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                <title>भारत - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारत RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वोट काउंटिंग के दौरान राज्य का नॉमिनी मौजूद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177974/west-bengal-election-commission-told-supreme-court-that-the-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ah2nk1so_supreme-court_625x300_26_january_25.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने नायडू की यह बात रिकॉर्ड की। कि ECI उसके सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा। इसलिए, उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ TMC की अपील पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "SLP में आगे किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। हम मिस्टर नायडू की बात रिकॉर्ड करते हैं कि ECI के सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए।मामले की आज अर्जेंट सुनवाई हुई क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को याचिका खारिज कर दी थी।हाई कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से नियुक्त करना इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय PSU कर्मचारी से काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट नियुक्त करने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं लगती।"इसने आगे कहा कि अगर TMC को लगता है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी BJP उम्मीदवारों का पक्ष ले रहे हैं, तो वह बाद में नतीजों को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकती है।इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:41:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>कचरे के अंबार में तब्दील हुआ इनरवा बाजार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात | बिहार से संवाददाता की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<p style="text-align:justify;">पश्चिमी चम्पारण। मैनाटांड प्रखंड क्षेत्र के इनरवा बाजार स्थित सैनिक रोड के पश्चिमी हिस्से, जो वार्ड संख्या 7 के अंतर्गत आता है, इन दिनों कचरे के ढेर से पट गया है। सड़क किनारे फैला गंदगी का अंबार स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है। कचरा उठाव नहीं होने के कारण दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177882/inarva-market-turned-into-a-heap-of-garbage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/bihar-5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात | बिहार से संवाददाता की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<p style="text-align:justify;">पश्चिमी चम्पारण। मैनाटांड प्रखंड क्षेत्र के इनरवा बाजार स्थित सैनिक रोड के पश्चिमी हिस्से, जो वार्ड संख्या 7 के अंतर्गत आता है, इन दिनों कचरे के ढेर से पट गया है। सड़क किनारे फैला गंदगी का अंबार स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है। कचरा उठाव नहीं होने के कारण दुर्गंध फैल रही है, जिससे आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों का वहां खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।गंदगी के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा भी लगातार बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद न तो पंचायत प्रशासन और न ही संबंधित विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।प्रश्न उठता है कि आखिर इस समस्या की सुधि लेने वाला कोई है भी या नहीं? यदि समय रहते सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द कचरा उठाव और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र को गंदगी और बीमारी से बचाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 21:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कमर्शियल और 5 किलो एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आज शुक्रवार 1 मई से भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 3,071.50 रुपये हो गई है। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर के दामों में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की है। छोटे सिलेंडर पर बढ़े रेट सीधे गरीबों और मजदूर वर्ग पर महंगाई की मार है। हालांकि, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने शुक्रवार को इस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177871/prices-of-commercial-and-5-kg-lpg-cylinders-increased"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आज शुक्रवार 1 मई से भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 3,071.50 रुपये हो गई है। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर के दामों में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की है। छोटे सिलेंडर पर बढ़े रेट सीधे गरीबों और मजदूर वर्ग पर महंगाई की मार है। हालांकि, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने शुक्रवार को इस मूल्य संशोधन की घोषणा की। बढ़ोतरी सिर्फ कमर्शियल इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडर और 5 किलो वाले सिलेंडर पर लागू होगी। घरेलू LPG (14.2 किलो वाले सब्सिडी वाले सिलेंडर) की कीमत पूरी तरह स्थिर रहेगी। इसी तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई वृद्धि या कमी नहीं हुई है। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग आशंका जता रहे हैं कि पांच राज्यों के नतीजे आने के बाद सरकार इनके दाम भी बढ़ा देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की सब्सिडी नीति के तहत घरेलू LPG की कीमतें पिछले कई महीनों से स्थिर हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी पिछले लंबे समय से अपरिवर्तित हैं। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को LPG, पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती हैं। आज का संशोधन इसी मासिक रिव्यू का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">छोटे सिलेंडर पर 261 रुपये की बढ़ोतरी सीधे मज़दूर वर्ग पर हमला है। उसे अब यह सिलेंडर करीब 800 के आसपास पड़ेगा। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसके रेट अलग होंगे। आमतौर पर महानगरों में रहने वाला मज़दूर तबका इसी छोटे सिलेंडर से काम चलाता है। क्योंकि बड़े सिलेंडर के लिए उसे आधार, पता और अन्य दस्तावेज देने पड़ते हैं। लेकिन छोटे सिलेंडर आमतौर पर उपलब्ध रहते हैं। जिनमें वो एलपीजी भरवाकर अपना काम चलाता है। इसका असर मोबाइल वेंडर्स पर भी पड़ेगा, जो कॉलोनियों और अन्य स्थानों पर अपने काम के हिसाब से इस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बदलाव पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें अमेरिका, इसराइल और ईरान शामिल हैं, जिसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हो गई है, जो कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मार्ग है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें घरेलू एयरलाइंस के लिए अपरिवर्तित रखी गई हैं। तेल कंपनियों ने वैश्विक ईंधन मूल्यों में वृद्धि को खुद वहन किया है, ताकि एयरलाइंस और उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतें बढ़ाई गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:48:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पवन खेड़ा की सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि अपराध शाखा थाना प्रकरण संख्या 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177867/pawan-khedas-anticipatory-bail-approved-by-supreme-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/pawan-khera-3.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि अपराध शाखा थाना प्रकरण संख्या 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने यह भी माना कि दोनों पक्षों, पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन इससे किसी की आजादी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पवन खेड़ा के खिलाफ यह मामला रिंकी भुइयां सरमा से जुड़े बयान को लेकर दर्ज किया गया था। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं। इसी बयान के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना पड़ेगा। उन्हें साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं होगी और बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें लागू कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका मामले के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं होगा और निचली अदालत इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार, आगे की कार्रवाई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले पवन खेड़ा ने असम की निचली अदालत और गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली थी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए उन्हें अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:44:34 +0530</pubDate>
