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                <title>लाइफस्टाइल - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>वियोगी बागवानी  का शुभारंभ, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-9 में शनिवार को वियोगी बागवानी का उद्घाटन पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र ऋषिदेव, प्रगतिशील किसान राजेंद्र यादव, प्लस-टू बालिका उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार तथा योगेंद्र कुमार वियोगी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर एवं नारियल फोड़कर किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्घाटन के बाद बागवानी के संचालकसमाजसेवी  योगेंद्र कुमार वियोगी ने सभी अतिथियों का स्वागत फूल-माला एवं अंगवस्त्र देकर  किया।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा ने कहा कि यह केवल एक नर्सरी नहीं, बल्कि समाज, विशेषकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184451/launch-of-viyogi-gardening-gave-message-of-environmental-protection"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/bihar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">त्रिवेणीगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-9 में शनिवार को वियोगी बागवानी का उद्घाटन पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र ऋषिदेव, प्रगतिशील किसान राजेंद्र यादव, प्लस-टू बालिका उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार तथा योगेंद्र कुमार वियोगी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर एवं नारियल फोड़कर किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्घाटन के बाद बागवानी के संचालकसमाजसेवी  योगेंद्र कुमार वियोगी ने सभी अतिथियों का स्वागत फूल-माला एवं अंगवस्त्र देकर  किया।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा ने कहा कि यह केवल एक नर्सरी नहीं, बल्कि समाज, विशेषकर युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच पौधों का महत्व और बढ़ गया है। पौधे न केवल पर्यावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उल्लेख करते हुए प्रत्येक व्यक्ति से कम-से-कम एक पौधा लगाने तथा फलदार वृक्षों के रोपण का आह्वान किया।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/bihar,,1.jpg" alt="फलदार व छायादार पौधे लगाने की अपील, युवाओं को प्रकृति से जोड़ने की पहल" width="1600" height="900"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र ऋषिदेव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक फलदार एवं छायादार पौधे लगाने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">बागवानी के संचालक योगेंद्र कुमार वियोगी ने बताया कि उनकी नर्सरी में विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों फलदार, औषधीय एवं सजावटी पौधे उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी उनका उद्देश्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में  वार्ड पार्षद रामसुंदर साह, भूपेन्द्र यादव ,गोरी अग्रवाल ,रामकृष्ण यादव, डॉ शुरेश यादव, खुशबू कुमारी ,दिलीप कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, किसान एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>किसान</category>
                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 19:53:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय कराटे चैंपियन बना सुपौल का लाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार राजेश, बिहार</strong></p>
<p><strong>सुपौल।</strong> जिले के सात वर्षीय होनहार खिलाड़ी <strong>गीतांक आयुष</strong> ने अपनी असाधारण प्रतिभा और शानदार प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का गौरव बढ़ाया है। उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित <strong>कियो सब जूनियर, कैडेट एवं जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप-2026</strong> में गीतांक ने अंडर-7 वर्ष (25 किलोग्राम वर्ग) में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। अब उसकी निगाह सितंबर-अक्टूबर में चीन में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता पर है, जहां वह भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।</p>
<p>4 से 7 जून तक देहरादून के मल्टी पर्पस हॉल, परेड ग्राउंड में आयोजित इस प्रतिष्ठित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182292/laal-of-supaul-becomes-national-karate-champion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/videoshot_20260629_173407.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार राजेश, बिहार</strong></p>
<p><strong>सुपौल।</strong> जिले के सात वर्षीय होनहार खिलाड़ी <strong>गीतांक आयुष</strong> ने अपनी असाधारण प्रतिभा और शानदार प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का गौरव बढ़ाया है। उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित <strong>कियो सब जूनियर, कैडेट एवं जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप-2026</strong> में गीतांक ने अंडर-7 वर्ष (25 किलोग्राम वर्ग) में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। अब उसकी निगाह सितंबर-अक्टूबर में चीन में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता पर है, जहां वह भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।</p>
<p>4 से 7 जून तक देहरादून के मल्टी पर्पस हॉल, परेड ग्राउंड में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। बिहार की ओर से उतरे गीतांक ने पूरे टूर्नामेंट में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले शानदार अंतर से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।</p>
