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                <title>अंतर्राष्ट्रीय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अंतर्राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
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                <title>लेबनान में हड्डियों तक को गला देने वाले केमिकल के इस्तेमाल का दावा, इस्राइल पर लगा गंभीर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></p>
<p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित और खतरनाक हथियार माने जाते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने सात तस्वीरों को जियोलोकेट और सत्यापित कर यह निष्कर्ष निकाला कि इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों में तोपखाने के जरिए व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया। यह हमला उस समय हुआ जब इस्राइली सेना ने कुछ घंटे पहले ही गांव के निवासियों और दक्षिणी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173204/the-claim-of-using-chemicals-that-melt-bones-in-lebanon"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/lebnana.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </strong></p>
<p>मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादित और खतरनाक हथियार माने जाते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने सात तस्वीरों को जियोलोकेट और सत्यापित कर यह निष्कर्ष निकाला कि इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों में तोपखाने के जरिए व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया। यह हमला उस समय हुआ जब इस्राइली सेना ने कुछ घंटे पहले ही गांव के निवासियों और दक्षिणी लेबनान के कई अन्य गांवों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा कि वह स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं कर पाया कि उस समय गांव में कोई नागरिक मौजूद था या इस हमले में किसी को नुकसान पहुंचा।</p>
<p>मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है। यह रासायनिक पदार्थ अत्यधिक गर्म होकर जलता है, जिससे इमारतों में आग लग सकती है और यह मानव शरीर को हड्डियों तक जला सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मामूली जलन के बाद भी पीड़ितों को संक्रमण, अंगों के फेल होने या सांस संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p>ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान शोधकर्ता रामजी काइस ने कहा कि रिहायशी इलाकों के ऊपर इस्राइली सेना द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है और इससे नागरिकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>इस मामले पर इस्राइली सेना की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालांकि, इससे पहले सेना यह कहती रही है कि वह व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल स्मोक स्क्रीन बनाने के लिए करती है, न कि नागरिकों को निशाना बनाने के लिए।</p>
<p>मानवाधिकार संगठनों ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच पिछले युद्ध के दौरान भी दक्षिणी लेबनान में कई बार व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया था, जबकि उस समय भी वहां नागरिक मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 21:51:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-इस्राइल का साथ दिया तो माना जाएगा युद्ध की कार्रवाई, ईरान ने यूरोप को दी कड़ी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172564/if-america-supports-israel-it-will-be-considered-an-act"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/download1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह प्रतिक्रिया जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। ईरान ने इसे सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने की तैयारी बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वे सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटेन ने अमेरिकी बलों को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि यदि सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस ने बताया कि प्रभावित देशों में लगभग चार लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। हालात बिगड़ने पर उन्हें वाणिज्यिक और सैन्य उड़ानों के जरिए निकाला जा सकता है। इसी बीच क्षेत्र में हमलों का सिलसिला जारी है और रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले से तनाव और बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। यूरोप की संभावित भूमिका को लेकर आने वाले दिनों में हालात और स्पष्ट हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:28:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान का 27 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, कतर- यूएई में धमाके</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172129/after-confirmation-of-khameneis-death-iran-claims-to-attack-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/खामेनेई-की-मौत-की-पुष्टि-के-बाद-ईरान-का-27-अमेरिकी-ठिकानों-पर-हमले-का-दावा,-कतर--यूएई-में-धमाके.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के जवाब में “छठी लहर” के तहत कार्रवाई कर रहा है। बयान में कहा गया है कि “विस्तृत मिसाइल और ड्रोन हमले” इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">IRGC ने दावा किया कि 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा इजरायल का तेल नोफ एयरबेस, तेल अवीव स्थित सेना का कमांड मुख्यालय हाकिर्या, और उसी शहर में स्थित एक बड़े रक्षा औद्योगिक परिसर को निशाना बनाया गया।IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि ईरानी बल “लगातार और कठोर बदले की कार्रवाई” करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बीच कतर की राजधानी दोहा से कई धमाकों की आवाजें सुने जाने की खबर है। स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया गया कि शहर के ऊपर आसमान में कम से कम 11 विस्फोटों की आवाज सुनी गई।