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                <title>EVM गड़बड़ी पर ममता की सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम अनियमितताओं के आरोपों के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर मतदान मशीनों या मतगणना प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो वह “जीने-मरने की लड़ाई” लड़ेंगी। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रांगरूम का दौरा किया, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम और मतपत्र रखे गए हैं। उन्होंने यहां तीन घंटे से अधिक समय बिताया। यह दौरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177865/mamatas-strict-warning-on-evm-glitches"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम अनियमितताओं के आरोपों के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर मतदान मशीनों या मतगणना प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो वह “जीने-मरने की लड़ाई” लड़ेंगी। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रांगरूम का दौरा किया, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम और मतपत्र रखे गए हैं। उन्होंने यहां तीन घंटे से अधिक समय बिताया। यह दौरा उस समय हुआ जब तृणमूल कांग्रेस लगातार एक वायरल वीडियो के आधार पर स्ट्रांगरूम के आसपास संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रांगरूम से बाहर निकलने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि अगर कोई ईवीएम मशीन चुराने या मतगणना में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा, तो वह जान की बाजी लगाकर उसका मुकाबला करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरी जिंदगी इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेंगी। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद ही उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षाबलों ने उन्हें शुरुआत में स्ट्रांगरूम में प्रवेश से रोका। हालांकि, उम्मीदवार होने के अधिकार का हवाला देने पर उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि चुनाव नियमों के तहत उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि सीलबंद कक्ष तक जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के एक प्रतिनिधि को गिरफ्तार किया गया है और एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मतगणना से पहले विवाद उस समय और गहरा गया जब तृणमूल कांग्रेस ने एक वीडियो जारी कर चुनाव सामग्री के प्रबंधन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि वीडियो में अधिकृत प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में मतपेटियों को खोला जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है। TMC ने इस मामले में बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:42:46 +0530</pubDate>
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                <title>9 साल हिरासत में रहने के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को ज़मानत दी, जिसने हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में लगभग नौ साल बिताए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के 'जल्द सुनवाई के मौलिक अधिकार' को समझने में नाकाम रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। बेंच ने इस मामले को "बहुत चौंकाने वाला" और विवादित आदेश को "बहुत निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल खत्म हुए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177861/allahabad-high-court-did-not-grant-bail-despite-being-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(3)3.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को ज़मानत दी, जिसने हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में लगभग नौ साल बिताए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के 'जल्द सुनवाई के मौलिक अधिकार' को समझने में नाकाम रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। बेंच ने इस मामले को "बहुत चौंकाने वाला" और विवादित आदेश को "बहुत निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल खत्म हुए बिना याचिकाकर्ता को इतने लंबे समय तक जेल में रखना, 'जल्द सुनवाई के अधिकार' का घोर उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने ज़मानत के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट की आलोचना की। हाल ही में, बेंच की ऐसी ही एक आलोचना के बाद हाईकोर्ट के जज ने अनुरोध किया था कि उन्हें ज़मानत से जुड़े मामलों की लिस्ट (रोस्टर) से हटा दिया जाए। पिछले साल, जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने निर्देश दिया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक और जज को आपराधिक मामलों की लिस्ट से हटा दिया जाए। इस आदेश को बाद में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के अनुरोध पर वापस ले लिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता वैभव सिंह को 7 मार्च, 2017 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर गोरखपुर के कैंट पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 120-B और 302 के तहत अपराधों का आरोप है। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और मामला सेशंस कोर्ट को सौंप दिया गया, जहां ट्रायल अभी भी चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबे समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता लगभग नौ सालों से एक विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले में गलती पाई, जिसमें उसने ट्रायल शुरू होने के बाद ज़मानत न देने के लिए 'X बनाम राजस्थान राज्य' (2024 INSC 909) मामले के पिछले फैसले का हवाला दिया था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि एक बार ट्रायल शुरू हो जाने के बाद आम तौर पर ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए और उस चरण में सबूतों में मौजूद कमियों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बेंच ने माना कि हाई कोर्ट, जिस फैसले का हवाला दिया गया, उसका असली मतलब समझने में नाकाम रहा और उसने याचिकाकर्ता के लगातार जेल में रहने की मुख्य बात को नज़रअंदाज़ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि हाईकोर्ट को हिरासत की अवधि और जल्द सुनवाई के संवैधानिक आदेश पर विचार करना चाहिए था। कानून के स्थापित सिद्धांतों पर ज़ोर देते हुए बेंच ने दोहराया कि सिर्फ़ अपराध की गंभीरता के आधार पर किसी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब मुक़दमे में बेवजह देरी हो रही हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, “अपने कई फ़ैसलों में और कई मौकों पर हमने साफ़ शब्दों में कहा है कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, लेकिन अगर आरोपी को जल्द सुनवाई का उसका अधिकार नहीं मिलता है और वह अपनी किसी भी गलती के बिना सालों से जेल में सड़ रहा है तो उसे अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।”</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने आगे कहा कि यह मामला ऐसी स्थिति दिखाता है, जहां अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन साफ़ तौर पर रिकॉर्ड में दिख रहा था। इसलिए राहत देने से पहले राज्य के जवाब का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">तदनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तुरंत ज़मानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते उस पर ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें लागू होंगी। साथ ही अगर किसी अन्य मामले में उसकी ज़रूरत न हो</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:39:01 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली हाईकोर्ट में हड़कंप: चीफ जस्टिस की कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान चला अश्लील वीडियो; जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को उस समय अजीबोगरीब और शर्मनाक स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक मामले की वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए सुनवाई की तैयारी चल रही थी। जैसे ही जज अपनी कुर्सी पर बैठे, अचानक वीसी सिस्टम पर अश्लील वीडियो प्ले होने लगा। इस अप्रत्याशित घटना से कोर्टरूम में मौजूद जज, वकील और कर्मचारी सन्न रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब हाईकोर्ट अपनी नियमित कार्यवाही शुरू करने वाली थी। बताया जा रहा है कि अश्लील वीडियो एक बार नहीं बल्कि दो बार चला। इस स्थिति को देखते</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177752/panic-in-delhi-high-court-obscene-video-played-during-virtual"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(4).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को उस समय अजीबोगरीब और शर्मनाक स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्य न्यायाधीश की अदालत में एक मामले की वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए सुनवाई की तैयारी चल रही थी। जैसे ही जज अपनी कुर्सी पर बैठे, अचानक वीसी सिस्टम पर अश्लील वीडियो प्ले होने लगा। इस अप्रत्याशित घटना से कोर्टरूम में मौजूद जज, वकील और कर्मचारी सन्न रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब हाईकोर्ट अपनी नियमित कार्यवाही शुरू करने वाली थी। बताया जा रहा है कि अश्लील वीडियो एक बार नहीं बल्कि दो बार चला। इस स्थिति को देखते हुए तुरंत एहतियातन वीसी सिस्टम को बंद कर दिया गया और तकनीकी टीम को बुलाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह वीडियो श्रीधर सार्नोबत और शितजीत सिंह नामक व्यक्तियों के लॉग-इन आईडी से जुड़ा पाया गया है।हालांकि, इस मामले में अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है कि क्या यह किसी की जानबूझकर की गई शरारत थी या सिस्टम की सुरक्षा में कोई सेंध लगाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालतों में हाइब्रिड और वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था पारदर्शी न्याय के लिए की गई है, लेकिन इस घटना ने इसके मॉनिटरिंग सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है। घटना के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर वीसी सिस्टम को ठप कर दिया गया ताकि आगे ऐसी स्थिति न बने और हाई कोर्ट की आईटी व तकनीकी टीम को इस मामले की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है और यह स्पष्ट