सुरेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय समेत कई जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे। वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और सीडीओ हर्शिका सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गंगा एक्सप्रेस-वे को उत्तर प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल राज्य के विभिन्न जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेस-वे से पूर्वांचल सहित पूरे प्रदेश को आर्थिक मजबूती मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लाइव प्रसारण के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के विचारों का स्वागत करते हुए कहा कि गंगा एक्सप्रेस-वे क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 22:40:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, "CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177595/magistrate-does-not-need-prior-approval-to-direct-filing-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, "CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3) के तहत FIR दर्ज करने या जांच करने के संज्ञान-पूर्व चरण तक विस्तारित नहीं होती।" यह टिप्पणी CPI(M) नेता वृंदा करात द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से पहले कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में BJP नेता कपिल शर्मा, अनुराग ठाकुर आदि के खिलाफ FIR दर्ज करने की उनकी याचिका खारिज की गई थी। मजिस्ट्रेट ने इस आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया कि इसके लिए पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत है; बाद में हाईकोर्ट ने भी इस विचार को सही ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 196 (BNSS की धारा 217) यह अनिवार्य करती है कि IPC की धारा 295A, 153A और 153B के तहत अपराधों का संज्ञान लेने के लिए सरकार से पहले से मंज़ूरी लेना ज़रूरी है। CrPC की धारा 197 (BNSS की धारा 218) सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अपराधों का संज्ञान लेने के लिए पहले से मंज़ूरी लेना अनिवार्य करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने वृंदा करात की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणी रद्द की, जिसमें कहा गया था कि CrPC की धारा 156(3) के तहत कोई भी मजिस्ट्रेट पहले से मंज़ूरी लिए बिना FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने भड़काऊ भाषणों/घृणा अपराधों के खिलाफ निर्देश मांगने वाले मामलों के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। यह देखते हुए कि मौजूदा कानून भड़काऊ भाषणों से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त है, कोर्ट ने भड़काऊ भाषणों को अपराध घोषित करने के लिए कोई नया निर्देश जारी करने से परहेज़ किया। हालांकि पीठ ने मांगे गए स्वरूप के निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया, लेकिन उसने यह फैसला विधायी अधिकारियों पर छोड़ दिया कि वे अपने विवेक से विचार करें कि क्या किसी नीतिगत या विधायी उपाय की ज़रूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने आगे कहा कि किसी संज्ञेय अपराध का पता चलने पर FIR दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है (जैसा कि ललिता कुमारी केस में तय किया गया)। अगर FIR दर्ज नहीं होती है, तो CrPC/BNSS में असरदार उपाय दिए गए। जैसे, कोई पीड़ित व्यक्ति CrPC की धारा 154(3)/BNSS की धारा 173(4) के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकता है। उसके बाद CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175 के तहत मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है, या CrPC की धारा 200/BNSS की धारा 223 के तहत शिकायत के ज़रिए आगे बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">"ये उपाय एक पूरा कानूनी ढांचा बनाते हैं। इन उपायों की उपलब्धता, और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत संवैधानिक अदालतों के निगरानी अधिकार क्षेत्र से यह साबित होता है कि कोई ऐसी कानूनी कमी नहीं है, जिसके लिए इस तरह के दखल की ज़रूरत हो। सही तरीका यही है कि मौजूदा कानून को पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से लागू किया जाए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:57:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गंगा एक्सप्रेस-वे: 12 शहर, 36 हजार करोड़ का खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है। नोएडा और आगरा के बीच बने एक्सप्रेस-वे के बाद से राज्य में अब तक पांच एक्सप्रेस-वे अस्तित्व में आ चुके हैं। अब 29 अप्रैल यानी आज (बुधवार) उत्तर प्रदेश में छठवें एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के नए-नवेले गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया। 594 किलोमीटर लंबे इस ई-वे को यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता के रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह जानना अहम है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177593/ganga-expressway-12-cities-cost-rs-36-thousand-crores"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/up-expressway-16374761933x2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है। नोएडा और आगरा के बीच बने एक्सप्रेस-वे के बाद से राज्य में अब तक पांच एक्सप्रेस-वे अस्तित्व में आ चुके हैं। अब 29 अप्रैल यानी आज (बुधवार) उत्तर प्रदेश में छठवें एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी के नए-नवेले गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया। 