बाद में कतर के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि ईरानी हमलों के बाद कुल 16 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त आठ घायलों की पुष्टि के बाद कुल संख्या 16 हो गई। साथ ही विभिन्न इलाकों में “सीमित भौतिक नुकसान” की भी जानकारी दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इजरायल में सायरन बचने की खबरें है। वहीं, इजरायल के चैनल 12 ने रिपोर्ट किया कि ईरान की ओर से मिसाइल लॉन्च किए जाने के कारण देशभर में एयर अटैक सायरन बजने की आशंका है। इससे इजरायल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भी ईरानी हमलों का असर देखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव ने अब खाड़ी क्षेत्र को भी सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कतर और यूएई जैसे देशों में धमाकों और आगजनी की घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच भीषण जंग, जानें भारत ने इस पर क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/amerika-uddh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने से बचने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। साथ ही सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने पर जोर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावासों और मिशनों के माध्यम से नागरिकों से संपर्क बनाए रखा गया है और उन्हें सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने तथा आपात स्थिति में मिशन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लगातार हमलों से बिगड़े हालात</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में हालात तब और बिगड़ गए जब इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इजराइल के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नेतन्याहू का कड़ा बयान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा कि इन कार्रवाइयों से ईरान के लोगों को अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां की सरकार लंबे समय से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ शत्रुता रखती रही है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिनका उद्देश्य इजराइल को नुकसान पहुंचाना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>अनावश्यक यात्रा से बचें</p>
</li>
<li>
<p>स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें</p>
</li>
<li>
<p>भारतीय दूतावास से संपर्क में रहें</p>
</li>
<li>
<p>आपात स्थिति में तुरंत सहायता लें</p>
</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक चिंता बढ़ी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। कई देशों ने संयम बरतने और संघर्ष को फैलने से रोकने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 21:47:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान समृद्धि हमारा संकल्प &quot; भाव के साथ समीक्षा बैठक का किया गया आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश में वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए मिलकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करना है, जिससे सभी  की विजय हो।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  उक्त बातें वरिष्ठ महाप्रबंधक विपणन नई दिल्ली इफको श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि,  इफको पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान समृद्धि हमारा संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। मुख्य अतिथि  ने वर्तमान कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति सजग होने की बात कहते हुए कहा की मिट्टी में जीवांश कार्बन</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610032.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1200" height="800" /></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171120/kisan-samridhi-hamara-review-meeting-was-organized-with-the-spirit"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001610031.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में वर्तमान कृषि की दशा व दिशा बदलने के लिए मिलकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करना है, जिससे सभी  की विजय हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> उक्त बातें वरिष्ठ महाप्रबंधक विपणन नई दिल्ली इफको श्री संजय कुलश्रेष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि,  इफको पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान कहीं।  कार्यक्रम का प्रारंभ  "किसान समृद्धि हमारा संकल्प" के भाव के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया। मुख्य अतिथि  ने वर्तमान कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति सजग होने की बात कहते हुए कहा की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ाने के लिए कार्य करना होगा। इसके लिए कार्बनिक खादों, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के प्रयोग को जिम्मेदारी पूर्वक बताना होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610032.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1280" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> किसान भाइयों को प्रेरित करना होगा कि वह अपनी मिट्टी की जांच कर के मृदा कार्ड के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग सुनिश्चित करें जिससे स्वस्थ एवं टिकाऊ उत्पादन मिल सके और भविष्य की कृषि के लिए मिट्टी भी सुरक्षित रहे। कृषि में जैव उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की जरूरत है ताकि मिट्टी में मित्र जीवों की संख्या मे वृद्धि हो और सस्ती एवं टिकाऊ खेती का रास्ता बने।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री कुलश्रेष्ठ ने बताया की इफको के नैनो उर्वरक पर्यावरण हितैषी हैं एवं कृषि लागत को कम करने में सहायक हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-02/1001610033.jpg" alt="किसान समृद्धि हमारा संकल्प" width="1280" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर मुख्य प्रबंधक इफको नई दिल्ली  एन.एम. गजेरा , इफको ई बाजार के वरिष्ठ अधिकारी  एन.