किया गया है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:18:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक अरब के सट्टे का खेल बेनकाब, रडार पर BJP नेता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> झांसी के नवाबाद पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले बड़े गिरोह का बुधवार को भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने तीन बड़े सटोरिये- तिलयानी बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय, सिंधी कॉलोनी निवासी विजय बाधवा, बड़ागांव गेट निवासी नितिन अग्रवाल को गिरफ्तार कर उनके पास से 100 करोड़ रुपये अधिक के लेनदेन का रिकॉर्ड बरामद किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके आधार पर पुलिस को भाजपा किसान मोर्चा उपाध्यक्ष एवं सहकारिता बैंक के निदेशक आशीष उपाध्याय, पार्षद पति पप्पू यादव समेत नौ सटोरियों का पता चला है। पुलिस उनको तलाश रही है। इस बीच सटोरियों के बैंक खातों में जमा 50 लाख रुपये</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177747/one-billion-betting-game-exposed-bjp-leader-on-radar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas20.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> झांसी के नवाबाद पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले बड़े गिरोह का बुधवार को भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने तीन बड़े सटोरिये- तिलयानी बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय, सिंधी कॉलोनी निवासी विजय बाधवा, बड़ागांव गेट निवासी नितिन अग्रवाल को गिरफ्तार कर उनके पास से 100 करोड़ रुपये अधिक के लेनदेन का रिकॉर्ड बरामद किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके आधार पर पुलिस को भाजपा किसान मोर्चा उपाध्यक्ष एवं सहकारिता बैंक के निदेशक आशीष उपाध्याय, पार्षद पति पप्पू यादव समेत नौ सटोरियों का पता चला है। पुलिस उनको तलाश रही है। इस बीच सटोरियों के बैंक खातों में जमा 50 लाख रुपये की रकम जब्त करवा दी गई है। पुलिस अफसरों का दावा है कि जल्द इन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने बताया कि बुधवार तड़के मुस्तरा से सखी के हनुमान मंदिर के पास नवनिर्मित जेडीए कॉलोनी के पहाड़ी मार्ग पर कुछ सटोरियों के मौजूद होने की सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की। आरोपियों ने भागने के लिए अपनी फॉर्च्यूनर कार से पुलिस की सरकारी जीप में टक्कर मार दी, इससे चालक समेत विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी निखिल कुमार घायल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने तीनों आरोपियों को घेरकर पकड़ लिया। उनके पास से आठ मोबाइल, एक टैबलेट, 84 हजार 500 रुपये समेत कार को बरामद किया। सट्टे से संबंधित बहीखाता भी बरामद हुआ। गिरफ्तार शुभम उपाध्याय का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूछताछ में भाजपा नेता आशीष उपाध्याय समेत पार्षद पति पप्पू निवासी उन्नाव गेट, पंकज राय, सौरभ लिखधारी, सोनू चढ्ढा, हरीश कुमार, आकाश चंचलानी, सुमित साहू, रोशन मुंशी का भी नाम सामने आया है। एसएसपी के मुताबिक जल्द इनकी गिरफ्तारी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सट्टा बाजार के जरिये शुभम उपाध्याय, नितिन अग्रवाल और विजय बाधवा ने कम समय में करोड़ों रुपये की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली। पुलिस की छानबीन में तीनों की संपत्तियों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। अब पुलिस इनकी संपत्ति का पूरा ब्योरा जुटाकर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पुलिस के अनुसार, शुभम लग्जरी कारों का शौकीन है और उसने बेशकीमती रेंज रोवर समेत कई महंगी गाड़ियां खरीद रखी हैं। इसके अलावा दिल्ली के राजेंद्र नगर, इंदौर, धौलपुर (राजस्थान), रक्सा, उन्नाव गेट के बाहर, बूढ़ा रोड समेत झांसी में करीब 12 स्थानों पर कीमती प्लॉट खरीदे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> पत्नी और बच्चों के नाम दो फार्महाउस व एक दुकान भी दर्ज है। म्यूचुअल फंड और एफडी में भी निवेश किया गया है, जो पत्नी के नाम पर है। नितिन अग्रवाल और विजय बाधवा के पास भी झांसी, धौलपुर और इंदौर में कीमती जमीन होने की जानकारी मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों के बैंक खातों में भी बड़ी रकम का पता चला है। पुलिस का कहना है कि आयकर से बचने के लिए शुभम नकद रकम अपने परिचितों को देता था और उनके माध्यम से खर्च करता था। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव के अनुसार, तीनों की सभी संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शुभम जिस मोबाइल एप के जरिये सट्टा चलाता था, उसका मुख्य एडमिन दुबई में बताया गया है। वहां एक क्वाइन की कीमत करीब सात रुपये थी, जबकि यहां उसे 25 रुपये में बेचा जाता था। इस तरह प्रति क्वाइन करीब 18 रुपये का कमीशन वसूला जाता था। इसी अंतर से रोजाना लाखों रुपये की कमाई होती थी। एप में जीत की संभावना अधिक दिखने के कारण लोग बड़ी रकम दांव पर लगाते थे, जिससे सटोरियों की आमदनी लगातार बढ़ती रही।</p>