<p>गीतांक के कोच <strong>सुभाष कुमार</strong> ने बताया कि पहले मुकाबले में उसने सिक्किम के रेयांश क्षेत्री को 6-0 से हराया। दूसरे दौर में कर्नाटक के एम. गौड़ा विहान को भी 6-0 से मात दी। सेमीफाइनल में मध्य प्रदेश के एरोन जॉर्ज को 8-2 से पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में महाराष्ट्र के शौर्य प्रजापति को 6-0 से हराकर राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब गीतांक का चयन चीन में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता के लिए हुआ है। सितंबर-अक्टूबर में होने वाली इस प्रतियोगिता में वह भारतीय टीम का हिस्सा होगा। इसके लिए उसे विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश के लिए पदक जीत सके।</p>
<p>कम उम्र में मिली इस बड़ी उपलब्धि से गीतांक के परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों के साथ-साथ पूरे गांव और जिले के लोगों में भी गर्व और उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गीतांक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है और वह क्षेत्र के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया है।</p>
<p>कोच सुभाष कुमार ने विश्वास जताया कि यदि गीतांक को बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं मिलती रहीं तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के लिए स्वर्णिम सफलता अर्जित करेगा। अब पूरे जिले की उम्मीदें चीन में होने वाली प्रतियोगिता पर टिकी हैं, जहां यह नन्हा खिलाड़ी एक बार फिर तिरंगा ऊंचा लहराने के इरादे से उतरेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 17:44:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सब जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गीतांक आयुष ने जीता स्वर्ण पदक</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पटना। उत्तराखंड के देहरादून में 3 से 7 जून 2026 तक आयोजित कियो सब जूनियर कराटे चैंपियनशिप-2026 में पटना के सुपौल जिले के रामनगर निवासी गीतांक आयुष ने स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है।<br />सब जूनियर बालक 7 वर्ष आयु वर्ग (25 किलोग्राम) प्रतियोगिता में खेलते हुए गीतांक ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्रमशः सिक्किम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में गीतांक ने अपने सभी मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260622-wa0055.jpg" alt="जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गीतांक आयुष ने जीता स्वर्ण पदक" width="960" height="1200" /></p><p>गीतांक आयुष के पिता अजय कुमार सचिवालय में कार्यरत हैं,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181832/geetank-ayush-won-gold-medal-in-junior-national-karate-championship"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0053.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। उत्तराखंड के देहरादून में 3 से 7 जून 2026 तक आयोजित कियो सब जूनियर कराटे चैंपियनशिप-2026 में पटना के सुपौल जिले के रामनगर निवासी गीतांक आयुष ने स्वर्ण पदक जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है।<br />सब जूनियर बालक 7 वर्ष आयु वर्ग (25 किलोग्राम) प्रतियोगिता में खेलते हुए गीतांक ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने क्रमशः सिक्किम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों को पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में गीतांक ने अपने सभी मुकाबले एकतरफा अंदाज में जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260622-wa0055.jpg" alt="जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गीतांक आयुष ने जीता स्वर्ण पदक" width="960" height="1280"></img></p><p>गीतांक आयुष के पिता अजय कुमार सचिवालय में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता स्वीटी आकृति गृहिणी हैं। गीतांक पटना में रहकर अपने कोच सुभाष कुमार के मार्गदर्शन में कराटे का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।कोच सुभाष कुमार ने बताया कि गीतांक बेहद मेहनती, जुनूनी और खेल के प्रति समर्पित खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लगन और अनुशासन को देखते हुए यह विश्वास है कि वह भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार का नाम रोशन करेंगे।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260622-wa00531.jpg" alt="जूनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में गीतांक आयुष ने जीता स्वर्ण पदक" width="1280" height="960"></img></p><p>गीतांक की इस उपलब्धि पर शिक्षाविद हरेराम मंडल, निशांत, सत्यनारायण मंडल, अमन यादव, गौरी चौधरी, डॉ. संजय कुमार, ललित मंडल सहित क्षेत्र के लोगों ने खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:55:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्टार प्लस का बहुप्रतीक्षित रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा 'सैराब' 2 जून, मंगलवार से। </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong>स्वतंत्र प्रभात।ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong>दया शंकर त्रिपाठी।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;">स्टार प्लस का बहुप्रतीक्षित रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा 'सैराब' 2 जून, मंगलवार की शाम दर्शकों के बीच दस्तक देने जा रहा है। शो को लेकर जिस तरह की चर्चा और उत्साह देखने को मिल रहा है, उससे यह तो स्पष्ट है कि दर्शक पहले एपिसोड के प्रसारण से पहले ही इसकी मुख्य जोड़ी से जुड़ाव महसूस करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मदिराक्षी मुंडले और रोहित चंदेल अभिनीत 'सैराब' अपने पुराने दौर की रोमांटिक खूबसूरती, सुकून भरे संगीत और शानदार विजुअल्स की वजह से इन दिनों खूब चर्चा बटोर रहा है। यह शो एक मशहूर पॉप स्टार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180558/star-plus-much-awaited-romantic-musical-drama-sairab-airs-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260603-wa0185.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong>स्वतंत्र प्रभात।ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><strong>दया शंकर त्रिपाठी।