के. भाटिया, राज्य विपणन प्रबंधक इफको उत्तर प्रदेश  यतेंद्र तेवतिया,  ने अपने विचार व्यक्त किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको फूलपुर इकाई के महाप्रबंधक उत्पादन  संजय भंडारी, इफको के संयुक्त उद्यम नैनो विजन, ई बाजार, इफको एमसी के अधिकारीगण उपस्थित रहे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 40 क्षेत्राधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य कोरडेट डॉ.डी.के.सिंह ने सभी प्रतिभागियों को कोरडेट की गतिविधियों से परिचित कराया एवं विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया तथा नैनो उर्वरकों, जैव उर्वरकों के विभिन्न रवि फसलों पर लगे ट्रायल्स एवं प्रदर्शनों का भी अवलोकन कराया।  संयुक्त महाप्रबंधक इफको नैनो संयंत्र ,फूलपुर,  अरुण कुमार ने सभी प्रतिभागियों को नैनो यूरिया संयंत्र का भ्रमण कराया ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 22:41:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय मंच पर फजीहत! तीन गलतियों के चलते Expo से बाहर हुई गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University)</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170323/embarrassment-on-international-stage-galgotias-university-out-of-expo-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/galgotiya-university.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ग्रेटर नोएडा स्थित Galgotias University एक बार फिर विवादों में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Expo से यूनिवर्सिटी को बाहर किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि “झूठी और भ्रामक जानकारी को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं के लिए ऐसे मंच पर जगह नहीं हो सकती।”</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह Expo भारत की ओर से AI सेक्टर में अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा मंच था। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद इसे भारत की छवि के लिए भी नुकसानदायक माना गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने AI और मशीन लर्निंग से जुड़े अपने प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियों को लेकर Expo में कुछ ऐसे दावे किए थे, जिनकी जांच में पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की समीक्षा की और यूनिवर्सिटी की भागीदारी रद्द कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों का कहना है कि AI जैसे संवेदनशील और तकनीकी क्षेत्र में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई जानकारी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की साख प्रभावित होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार ने गिनाए तीन बड़े ब्लंडर्स</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार की प्राथमिक जांच में तीन बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं:</p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>1. उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना</strong><br />यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने अपने AI प्रोजेक्ट्स और रिसर्च को लेकर ऐसे दावे किए जो आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. गलत डेटा और भ्रामक प्रस्तुति</strong><br />Expo में दिखाए जाने वाले कुछ मॉडल और आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे। जांच में पाया गया कि कुछ जानकारी सत्यापित नहीं थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत प्रतिनिधित्व</strong><br />अधिकारियों के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने खुद को कुछ प्रोजेक्ट्स का प्रमुख डेवलपर बताया, जबकि उनमें अन्य संस्थानों की भी भूमिका थी।</p>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्यों अहम था यह Expo?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह AI Expo भारत के लिए खास माना जा रहा था क्योंकि देश AI टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी भी संस्थान द्वारा गलत जानकारी देने को गंभीरता से लिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मामले पर अभी तक यूनिवर्सिटी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी अपने पक्ष में दस्तावेज तैयार कर रही है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आगे क्या?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यूनिवर्सिटी के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, AI Expo के आयोजकों ने साफ किया है कि भविष्य में केवल सत्यापित और प्रमाणित संस्थानों को ही भागीदारी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेजी से बढ़ रहे AI सेक्टर में संस्थानों के दावों की जांच कितनी जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख मजबूत बनी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/170323/embarrassment-on-international-stage-galgotias-university-out-of-expo-due</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 13:13:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैनाती, F-35 और B-2 विमानों की मौजूदगी से ईरान पर बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170056/america-increased-military-deployment-pressure-on-iran-increased-due-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/अमेरिका-ने-बढ़ाई-सैन्य-तैनाती,-f-35-और-b-2-विमानों-की-मौजूदगी-से-ईरान-पर-बढ़ा-दबाव.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वॉशिंगटन/तेहरान।</strong> अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">मार्को रुबियो</span></span> ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ समझौते की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और अमेरिका सभी विकल्पों के लिए तैयार है।</p>
<p>खबरों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के अल उदैद एयरबेस और जॉर्डन के मुफाक साल्टी एयरबेस पर अपने F-15, F-35A और A-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों पर करीब 24 विमान सक्रिय हैं, जिनमें 12 F-35A और 12 अन्य लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>
<h4>F-35: अमेरिका का अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर</h4>
<p>F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। इसकी प्रमुख खूबियां—</p>
<ul>
<li>