<p style="text-align:justify;">शुभम उपाध्याय के पकड़े जाने के बाद अली गोल से पार्षद राजकुमारी यादव का पति पप्पू यादव एवं छनियापुर से पार्षद अर्चना राय का पति पंकज राय का नाम सामने आया है। ये दोनों अपने घरों से भाग निकले।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अफसरों का दावा है कि जल्द ही इनको भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस को नगर निगम के कई अन्य पार्षदों के भी नाम मालूम चले हैं। इनमें अधिकांश पार्षद प्रेमनगर एवं कोतवाली इलाके के हैं। पुलिस इनको तलाश रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईपीएल आरंभ होने के साथ ही पुलिस ने सभी थानों से 970 से अधिक सट्टेबाजों की सूची बनाई है, इनमें पांच पार्षद के नाम सामने आए थे। गिरोह के भंडाफोड़ होने के बाद इनकी संख्या बढ़ गई। प्रेमनगर इलाके में सत्ताधारी दल से जुड़े दो पार्षद का नाम सामने आया।</p>
<p style="text-align:justify;"> कुछ दिन पहले पकड़े गए भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष हरेंद्र परिहार एवं विजय परिहार से इन दोनों पार्षदों की दर्जनों बार व्हाट्सएप पर कॉल हिस्ट्री मिली है। आईपीएल शुरू होने के बाद से दोनों पार्षद सटोरियों से दिन में कई बार व्हाट्सएप पर बात करते थे। पुलिस इसके आधार पर इनकी निगहबानी कर रही है। इसी तरह कोतवाली इलाके में पहली बार जीत हासिल करने वाले पार्षद को भी पुलिस तलाश रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:14:27 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की  अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177745/supreme-court-reserves-verdict-on-pawan-khedas-anticipatory-bail-plea"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/pawan-khera-2.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप ट्रायल का विषय हैं और गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें से कई जमानती हैं और बाकी में भी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, इसलिए अग्रिम जमानत से इनकार करना उचित नहीं होगा। सिंहवी ने यह भी तर्क दिया कि यदि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जाती, तो इस कानूनी प्रावधान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट से जुड़े फर्जी और छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज पेश किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खेड़ा जांच से बच रहे हैं और लगातार वीडियो जारी कर गलत तथ्यों को प्रचारित कर रहे हैं। मेहता ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार और गलत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने 24 अप्रैल को गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत पर अंतरिम रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो तय करेगा कि पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:12:05 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट के राडार पर 'इलाहाबाद हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट से सवाल किया कि उसने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत क्यों दी, जिस पर पहली नज़र में दहेज हत्या के आरोप हैं। कोर्ट ने आरोपी पति की ज़मानत रद्द कर दी और उसे एक हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि ट्रायल एक साल के अंदर पूरा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच, मृतक के पिता द्वारा दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा पति को दी गई ज़मानत को चुनौती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177743/allahabad-high-court-on-the-radar-of-supreme-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(3)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट से सवाल किया कि उसने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत क्यों दी, जिस पर पहली नज़र में दहेज हत्या के आरोप हैं। कोर्ट ने आरोपी पति की ज़मानत रद्द कर दी और उसे एक हफ़्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि ट्रायल एक साल के अंदर पूरा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच, मृतक के पिता द्वारा दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा पति को दी गई ज़मानत को चुनौती दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में, कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखी, जिसमें बताया गया था कि मृतक की गर्दन के आस-पास चोट के निशान थे। जब कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे एक काउंटर-एफ़िडेविट (जवाबी हलफ़नामा) दायर करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस पारदीवाला ने कहा: "इस तरह के आरोपों और शादी के सात साल के अंदर हुई मौत के मामले में, आपको ज़मानत क्यों दी जानी चाहिए? वकील साहब, मुद्दे पर बात करें, कमज़ोर दलीलें न दें, वरना हम यहीं और अभी आपकी ज़मानत रद्द कर देंगे। आप पर दहेज हत्या का आरोप है, और आपकी पत्नी आपके ही घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर बाहरी चोट के निशान थे। आप अपनी पत्नी की मौत के बारे में क्या सफ़ाई देंगे?"