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;">स्टार प्लस का बहुप्रतीक्षित रोमांटिक म्यूजिकल ड्रामा 'सैराब' 2 जून, मंगलवार की शाम दर्शकों के बीच दस्तक देने जा रहा है। शो को लेकर जिस तरह की चर्चा और उत्साह देखने को मिल रहा है, उससे यह तो स्पष्ट है कि दर्शक पहले एपिसोड के प्रसारण से पहले ही इसकी मुख्य जोड़ी से जुड़ाव महसूस करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मदिराक्षी मुंडले और रोहित चंदेल अभिनीत 'सैराब' अपने पुराने दौर की रोमांटिक खूबसूरती, सुकून भरे संगीत और शानदार विजुअल्स की वजह से इन दिनों खूब चर्चा बटोर रहा है। यह शो एक मशहूर पॉप स्टार और एक साधारण युवती की अनोखी प्रेम कहानी को दर्शाता है, जिसने वर्षों तक समाज द्वारा बनाए गए नियमों और अपेक्षाओं के बीच अपनी जिंदगी बिताई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>शो का प्रोमो रिलीज़ होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">दर्शक इसकी नई और ताज़गी भरी कहानी के साथ-साथ मुख्य कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री की भी जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई दर्शकों का मानना है कि 'सैराब' उन्हें उन भावनात्मक और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानियों की याद दिलाता है, जिनके लिए कभी स्टार प्लस जाना जाता था। सोशल मीडिया पर "आखिरकार एक खूबसूरत रोमांटिक कहानी देखने को मिलेगी" और "यह शो पुराने स्टार प्लस शोज़ वाला फील दे रहा है" जैसे कमेंट्स लगातार देखने को मिल रहे हैं। वहीं, कई दर्शक नोयोनिका और ईशान को इस सीज़न की सबसे दिलचस्प नई ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में से एक मान रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ाते हुए, रोहित चंदेल और मदिराक्षी मुंडले को बीती रात प्रसारित हुए स्टार प्लस के भव्य कार्यक्रम 'फैशन के रंग, रिश्तों के संग' में चैनल की नई ऑन-स्क्रीन जोड़ी के रूप में पेश किया गया। रंगारंग प्रस्तुतियों, शानदार परफॉर्मेंस और पूरे स्टार परिवार की मौजूदगी के बीच दर्शकों को इस नई जोड़ी की पहली झलक देखने को मिली, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान दोनों कलाकारों की मौजूदगी ने दर्शकों के बीच खास उत्साह पैदा किया। शो की शुरुआत से पहले ही उनकी केमिस्ट्री को लेकर जो चर्चा सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है, उसने 'सैराब' को लेकर उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या नोयोनिका और ईशान की यह अनोखी प्रेम कहानी दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बना पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:22:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुपौल में LPG और पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात | पटना , बिहार ब्यूरो</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  <em>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</em></strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<p style="text-align:justify;">सुपौल जिले में रसोई गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता को लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी सावन कुमार ने सभी तेल विपणन कंपनियों के विक्रय पदाधिकारियों एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में बताया गया कि जिले में पेट्रोलियम पदार्थ एवं घरेलू LPG गैस की कोई कमी नहीं है और मांग के अनुरूप लगातार आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान नोडल पदाधिकारी LPG ने जानकारी दी कि जिले की 51 गैस एजेंसियों में करीब 13,405 गैस सिलेंडरों का भंडार उपलब्ध है तथा 4,055</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179095/adequate-availability-of-lpg-and-petrol-diesel-in-supaul"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260512-wa0186.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात | पटना , बिहार ब्यूरो</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> <em>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</em></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<p style="text-align:justify;">सुपौल जिले में रसोई गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता को लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी सावन कुमार ने सभी तेल विपणन कंपनियों के विक्रय पदाधिकारियों एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में बताया गया कि जिले में पेट्रोलियम पदार्थ एवं घरेलू LPG गैस की कोई कमी नहीं है और मांग के अनुरूप लगातार आपूर्ति की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">समीक्षा के दौरान नोडल पदाधिकारी LPG ने जानकारी दी कि जिले की 51 गैस एजेंसियों में करीब 13,405 गैस सिलेंडरों का भंडार उपलब्ध है तथा 4,055 अतिरिक्त सिलेंडर मिलने की संभावना है। सोमवार को 6,771 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए, जबकि वर्तमान में 23,368 उपभोक्ताओं की बुकिंग लंबित है। जिले में प्रतिदिन औसतन 5,532 घरेलू LPG सिलेंडरों का वितरण किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों एवं गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को पेट्रोल पंपों, गैस एजेंसियों और गैस-तेल का उपयोग करने वाले संस्थानों पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया। नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में स्थित पेट्रोल पंपों एवं गैस एजेंसियों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि वैवाहिक कार्यक्रमों के अलावा श्राद्ध, मुंडन, उपनयन एवं अन्य सामाजिक-धार्मिक आयोजनों के लिए भी वाणिज्यिक LPG सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। इसके लिए संबंधित रसोइयों एवं कैटरर्स को तेल कंपनियों में निबंधन कराना होगा, जिसे 5 से 7 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। कार्यक्रम आयोजित करने वाले व्यक्ति को आवश्यक सिलेंडरों की संख्या एवं संभावित लोगों की जानकारी के साथ अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि पांच किलो वाले गैस सिलेंडर छात्रों, प्रवासी मजदूरों एवं युवा पेशेवरों को बिना पते के प्रमाण के भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले की 51 गैस एजेंसियों में से 48 एजेंसियों पर LPG उपलब्ध है, जबकि शेष तीन एजेंसियों में शीघ्र आपूर्ति होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 11 गैस एजेंसियों की जांच की जा चुकी है तथा 14 होटलों एवं प्रतिष्ठानों पर गैस सिलेंडरों के उपयोग को लेकर छापेमारी अभियान चलाया गया है। घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग एवं कालाबाजारी के आरोप में जिले में अब तक तीन प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन ने बताया कि अस्पतालों एवं सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण भी जारी है ताकि पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय, सुपौल में जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसका दूरभाष संख्या 06473-224005 है। गैस संबंधी शिकायतों के लिए उपभोक्ता 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन 1906 के अलावा IOCL, BPCL एवं HPCL के टोल फ्री नंबरों पर भी संपर्क कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:56:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लू की हवा का प्रकोप, कैसे सांस लेंगे हम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177276/how-will-we-breathe-the-wrath-of-heat-wave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/154169033.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि पिछले आठ वर्ष मानव इतिहास के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं और दक्षिण एशिया विशेष रूप से चरम हीटवेव की चपेट में है। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता के दौरान हमारे संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हुआ, परंतु विडंबना यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी हमने उसी मॉडल को और तीव्र रूप में अपनाया, परिणामस्वरूप मनुष्य तो स्वतंत्र हुआ पर प्रकृति आज भी बंधनों में जकड़ी रही। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंटल एजेंसी के अनुसार दुनिया हर वर्ष लगभग 1 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र खो रही है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहाँ शहरीकरण और औद्योगीकरण की तेज रफ्तार ने जंगलों, जलस्रोतों और जैव विविधता पर गंभीर दबाव डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी, किंतु हमने विकास को उपभोग और विस्तार की अंधी दौड़ बना दिया, मशीनें जितनी विशाल होती गईं, मनुष्य उतना ही प्रकृति से दूर और बौना होता गया। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से विश्व की लगभग 33 प्रतिशत भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई है, भारत में भी कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है और भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है और 2030 तक देश की जल मांग उपलब्ध संसाधनों से दोगुनी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब से हमने विकास के नाम पर उद्योगों की चिमनियाँ ऊँची कीं, मोबाइल क्रांति का बटन दबाया और डिजिटल संसार में प्रवेश किया, तब से प्रकृति की ध्वनियाँ धीमी पड़ती चली गईं, झरनों का कलकल स्वर, पक्षियों का कलरव और नदियों की जीवनदायिनी धारा जैसे विलुप्त होती जा रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार भारत के कई प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों समयपूर्व मृत्यु हो रही हैं। अब प्रश्न यह है कि विकास के नाम पर हमें केवल डिजिटल इंडिया चाहिए या हरित भारत की भी आवश्यकता है, क्या बच्चों के हाथ में केवल इंटरनेट देकर हम भविष्य सुरक्षित कर लेंगे या उन्हें स्वच्छ हवा, जल और हरियाली भी देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हरा-भरा हिंदुस्तान और डिजिटल इंडिया विरोधी नहीं बल्कि पूरक हो सकते हैं, बशर्ते हम संतुलन बनाना सीखें। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना ही जलवायु संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है और भारत ने सौर तथा पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी की है, फिर भी यह प्रयास पर्याप्त नहीं है जब तक कि हम उपभोग की प्रवृत्ति को नियंत्रित न करें। महात्मा गांधी का यह कथन आज और भी प्रासंगिक हो उठता है कि पृथ्वी सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, किंतु किसी एक के लालच को नहीं। भारत की विडंबना यह है कि एक ओर महानगरों की चकाचौंध, मेट्रो, डिजिटल नेटवर्क और ऊँची इमारतें हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण भारत में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, किसान पसीना बहा रहा है और बच्चे दीपक या कैरोसिन की रोशनी में पढ़ रहे हैं, यह असमानता केवल आर्थिक नहीं बल्कि विकास के असंतुलित मॉडल की भी देन है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की रिपोर्टों में भी जल संकट, कृषि संकट और पर्यावरणीय असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि विकास का रास्ता हरित क्रांति, सतत संसाधन उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से होकर ही गुजरता है, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ज्वार-भाटा ऊर्जा जैसे विकल्प केवल विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। यदि जल, खनिज और प्राकृतिक संसाधन ही समाप्त हो गए तो न तो उद्योग चलेंगे, न ऊर्जा उत्पादन होगा और न ही डिजिटल इंडिया का सपना साकार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी कवि की पंक्ति आज सच लगती है कि यदि घर बनाओ तो एक पेड़ भी लगा लेना, क्योंकि वही पेड़ आने वाली पीढ़ियों की सांसों का आधार बनेगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास की परिभाषा को पुनः परिभाषित करें, उसे केवल आर्थिक प्रगति नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक समानता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ें, तभी हम अपनी 141 करोड़ जनसंख्या को स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित भविष्य दे पाएंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकेंगे जहाँ हरित क्रांति और डिजिटल प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें, न कि एक-दूसरे के विकल्प बनकर खड़े हों।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:29:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>यादव समाज के बिना इस देश की कल्पना भी नहीं किया जा सकता-प्रदीप यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">आप इस पर फिल्म बनाया आपका फिल्म सुपरहिट जाएगा और यादव के प्रति और यादव आपका सम्मान करेगा।</blockquote>