<p>रडार से बचने की क्षमता (स्टेल्थ टेक्नोलॉजी)</p>
</li>
<li>
<p>लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता</p>
</li>
<li>
<p>सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से लैस</p>
</li>
<li>
<p>एक साथ कई सैन्य यूनिट्स के साथ डेटा शेयर करने में सक्षम</p>
</li>
<li>
<p>एडवांस मिसाइल सिस्टम से लैस</p>
</li>
</ul>
<p>अमेरिका के पास ऐसे 300 से ज्यादा विमान हैं, जिनमें से कुछ को हाल ही में मिडिल ईस्ट में भेजा गया है।</p>
<h4>B-2 बॉम्बर की तैनाती का भी संकेत</h4>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">डोनाल्ड ट्रंप</span></span> ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका B-2 जैसे रणनीतिक बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल कर सकता है। B-2 बॉम्बर लंबी दूरी तक भारी बम ले जाने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होता है।</p>
<h4>ईरान ने भी दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</h4>
<p>तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">अली खामेनेई</span></span> ने संकेत दिया है कि अगर देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो ईरान भी जवाब देने के लिए तैयार है। ईरान ने अपने सैन्य बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h4>क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता बढ़ी</h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े सैन्य टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के कड़े बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 18:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-फ्रांस साझेदारी की कोई सीमा नहीं: नरेंद्र मोदी-इमैनुएल मैक्रों बैठक में रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर बड़ा जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170053/there-is-no-limit-to-india-france-partnership-said-pm-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/भारत-फ्रांस-साझेदारी-की-कोई-सीमा-नहीं.webp" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने मित्र से मुंबई में मिलकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मैक्रों को मुंबई बेहद पसंद आया और उन्होंने सुबह की दौड़ का भी आनंद लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुंबई की सड़कों पर मैक्रों की मॉर्निंग जॉगिंग</h4>
<p style="text-align:justify;">मुंबई दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों सुबह-सुबह जॉगिंग करते नजर आए। उनके साथ फ्रांसीसी और भारतीय अधिकारी तथा सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। इस दौरान स्थानीय लोगों और मीडिया की भी नजर उन पर पड़ी, जिससे यह पल चर्चा का विषय बन गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">26/11 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि</h4>
<p style="text-align:justify;">अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह भाव आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति मैक्रों ने इस मौके पर भारत और फ्रांस के बीच लोकतंत्र, शांति और वैश्विक स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत सहयोग है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहराई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UNSC मेंबरशिप, ट्रेड डील और चुनाव… वैश्विक मुद्दों पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है?</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">नई दिल्ली:<strong>    </strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारत से जुड़े अहम वैश्विक मुद्दों पर विदेश मंत्रालय ने विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील, भारत-रूस संबंध, चीन के साथ बातचीत, बांग्लादेश चुनाव, एनएसए अजीत डोभाल के कनाडा दौरे, अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव और ब्राजील के राष्ट्रपति के भारत दौरे सहित कई विषयों पर जानकारी दी।</span></h4>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर क्या कहा?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका ने <strong>रेसिप्रोकल और म्यूचुअली बेनिफिशियल ट्रेड</strong> पर एक इंटरिम एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क को लेकर संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर सहमति जताई थी, जिसे 7 फरवरी 2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169331/unsc-membership-trade-deal-and-elections%E2%80%A6what-is-indias-official-stance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/unsc-मेंबरशिप,-ट्रेड-डील-और-चुनाव…-वैश्विक-मुद्दों-पर-भारत-का-आधिकारिक-रुख-क्या-है.png" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h4>
<h4 style="text-align:justify;">नई दिल्ली:<strong>  </strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारत से जुड़े अहम वैश्विक मुद्दों पर विदेश मंत्रालय ने विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग की। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इंडिया-यूएस ट्रेड डील, भारत-रूस संबंध, चीन के साथ बातचीत, बांग्लादेश चुनाव, एनएसए अजीत डोभाल के कनाडा दौरे, अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव और ब्राजील के राष्ट्रपति के भारत दौरे सहित कई विषयों पर जानकारी दी।</span></h4>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इंडिया-यूएस ट्रेड डील पर क्या कहा?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका ने <strong>रेसिप्रोकल और म्यूचुअली बेनिफिशियल ट्रेड</strong> पर एक इंटरिम एग्रीमेंट के फ्रेमवर्क को लेकर संयुक्त बयान (जॉइंट स्टेटमेंट) पर सहमति जताई थी, जिसे 7 फरवरी 2026 को जारी किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह जॉइंट स्टेटमेंट दोनों देशों के बीच आपसी समझ का आधार है। अब दोनों पक्ष इस फ्रेमवर्क को लागू करने और इंटरिम एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी फैक्टशीट में किए गए बदलाव उसी साझा समझ को दर्शाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रूस के साथ संबंधों पर भारत का रुख</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत-रूस संबंधों पर प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग जारी है। इसमें व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों के ये सभी आयाम आगे भी मजबूत होते रहेंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन के साथ बातचीत और UNSC पर समर्थन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जायसवाल ने बताया कि चीन के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर ऑफ फॉरेन अफेयर्स की हालिया भारत यात्रा BRICS शेरपा बैठक (8 से 10 फरवरी, दिल्ली) के संदर्भ में हुई थी। इस दौरान उन्होंने विदेश सचिव के साथ रणनीतिक वार्ता की।</p>