</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने हाई कोर्ट से सवाल किया: "इस हाई कोर्ट में क्या दिक्कत है, यह हमारी समझ से बाहर है। जिन मामलों में ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए, उनमें भी ज़मानत दे दी जाती है।"</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस बात पर भी विचार करे कि आरोपी 18 महीने से हिरासत में है। इस पर, जस्टिस पारदीवाला ने मौखिक रूप से टिप्पणी की: "आप कुछ कहना चाहते हैं, मिस्टर वकील साहब? यह हत्या का मामला है। 304B, हाँ। उसकी गला घोंटकर हत्या की गई है; क्या आप चाहते हैं कि हम इसे करके दिखाएँ? पेज 31 [पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का] पर आइए।"</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने ज़मानत रद्द करने का आदेश दिया। अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा कि शादी फरवरी 2019 में हुई थी और पत्नी की अप्राकृतिक मौत जुलाई 2024 में हुई। कोर्ट ने आगे कहा कि यह बात निर्विवाद है कि मृतक की मौत शादी के सात साल के अंदर हुई थी और आरोप दहेज से जुड़ी मौत के हैं। ऐसे हालात में, हाई कोर्ट को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113B के तहत अनुमान को ध्यान में रखना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें मृतक के शरीर पर मौत से पहले लगी चोटों का ज़िक्र था।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने साफ़ किया कि वह मामले के गुण-दोष पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, क्योंकि अभी मुक़दमा चल रहा है और अब तक सिर्फ़ एक गवाह की ही गवाही हुई है। हालाँकि, कुल मिलाकर हालात को देखते हुए, कोर्ट इस बात से संतुष्ट था कि ज़मानत देने वाला विवादित आदेश क़ानून की नज़र में सही नहीं है। इसलिए, प्रतिवादी को दी गई ज़मानत रद्द कर दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिवादी को निर्देश दिया गया कि वह एक हफ़्ते के अंदर जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करे। ट्रायल कोर्ट को भी निर्देश दिया गया है कि वह एक साल के अंदर मुक़दमा पूरा करने की कोशिश करे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी जज ने तब भी निराशा ज़ाहिर की थी, जब हाई कोर्ट ने दहेज से जुड़ी मौत के एक मामले में, पहली नज़र में लगे आरोपों पर विचार किए बिना, अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए ज़मानत दे दी थी। इसके बाद, हाई कोर्ट के उस जज ने हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से अनुरोध किया कि उन्हें ज़मानत से जुड़े मामलों की ज़िम्मेदारी न दी जाए, और सुप्रीम कोर्ट की आलोचना को "हतोत्साहित करने वाला" बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने पिछले साल एक अनोखा आदेश दिया था। उन्होंने हाई कोर्ट के एक दूसरे जज के आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिसमें पैसे की वसूली के लिए सिविल उपाय के प्रभावी न होने के आधार पर एक आपराधिक शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। बेंच ने कड़ी टिप्पणियाँ करते हुए कहा कि उक्त जज से उनके रिटायरमेंट तक आपराधिक क्षेत्राधिकार वापस ले लिया जाना चाहिए और उन्हें हाई कोर्ट के किसी अनुभवी वरिष्ठ जज के साथ एक डिवीज़न बेंच में बैठाया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:10:18 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177724/indian-agriculture-is-at-a-critical-juncture-now-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे फसल की पैदावार भी कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm.jpeg" alt="भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय" width="527" height="351"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बहुत बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन यही क्षेत्र मौसम के बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या अचानक गर्मी बढ़ जाए, तो इसका असर सिर्फ खेत तक नहीं रहता—किसानों की आय, बाजार के दाम और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अब “जलवायु के हिसाब से खेती” अपनाना जरूरी हो गया है। इसका मतलब है पानी का सही इस्तेमाल, मौसम के अनुसार फसल चुनना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और पराली जलाने से बचना। ये छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात ये