<p>यादव बिरादरी (यदुवंश) का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। आपके गाने के लिए मैंने शुरू से लेकर अब तक के महान व्यक्तित्वों की एक सूची तैयार की है, जिसे आप अपनी धुन और लय के अनुसार सेट कर सकते हैं:</p>
<ol>
<li><br />1. पौराणिक और प्राचीन काल (जड़ें)<br />  * भगवान श्री कृष्ण: यदुवंश के सबसे महान नायक और मार्गदर्शक।<br />  * नंद बाबा और यशोदा मैया: जिन्होंने श्री कृष्ण का पालन-पोषण किया।<br />  * बलराम (दाऊजी): श्री कृष्ण के बड़े भाई, वीरता के प्रतीक।<br /> <br />2.</li></ol>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170969/this-country-cannot-be-imagined-without-yadav-community-%E2%80%93-pradeep"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20250426-wa0023.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">आप इस पर फिल्म बनाया आपका फिल्म सुपरहिट जाएगा और यादव के प्रति और यादव आपका सम्मान करेगा।</blockquote>
<p>यादव बिरादरी (यदुवंश) का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है। आपके गाने के लिए मैंने शुरू से लेकर अब तक के महान व्यक्तित्वों की एक सूची तैयार की है, जिसे आप अपनी धुन और लय के अनुसार सेट कर सकते हैं:</p>
<ol>
<li><br />1. पौराणिक और प्राचीन काल (जड़ें)<br /> * भगवान श्री कृष्ण: यदुवंश के सबसे महान नायक और मार्गदर्शक।<br /> * नंद बाबा और यशोदा मैया: जिन्होंने श्री कृष्ण का पालन-पोषण किया।<br /> * बलराम (दाऊजी): श्री कृष्ण के बड़े भाई, वीरता के प्रतीक।<br /> * महाराजा यदु: जिनके नाम से 'यादव' कुल की शुरुआत हुई।<br />2. वीर योद्धा और सेनानी<br /> * रेवाड़ी के राव तुलाराम: 1857 की क्रांति के महानायक।<br /> * ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव: कारगिल युद्ध के नायक और परमवीर चक्र विजेता।<br /> * प्रण सुख यादव: अहीरवाल क्षेत्र के महान सेनानी।<br /> * शहीद जगदेव प्रसाद: जिन्हें 'बिहार का लेनिन' कहा जाता है।<br />3. राजनीति के दिग्गज<br /> * चौधरी ब्रह्म प्रकाश: दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री।<br /> * मुलायम सिंह यादव: समाजवादी विचारधारा के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री।<br /> * लालू प्रसाद यादव: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और सामाजिक न्याय के बड़े नेता।<br /> * चौधरी हरमोहन सिंह यादव: शौर्य चक्र विजेता और वरिष्ठ राजनेता।<br /> * राम बरन यादव: नेपाल के प्रथम राष्ट्रपति।<br />4. खेल और मनोरंजन<br /> * के. डी. जाधव: स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता (कुश्ती)।<br /> * कुलदीप यादव / उमेश यादव / सूर्य कुमार यादव: आधुनिक क्रिकेट के चमकते सितारे।<br /> * राजपाल यादव: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता।<br /> * पूनम यादव: महिला क्रिकेट की स्टार खिलाड़ी।<br /> * संतोष यादव: माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली पहली महिला।<br />5. संगीत और लोक कला (आपके गाने के लिए विशेष)<br /> * बीरा (Birha) सम्राट: जैसे हीरालाल यादव और बालेश्वर यादव (लोक गायकी में यादव समाज की पहचान)।<br />गाने के लिए कुछ सुझाव:<br /> * आप 'यदुवंश' या 'अहीर' शब्दों का प्रयोग करके शौर्य गाथा लिख सकते हैं।<br /> * मथुरा से लेकर रेवाड़ी और साबरमती तक के क्षेत्रों का ज़िक्र कर सकते हैं।<br /> * "श्री कृष्ण के वंशज" और "वीरों की खान" जैसी पंक्तियाँ गाने में जोश भर देंगी।</li>
</ol>
<blockquote class="format1">आशा है यह लिस्ट आपके गीत को और भी प्रभावशाली बनाएगी! जय श्री कृष्ण!</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 00:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Promise Day 2026: इन 5 वादों से रिश्ते में आएगी नई मजबूती, प्यार रहेगा हमेशा ताज़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में रिश्तों को निभाना आसान नहीं है. समय की कमी, गलतफहमियां और बढ़ता तनाव अक्सर प्यार में दूरी ला देता है. ऐसे में हर साल 11 फरवरी को मनाया जाने वाला <strong>Promise Day</strong> कपल्स को एक-दूसरे से फिर से जुड़ने का मौका देता है.</p>
<p>इस खास दिन पर किए गए छोटे-छोटे वादे रिश्ते की नींव को मजबूत बना सकते हैं. अगर आप भी अपने रिश्ते को लंबे समय तक खुशहाल रखना चाहते हैं, तो इन 5 बातों का वादा जरूर करें.</p>
<hr />
<h3><strong>💞 1. बिना शर्त अपनाने का वादा</strong></h3>
<p>सच्चा प्यार सामने वाले को बदलने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169176/promise-day-2026-these-5-promises-will-bring-new-strength"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/5.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में रिश्तों को निभाना आसान नहीं है. समय की कमी, गलतफहमियां और बढ़ता तनाव अक्सर प्यार में दूरी ला देता है. ऐसे में हर साल 11 फरवरी को मनाया जाने वाला <strong>Promise Day</strong> कपल्स को एक-दूसरे से फिर से जुड़ने का मौका देता है.</p>
<p>इस खास दिन पर किए गए छोटे-छोटे वादे रिश्ते की नींव को मजबूत बना सकते हैं. अगर आप भी अपने रिश्ते को लंबे समय तक खुशहाल रखना चाहते हैं, तो इन 5 बातों का वादा जरूर करें.</p>
<hr />
<h3><strong>💞 1. बिना शर्त अपनाने का वादा</strong></h3>
<p>सच्चा प्यार सामने वाले को बदलने में नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह स्वीकार करने में होता है.<br />Promise Day पर यह वादा करें कि आप अपने पार्टनर को उसकी खूबियों और कमियों के साथ अपनाएंगे.</p>
<hr />
<h3><strong>🤝 2. लड़ाई से पहले रिश्ते को चुनने का वादा</strong></h3>
<p>हर रिश्ते में मतभेद होते हैं, लेकिन अहम यह है कि आप किसे प्राथमिकता देते हैं. वादा करें कि बहस जीतने से ज्यादा रिश्ते को बचाने की कोशिश करेंगे.</p>
<hr />
<h3><strong>🌿 3. आज़ादी और भरोसे का वादा</strong></h3>