594 किलोमीटर लंबे इस ई-वे को यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव में भाजपा के लिए सत्ता के रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर गंगा एक्सप्रेस-वे की जरूरत और इसके निर्माण से जुड़ा इतिहास क्या है? इस एक्सप्रेस-वे की क्या-क्या खासियतें हैं? इसका आर्थिक और राजनीतिक महत्व कितना ज्यादा है? आइये जानते हैं... गंगा एक्सप्रेस-वे की नींव योगी सरकार के कार्यकाल में 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से रखी गई थी। हालांकि, इसकी परिकल्पना और जरूरत को लेकर पहली बार चर्चाएं 2000 के दशक में ही शुरू हो गई थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">गंगा एक्सप्रेस-वे का विचार पहली बार 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से प्रस्तावित किया गया था। इसे शुरुआत में 'ग्रेटर नोएडा-बलिया एक्सप्रेस-वे' के तौर पर पहचान मिली। हालांकि, गंगा नदी के किनारे इसकी निर्माण योजना होने की वजह से इसे पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां नहीं मिल पाईं और यह परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अगले करीब 12 साल तक इस प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा तक नहीं हुई। इस बीच राज्य में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने नोएडा-आगरा एक्सप्रेस-वे को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">29 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को पुनर्जीवित किया। पर्यावरण के मानकों को पूरा करने के लिए, नए एक्सप्रेस-वे को गंगा नदी से 10 किलोमीटर की दूरी पर लगभग समानांतर बनाने की योजना तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) को दी गई। साल 2020 में चरण-1 (मेरठ से प्रयागराज) के निर्माण के लिए दो हजार करोड़ रुपये का पहला बजट आवंटित किया गया। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया। अगस्त 2021 तक 90% से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">नवंबर 2021 में इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल गई और यूपी कैबिनेट ने इसके लिए 36,230 करोड़ का बजट स्वीकृत किया। 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी। एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट को डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर 12 पैकेजों में बांटा गया, जिसका ठेका अदाणी एंटरप्राइजेज और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की कंपनियों को दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जनवरी 2025 में, एक्सप्रेस-वे के दूसरे चरण को भी मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत मेरठ से हरिद्वार (अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे) और प्रयागराज से बलिया तक इसका विस्तार किया जाना है।मार्च 2026 तक पहले चरण में 594 किमी लंबे मुख्य एक्सप्रेस-वे का लगभग 96% काम पूरा हो गया। इसमें मुख्य कैरिजवे का पूरा काम और सभी 1,498 संरचनाओं (पुलों आदि) का निर्माण शामिल रहा। अप्रैल आते-आते इसके सफल ट्रायल रन (परीक्षण) भी पूरे कर लिए गए। अब यह छह लेन एक्सप्रेस-वे पूरी तरह तैयार है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल 2026 को हरदोई के सलेमपुर में इसका भव्य उद्घाटन करेंगे। इंजीनियरों के मुताबिक, यह एक्सप्रेस-वे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ लेन तक विस्तार करने लायक बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"> लगभग 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में 14 लंबे पुल, जिसमें हापुड़ में गंगा नदी पर 900 मीटर और बदायूं में रामगंगा पर 720 मीटर लंबा पुल शामिल हैं। इसके अलावा सात रेलवे ओवरब्रिज, 32 फ्लाईओवर और 453 अंडरपास शामिल हैं। वाहन चालकों की नींद और थकान दूर करने के लिए किनारे पर रंबल स्ट्रिप्स लगाई गई हैं, जो कंपन पैदा कर चालकों को सचेत करेंगी और हादसों का खतरा कम करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। निगरानी-सुरक्षा के लिए पूरे एक्सप्रेस-वे पर सीसीटीवी और स्पीड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित किया गया है। रास्ते में यात्रियों के लिए विश्राम स्थल, भोजनालय, पेट्रोल पंप और आपात स्थिति के लिए ट्रॉमा सेंटर जैसी सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके दोनों ओर गंगा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिसमें आईटी पार्क, फार्मा पार्क और टेक्सटाइल पार्क बनेंगे, जिससे रोजगार और व्यापार को भारी बढ़ावा मिलेगा।दावा किया जा रहा है कि इसके शुरू होने से देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 55% से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:55:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बॉम्बे हाईकोर्ट ने खीझ कर 90 साल के बुजुर्ग के अवमानना केस की तारीख़ लगा दी साल 2046 की</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बॉम्बे कोर्ट ने 90 साल के एक बुजुर्ग को अगली तारीख़ साल 2046 की लगा दी है। यानी 20 साल बाद की। अगली तारीख़ आने तक क्या बुजुर्ग अदालत जाने की स्थिति में होंगी? दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला खीझकर दिया है। एक बुजुर्ग महिला द्वारा दायर 9 साल पुराने मानहानि के केस में यह बेहद असामान्य और सख्त फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने इस मामले को 2046 तक के लिए इसलिए टाल दिया क्योंकि कोर्ट को लगा कि यह केस दो बुजुर्गों के बीच अहंकार की लड़ाई है, जिसकी वजह से कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177591/bombay-high-court-angrily-dates-the-contempt-case-of-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/bombay-highcourt_1713880877.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बॉम्बे कोर्ट ने 90 साल के एक बुजुर्ग को अगली तारीख़ साल 2046 की लगा दी है। यानी 20 साल बाद की। अगली तारीख़ आने तक क्या बुजुर्ग अदालत जाने की स्थिति में होंगी? दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला खीझकर दिया है। एक बुजुर्ग महिला द्वारा दायर 9 साल पुराने मानहानि के केस में यह बेहद असामान्य और सख्त फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने इस मामले को 2046 तक के लिए इसलिए टाल दिया क्योंकि कोर्ट को लगा कि यह केस दो बुजुर्गों के बीच अहंकार की लड़ाई है, जिसकी वजह से कोर्ट का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है। इसलिए इस मामले को अगले 20 साल तक नहीं सुना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने 28 अप्रैल 2026 को दिए गए आदेश में साफ़ लिखा, 'यह उन मामलों में से एक है जिसमें अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पार्टियों के बीच अहंकार की लड़ाई कोर्ट सिस्टम को जाम कर रही है। इससे उन अहम मामलों को सुनने का मौका नहीं मिल पाता जो वाकई प्राथमिकता के हैं।'