<p style="text-align:justify;">बातचीत में सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि चीनी प्रतिनिधि ने कहा है कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदों को समझता है और उनका सम्मान करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव पर भारत का जवाब</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत को शामिल होने का निमंत्रण मिला है। इस पर जायसवाल ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भारत हमेशा पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन करता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का स्वागत किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>एनएसए अजीत डोभाल का कनाडा दौरा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">एनएसए अजीत डोभाल के ओटावा दौरे पर प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने अपने कनाडाई समकक्ष से मुलाकात की। यह बैठक सुरक्षा मामलों पर जारी सहयोग का हिस्सा थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों ने बेहतर समन्वय और सूचना के सुगम आदान-प्रदान के लिए <strong>लायजन ऑफिसर नियुक्त करने</strong> पर सहमति जताई है। इसकी औपचारिक प्रक्रिया पर आगे जानकारी साझा की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बांग्लादेश चुनाव पर भारत का रुख</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश में चुनाव को लेकर भारत ने संयमित रुख अपनाया है। जायसवाल ने कहा कि पहले चुनाव परिणाम आने का इंतजार किया जाना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि जनता का जनादेश किस दिशा में है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दोहराया कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव का समर्थन करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>ब्राजील के राष्ट्रपति लूला का भारत दौरा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा 18 से 22 फरवरी 2026 तक भारत दौरे पर रहेंगे। वे 19-20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित दूसरे AI समिट में हिस्सा लेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">21 फरवरी को भारत-ब्राजील के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। राष्ट्रपति लूला के साथ कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और व्यावसायिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:01:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमसे तेल खरीदना बंद नहीं करेगा भारत…ट्रंप के दावे पर रूस का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169281/india-will-not-stop-buying-oil-from-us%E2%80%A6-russias-response"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों में विविधता लाता रहेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस के साथ भारत के सभी समझौते पहले की तरह जारी हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. बाद में यह टैरिफ वापस ले लिया गया. हालांकि अमेरिका ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू की, तो 25% टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत से रूसी तेल खरीद को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. ट्रंप के अलावा किसी और ने ऐसा नहीं कहा है. लावरोव के मुताबिक, रूस और भारत के बीच हुए तेल और अन्य समझौते पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले हफ्ते ट्रंप ने भारत के साथ एक फ्रेमवर्क व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उसी दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमति जताई है. अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल बेचकर जो पैसा कमाता है, उसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाए</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह भारत और ब्रिक्स देशों के साथ रूस के व्यापार, निवेश और सैन्य सहयोग को रोकने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और दबाव वाले कदमों के जरिए दुनियाभर में दबदबा बनाए रखना चाहता है, लावरोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद यह नीति और खुलकर दिख रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 23:01:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Bangladesh Election 2026: ऑब्जर्वर लिस्ट से भारत गायब, चीन-पाकिस्तान की मौजूदगी पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169276/india-missing-from-bangladesh-election-2026-observer-list-questions-raised"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/bangladesh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका।</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><br />बांग्लादेश में 2026 में होने वाले आम चुनावों को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (International Observers) की सूची ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस सूची में पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम नदारद है। भारत-बांग्लादेश के लंबे समय से चले आ रहे करीबी संबंधों के बावजूद यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग की ओर से जारी सूची के अनुसार, पाकिस्तान से 8, चीन से 3, तुर्किए से 13, श्रीलंका से 11 और जापान, दक्षिण कोरिया, रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ का एक विशेष मिशन भी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेगा। हालांकि, पड़ोसी और प्रमुख सहयोगी देश भारत को इस सूची में जगह नहीं मिली है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यूनुस सरकार के बाद बदले रिश्ते?