<p>प्यार में स्पेस बहुत जरूरी होता है. जरूरत से ज्यादा रोक-टोक रिश्ते को कमजोर कर देती है. इसलिए अपने पार्टनर को भरोसा और आज़ादी देने का वादा करें.</p>
<hr />
<h3><strong>💬 4. खुलकर बात करने का वादा</strong></h3>
<p>मन में बात दबाकर रखने से रिश्ते में दूरी बढ़ती है.<br />वादा करें कि अपनी परेशानी, दुख या नाराज़गी खुलकर और प्यार से साझा करेंगे.</p>
<hr />
<h3><strong>💖 5. रोज प्यार निभाने का वादा</strong></h3>
<p>प्यार सिर्फ खास मौकों तक सीमित नहीं होना चाहिए.<br />हर दिन छोटे-छोटे तरीकों से प्यार जताने का वादा करें, ताकि रिश्ता हमेशा ताजा बना रहे.</p>
<hr />
<h2>✨ <strong>क्यों जरूरी हैं ये वादे?</strong></h2>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, रिश्ते में भरोसा, सम्मान और संवाद सबसे जरूरी होते हैं. जब कपल्स एक-दूसरे से सच्चे दिल से वादे निभाते हैं, तो रिश्ता और भी मजबूत बनता है.</p>
<hr />
<h3><strong>❤️ निष्कर्ष</strong></h3>
<p>Promise Day सिर्फ वादे करने का नहीं, उन्हें निभाने का दिन है. अगर आप इन 5 बातों को अपनी जिंदगी में अपनाते हैं, तो आपका रिश्ता लंबे समय तक खुशहाल बना रह सकता है.</p>
<hr />
<p>अगर आप चाहें, तो मैं इसे <strong>और ज्यादा शॉर्ट, वायरल स्टाइल, या सोशल मीडिया पोस्ट फॉर्मेट</strong> में भी बना दूँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/169176/promise-day-2026-these-5-promises-will-bring-new-strength</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:53:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोशिश से हरियाली तक जब गांव खुद अपने भविष्य की जड़ें सींचते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ गांवों में चल रही पर्यावरणीय पहलें आज उस भारत की तस्वीर दिखाती हैं, जहां समाधान किसी आदेश या योजना का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि ज़मीन से उठते हैं। यह कहानी केवल पेड़ लगाने की नहीं है, बल्कि सोच बदलने, जिम्मेदारी लेने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य गढ़ने की है। सोलापुर के पथरीले गांवों से लेकर धुले के जंगलों और बेंगलुरु के बाहरी इलाके के एक छोटे से गांव तक, लोगों ने साबित किया है कि अगर इरादा मजबूत हो तो हरियाली असंभव नहीं रहती।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के माडा तहसील के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168842/from-effort-to-greenery-when-villages-water-the-roots-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/66.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ गांवों में चल रही पर्यावरणीय पहलें आज उस भारत की तस्वीर दिखाती हैं, जहां समाधान किसी आदेश या योजना का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि ज़मीन से उठते हैं। यह कहानी केवल पेड़ लगाने की नहीं है, बल्कि सोच बदलने, जिम्मेदारी लेने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य गढ़ने की है। सोलापुर के पथरीले गांवों से लेकर धुले के जंगलों और बेंगलुरु के बाहरी इलाके के एक छोटे से गांव तक, लोगों ने साबित किया है कि अगर इरादा मजबूत हो तो हरियाली असंभव नहीं रहती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के माडा तहसील के अंजनगांव खिलोबा में किसान प्रमोद इंगले जिस जमीन पर जंगल उगा रहे हैं, वह कभी झाड़ियों से आगे कुछ नहीं जानती थी। पथरीली जमीन, कम पानी और तेज गर्मी इन सबके बीच पेड़ लगाना एक सपना सा लगता था। लेकिन इंगले और उनके गांव के 25 साथी इस सपने को रोज़ अपने हाथों से सच कर रहे हैं। वे पौधों की जड़ों के पास गन्ने के सूखे अवशेष बिछाते हैं ताकि नमी बनी रहे और पानी की बर्बादी न हो। यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि स्थानीय समझ और अनुभव का नतीजा है। इन सौ पेड़ों को बचाने की जिम्मेदारी पूरे गांव ने साझा की है, क्योंकि उन्हें पता है कि पेड़ लगाना आसान है, उन्हें जिंदा रखना असली चुनौती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंजनगांव की यह पहल अकेली नहीं है। सोलापुर जिले के 43 गांवों और दो कस्बों में अब तक छह हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं और उनकी देखभाल भी की जा रही है। इन गांवों में पर्यावरण पाठशालाएं लगती हैं, जहां डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाती हैं और धरती के बढ़ते तापमान के खतरों को सरल भाषा में समझाया जाता है। पूर्व आईआरएस अधिकारी विपुल वाघमारे के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का नारा है-“लेट्स प्लांट ए ट्री इन द माइंड।” यानी पहले सोच में बदलाव, फिर जमीन पर काम। गांवों में दस लोगों की टीम जाकर पर्यावरण परिवर्तन, जल संकट और पौधरोपण की जरूरत पर बात करती है। इसके बाद ग्रामीण खुद समूह बनाकर सौ पेड़ लगाने और उन्हें बचाने का लक्ष्य तय करते हैं। यह प्रक्रिया लोगों को सिर्फ सहभागी नहीं, बल्कि मालिक बनाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन गांवों में पेड़ों की देखभाल के लिए हर दस दिन में चंदा इकट्ठा किया जाता है। टैंकर से पानी लाया जाता है, खर्च सब मिलकर उठाते हैं। प्रमोद इंगले कहते हैं कि वे केवल आज के लिए नहीं, अपने बच्चों के कल के लिए यह सब कर रहे हैं। उनके शब्दों में, अगर पेड़ रहेंगे तभी बच्चे सुरक्षित रह सकेंगे। यह सोच पर्यावरण को किसी दूर की समस्या से निकालकर रोज़मर्रा की जिम्मेदारी बना देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र के ही धुले जिले के पिंपलनेर, साक्री तहसील का डवण्यापाडा जंगल एक और उदाहरण है, जहां समुदाय ने जंगल को अपना माना। 1100 हेक्टेयर में फैले इस जंगल की सुरक्षा के लिए गांव वालों ने गार्ड नियुक्त किए हैं और खुद भी बारी-बारी से रखवाली करते हैं। सात बस्तियों के हर घर से सालाना 300 रुपये लेकर गार्ड की सैलरी दी जाती है। इससे अवैध कटाई रुकी है और अतिक्रमण पर भी रोक लगी है। गांव वालों ने कड़े नियम बनाए हैं।