</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता सीनियर सिटीजन या सुपर सीनियर सिटीजन हैं, इसलिए भी इस मामले को कोई प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। आदेश में साफ़ तौर पर लिखा गया, 'इस मामले को 2046 के बाद सूचीबद्ध किया जाए। किसी भी स्थिति में इसे सीनियर सिटीजन होने के आधार पर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यह साफ़ तौर पर कहा जाता है कि 2046 से पहले इस मामले को कभी भी सुनवाई के लिए नहीं लिया जाएगा।'</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद श्याम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में 2015 के वार्षिक आम बैठक से शुरू हुआ। सोसाइटी ने दो महिलाओं- लगभग 90 वर्षीय तारिणीबेन देसाई और दूसरी महिला- को सोसाइटी से निकालने का प्रस्ताव पास किया था। इन महिलाओं ने सोसाइटी के नोटिस, पत्र और प्रस्ताव को मानहानिकारक बताते हुए 2017 में कोर्ट में मुक़दमा दायर किया और 20 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा। उनका आरोप था कि इन पत्रों की वजह से उन्हें मानसिक परेशानी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने पहले कई बार समझौता कराने की कोशिश की। एक बार तो कहा गया कि अगर सोसाइटी बिना शर्त माफी मांग ले तो मामला सुलझ सकता है, लेकिन 90 वर्षीय तारिणीबेन देसाई माफी स्वीकार करने को तैयार नहीं हुईं और केस आगे बढ़ाने पर अड़ी रहीं। 27 मार्च 2025 को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो न तो महिलाएं कोर्ट में आईं और न ही उनके वकील। कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी थी। अब 28 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने पूरे मामले को 20 साल के लिए फ्रीज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा, 'मैं इस मामले पर और कुछ नहीं कहना चाहता, बस अगले 20 साल तक इसे न उठाया जाए।'</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट का मानना है कि छोटे-छोटे अहंकार और व्यक्तिगत झगड़ों के कारण कोर्ट का समय उन गंभीर मामलों से छीन लिया जाता है, जिनमें आम लोगों की जान-माल, संपत्ति या अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे होते हैं। यह फैसला कोर्ट की बढ़ती खीझ का नतीजा बताया जा रहा है, जहां छोटे-मोटे झगड़ों में सालों-साल तक समय बर्बाद होता रहता है। यह ख़बर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग कोर्ट के इस फैसले की तारीफ़ कर रहे हैं, तो कुछ इसे बहुत सख्त बता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:49:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच से निपटने के लिए देश में पहले से मौजूद कानून पर्याप्त हैं और किसी विधायी खालीपन की स्थिति नहीं है, जिसके चलते न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़े। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत के अनुसार न्यायपालिका अपनी सीमा में रहकर ही काम कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साफ किया है कि किसी भी अपराध के लिए सजा का निर्धारण करना पूरी तरह से विधायिका का अधिकार क्षेत्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने दोहराया कि यह अधिकार संसद और राज्य विधानसभाओं के पास सुरक्षित है।शक्तियों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177589/supreme-court-refuses-to-issue-guidelines-regarding-hate-speech"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच से निपटने के लिए देश में पहले से मौजूद कानून पर्याप्त हैं और किसी विधायी खालीपन की स्थिति नहीं है, जिसके चलते न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़े। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत के अनुसार न्यायपालिका अपनी सीमा में रहकर ही काम कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साफ किया है कि किसी भी अपराध के लिए सजा का निर्धारण करना पूरी तरह से विधायिका का अधिकार क्षेत्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने दोहराया कि यह अधिकार संसद और राज्य विधानसभाओं के पास सुरक्षित है।शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत पर आधारित संवैधानिक व्यवस्था न्यायपालिका को नए अपराध बनाने या न्यायिक निर्देशों के ज़रिए आपराधिक दायित्व का दायरा बढ़ाने की इजाज़त नहीं देती।" ज़्यादा-से-ज़्यादा कोर्ट सिर्फ़ सुधारों की ज़रूरत के बारे में विधायिका और कार्यपालिका का ध्यान खींच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा "यह दलील कि हेट स्पीच का क्षेत्र कानूनी तौर पर खाली है, गलत है। मौजूदा आपराधिक कानून का ढांचा—जिसमें IPC के प्रावधान और उससे जुड़े कानून शामिल हैं—उन कामों से निपटने के लिए पर्याप्त है, जो दुश्मनी को बढ़ावा देते हैं, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं, या सार्वजनिक शांति भंग करते हैं। इसलिए यह क्षेत्र खाली नहीं है।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत कानून की कमी से नहीं, बल्कि उसके लागू होने में कमी से है। हालांकि, ऐसी चिंताओं के आधार पर न्यायपालिका द्वारा कानून बनाना सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज करने का प्रावधान करती है, और पुलिस की लापरवाही के मामले में मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत करने का उपाय भी देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि मौजूदा आपराधिक कानून हेट स्पीच जैसे मामलों से निपटने में सक्षम हैं। इसलिए इस मुद्दे पर अलग से कोई न्यायिक दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक अदालतें कानून की व्याख्या और मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए निर्देश दे सकती हैं, लेकिन वे कानून नहीं बना सकतीं और न ही विधायिका को ऐसा करने के लिए बाध्य कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी तरह की नई नीति या कानून की