है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। कई संस्थाएं किसानों को नई तकनीकें सिखा रही हैं। सरकार भी कई योजनाओं के जरिए मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को पता चलता है कि खेत में किस तरह की खाद कितनी मात्रा में डालनी है। परंपरागत कृषि विकास योजना से जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन मौसम के असर को कम करने पर काम करता है, और फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसानों को आर्थिक सहारा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिशा सही है, लेकिन काम को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है, तो हमें भी उतनी ही जल्दी कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधी बात है—आज जो फैसले हम लेंगे, वही कल की खेती तय करेंगे। अगर अभी सही कदम उठाए गए, तो हम किसानों को मजबूत बना सकते हैं, खाने की सुरक्षा बनाए रख सकते हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं। अब समय है—किसानों का साथ देने का, पर्यावरण को बचाने का और सही दिशा में आगे बढ़ने का।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नवाज़ अहमद खान<br />प्रोफेसर<br />आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                <title>CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, "CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177595/magistrate-does-not-need-prior-approval-to-direct-filing-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, "CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3) के तहत FIR दर्ज करने या जांच करने के संज्ञान-पूर्व चरण तक विस्तारित नहीं होती।" यह टिप्पणी CPI(M) नेता वृंदा करात द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से पहले कथित भड़काऊ भाषणों के मामले में BJP नेता कपिल शर्मा, अनुराग ठाकुर आदि के खिलाफ FIR दर्ज करने की उनकी याचिका खारिज की गई थी। मजिस्ट्रेट ने इस आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया कि इसके लिए पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत है; बाद में हाईकोर्ट ने भी इस विचार को सही ठहराया।</p>
<p style="text-align:justify;">CrPC की धारा 196 (BNSS की धारा 217) यह अनिवार्य करती है कि IPC की धारा 295A, 153A और 153B के तहत अपराधों का संज्ञान लेने के लिए सरकार से पहले से मंज़ूरी लेना ज़रूरी है। CrPC की धारा 197 (BNSS की धारा 218) सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अपराधों का संज्ञान लेने के लिए पहले से मंज़ूरी लेना अनिवार्य करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने वृंदा करात की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणी रद्द की, जिसमें कहा गया था कि CrPC की धारा 156(3) के तहत कोई भी मजिस्ट्रेट पहले से मंज़ूरी लिए बिना FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दे सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने भड़काऊ भाषणों/घृणा अपराधों के खिलाफ निर्देश मांगने वाले मामलों के एक समूह पर यह फैसला सुनाया। यह देखते हुए कि मौजूदा कानून भड़काऊ भाषणों से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त है, कोर्ट ने भड़काऊ भाषणों को अपराध घोषित करने के लिए कोई नया निर्देश जारी करने से परहेज़ किया। हालांकि पीठ ने मांगे गए स्वरूप के निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया, लेकिन उसने यह फैसला विधायी अधिकारियों पर छोड़ दिया कि वे अपने विवेक से विचार करें कि क्या किसी नीतिगत या विधायी उपाय की ज़रूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने आगे कहा कि किसी संज्ञेय अपराध का पता चलने पर FIR दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है (जैसा कि ललिता कुमारी केस में तय किया गया)। अगर FIR दर्ज नहीं होती है, तो CrPC/BNSS में असरदार उपाय दिए गए। जैसे, कोई पीड़ित व्यक्ति CrPC की धारा 154(3)/BNSS की धारा 173(4) के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकता है। उसके बाद CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175 के तहत मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है, या CrPC की धारा 200/BNSS की धारा 223 के तहत शिकायत के ज़रिए आगे बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">"ये उपाय एक पूरा कानूनी ढांचा बनाते हैं। इन उपायों की उपलब्धता, और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत संवैधानिक अदालतों के निगरानी अधिकार क्षेत्र से यह साबित होता है कि कोई ऐसी कानूनी कमी नहीं है, जिसके लिए इस तरह के दखल की ज़रूरत हो। सही तरीका यही है कि मौजूदा कानून को पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से लागू किया जाए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:57:53 +0530</pubDate>
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