जंगल में कुल्हाड़ी ले जाना मना है, हरे पेड़ काटने पर भारी जुर्माना है और हर घटना का पंचनामा कर वन विभाग को सौंपा जाता है। यह अनुशासन डर से नहीं, साझा जिम्मेदारी से पैदा हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन पहलों के बीच एक और महत्वपूर्ण कहानी कर्नाटक के बेंगलुरु के बाहरी इलाके के बिलपुरा पंचायत की है, जहां पर्यावरण संरक्षण घर की चौखट से शुरू होता है। यह गांव दिखाता है कि कचरा समस्या नहीं, संसाधन बन सकता है। कभी जहां खुले मैदानों में कचरे के ढेर, बदबू और धुआं आम था, आज वहां 90 प्रतिशत कचरा घरों में ही अलग किया जाता है। गीले कचरे से खाद बनती है और उसी खाद से गांव में फलदार पेड़ों का एक छोटा सा वन तैयार हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिलपुरा की इस सफलता के केंद्र में घरों में बनने वाली खाद है, खासकर महिलाओं की भूमिका। गांव की महिलाएं रसोई से निकलने वाले गीले कचरे को अलग रखती हैं, उसे खाद में बदलने की प्रक्रिया अपनाती हैं और फिर उसी खाद का इस्तेमाल अपने आंगन, खेत और सामुदायिक जमीन पर करती हैं। यह काम किसी बड़े बजट या भारी मशीनरी से नहीं हुआ, बल्कि पंचायत, गांव वालों और पास की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों के सहयोग से संभव हुआ। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि कचरा हम बनाते हैं, तो उसे संभालना भी हमारी जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घरों में खाद बनाना केवल पर्यावरण के लिए नहीं, सामाजिक बदलाव के लिए भी अहम साबित हुआ है। जब महिलाएं कचरे को अलग करती हैं, खाद बनाती हैं और पेड़ उगते देखती हैं, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है। रसोई का कचरा, जिसे पहले बेकार समझा जाता था, अब गांव की हरियाली की नींव बन गया है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरी है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हुई है और गांव का खर्च भी घटा है। सबसे बड़ी बात यह कि बच्चों ने अपनी आंखों के सामने कचरे से जंगल बनते देखा है, जो उन्हें जीवन भर याद रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी कहानियों को जोड़ने वाली एक डोर है स्थानीय पहल और सामूहिक जिम्मेदारी। कहीं पेड़ बचाने के लिए चंदा है, कहीं जंगल बचाने के लिए नियम, तो कहीं घर-घर में खाद बनाने की आदत। ये पहलें बताती हैं कि पर्यावरण संरक्षण कोई एक बड़ा कदम नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सतत प्रयासों का नतीजा है। जब गांव यह समझ लेते हैं कि तापमान बढ़ने, पानी घटने और जंगल कटने का असर सबसे पहले उन्हीं पर पड़ेगा, तब समाधान भी वहीं से निकलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब शहर कचरा प्रबंधन, हरियाली और जल संकट से जूझ रहे हैं, तब ये गांव एक रास्ता दिखाते हैं। घरों में खाद बनाना, पेड़ों को बचाने के लिए सामूहिक खर्च उठाना और जंगल की रखवाली खुद करना ये सब ऐसे कदम हैं, जिन्हें कहीं भी अपनाया जा सकता है। जरूरत केवल सोच बदलने की है। इन गांवों ने साबित किया है कि अगर हम अपने आसपास से शुरुआत करें, तो धरती को बचाने की कोशिश रंग ला सकती है। यह कोशिश ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;">       </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:18:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किराएदारों के लिए बड़ी राहत! HRA पर सरकार का बड़ा फैसला, अब बचेगा ज्यादा पैसा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किराए के मकान में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक अब दिल्ली और मुंबई की तरह बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में भी 50 फीसदी तक HRA छूट का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल इन शहरों में यह सीमा 40 फीसदी है।</p>
<p>अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी टैक्स बचत में इजाफा होगा।</p>
<hr />
<h3><strong>क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?</strong></h3>
<p>वर्तमान नियमों के अनुसार,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168755/big-relief-for-tenants-big-decision-of-government-on-hra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/what-are-the-key-benefits-of-staying-on-rent-f.jpg" alt=""></a><br /><p>किराए के मकान में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक अब दिल्ली और मुंबई की तरह बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में भी 50 फीसदी तक HRA छूट का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल इन शहरों में यह सीमा 40 फीसदी है।</p>
<p>अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी टैक्स बचत में इजाफा होगा।</p>
<hr />
<h3><strong>क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?</strong></h3>
<p>वर्तमान नियमों के अनुसार, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में रहने वाले कर्मचारियों को ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत सैलरी के 50 प्रतिशत तक HRA पर टैक्स छूट मिलती है। वहीं, अन्य शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत तक ही सीमित है।</p>
<p>अब सरकार इस सूची में चार और बड़े शहरों को जोड़ने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार—</p>
<ul>
<li>
<p>बेंगलुरु</p>
</li>
<li>
<p>हैदराबाद</p>
</li>
<li>
<p>पुणे</p>
</li>
<li>
<p>अहमदाबाद</p>
</li>
</ul>
<p>को भी मेट्रो कैटेगरी में शामिल किया जाएगा।</p>
<p>इसके बाद कुल 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को 50 फीसदी HRA छूट मिलेगी, जबकि बाकी शहरों में यह सीमा 40 फीसदी ही रहेगी।</p>
<hr />
<h3><strong>क्यों जरूरी था यह बदलाव?</strong></h3>
<p>पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर तेजी से विकसित हुए हैं। ये शहर अब देश के बड़े—</p>
<ul>
<li>
<p>आईटी हब</p>
</li>
<li>
<p>मैन्युफैक्चरिंग सेंटर</p>
</li>
<li>
<p>सर्विस सेक्टर हब</p>
</li>
</ul>
<p>बन चुके हैं।</p>
<p>रोजगार बढ़ने के साथ-साथ यहां मकानों का किराया भी काफी बढ़ गया है। कई इलाकों में किराया मेट्रो शहरों के बराबर या उससे भी ज्यादा हो गया है।</p>
<p>ऐसे में 40 फीसदी की सीमा कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई थी। सरकार का यह कदम इन शहरों की बदली हुई आर्थिक और सामाजिक स्थिति को स्वीकार करने जैसा माना जा रहा है।</p>
<hr />
<h3><strong>टैक्स बचत पर कितना पड़ेगा असर?</strong></h3>