आवश्यकता महसूस होती है, तो इस पर निर्णय लेना पूरी तरह विधायी प्राधिकरणों का काम है। अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय संविधान शक्ति विभाजन के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका की अलग-अलग भूमिकाएं निर्धारित हैं। इन्हीं सीमाओं के भीतर सभी संस्थाओं को कार्य करना होता है। अदालत ने लॉ कमीशन की 267वीं रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें संभावित सुधारों का सुझाव दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने यह भी कहा: "हालांकि, हम मांगी गई गाइडलाइंस जारी करने से इनकार करते हैं, लेकिन हम यह कहना उचित समझते हैं कि हेट स्पीच और अफ़वाह फैलाने से जुड़े मुद्दे सीधे तौर पर भाईचारे, गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रखने से जुड़े हैं। केंद्र और राज्यों के लिए यह खुला है कि वे अपनी समझ से विचार करें कि बदलते सामाजिक बदलावों और चुनौतियों को देखते हुए क्या और कानूनी कदम उठाने की ज़रूरत है, या 23 मार्च 2017 की विधि आयोग की रिपोर्ट 267 में सुझाए गए अनुसार उचित संशोधन किए जाएं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:44:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अदाणी ग्रुप द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरदोई से 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह यूपी के सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक है, जिसे 3.5 साल से भी कम समय में पूरा किया गया है।  यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे राज्य के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दशकों से पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के बावजूद अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे इस क्षेत्र की छिपी हुई आर्थिक क्षमता को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177581/69f1f109e99f8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001755734.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरदोई से 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। यह यूपी के सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक है, जिसे 3.5 साल से भी कम समय में पूरा किया गया है।  यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे राज्य के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशकों से पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के बावजूद अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे इस क्षेत्र की छिपी हुई आर्थिक क्षमता को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह प्रोजेक्ट बेहतर पहुंच, दूरी में कमी और राज्य के विकास कॉरिडोर से मजबूत जुड़ाव के माध्यम से पूर्वी यूपी को नई आर्थिक दिशा देगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रा समय करीब 11 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा। इससे बिजनेस, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन क्षेत्रों को व्यापक लाभ होगा। सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए इस एक्सप्रेसवे पर एआई-सक्षम कैमरा सिस्टम लगाए गए हैं, जो दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एडवांस अलर्ट करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रोजेक्ट के तहत शाहजहांपुर जिले में 3.5 किमी लंबा इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी तैयार किया गया है, जिससे भारतीय वायुसेना के एयरक्राफ्ट को आपात स्थिति में लैंड कर सकेंगे और इस रणनीतिक कॉरिडोर की क्षमताएं और मजबूत होंगी।</div>
<div style="text-align:justify;">12 जिलों से गुजरने वाला यह छह लेन का एक्सप्रेसवे, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है, बाजारों, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा केंद्रों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को बेहतर बनाएगा। आम नागरिकों को जहां आवश्यक सेवाओं तक तेजी से पहुंच मिलेगी, वहीं व्यापार और उद्योगों को तेज कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड, जो अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का रोड्स बिजनेस है, ने इस परियोजना में 464 किमी, यानी कुल एलाइनमेंट का लगभग 80% हिस्सा विकसित किया। निर्माण के समय में इश प्रोजेक्ट पर 12,000 से ज्यादा श्रमिक तैनात रहे। बाकि हिस्से का निर्माण आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर ने बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे हर वर्ष ₹25,000–30,000 करोड़ की लॉजिस्टिक्स बचत करेगा, अगले एक दशक में लगभग 3 लाख रोजगार सृजित करेगा और राज्य के जीडीपी में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का योगदान देगा। इसके साथ ही, यह फ्रेट वेलोसिटी को बढ़ाने और कई क्षेत्रों में इन्वेंट्री होल्डिंग लागत को कम करने में मदद करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह ट्रंक कॉरिडोर कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं की तेज आवाजाही सुनिश्चित कर व्यापार प्रवाह को मजबूत करेगा। किसानों और छोटे कारोबारियों को बेहतर बाजार पहुंच और बेहतर मूल्य प्राप्ति में सहायता मिलेगी। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कृषि कनेक्टिविटी को मजबूती देने के साथ करीब 8 करोड़ से अधिक लोगों को को फायदा पहुंचाएगा। प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंच को भी बेहतर करेगा, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन मजबूत होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:33:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनी पल पर शुरू हो रही साहस और भक्ति के प्रतीक 'संकट मोचन हनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत का लोकप्रिय  एंटरटेनमेंट चैनल सोनी पल, जो अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है, ने गर्व और उत्साह के साथ संकट मोचन हनुमान के प्रसारण की घोषणा की है। यह एक कालजयी पौराणिक धारावाहिक है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करता रहा है। सोनी पल पर इसके शुरू होने के साथ दर्शकों को भगवान हनुमान की साहसिक यात्रा को एक बार फिर नए अंदाज में देखने का अवसर मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस महाकाव्य के केंद्र में भक्ति, शक्ति और साहस के सच्चे 'सुपरहीरो' भगवान हनुमान हैं।  