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित यूनुस सरकार के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव देखा गया है। सीमा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग के बावजूद हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने रिश्तों में ठंडापन ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को ऑब्जर्वर सूची से बाहर रखना इसी बदले हुए समीकरण का संकेत हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>चीन-पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सूची में पाकिस्तान और चीन की मौजूदगी को केवल औपचारिकता नहीं माना जा रहा है। चीन बांग्लादेश का बड़ा निवेशक है, जबकि पाकिस्तान की भागीदारी को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम ढाका की विदेश नीति में संतुलन साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक तटस्थता दिखाने की कोशिश?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि पूर्व सरकार भारत के करीब थी। विपक्ष अक्सर “भारत-समर्थक” होने का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे माहौल में भारत को पर्यवेक्षक सूची से बाहर रखना सरकार की ओर से चुनाव प्रक्रिया को “भारत-प्रभाव से मुक्त” दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कूटनीतिक संकेत या संयोग?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह फैसला महज संयोग नहीं हो सकता। दक्षिण एशिया में हर कूटनीतिक कदम का एक संदेश होता है। भारत की अनुपस्थिति यह संकेत दे सकती है कि ढाका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र पहचान और संतुलित नीति को मजबूत करना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को सूची से बाहर रखने पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया आएगी या नहीं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों से ही यह तय होगा कि यह कदम रणनीतिक बदलाव है या केवल एक अस्थायी राजनीतिक फैसला।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश का यह चुनाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा भी तय कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 22:22:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकाया भुगतान को लेकर अडानी ग्रुप का बांग्लादेश को पत्र, बिजली संकट की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168714/adani-groups-letter-to-bangladesh-regarding-payment-of-dues-warning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/adani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिजली संयंत्र के नियमित संचालन के लिए इस राशि का भुगतान अत्यंत आवश्यक है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बकाया राशि का विवरण</strong></h3><p style="text-align:justify;">पत्र के मुताबिक, कुल बकाया रकम में</p><ul style="text-align:justify;"><li><p><strong>53.2 मिलियन डॉलर</strong> जून तक का पुराना बकाया,</p></li><li><p>जबकि <strong>59.6 मिलियन डॉलर</strong> अक्टूबर तक की बिजली आपूर्ति का भुगतान शामिल है।</p></li></ul><p style="text-align:justify;">कंपनी का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ता आर्थिक दबाव</strong></h3><p style="text-align:justify;">अडानी ग्रुप ने पत्र में यह भी कहा है कि बढ़ते बकाये के कारण बिजली उत्पादन, रखरखाव और सहयोगी कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। यदि भुगतान में और देरी हुई, तो बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।</p><p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, आर्थिक संकट की स्थिति में बिजली उत्पादन और वितरण प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>पहले भी हो चुका है विवाद</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह विवाद पहले भी सामने आ चुका है। नवंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने भुगतान न मिलने पर बिजली सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने करीब <strong>100 मिलियन डॉलर</strong> का भुगतान कर स्थिति को संभाला था।</p><p style="text-align:justify;">हालांकि, दिसंबर के बाद से फिर बकाया बढ़ने लगा और पुराने भुगतान का पूरा निपटारा नहीं हो सका। अब एक बार फिर बिजली संकट की आशंका गहराने लगी है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव से पहले बढ़ी चिंता</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में आगामी <strong>12 फरवरी को संसदीय चुनाव</strong> होने हैं। देश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। चुनावी माहौल में बिजली संकट की आशंका ने सरकार की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।</p><p style="text-align:justify;">वर्तमान में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सत्ता में है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के चलते राजनीतिक हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका</strong></h3><p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका नकारात्मक असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और निवेश पर पड़ सकता है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन और व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही, यह विवाद भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग पर भी असर डाल सकता है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार</strong></h3><p style="text-align:justify;">फिलहाल बांग्लादेश सरकार और पावर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अडानी ग्रुप से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव से पहले किसी बड़े संकट से बचा जा सके।</p><hr /><p style="text-align:justify;">अगर आप चाहें, तो मैं इसे आपके अखबार के नाम के साथ <strong>फ्रंट पेज लीड</strong>, <strong>संक्षिप्त कॉलम</strong>, या <strong>ब्रेकिंग न्यूज फॉर्मेट</strong> में भी तैयार कर दूँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 19:55:43 +0530</pubDate>
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