<p>इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं।</p>
<ul>
<li>
<p>ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA पर छूट मिलती है</p>
</li>
<li>
<p>न्यू टैक्स रिजीम में HRA की सुविधा नहीं है</p>
</li>
</ul>
<p>अगर कोई कर्मचारी 40% से 50% की कैटेगरी में आ जाता है, तो उसकी टैक्स योग्य आय कम हो जाएगी। इससे—</p>
<ul>
<li>
<p>टैक्स कम देना होगा</p>
</li>
<li>
<p>महीने की बचत बढ़ेगी</p>
</li>
<li>
<p>जेब में ज्यादा पैसा बचेगा</p>
</li>
</ul>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को सालाना हजारों रुपये तक का फायदा हो सकता है।</p>
<hr />
<h3><strong>कब लागू हो सकता है नियम?</strong></h3>
<p>फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे आने वाले बजट या वित्तीय संशोधन में लागू कर सकती है। आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।</p>
<hr />
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>सरकार का यह कदम बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव से जूझ रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो मेट्रो के अलावा बड़े शहरों में रहने वालों को भी टैक्स में बराबरी का लाभ मिलेगा।</p>
<hr />
<p>अगर आप चाहें, तो मैं इसे <strong>हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज या सोशल मीडिया पोस्ट फॉर्मेट</strong> में भी तैयार कर दूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 21:41:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तर प्रदेश का गौरव बने प्रयागराज के डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  दिव्यांगजन सशक्तिकरण, खेल प्रतिभा और मानवीय संकल्प के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के लिए यह अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि प्रयागराज स्थित नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय, जमुनीपुर के विशेष शिक्षा विभाग में कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी ने पैरा डार्ट्स के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इंडियन डिसएबिलिटी डार्ट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय पैरा डार्ट्स चैंपियनशिप 2026, जो दिनांक 31 जनवरी एवं 1 फरवरी 2026 को कानपुर (उत्तर प्रदेश) में संपन्न हुई, में डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली प्रदर्शन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168336/dr-deepak-kumar-tripathi-of-prayagraj-became-the-pride-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260202-wa0142.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> दिव्यांगजन सशक्तिकरण, खेल प्रतिभा और मानवीय संकल्प के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के लिए यह अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि प्रयागराज स्थित नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय, जमुनीपुर के विशेष शिक्षा विभाग में कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी ने पैरा डार्ट्स के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंडियन डिसएबिलिटी डार्ट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय पैरा डार्ट्स चैंपियनशिप 2026, जो दिनांक 31 जनवरी एवं 1 फरवरी 2026 को कानपुर (उत्तर प्रदेश) में संपन्न हुई, में डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर से 120 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया, जहाँ डॉ. त्रिपाठी ने अपने कौशल, एकाग्रता और अनुशासन से सभी का ध्यान आकर्षित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके इसी शानदार प्रदर्शन के परिणामस्वरूप वर्ल्ड डिसेबिलिटी डार्ट्स एसोसिएशन, स्कॉटलैंड द्वारा आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय पैरा डार्ट्स चैंपियनशिप (मलेशिया) के लिए उनका चयन किया गया है। इस प्रकार डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी अब वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो न केवल प्रयागराज और उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का क्षण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंडियन डिसएबिलिटी डार्ट्स एसोसिएशन के महासचिव श्री महेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. त्रिपाठी का चयन उनकी निरंतर साधना, अनुकरणीय अनुशासन और उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन का प्रतिफल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. त्रिपाठी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपने प्रदर्शन से राष्ट्र का नाम गौरवान्वित करेंगे। डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी केवल एक सफल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के मार्गदर्शक, प्रेरक और सशक्तिकरण के संवाहक भी हैं। वे सदैव इस संकल्प के साथ कार्यरत हैं कि सभी दिव्यांगजन शैक्षिक एवं खेल दोनों ही क्षेत्रों में समान अवसर प्राप्त कर विश्व मंच पर आगे बढ़ें। उनका प्रयास केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न होकर, दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने की दिशा में निरंतर समर्पित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शैक्षणिक जगत में विशेष शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका और खेल के मैदान में यह उपलब्धि डॉ. त्रिपाठी की बहुआयामी प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और मानवीय संवेदना को सशक्त रूप से रेखांकित करती है। उनकी यह सफलता विश्वविद्यालय परिवार, प्रयागराज जनपद एवं समस्त उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ उन असंख्य दिव्यांगजनों के लिए आशा, साहस और प्रेरणा का संदेश है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्वास है कि डॉ. दीपक कुमार त्रिपाठी का यह अंतरराष्ट्रीय पदार्पण दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में एक नई राह प्रशस्त करेगा और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा, खेल और राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 21:51:20 +0530</pubDate>
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