उनकी जीवन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177584/sankat-mochan-hanuman-symbol-of-courage-and-devotion-starting-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001755600-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत का लोकप्रिय  एंटरटेनमेंट चैनल सोनी पल, जो अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है, ने गर्व और उत्साह के साथ संकट मोचन हनुमान के प्रसारण की घोषणा की है। यह एक कालजयी पौराणिक धारावाहिक है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करता रहा है। सोनी पल पर इसके शुरू होने के साथ दर्शकों को भगवान हनुमान की साहसिक यात्रा को एक बार फिर नए अंदाज में देखने का अवसर मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस महाकाव्य के केंद्र में भक्ति, शक्ति और साहस के सच्चे 'सुपरहीरो' भगवान हनुमान हैं।  उनकी जीवन यात्रा वीरता और अटूट निष्ठा से भरी है, जो हर पीढ़ी के दर्शकों को गहराई से जोड़ती है और उन्हें आस्था, धर्म व निस्वार्थ सेवा जैसे शाश्वत मूल्यों की याद दिलाती है। यह कहानी भगवान हनुमान की उस अद्भुत यात्रा को दिखाती है, जहाँ वे निडर रक्षक के रूप में सामने आते हैं। भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति असीम है और बुराई के खिलाफ उनका साहस बेजोड़ है। शानदार दृश्यों और दमदार कहानी के साथ यह सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक अनुभव है, जो दिल और आत्मा को छू जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस धारावाहिक की शानदार स्टार कास्ट ने इन पौराणिक किरदारों को पूरी सच्चाई और जीवंतता के साथ पर्दे पर उतारने का काम किया है। गगन मलिक भगवान राम के रूप में गरिमा और मर्यादा को दर्शाते हैं; देब्लिना चटर्जी,  माता सीता की करुणा और शक्ति को खूबसूरती से प्रस्तुत करती हैं। वहीं निर्भय वाधवा भगवान हनुमान की दिव्य ऊर्जा को जीवंत करते हैं और सौरव गुर्जर रावण के रूप में दमदार अभिनय करते नजर आते हैं। ये सभी कलाकार मिलकर एक ऐसी दुनिया रचते हैं, जो जादुई होने के साथ-साथ हमारी परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भगवान हनुमान को परम रक्षक और दिव्य सुपरहीरो के रूप में प्रस्तुत करने वाला संकट मोचन हनुमान, अपने शाश्वत संदेश और यादगार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने का वादा करता है।  सोनी पल दर्शकों को इस दिव्य यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ भगवान हनुमान की गाथा एक बार फिर टीवी स्क्रीन पर लौट रही है, जो पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली, प्रेरणादायक और प्रासंगिक है। यह शो 4 मई से रात 9 बजे, दर्शकों को हनुमान जी की कहानी को फिर से जीने और भक्ति की भावना को दोबारा महसूस करने का मौका</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:29:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनी पल पर शुरू हो रही साहस और भक्ति के प्रतीक 'संकट मोचन हनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत का लोकप्रिय  एंटरटेनमेंट चैनल सोनी पल, जो अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है, ने गर्व और उत्साह के साथ संकट मोचन हनुमान के प्रसारण की घोषणा की है। यह एक कालजयी पौराणिक धारावाहिक है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करता रहा है। सोनी पल पर इसके शुरू होने के साथ दर्शकों को भगवान हनुमान की साहसिक यात्रा को एक बार फिर नए अंदाज में देखने का अवसर मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस महाकाव्य के केंद्र में भक्ति, शक्ति और साहस के सच्चे 'सुपरहीरो' भगवान हनुमान हैं।  उनकी जीवन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177518/sankat-mochan-hanuman-symbol-of-courage-and-devotion-starting-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001754239.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत का लोकप्रिय  एंटरटेनमेंट चैनल सोनी पल, जो अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है, ने गर्व और उत्साह के साथ संकट मोचन हनुमान के प्रसारण की घोषणा की है। यह एक कालजयी पौराणिक धारावाहिक है, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करता रहा है। सोनी पल पर इसके शुरू होने के साथ दर्शकों को भगवान हनुमान की साहसिक यात्रा को एक बार फिर नए अंदाज में देखने का अवसर मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस महाकाव्य के केंद्र में भक्ति, शक्ति और साहस के सच्चे 'सुपरहीरो' भगवान हनुमान हैं।  उनकी जीवन यात्रा वीरता और अटूट निष्ठा से भरी है, जो हर पीढ़ी के दर्शकों को गहराई से जोड़ती है और उन्हें आस्था, धर्म व निस्वार्थ सेवा जैसे शाश्वत मूल्यों की याद दिलाती है। यह कहानी भगवान हनुमान की उस अद्भुत यात्रा को दिखाती है, जहाँ वे निडर रक्षक के रूप में सामने आते हैं। भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति असीम है और बुराई के खिलाफ उनका साहस बेजोड़ है। शानदार दृश्यों और दमदार कहानी के साथ यह सिर्फ एक धारावाहिक नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक अनुभव है, जो दिल और आत्मा को छू जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस धारावाहिक की शानदार स्टार कास्ट ने इन पौराणिक किरदारों को पूरी सच्चाई और जीवंतता के साथ पर्दे पर उतारने का काम किया है। गगन मलिक भगवान राम के रूप में गरिमा और मर्यादा को दर्शाते हैं; देब्लिना चटर्जी,  माता सीता की करुणा और शक्ति को खूबसूरती से प्रस्तुत करती हैं। वहीं निर्भय वाधवा भगवान हनुमान की दिव्य ऊर्जा को जीवंत करते हैं और सौरव गुर्जर रावण के रूप में दमदार अभिनय करते नजर आते हैं। ये सभी कलाकार मिलकर एक ऐसी दुनिया रचते हैं, जो जादुई होने के साथ-साथ हमारी परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भगवान हनुमान को परम रक्षक और दिव्य सुपरहीरो के रूप में प्रस्तुत करने वाला संकट मोचन हनुमान, अपने शाश्वत संदेश और यादगार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने का वादा करता है।  सोनी पल दर्शकों को इस दिव्य यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ भगवान हनुमान की गाथा एक बार फिर टीवी स्क्रीन पर लौट रही है, जो पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली, प्रेरणादायक और प्रासंगिक है। यह शो 4 मई से रात 9 बजे, दर्शकों को हनुमान जी की कहानी को फिर से जीने और भक्ति की भावना को दोबारा महसूस करने का मौका देगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 18:34:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजा रवि वर्मा के चित्रों में जीवित गौरवशाली भारतीय परंपरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय चित्रकला के गौरवशाली इतिहास में राजा रवि वर्मा एक ऐसे युगपुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने अपनी कूची और रंगों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान और वैश्विक गरिमा प्रदान की। 29 अप्रैल 1848 को केरल के किलिमनूर नामक छोटे से गांव में जन्मे इस महान कलाकार ने उस समय कला की साधना प्रारंभ की जब वह केवल राजदरबारों की दीवारों और प्राचीन मंदिरों के गर्भगृहों तक ही सीमित थी। रवि वर्मा का जन्म एक ऐसे कुलीन परिवार में हुआ था जहाँ कला, साहित्य और संस्कृति का संगम पहले से ही विद्यमान था</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177488/glorious-indian-tradition-alive-in-the-paintings-of-raja-ravi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/untitled-1-1682749007.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय चित्रकला के गौरवशाली इतिहास में राजा रवि वर्मा एक ऐसे युगपुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हैं जिन्होंने अपनी कूची और रंगों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक नई पहचान और वैश्विक गरिमा प्रदान की। 29 अप्रैल 1848 को केरल के किलिमनूर नामक छोटे से गांव में जन्मे इस महान कलाकार ने उस समय कला की साधना प्रारंभ की जब वह केवल राजदरबारों की दीवारों और प्राचीन मंदिरों के गर्भगृहों तक ही सीमित थी। रवि वर्मा का जन्म एक ऐसे कुलीन परिवार में हुआ था जहाँ कला, साहित्य और संस्कृति का संगम पहले से ही विद्यमान था और इसी वातावरण ने उनकी अंतर्निहित प्रतिभा को पल्लवित होने का सुअवसर प्रदान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बचपन से ही उनके हाथों में रंगों और रेखाओं का जो जादू था उसे उनके परिवार ने शीघ्र ही पहचान लिया और उन्हें कला के क्षेत्र में निरंतर प्रोत्साहित किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही चित्रकला का अभ्यास निरंतर चलता रहा और शीघ्र ही उनकी ख्याति त्रावणकोर के महाराजा तक पहुँच गई। महाराजा के संरक्षण ने रवि वर्मा के जीवन को एक निर्णायक मोड़ दिया जहाँ उन्हें न केवल संसाधन उपलब्ध हुए बल्कि वैश्विक कला की बारीकियों को समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उस दौर में भारत में तैल चित्रकला की प्रविधि बहुत कम प्रचलित थी और भारतीय कलाकार मुख्य रूप से पारंपरिक शैलियों में ही कार्य कर रहे थे। रवि वर्मा ने यूरोपीय शैली की यथार्थवादी कला का गहराई से अध्ययन किया और उसे भारतीय विषयों के साथ समाहित करने का साहसिक प्रयास किया। उन्होंने अपनी कला में पाश्चात्य प्रविधि और भारतीय आत्मा का जो संगम किया उसने चित्रकला के इतिहास में एक नवीन अध्याय जोड़ दिया। उनकी कला की सबसे विलक्षण विशेषता यह थी कि उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं के पात्रों को मानवीय संवेदनाओं के साथ जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों के जो पात्र अब तक केवल कल्पनाओं या पांडुलिपियों के विवरणों तक ही सीमित थे वे रवि वर्मा के चित्रों में हाड़-मांस के मनुष्य की तरह जीवंत होकर सामने आए। उनके द्वारा चित्रित राम, सीता, कृष्ण, द्रौपदी और शकुंतला के चित्रों में भावनाओं की जो गहराई और चेहरों पर जो भाव विद्यमान थे उन्होंने जनमानस के हृदय को स्पर्श किया। विशेष रूप से देवी लक्ष्मी और सरस्वती के जो स्वरूप उन्होंने अपनी तूलिका से गढ़े वे आज भी करोड़ों भारतीय घरों के पूजा स्थलों में श्रद्धा के साथ देखे जा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रवि वर्मा की कला का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारतीय स्त्री के सौंदर्य और उसकी गरिमा का चित्रण था। उनके चित्रों में स्त्रियां केवल सौंदर्य का प्रतीक मात्र नहीं थीं बल्कि वे भावनात्मक रूप से अत्यंत सशक्त और गरिमापूर्ण दिखाई देती थीं। उन्होंने भारतीय नारी को एक ऐसे आदर्श रूप में प्रस्तुत किया जिसमें सौम्यता, शक्ति और मर्यादा का अद्भुत संतुलन था। उनके द्वारा चित्रित साड़ी पहने हुए स्त्रियों के चित्रों ने न केवल भारतीय वेशभूषा को एक वैश्विक पहचान दी बल्कि वह भारतीय नारीत्व की एक शाश्वत छवि बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके चित्रों में रंगों का चयन और वस्त्रों की सिलवटों का सूक्ष्म चित्रण इतना यथार्थवादी था कि दर्शक उन चित्रों के साथ एक आत्मीय जुड़ाव महसूस करने लगता था। उनकी कला में केवल बाहरी सौंदर्य ही नहीं बल्कि पात्रों की मानसिक अवस्था और उनके अंतर्द्वंद्व को भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। शकुंतला का अपने पैर से कांटा निकालने का बहाना करके पीछे मुड़कर देखना हो या दमयंती का हंस से संवाद, हर चित्र एक पूरी कहानी स्वयं में समेटे हुए था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय चित्रकला को महलों से निकालकर झोपड़ियों तक पहुँचाने का श्रेय भी निर्विवाद रूप से राजा रवि वर्मा को ही जाता है। वर्ष 1894 में उन्होंने मुंबई में एक शिलामुद्रणालय अर्थात लिथोग्राफी प्रेस की स्थापना करके एक क्रांतिकारी कदम उठाया। इस प्रेस के माध्यम से उनके चित्रों की हजारों प्रतियां छपने लगीं और बहुत ही कम मूल्य पर सामान्य लोगों के लिए उपलब्ध होने लगीं। इससे पहले कला केवल धनी वर्ग और शासकों के विलास का साधन समझी जाती थी परंतु रवि वर्मा ने अपनी इस दूरदर्शिता से कला का लोकतंत्रीकरण कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके द्वारा बनाए गए चित्र कैलेंडरों और पोस्टरों के रूप में प्रत्येक घर की शोभा बनने लगे। इसी माध्यम से भारतीय देवी-देवताओं की एक निश्चित छवि जनमानस के मस्तिष्क में स्थायी रूप से अंकित हो गई। यह उनकी कला का ही प्रभाव था कि उस समय के साधारण भारतीय भी अपनी संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों के साथ गर्व से जुड़ सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रवि वर्मा की सफलता केवल भारत तक ही सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी भारतीय कला का परचम लहराया। वर्ष 1873 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में उन्हें पुरस्कृत किया गया जिससे उनकी ख्याति विश्वव्यापी हो गई। इसके पश्चात उन्हें भारत की विभिन्न रियासतों जैसे बड़ौदा, मैसूर और उदयपुर के राजाओं का निमंत्रण और संरक्षण प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने देश के विभिन्न अंचलों की व्यापक यात्राएं कीं और वहां की विविधतापूर्ण संस्कृति, वेशभूषा और जनजीवन को अपनी कला में स्थान दिया। उनकी इन यात्राओं ने उनकी कला को और अधिक समृद्ध और समावेशी बनाया। हालांकि उनकी इस पाश्चात्य शैली की कुछ पारंपरिक कलाकारों ने आलोचना भी की और इसे भारतीयता के विरुद्ध बताया परंतु समय ने सिद्ध किया कि रवि वर्मा ने वास्तव में भारतीय कला को आधुनिकता के साथ जोड़कर उसे नया जीवन प्रदान किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी कला में छाया और प्रकाश का जो प्रयोग था वह अद्वितीय था। उन्होंने चित्रों में गहराई पैदा करने के लिए जिस सूक्ष्मता से कार्य किया वह आज भी कला के विद्यार्थियों के लिए शोध का विषय है। उनके चित्रों के रंगों में एक ऐसी चमक और स्थायित्व था जो दशकों बाद भी धूमिल नहीं हुआ। वे केवल एक चित्रकार ही नहीं थे बल्कि भारतीय संस्कृति के एक ऐसे दूत थे जिन्होंने विदेशी शासन के दौर में भी भारतीय मूल्यों को गौरव के साथ स्थापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2 अक्टूबर 1906 को इस महान विभूति का निधन हो गया लेकिन वे अपनी कला के रूप में आज भी अमर हैं। उनकी विरासत आज भी भारतीय चित्रकारों को प्रेरित करती है और उनके बनाए चित्र आज भी विश्व के प्रतिष्ठित संग्रहालयों में सुरक्षित रखे गए हैं। रवि वर्मा का जीवन हमें सिखाता है कि प्रतिभा और समर्पण के माध्यम से सीमाओं को तोड़ा जा सकता है और कला के जरिए समाज में एक व्यापक वैचारिक परिवर्तन लाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजा रवि वर्मा ने कला को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनाया। उनके चित्रों ने उस कालखंड में भारतीयों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति स्वाभिमान जगाने का कार्य किया जब पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव चरम पर था। उनकी सबसे बड़ी देन यही है कि उन्होंने आम आदमी की आंखों को कला परखने की दृष्टि दी और कला को जन सामान्य की भावना का अभिन्न अंग बना दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भी जब हम किसी पौराणिक आख्यान की कल्पना करते हैं तो हमारे मन में अनायास ही वही रूप उभरते हैं जिन्हें रवि वर्मा ने अपनी कल्पना से साकार किया था। भारतीय कला के इतिहास में उनका नाम सदैव एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ के रूप में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा और आने वाली पीढ़ियां उनके कार्यों से निरंतर प्रेरणा प्राप्त करती रहेंगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:41:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अरविंद केजरीवाल ने किया जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट का बहिष्कार, कहा- न्याय की उम्मीद नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177435/arvind-kejriwal-boycotted-justice-swarnakantas-court-and-said-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/justice-swarana-kanta-arvind-kejriwal-2026-04-daca29956d6964f435922dd3db6b6bc3-1200x900.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर बताया कि उनके कोर्ट के समक्ष वो खुद या वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधीजी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है।आप नेता ने कहा, “मैंने यह फैसला अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है।” साथ ही उन्होंने कानूनी विकल्प भी खुला रखा। पत्र में उन्होंने जोड़ा, “मैं जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखता हूं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह घटनाक्रम उन दिनों बाद आया है जब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से हटाने (रिक्यूज) से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने पूर्व में पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए रिक्यूजल की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांत पर जोर दिया और निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को अस्वीकार किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केजरीवाल का पत्र और संदेशपत्र में केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि वे जज के न्याय देने की क्षमता पर भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने गांधीजी के अहिंसक विरोध के रास्ते को अपनाने का फैसला लिया है। इस कदम ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले से जुड़े मामले में उनकी कानूनी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।इससे पहले हुई सुनवाई पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति मामले से रिक्यूज करने यानी खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था। उनके रिक्यूजल को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस शर्मा ने कहा, 'मैं इस केस से रिक्यूज़ नहीं करूंगी। मैं इस केस की सुनवाई करूंगी।' इसके साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा अन्य आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने शराब नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, कविता और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। इस अपील की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कर रही हैं। केजरीवाल के अलावा मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक और अन्य ने भी रिक्यूजल की याचिका दायर की थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:38:29 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि, गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानहानि और जालसाजी के एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।  यह मामला असम पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज किया है। पवन खेड़ा ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खेड़ा ने रविवार को एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, और इस मामले को डायरी नंबर 25523/2026 के तौर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177433/congress-leader-pawan-kheda-reached-supreme-court-and-challenged-assam"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/8figkh4o_pawan-khera-pti_625x300_27_april_23.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि, गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानहानि और जालसाजी के एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।  यह मामला असम पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज किया है। पवन खेड़ा ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खेड़ा ने रविवार को एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, और इस मामले को डायरी नंबर 25523/2026 के तौर पर रजिस्टर किया गया है। शाम करीब 6.26 बजे दायर की गई यह याचिका फिलहाल 'पेंडिंग' के तौर पर लिस्टेड है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह याचिका गौहाटी हाईकोर्ट की ओर से खेड़ा को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार करने के दो दिन बाद आई है। जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की सिंगल-जज बेंच ने फैसला सुनाया था कि कांग्रेस नेता 'गिरफ्तारी से पहले जमानत का विशेषाधिकार पाने के हकदार नहीं हैं।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौहाटी हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले को सिर्फ मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 339 के तहत पहली नजर में मामला बनने के सबूत मौजूद हैं।असम पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि और जालसाजी का मामला दर्ज किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत कुमार सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने दर्ज कराया है। उन्होंने खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:35:31 +0530</pubDate>
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                <title>राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी? आप का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177431/aaps-big-claim-is-that-membership-of-7-mps-including"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई जानकारों, देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य ने साफ़ कर दिया है कि आप को तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फ़ैसला लेने वाले सात लोगों की सदस्यता ख़त्म होगी। ये बहुत साफ़ तौर पर है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संजय सिंह ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे संविधान के जानकारों की राय लेकर राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक याचिका भेजी है जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक इन सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए, इसके बारे में अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय से मांग की है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई करके अपनी ओर से न्यायपूर्ण फैसला दें। संविधान की 10वीं अनुसूची में भी साफ़ तौर पर लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी तोड़फोड़ की इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के पूर्व राज्‍यसभा उपनेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्‍यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए वे एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून से बच सकते हैं।बागी सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हो गए। स्वाति मालीवाल ने शनिवार को बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि की।आप के इन सात सांसदों की बगावत के बाद अब आप के पास राज्‍यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सात सांसदों की बगावत पर आप के वरिष्ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था, 'यह गैरकानूनी, गलत, असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। हम इनकी पूरी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।'संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग रहे हैं और वे पंजाब से चुने गए 6 बागी सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे। हालांकि, संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।वरिष्ठ वकील और संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल ने एचटी से कहा कि पार्टी खुद पहले मर्जर का फैसला नहीं ले ले तब तक कोई भी खुद से मर्जर नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी स्तर पर रेजॉल्यूशन पास करना ज़रूरी है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एचटी से कहा कि ये 7 सांसद अयोग्यता से बच नहीं सकते। हालाँकि, सांसदों को वापस बुलाने यानी हटाने के अधिकार पर पूर्व पंजाब एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने साफ़ किया कि 'राइट टू रिकॉल' यानी वोटर द्वारा सांसद को बीच में हटाने का अधिकार संविधान में कहीं नहीं है।</div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:32:35 +0530</pubDate>
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